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 इंदौर के चौराहे पर इंजीनियरिंग का कमाल,,23 मीटर की ऊंचाई पर लटका 400 टन का लोहा

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इंदौर के अधोसंरचना विकास में आज का दिन विशेष महत्व रखता है। इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा लवकुश चौराहे पर, आगामी सिंहस्थ 2028 की दृष्टि से अतिमहत्वपूर्ण, लेवल-2 फ्लाईओवर का निर्माण किया जा रहा है। आज फ्लाईओवर में 22 मीटर की ऊंचाई पर 400 टन वजनी ‘प्रथम बो-स्ट्रिंग गर्डर’को सफलतापूर्वक स्थापित किया गया है। जिसकी लंबाई: 65 मीटर एवं चौड़ाई: 12 मीटर है। 1200 टन क्षमता की स्टेजिंग और 600 टन की क्रेन का उपयोग कर इस कार्य को पूर्ण किया गया। इस सफलता के तुरंत बाद दूसरे बो-स्ट्रिंग गर्डर की लॉन्चिंग हेतु कार्य प्रारंभ कर दिया गया है, जिसे एक माह की अवधि में पूर्ण कर स्थापित किया जाएगा।

इंदौर के लवकुश चौराहे पर बन रहे डबल डेकर फ्लाईओवर के निर्माण में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई है। यहां शहर की सबसे लंबी 65 मीटर की स्टील गर्डर को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया गया है। करीब 400 टन वजनी इस विशालकाय गर्डर को जमीन से 23 मीटर की ऊंचाई पर स्थापित करने की जटिल प्रक्रिया लगभग 12 घंटे तक चली। इस गर्डर के जुड़ जाने से अब शहर में यातायात सुगमीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ गया है।

तीन विंच मशीनों की मदद से पूरा हुआ चुनौतीपूर्ण कार्य
लवकुश चौराहे पर बो स्ट्रिंग्स स्पान के काम के दौरान इस विशाल गर्डर को हवा में ही असेंबल किया गया था। इसे सही स्थान पर लाने के लिए तीन विंच मशीनों का सहारा लिया गया। इसमें से दो विंच मशीनों का उपयोग गर्डर को आगे की ओर खींचने के लिए किया गया, जबकि एक विंच मशीन को पीछे से नियंत्रण बनाए रखने और रोकने के लिए लगाया गया था। अब जेक पुश तकनीक के माध्यम से इसे दूसरी तरफ के बो स्ट्रिंग्स स्पान पर शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। इस पहली गर्डर का काम सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद अब दूसरी स्टील गर्डर के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

आईडीए बना रहा भव्य डबल डेकर फ्लाईओवर
इंदौर विकास प्राधिकरण यानी आईडीए द्वारा लवकुश चौराहे पर कुल 1452 मीटर लंबा डबल डेकर फ्लाईओवर तैयार किया जा रहा है। इस विशाल निर्माण परियोजना में कुल 19 सेगमेंटल स्पान, चार कंपोजिट गर्डर स्पान और एक विशेष बो स्ट्रिंग्स स्पान शामिल है। जिस बो स्ट्रिंग्स स्पान पर गर्डर रखी गई है उसकी कुल लंबाई 65 मीटर है और यहां ऐसी दो स्टील गर्डर स्थापित की जानी हैं। पहली गर्डर का निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद उसे निर्धारित स्थान पर रख दिया गया है।

रात भर चली गर्डर लॉन्चिंग की विशेष प्रक्रिया
गर्डर को लॉन्च करने की यह संवेदनशील प्रक्रिया गुरुवार रात 11 बजे शुरू की गई थी, जो शुक्रवार सुबह 11 बजे जाकर पूरी हुई। गर्डर को खींचकर सही स्थान पर लाने (पुलिंग) में ही लगभग पांच घंटे का समय लगा। पुलिंग शुरू करने से पहले रीले पर गर्डर को चढ़ाने और उसके संतुलन की बारीकियों की जांच की गई। सुरक्षा की दृष्टि से गर्डर लॉन्चिंग के दौरान नीचे से गुजरने वाले यातायात को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया था ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति या बाधा उत्पन्न न हो।

शहर का सबसे ऊंचा फ्लाईओवर पॉइंट बना आकर्षण
यह 400 टन वजनी गर्डर जिस बो स्ट्रिंग्स पर रखी गई है, उसकी ऊंचाई 23 मीटर है, जो वर्तमान में इंदौर के सभी फ्लाईओवर में सबसे अधिक है। इस फ्लाईओवर की खासियत यह है कि इसके नीचे से मेट्रो और एक अन्य फ्लाईओवर गुजर रहे हैं, इसी कारण गर्डर को ऊंचाई पर ही असेंबल करना पड़ा। इस जटिल कार्य के लिए 900 टन की संयुक्त क्षमता वाली दो क्रेन का उपयोग किया गया, जिसमें एक 600 टन और दूसरी 300 टन की क्रेन शामिल थी। इन क्रेन की मदद से ही गर्डर के भारी एंगल और निर्माण सामग्री को 23 मीटर ऊपर पहुंचाया गया।

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