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*अमेरिका-रूस की लड़ाई में भारत के पिसने की बारी, बिल बम फटने का क्‍यों सताया डर?*

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डोनाल्ड ट्रंप की रूस पर प्रतिबंधों की धमकी से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। इससे ब्रेंट क्रूड ऑयल 80-82 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। रूस से तेल सप्‍लाई बाधित होने पर भारत में महंगाई बढ़ने का खतरा है। कारण है क‍ि भारत कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा के ल‍िए अग्निपरीक्षा का समय आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है। इसके चलते अंतरराष्‍ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ने के आसार हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम साल के अंत तक 80-82 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकते हैं। स्थितियों के बिगड़ने पर कीमतें 100-120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने का भी डर है। यह भारत के लिए कतई अच्‍छी खबर नहीं है। रूस से तेल की सप्‍लाई बाधित होने से भारत में महंगाई बढ़ने का रिस्‍क है। हालांकि, भारत 40 से ज्‍यादा देशों से तेल खरीदकर अपनी सप्‍लाई बनाए रख सकता है।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता है। उसकी अर्थव्यवस्था कच्चे तेल की कीमतों के प्रति बहुत ज्‍यादा संवेदनशील है। अगर रूस ग्‍लोबल मार्केट से बाहर हो जाता है तो कच्चे तेल की कीमतें 100-120 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ सकती हैं। वह दुनिया को हर रोज 50 लाख बैरल तेल की सप्‍लाई करता है। कीमतों में बढ़ोतरी से भारत का तेल आयात बिल अरबों डॉलर बढ़ जाएगा। इससे चालू खाता घाटा (सीएडी) पर दबाव पड़ेगा। महंगाई बढ़ सकती है।

तेल बाजार के विश्लेषकों ने न्‍यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने और ट्रंप के रूस को लेकर सख्त रुख अपनाने से तेल की सप्‍लाई घट सकती है। इसके दूरगामी परिणाम होंगे। वेंचुरा के कमोडिटीज और सीआरएम के प्रमुख एनएस रामस्वामी ने कहा कि ब्रेंट का शॉर्ट-टर्म टारगेट 76 डॉलर है। साल 2025 के अंत तक यह 82 डॉलर तक जा सकता है। बशर्ते कि यह 69 डॉलर के सपोर्ट लेवल से नीचे न गिरे। WTI क्रूड के भी 69.65 डॉलर से बढ़कर 76-79 डॉलर तक जाने का अनुमान है।

बाजार की चिंता की वजह ट्रंप की नई प्रतिबंधों की घोषणा है। रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 100% सेकेंडरी टैरिफ लगाने की धमकी भी टेंशन बढ़ा रही है। इन उपायों के चलते रूसी कच्चे तेल के प्रमुख खरीदार सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।

क्‍यों 100-120 डॉलर तक पहुंच सकती है कीमत?

सीनियर एनर्जी एनालिस्‍ट नरेंद्र तनेजा ने चेतावनी दी है कि रूस ग्‍लोबल मार्केट में रोजाना 50 लाख बैरल तेल का निर्यात करता है। अगर यह सप्‍लाई बाधित होती है तो कच्चे तेल की कीमत 100-120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। उन्होंने कहा कि भारत को सप्‍लाई की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। वह 40 से ज्‍यादा देशों से तेल खरीदता है। लेकिन, उपभोक्ता कीमतों में बढ़ोतरी होने के आसार हैं।

भारत की रिफाइनरियां रियायती रूसी तेल पर निर्भर हैं। इसने 2022 से घरेलू महंगाई को संतुलित करने में मदद की है। अगर उन्हें तेजी से बदलाव करने के लिए मजबूर किया जाता है तो वैकल्पिक सपलाई के लिए ज्‍यादा कीमत चुकानी होगी या फिर निर्यात बाजारों में ऊंचे टैरिफ का सामना करना पड़ेगा।

अत‍िर‍िक्‍त उत्‍पादन क्षमता में भी समस्‍या

ग्‍लोबल मार्केट में सीमित अतिरिक्त उत्पादन क्षमता भी एक प्रॉब्लम है। OPEC+ या सऊदी अरब के हस्तक्षेप के बावजूद देरी होने की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि कीमतों में लगातार बढ़ोतरी 2026 तक जारी रह सकती है। राष्ट्रपति ट्रंप का टारगेट तेल कीमतों को कम करना है। लेकिन, अमेरिकी उत्पादन में किसी भी बढ़ोतरी में समय और संसाधनों की बाधाएं हैं। बुनियादी ढांचे, श्रम की कमी और पूंजी लागत से राहत मिलने में देरी होगी।

अमेरिका-ईयू व्यापार समझौते और अमेरिका-चीन के बीच युद्धविराम से कुछ स्थिरता आई है। लेकिन, विश्लेषक अभी भी सतर्क हैं। इन्वेंटरी स्तर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी ब्याज दर निर्णय पर भी बारीकी से नजर रखी जा रही है। कारण है कि मजबूत डॉलर तेल की कीमतों पर दबाव डाल रहा है।

भारत के लिए अच्‍छा नहीं पूरा सीन

यह पूरा सीन भारत के लिए अच्‍छा नहीं है। ट्रंप की ओर से रूस पर लगाए जाने वाले संभावित प्रतिबंधों और 100% सेकेंडरी टैरिफ की चेतावनी भारत के लिए गंभीर चुनौती पेश करती है। यह स्थिति भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और भू-राजनीतिक संबंधों पर सीधा असर डालेगी। खासतौर से यह देखते हुए कि भारत अपनी जरूरत का ज्‍यादातर कच्‍चा तेल आयात करता है। तेल की कीमतों का बढ़ना सीधे तौर पर भारत के आयात बिल पर दबाव डालेगा। इसके कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इनकी कीमतें बढ़ने पर महंगाई बढ़ने का जोखिम है।

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