अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कारण भारत की मुश्किलें बढ़ी हैं। इसने भारत में 1 करोड़ नौकरियों पर संकट खड़ा कर दिया है। दिग्गज अर्थशास्त्रियों को लगता है कि भारतीय इकोनॉमी को बचाने के लिए घरेलू मांग सबसे बड़ा सहारा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कारण भारत की मुश्किलें बढ़ी हैं। इसने भारत में 1 करोड़ नौकरियों पर संकट खड़ा कर दिया है। दिग्गज अर्थशास्त्रियों को लगता है कि भारतीय इकोनॉमी को बचाने के लिए घरेलू मांग सबसे बड़ा सहारा है। यूबीएस की तनवी गुप्ता जैन, जेपी मॉर्गन के साजिद चिनॉय और सिटीबैंक इंडिया के समीरन चक्रवर्ती जैसे बड़े अर्थशास्त्रियों ने भारत के आर्थिक विकास को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने अमेरिका की ओर से लगाए गए बढ़ते टैरिफ और बदलती वैश्विक व्यापार व्यवस्था के कारण भारत के निर्यात पर पड़ने वाले प्रतिकूल असर पर रोशनी डाली। इन एक्सपर्ट्स ने निर्यात पर भारी जुर्माने के असर, जवाबी कार्रवाई से बचने की सलाह और घरेलू मांग को बढ़ावा देने के साथ संरचनात्मक सुधारों की तत्काल जरूरत पर जोर दिया ताकि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सके।
मुंबई में आयोजित इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में तनवी गुप्ता जैन ने बताया कि भारत के निर्यात पर भारी जुर्माना लग रहा है। उन्होंने कहा, ‘50% का टैरिफ उभरते बाजारों में सबसे अधिक है। इसमें 25% जवाबी टैरिफ और रूस से सैन्य उपकरण खरीदने के लिए 25% जुर्माना शामिल है।’
ग्रोथ पर असर पड़ने की आशंका
जैन के अनुसार, लगभग 35 अरब डॉलर के भारतीय सामान इस जुर्माने के दायरे में हैं। यह भारत के कुल जीडीपी का लगभग 0.8% है। इसका सबसे ज्यादा असर उन क्षेत्रों पर पड़ रहा है जहां मुनाफा कम होता है। मजदूर ज्यादा काम करते हैं। इनमें रत्न और आभूषण, कपड़ा, चमड़ा और जूते जैसे उद्योग शामिल हैं। इन उद्योगों में 1 करोड़ से ज्यादा लोग काम करते हैं। जैन ने यह भी कहा कि इन ऊंचे टैरिफ के कारण जीडीपी ग्रोथ रेट पर असर पड़ेगा। इसके बावजूद भारत के वित्त वर्ष 2025-26 में 6.7% की दर से बढ़ने का अनुमान है। उन्होंने घरेलू मांग को बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
जवाबी कार्रवाई के खिलाफ चेतावनी
जेपी मॉर्गन के साजिद जेड चिनॉय ने जवाबी कार्रवाई करने के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा, ‘एक संकीर्ण आर्थिक नजरिये से बहुत सीधा जवाब है- नहीं। जवाबी कार्रवाई और तनाव बढ़ने से हमें बहुत कुछ खोना पड़ेगा।’ उन्होंने सर्विस एक्सपोर्ट के महत्व पर जोर दिया। सेवा निर्यात भारत की जीडीपी का 7% है। जबकि अमेरिका को होने वाला वस्तु निर्यात केवल 1% है।
चिनॉय ने बताया कि सेवा निर्यात शहरी खपत, वाइटकॉलर जॉब और हाउसिंग का मुख्य केंद्र है। उन्होंने कहा कि हमें ईमानदारी से बातचीत करनी चाहिए। साथ ही, कम समय में व्यवसायों को जीवित रखने के लिए मदद देनी चाहिए। उन्होंने कोरोना के दौरान सरकार की ओर से दी गई वित्तीय और क्रेडिट सहायता का उदाहरण दिया।
सुधारों की रफ्तार बढ़ानी होगी
सिटीबैंक इंडिया के समीरन चक्रवर्ती ने तुरंत नीतिगत कार्रवाई की जरूरत पर सहमति जताई। हालांकि, उन्होंने एक व्यापक सोच बदलने की भी बात कही। उन्होंने कहा, ‘यह महत्वपूर्ण है कि हम इसे जल्द से जल्द रोकें। लेकिन, हमें यह भी पहचानना होगा कि दुनिया अधिक संरक्षणवादी होती जा रही है। हम अब अपने भविष्य के विकास की कहानी केवल निर्यात पर नहीं बना सकते।’ चक्रवर्ती ने सुझाव दिया कि भारत को इस संकट का इस्तेमाल लंबे समय से लंबित सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए करना चाहिए। इनमें जीएसटी का सरलीकरण शामिल है। उन्होंने एक नई विकास कहानी बनाने की भी बात कही, जो वैश्विक पूंजी को आकर्षित कर सके।
पैनल के सदस्यों ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत की घरेलू मांग की कहानी देश को मजबूती देती है। लेकिन, ‘रिवर्स ग्लोबलाइजेशन’ की दुनिया में ग्रोथ को बनाए रखने के लिए बड़े सुधारों की जरूरत है। तनवी गुप्ता जैन ने कहा, ‘खपत प्रोत्साहन टिकाऊ नहीं है। 6-6.5% की मध्यम अवधि की ग्रोथ के लिए संरचनात्मक सुधार ही एकमात्र ऐसी कहानी है जिसे सरकार आगे बढ़ा सकती है।’

