पिछले 5 साल से हाउल ग्रुप के माध्यम से देवास जिले में आदिवासियों के बीच शिक्षा और स्वास्थ्य की अलख जगा रहे सौरव बनर्जी को लेकर पुलिस द्वारा नई-नई कहानी गड़ी जा रही है । पुलिस का कहना है कि सौरव बनर्जी के चार बैंकों में खाते हैं उसने हांगकांग की यात्रा भी की है तथा दिल्ली में भी उसके खिलाफ केस दर्ज है । पुलिस जिस तरह की कहानी गड़ रही है वह मध्य प्रदेश पुलिस के लिए आम है । किसी को भी अपराधी सिद्ध करने के लिए पुलिस इसी तरह की कहानी गडती रही है ।
देवास पुलिस ने जो कहानी बताई है, उसमें कहा गया है कि सौरव बनर्जी के चार बैंकों में खाते हैं और जंगल के इलाके में वह इंदौर के डॉक्टर से ऑनलाइन चर्चा कर लोगों को उपचार मुहिया कराता था । वहां की डिस्पेंसरी में एक्सपायरी डेट की दवाएं भी मिली है । उसने 2010 में हांगकांग की यात्रा भी की थी।यह सब कहानियां कितनी सच है । इसको पढ़कर ही समझा जा सकता है।

क्या बैंकों में खाते रखना अपराध है, लोगों को ऑनलाइन डॉक्टर से चर्चा करा इलाज उपलब्ध कराना अपराध है । और यह अपराध है , सवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है तो पुलिस को आईपीसी की धाराओं का भी उल्लेख करना चाहिए । चार दिन बाद देवास पुलिस जिस तरह की कहानी बता रही है वह मध्य प्रदेश पुलिस की की झूठी कहानी गढ़ने का प्रयास ही है ।
देवास पुलिस के अनुसार जिले के शुक्रवासा ग्रामीण क्षेत्र में ट्री हाउस में हाउल क्लब चलाने वालासौरव बनर्जी फिलहाल पुलिस गिरफ्त में है। देवास पुलिस ने उससे पूछताछ की और उसकी जन्मकुंडली खंगाली। उसके बैंक खातों की भी जांच की जा रही है। पुलिस को पता चला है कि सौरव बनर्जी खुद को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का रिश्तेदार बताता है और ग्रामीणों और आदिवासियों पर प्रभाव जमाता है।
सौरव बनर्जी के चार बैंकों में अकाउंट की जानकारी मिली है। पंजाब नेशनल बैंक के खाते में जून 2024 से जुलाई 2025 तक प्रतिमाह एक से डेढ़ लाख रुपये आने की जानकारी भी मिली है। आदिवासी दिवस के पूर्व 8 अगस्त को लगभग ढाई लाख रुपये इसके अकाउंट में जमा हुए थे। सौरभ, इंदौर में दो मकानों का किराया भी देता है। उसकी पत्नी इंदौर में रहती है और दो बच्चे भी हैं। दूसरे मकान में मां अलग रहती है। सौरभ उनसे अलग रहता है। सौरभ के संगठन में शामिल एक युवती के परिजनों ने आरोप लगया कि वह ट्री हाउस में एक अन्य युवती के साथ लिव इन में रहता है।
पुलिस को यह भी पता चला है कि सौरव बनर्जी ने सात साल पहले हांगकांग की यात्रा भी की थी। उसके पास एक कार, आईपैड, महंगे मोबाइल हैं। पुलिस ने उसके आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी जुटाई है। उस पर दिल्ली में वर्ष 2010 में धोखाधड़ी का केस दर्ज हो चुका है। सौरभ के संगठन का एनजीओ के रूप में कोई पंजीकरण नहीं मिला।
बगैर पंजीयन के क्लिनिक का संचालन
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ट्री हाउस में जाकर पड़ताल की। वहां एक्सपायरी डेट की दवाइयां मिली और कुछ प्रतिबंधित इंजेक्शन भी दल को मिले हैं। सौरव बनर्जी का संगठन क्लिनिक संचालित करता था और इंदौर के डाॅक्टरों के साथ वर्चुअली क्लिनिक से ग्रामीणों को जोड़कर इलाज की सुविधा देता था। उसका पंजीयन भी स्वास्थ्य विभाग में कराया नहीं गया था। ट्री हाउस में एक आटा चक्की भी मिली। ग्रामीणों को वहां मुफ्त में गेहूं पीस कर दिया जाता था।