कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग पर प्रधानमंत्री मोदी की ‘कठपुतली’ होने का आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि आयोग गरीबों और वंचितों को मताधिकार से वंचित करने के लिए बीजेपी के साथ मिलकर काम कर रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को चुनाव आयोग पर जोरदार हमला बोला और इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘कठपुतली’ तक बता दिया। एक दिन पहले पार्टी सांसद राहुल गांधी इस संवैधानिक संस्था पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाते हुए सबूतों का ‘एटम बम’ फोड़ने तक जैसी बात कह चुके हैं। खरगे ने आरोप लगाया है कि आयोग गरीबों और वंचितों को मताधिकार से वंचित करने के लिए व्यवस्थित रूप से काम कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार से मिलकर जानबूझकर खासकर दलितों, पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और गरीबों का नाम मतदाता सूची से हटा रहा है।
‘इलेक्शन कमीशन मोदी जी की कठपुतली है’
कांग्रेस की ओर से आयोजित एक लीगल कॉन्क्लेव में खरगे ने कहा कि ‘बिहार में 65 लाख या एक करोड़ वोटरों को मताधिकार से वंचित कर देना दलितों और पिछड़ों को वोटिंग से रोकने की सोची-समझी साजिश है। इलेक्शन कमीशन मोदी जी की कठपुतली है।’उन्होंने दावा कि 7 करोड़ वोटरों में से एक करोड़ का नाम बिना किसी उचित वजह के हटा दिया गया और इससे साफ जाहिर होता है कि समाज के कमजोर वर्गों को उनके संवैधानिक अधिकारों से दूर किया जा रहा है।
‘अल्पसंख्यकों के खिलाफ उत्पीड़न बढ़ गया है’
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘संवैधानिक अधिकारों के समाप्त किए जाने के लिए सरकार और चुनाव आयोग जिम्मेदार है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले की गंभीरता को संज्ञान में लिया है, लेकिन कई सुनवाई के बावजूद चुनाव आयोग ने अपना बर्ताव नहीं बदला।’ खरगे ने वोटरों के नाम काटे जाने को बीजेपी शासित राज्यों में कथित सांप्रदायिक ध्रुवीकरण वाले विस्तृत पैटर्न से भी जोड़ने की कोशिश की है। उन्होंने कहा, ‘बीजेपी शासित राज्यों में अल्पसंख्यकों के खिलाफ उत्पीड़न बढ़ गया है। वे मुगलों की बात करते हैं, चिकन, मंगलसूत्र की बात करते हैं, सिर्फ समाज को बांटने के लिए।’
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में यह कहने की कोशिश की कि प्रधानमंत्री की भूमिका संविधान को कायम रखने की है, इसे कम करने की नहीं। उन्होंने कहा, ‘ लोगों ने प्रधानमंत्री को इस देश के संविधान की रक्षा के लिए चुना है, इसे खत्म करने के लिए नहीं।’बिहार में चुनाव आयोग ने अभी-अभी मतदाता सूची की छानबीन का काम किया है, जिसे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कहा गया है। लेकिन, विपक्ष को चुनाव आयोग का यह काम फूटी आंखों रास नहीं आ रहा है।

