अमेरिका से दुश्मनी मंजूर, मगर रूस से नहीं तोड़ेंगे दोस्ती… मोदी के दो ‘कमांडरों’ का ट्रंप को सीधा संदेश!
रूस से तेल आयात को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है। अमेरिका द्वारा भारत पर लगने वाला टैरिफ अब कुल 50 प्रतिशत हो गया है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में तनाव बढ़ गए हैं। अमेरिका द्वारा उठाए गए इन कदमों पर अब भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
भारत अपने परंपरागत दोस्त रूस को गंवाना नहीं चाहेगा। रूस से तेल खरीदने पर भले ही अमेरिका धमकी दे, मगर भारत डरने वाला नहीं है। यही वजह है कि भारत ने न तो रूस से तेल मंगाना बंद किया है और न ही अमेरिका से किसी तरह की ‘भीख’ मांगी है। उल्टा रूस से संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दो आला ‘कमांडर’ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर को कमान सौंपी है। डोभाल तो मॉस्को के दौरे पर पहुंच गए हैं, वहीं जयशंकर भी अगस्त के आखिर में रूस का दौरा भी करेंगे। जानते हैं भारत-रूस संबंधों को लेकर अमेरिका के पड़ोस में क्या खिचड़ी पक रही है?
रूस से तेल आयात को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है। अमेरिका द्वारा भारत पर लगने वाला टैरिफ अब कुल 50 प्रतिशत हो गया है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में तनाव बढ़ गए हैं। अमेरिका द्वारा उठाए गए इन कदमों पर अब भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय इसे अनुचित और अन्यायपूर्ण करार देते हुए का कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक सभी कदम उठाएगा।

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि उसके तेल आयात पूरी तरह से बाजार आधारित है और इसका उद्देश्य 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। भारत सरकार ने कहा यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमेरिका ने भारत पर ऐसे कार्यों के लिए अतिरिक्त टैरिफ लगाने का विकल्प चुना है, जो कई अन्य देश भी अपने राष्ट्रीय हित में कर रहे हैं। भारत ने अमेरिका के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि वह अपने राष्ट्र हितों से समझौता नहीं करेगा।
अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय यूनियन द्वारा लगातार रूस से तेल आयात करने को लेकर किए जा रहे आरोपों को विदेश मंत्रालय ने खारिज करते हुए इसे अनुचित और तर्कहीन बताया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, भारत अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। अमेरिका भी रूस से अपने परमाणु उद्योग के लिए यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड और ईवी उद्योग के लिए पैलेडियम का आयात जारी रखे हुए है। इसके अलावा, अमेरिका रूस से उर्वरक और रसायन भी आयात करता है।
भारत ने अमेरिका को दिया मुहंतोड़ जवाब
अमेरिका के आरोपों पर पलटवार करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, भारत की आलोचना करने वाले देश भी रूस के साथ व्यापार कर रहे हैं, जो उनके लिए राष्ट्रीय मजबूरी नहीं है। विदेश मंत्रालय ने आकंड़े जारी करते हुए कहा कि, यूरोपीय संघ ने 2024 में रूस के साथ 67.5 बिलियन यूरो का द्विपक्षीय व्यापार किया और 2023 में 17.2 बिलियन यूरो का व्यापार किया। जो कि भारत-रूस व्यापार से कहीं ज्यादा है।
क्या है पूरा मामला?
साल 2022 में पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण रूस किफायती दरों पर कच्चा तेल बेच रहा था। जिसके बाद भारत ने रूस से तेल का आयात बढ़ा दिया। अब अमेरिका का आरोप है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच प्रतिबंधों के बावजूद भारत रूस से तेल खरीद रहा है। जो कि गलत है।
रूस अरसे से हमारा भरोसेमंद साथी, यह समझना जरूरी
डिफेंस एक्सपर्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी के अनुसार, भारत रूस के साथ अपने रक्षा संबंध ज्यादा बढ़ाना चाहता है, क्योंकि रूस अरसे से हमारा भरोसेमंद साथी रहा है। डोभाल और जयशंकर का रूस दौरा इन्हीं संबंधों को और मजबूत किए जाने की दिशा में बड़ा कदम है। भारत ने यह ठान लिया है कि उसे अमेरिका की दुश्मनी मंजूर है, मगर वह किसी भी कीमत पर रूस से दोस्ती नहीं तोड़ेगा। यही वजह है कि डोभाल के बाद अब जयशंकर भी मॉस्को दौरे पर जाएंगे।
पाक मिसाइलें तबाह करने वाला डिफेंस सिस्टम खरीदेगा
डिफेंस एक्सपर्ट जेएस सोढ़ी बताते हैं कि ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि भारत रूस से ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की मिसाइलों को फेल करने वाले डिफेंस सिस्टम यानी S-400 को और ज्यादा खरीदना चाहता है। इससे यह तय है कि पाकिस्तान की रातों की नींद उड़ने वाली है। इन्हीं डिफेंस सिस्टम से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के तुर्की ड्रोन और चाइनीज मिसाइलों को ध्वस्त कर दिया गया था।
SU-57 फाइटर जेट भी खरीदने का है प्लान
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत रूस से पांचवीं पीढ़ी के SU-57 फाइटर जेट भी खरीदने का प्लान बना रहा है। भारत S-400 के लिए MRO फैसिलटी बनाने की योजना बना रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद ऐसी खबरें आई थीं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को F-35 फाइटर जे देने का ऑफर दिया था। मगर, भारत ने अभी तक विचार नहीं किया है। इस विमान को कभी ट्रंप के सहयोगी रहे स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क भी बाड़ बता चुके हैं। माना जा रहा है कि भारत ने अमेरिका के F-35 के मुकाबले रूस के SU-57 फाइटर जेट की खरीद में दिलचस्पी दिखाई है। मिग-21 के रिटायर होने के बाद से भारतीय वायुसेना में इसकी जरूरत महसूस की जा रही है।
कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत रूस से अपनी दोस्ती इसलिए बढ़ा रहा है, क्योंकि रूस से दोस्ती के चलते उसे मिनरल्स से भरपूर आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा। इसके अलावा भारत का रूस को निर्यात और बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।। यह बातें तब होंगी, जब जयशंकर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और पहले उप प्रधानमंत्री डेनिस मानतुरोव से मिलेंगे।
भारत-रूस समिट में शामिल हो सकते हैं पुतिन
मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि भारत इस साल भारत-रूस समिट के अगले एडिशन का आयोजन करने जा रहा है। इसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी शिरकत करेंगे। अगर ऐसा होता है तो 2021 के बाद यह पहली बार होगा, जब पुतिन नई दिल्ली का दौरा करेंगे।
रूस से दोस्ती यूरोपीय यूनियन के मुंह पर तमाचा
भारत रूस के साथ ज्यादा से ज्यादा रक्षा समझौते करेगा। इसके अलावा, वह ऊर्जा क्षेत्र में भी समझौते करेगा। दरअसल, यूरोपीय यूनियन ने रूस से एनर्जी को लेकर पाबंदी लगा रखी है। इसमें सिविल न्यूक्लियर पार्टनरशिप, आर्कटिक कोऑपरेशन समेत हाईटेक सेक्टर में सहयोग को और बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। जयशंकर इसी की पृष्ठभूमि तैयार करेंगे।