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 *देश-दुनिया की ताजा खबर 19 जुलाई:TMC के गुंडा टैक्स से बंगाल में निवेश रुका’-PM मोदी,छांगुर बाबा के ठिकानों से ईडी को क्या-क्या मिला?,पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे को ED ने किया गिरफ्तार,ईडी की रडार पर ‘AAP’ नेता*

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रिलायंस को रिकॉर्ड ₹26994 करोड़ का मुनाफा; 10 साल में 6 गुना बढ़ीं म्यूचुअल फंड की परिसंपत्तियां

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी ने इस तिमाही में अब तक की सबसे ज्यादा कमाई और मुनाफा हासिल किया है। इससे कंपनी की कुल कमाई 6 प्रतिशत बढ़कर 2, 73,252 करोड़ रुपये हो गए। यह पिछली साल की तुलना में अधिक है। इस साल कंपनी के डिजिटल, रिटेल और एनर्जी बिजनेस सेगमेंट ने नई ऊंचाइयों को छुआ है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने जून 2025 को खत्म हुई पहली तिमाही (Q1 FY26) में शानदार प्रदर्शन करते हुए अब तक की सबसे ज्यादा तिमाही कमाई और मुनाफा हासिल किया है। इससे कंपनी की कुल कमाई 6% बढ़कर 2,73,252 करोड़ रुपये (लगभग $31.9 बिलियन) हो गई है, जो पिछले साल की तुलना में 1.06 गुना है। वहीं, टैक्स के बाद मुनाफा 76.5% बढ़कर 30,783 करोड़ रुपये ($3.6 बिलियन) रहा, जो पिछले साल से 1.77 गुना ज्यादा है। अगर निवेश से हुए मुनाफे को हटा दें, तो भी मुनाफा 25% यानी 1.25 गुना बढ़ा है। अप्रैल-जून 2025 तिमाही के लिए RIL ने नेट प्रॉफिट में 78 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हासिल की है, इस आंकड़े के अनुसार नेट प्रॉफिट 26,994 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इस दौरान यह आंकड़ा 15,138 करोड़ था। इस साल कंपनी के डिजिटल, रिटेल और एनर्जी बिजनेस ने इस तिमाही में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

यो ने मचाया धमाल

जियो प्लेटफॉर्म्स ने इस तिमाही में अपनी कमाई को 18.8% बढ़ाकर 41,054 करोड़ रुपये तक पहुंचाया है, जो पिछले साल के मुकाबले 1.19 गुना है। जियो के 49.8 करोड़ ग्राहकों में 99 लाख नए ग्राहक इस तिमाही में जुड़े। 5G नेटवर्क ने 20 करोड़ से ज्यादा यूजर्स का आंकड़ा पार कर लिया और 2 करोड़ से ज्यादा होम कनेक्शन के साथ जियो दुनिया की सबसे बड़ी फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA) सर्विस बन गई। जियो ने JioGames Cloud और JioPC जैसी नई डिजिटल सेवाएं शुरू कीं, जो ग्राहकों और बिजनेस के लिए गेम-चेंजर साबित हो रही हैं। इसके अलावा, 299 रुपये और उससे ज्यादा के प्लान पर 90 दिन का फ्री JioHotstar सब्सक्रिप्शन और 50 दिन का फ्री JioFiber/AirFiber ट्रायल ऑफर ने ग्राहकों को अपनी ओर खूब आकर्षित किया है।

रिलायंस रिटेल ने पकड़ी शानदार रफ्तार

रिलायंस रिटेल की बात करें तो इस कंपनी ने भी 11.3% की बढ़ोतरी के साथ 84,171 करोड़ रुपये की कमाई की, जो पिछले साल से 1.11 गुना ज्यादा है। कंपनी ने 388 नए स्टोर खोले हैं, जिससे इसकी पहुंच और मजबूत हुई है। कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स में बिल वैल्यू 26% यानी 1.26 गुना बढ़ी और resQ सर्विस सेंटर 31% बढ़कर 1,621 जगहों पर पहुंच गए। फैशन और लाइफस्टाइल में AJIO ने 26 लाख से ज्यादा प्रोडक्ट्स की रेंज बनाई, जो पिछले साल के मुकाबले 44% यानी 1.44 गुना ज्यादा है। Shein ऐप भी 20 लाख से ज्यादा डाउनलोड किया गया। क्विक कॉमर्स में 68% तिमाही-दर-तिमाही और 175% साल-दर-साल ऑर्डर ग्रोथ हुई, जो 4,290 पिन कोड्स में 2,200 से ज्यादा स्टोर्स के जरिए संभव हुई है। यह ऑर्डर ग्रोथ साल-दर-साल 2.75 गुना है।

म्युचुअल फंड इंडस्ट्री में 10 साल में 6 गुना ग्रोथ

दिसंबर 2014 में जहां इसका एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 10.51 लाख करोड़ रुपये था, वह दिसंबर 2024 तक बढ़कर 66.93 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

भारत में म्युचुअल फंड का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। पिछले 10 वर्षों में ही म्युचुअल फंड इंडस्ट्री 6 गुना से ज्यादा बढ़ी है। इसका एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) दिसंबर 2024 में 67 लाख करोड़ तक पहुंच गया। मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट कंपनी की ‘व्हेयर द मनी फ्लो’ रिपोर्ट के अनुसार, इस ग्रोथ में इक्विटी फंड्स का दबदबा कायम रहा, जो कुल AUM का 60.19% है। दिसंबर तिमाही में म्युचुअल फंड्स में 198 हजार करोड़ का नेट इनफ्लो आया, जिसमें एक्टिव इक्विटी और फ्लेक्सी कैप फंड्स प्रमुख रहे। हालांकि, थीमैटिक और अंतरराष्ट्रीय फंड्स में निवेशकों की रुचि में गिरावट दर्ज की गई।

10 साल में 6 गुना बढ़ी म्युचुअल फंड इंडस्ट्री

मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट कंपनी (MOAMC) की ‘व्हेयर द मनी फ्लो’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत की एसेट मैनेजमेंट इंडस्ट्री ने पिछले 10 वर्षों में 6 गुना से अधिक की शानदार वृद्धि दर्ज की है। दिसंबर 2014 में जहां इसका एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 10.51 लाख करोड़ रुपये था, वह दिसंबर 2024 तक बढ़कर 66.93 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में सबसे बड़ा हिस्सा 60.19% के साथ इक्विटी फंड्स का है। इसके बाद 26.77% डेट फंड्स में, 8.58% हाइब्रिड फंड्स में और 4.45% अन्य निवेश विकल्पों में है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि निवेशकों की पहली पसंद अभी भी इक्विटी फंड्स बने हुए हैं।

निवेशक इन स्कीम्स पर लगा रहे ज्यादा दांव

दिसंबर तिमाही में म्युचुअल फंड इंडस्ट्री ने 198 हजार करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश दर्ज किया, जिसमें सबसे अधिक योगदान इक्विटी फंड्स का रहा, खासतौर पर एक्टिव सेगमेंट में। इस तिमाही में 84 नई स्कीमें लॉन्च की गईं, जिनसे लगभग 24.8 हजार करोड़ रुपये जुटाए गए। निवेशकों ने इन स्कीम्स पर लगाया दांव…

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इक्विटी फंड का दबदबा कायम

म्युचुअल फंड इंडस्ट्री ने दिसंबर तिमाही में लगभग 199 हजार करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया। इसमें इक्विटी और डेट फंड्स का कुल योगदान क्रमशः 67% और 19% रहा। एक्टिव इक्विटी फंड्स ने करीब 105 हजार करोड़ रुपये के नेट इनफ्लो के साथ लीड किया, जबकि पैसिव इक्विटी फंड्स में 29 हजार करोड़ रुपये का निवेश आया।

एक तरफ, एक्टिव डेट फंड्स में निवेशकों ने लगभग 47 हजार करोड़ का निवेश किया। वहीं दूसरी तरफ, पैसिव डेट फंड्स से उन्होंने लगभग 9 हजार करोड़ रुपये बाहर निकालें।

निवेशकों ने ब्रॉड बेस्ड फंड को प्राथमिकता दी

ब्रॉड बेस्ड फंड्स ने लगभग 69% मार्केट शेयर पर कब्जा किया और अधिकांश इक्विटी नेट इनफ्लो अपने नाम किया। एक्टिव ब्रॉड बेस्ड फंड्स की हिस्सेदारी तिमाही आधार पर (QoQ) 57% से बढ़कर 70% हो गई, जबकि पैसिव ब्रॉड बेस्ड फंड्स की हिस्सेदारी 90% से घटकर 66% पर आ गई।

एक्टिव इक्विटी में, थीमैटिक फंड्स के नेट इनफ्लो में पिछली तिमाही की तुलना में गिरावट आई और यह 14 हजार करोड़ रुपये पर आ गया।

पैसिव इक्विटी में, ब्रॉड बेस्ड फंड्स के इनफ्लो में आई गिरावट की भरपाई फैक्टर और सेक्टर फंड्स में बढ़े नेट इनफ्लो से हुई। इस तिमाही में फैक्टर फंड्स ने कुल नेट इनफ्लो का 22% और सेक्टर फंड्स ने 10% हिस्सा अपने नाम किया।

ब्रॉड-बेस्ड सेगमेंट में फ्लेक्सी कैप को बढ़त

निवेशकों ने एक्टिव फ्लेक्सी कैप और मिड कैप फंड्स को प्राथमिकता दी, जिसमें प्रत्येक ने लगभग 15 हजार करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो प्राप्त किया। निवेशकों ने लार्ज कैप में अपने आवंटन के लिए मुख्य रूप से पैसिव फंड्स को चुना, जिससे इस कैटेगरी में लगभग 84% नेट इनफ्लो दर्ज किया गया। हालांकि, इसमें मामूली गिरावट देखी गई, क्योंकि निवेश का रुझान मिड कैप और स्मॉल कैप सेगमेंट की ओर शिफ्ट हो गया।

थीमैटिक सेगमेंट: कंजंप्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेशकों की पहली पसंद

कुल मिलाकर थीमैटिक म्युचुअल फंड्स में नेट इनफ्लो 17 हजार करोड़ रुपये से घटकर 14 हजार करोड़ रुपये रह गया। इस सेगमेंट में सबसे ज्यादा निवेश कंजंप्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर में हुआ, जिसमें 4.5 हजार करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया।

पैसिव थीमैटिक फंड्स में कैपिटल मार्केट्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) और पर्यटन (Tourism) जैसे नए थीम का उभार देखा गया।

कॉन्स्टेंट मैच्योरिटी फंड्स का दबदबा, टारगेट मैच्योरिटी फंड्स में बड़ा आउट फ्लो

कॉन्स्टेंट मैच्योरिटी फंड्स ने कुल नेट फ्लो में लगभग 37 हजार करोड़ रुपये का योगदान दिया और इनफ्लो में अपना दबदबा बनाया। इसके बाद कॉरपोरेट बॉन्ड फंड्स ने करीब 6 हजार करोड़ रुपये और गिल्ट फंड्स ने लगभग 4 हजार करोड़ रुपये का नेट फ्लो प्राप्त किया। वहीं, टारगेट मैच्योरिटी फंड्स ने लगभग 8 हजार करोड़ रुपये का नेट आउट फ्लो दर्ज किया।

लिक्विड फंड्स में जोरदार इनफ्लो, मनी मार्केट फंड्स की हिस्सेदारी घटी

कुल मिलाकर, लिक्विड फंड्स ने लगभग 41% नेट फ्लो में योगदान दिया, जो 15 हजार करोड़ रुपये के आसपास रहा। इसके बाद लो ड्यूरेशन और अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन कैटेगरी ने क्रमशः 7.5 हजार करोड़ रुपये और 7 हजार करोड़ रुपये का इनफ्लो प्राप्त किया।

आमतौर पर, निवेशक शॉर्ट टर्म में अतिरिक्त नकदी पार्क करने के लिए 1 साल की मैच्योरिटी तक वाले डेट फंड्स का उपयोग करते हैं, जिससे इनफ्लो और आउटफ्लो में उतार-चढ़ाव बना रहता है। मनी मार्केट फंड्स के नेट इनफ्लो की हिस्सेदारी तिमाही आधार पर (QoQ) 27% से घटकर 9% हो गई।

हाइब्रिड कैटेगरी में मल्टी एसेट फंड्स बना लीडर

मल्टी एसेट फंड्स ने हाइब्रिड कैटेगरी में लीड किया और कुल नेट इनफ्लो का 48% हिस्सा हासिल किया। इसके बाद बैलेंस्ड एडवांटेज फंड्स ने 25% का योगदान दिया।

इक्विटी सेविंग्स फंड्स के नेट इनफ्लो की हिस्सेदारी तिमाही आधार पर (QoQ) 26% से घटकर 15% हो गई, जबकि एग्रेसिव हाइब्रिड फंड्स की हिस्सेदारी 4% से बढ़कर 12% हो गई।

अंतरराष्ट्रीय फंड्स में निवेशकों की रुचि कम

अंतरराष्ट्रीय फंड्स में निवेश काफी कम रहा, क्योंकि RBI ने इन स्कीम्स में नए निवेश पर सीमाएं लगाई हुई हैं। एक्टिव और पैसिव ब्रॉड-बेस्ड फंड्स दोनों में 0.1 हजार करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया। वहीं, निवेशकों ने पैसिव थीमैटिक अंतरराष्ट्रीय फंड्स से 0.3 हजार करोड़ रुपये निकाले।

म्युचुअल फंड निवेशकों की विभिन्न जरूरतों को पूरा करने में सक्षम

मोतीलाल ओसवाल AMC के MD और CEO प्रतीक अग्रवाल ने कहा, “भारत की म्युचुअल फंड इंडस्ट्री ने तेजी से ग्रोथ की है, जिसकी एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) अब करीब 67 लाख करोड़ रुपये हो गई है। यह वृद्धि देश की आर्थिक प्रगति और बढ़ती वित्तीय साक्षरता (financial literacy) का नतीजा है।

यह ग्रोथ दिखाता है कि म्युचुअल फंड उद्योग निवेशकों की विभिन्न जरूरतों को पूरा करने में पूरी तरह सक्षम है और साथ ही देश के फाइनैंशियल इकोसिस्टम को भी मजबूत बना रहा है। भविष्य में इस विकास को बनाए रखने के लिए इनोवेशन, तकनीक और अनुकूलित निवेश समाधान अहम भूमिका निभाएंगे।

19 जुलाई को INDIA गठबंधन की रणनीतिक बैठक होने जा रही है। UP में पंचायतों का परिसीमन, वोटर लिस्ट का रिवीजन आज से शुरू हो गया। पीएम मोदी ने बिहार में रैली को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मोतिहारी को मुंबई बनाना हमारा संकल्प है। ट्रंप के पाकिस्तान जाने की खबर झूठी निकली।

रायपुर, छत्तीसगढ़: कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के खिलाफ ED कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।

एनसीपी-एसपी नेता जितेंद्र आव्हाड के खिलाफ मामला दर्ज

मुंबई में मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में एनसीपी-एसपी नेता जितेंद्र आव्हाड के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। कल विधान भवन में भाजपा और एनसीपी कार्यकर्ताओं के बीच हुई मारपीट के बाद, जितेंद्र आव्हाड और उनके कार्यकर्ताओं ने शाम को पुलिस वाहन के आगे बैठकर कामकाज में बाधा डाली। मामले की गंभीरता को देखते हुए, जितेंद्र आव्हाड के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। मुंबई पुलिस ने इसकी जानकारी दी है।

TMC के गुंडा टैक्स से बंगाल में निवेश रुका’, दुर्गापुर रैली में PM मोदी ने ममता सरकार पर साधा निशाना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में 5,400 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने ममता बनर्जी सरकार पर भी बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बंगाल में कोई निवेशक नहीं आ रहे हैं। यहां का विकास रुक गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि टीएमसी के ‘गुंडा टैक्स’ की वजह से राज्य में निवेशक आने से डरते हैं। इस तरह की भ्रष्ट और भय की राजनीति ने बंगाल की आर्थिक प्रगति को रोक दिया है और युवाओं को रोजगार से वंचित किया है।

पीएम ने इस रैली में दुर्गापुर के लिए कहा कि ये न केवल इस्पात नगरी है, बल्कि भारत की श्रमशक्ति का भी एक बड़ा केंद्र है। पीएम ने बताया कि इन परियोजनाओं से क्षेत्र की कनेक्टिविटी बढ़ेगी और गैस आधारित परिवहन को भी मजबूती मिलेगी। जनसभा में पीएम मोदी ने कहा कि  ये पहल भारत को विकसित बनाने की दिशा में अहम कदम हैं। हमें बंगाल को इस बुरे दौर से बाहर निकालना है, और आज यहां जिन परियोजनाओं की शुरुआत हुई है, वो इसी का प्रतीक हैं।

विकसित राष्ट्र बनाने के लिए दिए तीन मूलमंत्र
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया आज पूरा देश एक ही लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहा है। इस दौरान उन्होंने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए तीन मूल मंत्र भी दिए और कहा कि इसका रास्ता सिर्फ विकास से सशक्तिकरण, रोजगार से आत्मनिर्भरता और संवेदनशीलता से सुशासन है। इन तीन मूलमंत्रों पर काम करते हुए सरकार देश के प्रत्येक कोने तक विकास पहुंचा रही है। भाजपा ने पश्चिम बंगाल के लिए बड़े सपने देखे हैं। हम एक समृद्ध पश्चिम बंगाल बनाना चाहते हैं। ये सारी परियोजनाएं, इस सपने को साकार करने का प्रयास हैं।

दुर्गापुर और रघुनाथपुर की फैक्ट्रियों को नई तकनीक
पीएम मोदी ने बताया कि दुर्गापुर और रघुनाथपुर की फैक्ट्रियों में नई तकनीक के साथ काम हो रहा है। 1,500 करोड़ रुपये का निवेश इन इकाइयों को अपग्रेड करने में किया गया है। उन्होंने कहा कि इससे उत्पादन में बढ़ोतरी होगी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बनेंगे। साथ ही पश्चिम बंगाल की जनता को उन्होंने इस विकास के लिए बधाई दी।

बंगाल के युवा पलायन को मजबूर
इस दौरान पीएम ने ये भी कहा कि आज बंगाल अपने बुरे दौर से गुजर रहा है। एक समय था जब लोग यहां देशभर से रोजगार के लिए आते थे, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह उलट गई है। पश्चिम बंगाल का नौजवान पलायन के लिए मजबूर है। छोटे-छोटे काम के लिए भी उसे दूसरे राज्यों की तरफ जाना पड़ रहा है। बंगाल विकास चाहता है और अगर भाजपा आई तो बंगाल को विकास की रफ्तार मिलेगी। यहां के युवाओं को रोजगार मिलेगा। 

15 टीमें, 12 ठिकाने… सोना, नकदी और लग्जरी गाड़ियां, छांगुर बाबा के ठिकानों से ईडी को क्या-क्या मिला?

अवैध धर्मांतरण के आरोपी जमालुद्दीन उर्फ छांगुर और उसके करीबियों के बलरामपुर, मुंबई और लखनऊ के 15 ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला नेटवर्क से जुड़े मामलों में बड़ी कार्रवाई की। ईडी की 15 टीमों ने छांगुर बाबा के 12 ठिकाने पर एक्शन लिया। यह कार्रवाई सुबह 6 बजे पूरी प्लानिंग के तहत एक साथ शुरू की गई, ताकि किसी को भागने का मौका नहीं मिले। इस कार्रवाई में कई चौंकाने वाले सुराग ईडी के हाथ लगे हैं।छांगुर बाबा पर ईडी ने शिकंजा कस दिया है। 15 टीमों ने 12 ठिकाने पर कार्रवाई की। और 100 करोड़ की संपत्ति टीम को सोना, नकदी और लग्जरी गाड़ियां मिलीं हैं। ईडी ने सटीक रणनीति के तहत की बड़ी कार्रवाई है। दुबई, यूएई और नेपाल से फंडिंग के सुराग जुटाए हैं।

ईडी ने मुंबई में शहजाद शेख उर्फ इलियास शेख के माहिम और बांद्रा स्थित ठिकानों को भी खंगाला है, जिसके खाते में एक करोड़ रुपये छांगुर ने भेजे थे। लखनऊ के चिनहट स्थित छांगुर के मददगार बलरामपुर कोर्ट के कार्यालय के बाबू राजेश उपाध्याय के आवास को भी खंगाला गया है।

छापों के दौरान ईडी ने कई संपत्तियों के दस्तावेज, सोना, नकदी और लग्जरी गाड़ियों को बरामद किया है। साथ ही, दुबई, यूएई और नेपाल से हुई फंडिंग के सुराग भी जुटाए।

बलरामपुर के उतरौला में छांगुर व उससे जुड़े 12 ठिकानों पर ईडी की टीमों ने एक साथ छापा मारा। ईडी की पहली टीम मधपुर-उतरौला मार्ग स्थिति छांगुर के कॉम्प्लेक्स पर पहुंची। गेट का ताला खुलवाया। दुकान से जुड़े रजिस्टर और अन्य अभिलेखों की जानकारी की। 

इसके साथ ही दो टीमें छांगुर के मधपुर स्थित मकान में पहुंचीं। हर कमरों की जांच की। पूर्व प्रधान जुम्मन से भी पूछताछ की गई। टीम ने नामी और बेनामी संपत्तियों की भी जांच की।

जमीन बेचने पर मिली राशि के बारे में जुटाई जानकारी
ईडी की एक टीम रेहरामाफी में छांगुर के पैतृक गांव भी पहुंची। मधपुर में जमीन विक्रेता इसी गांव के पूर्व प्रधान जुम्मन खां हैं। मधपुर में जमीन विक्रेता संतोष कुमार त्रिगुनायक व उसके भाई दुर्गेश कुमार से भी सवाल किए। जमीन बेचने पर मिली धनराशि के बारे में जानकारी ली। 

हुसैनाबाद प्रिंट में ग्राम प्रधान अफसर अली, महमूदाबाद प्रिंट के ग्राम प्रधान इब्तिदा खान उर्फलल्लू, नगर के रफीनगर शोरूम पर काम करने वाले सगे भाइयों मलिक शमीम, मलिक वसीम, मलिक अली अहमद के आवास पर भी टीम पहुंची। उनसे घर में ही देर शाम तक पूछताछ चली।

सटीक थी ईडी की रणनीति
ईडी ने छापा मारने की रणनीति बहुत ही सटीक बनाई थी। लोगों को इसकी भनक भी नहीं लगी कि अभी ईडी भी जांच के लिए आ सकती है। सभी की निगाह इस पर टिकी थी कि पहले इंडी छांगुर को रिमांड पर लेगी, लेकिन ईडी ने छांगुर से पूछताछ के पहले ही उससे जुड़े लोगों की पड़ताल की योजना बनाई। 

इसी क्रम में बृहस्पतिवार सुबह छह बजे का समय तय किया, जिससे कोई घर से बाहर न निकल जाए। जिस समय ईडी की टीम पहुंची, उस समय लोग घर पर ही थे। कुछ लोग तो सो ही रहे थे। इस तरह ईडी ने सधे अंदाज में कार्रवाई की, जिससे किसी को भागने का भी मौका नहीं मिला।

लड़खड़ाने लगी जुबान
छांगुर के साथ ही नीतू और नवीन से लेनदेन करने वालों का इंडी से सामना हुआ तो उनकी जुबान लड़खड़ाने लगी। जांच की जद में आए सभी 20 लोग घबराए रहे। ईडी ने पूछताछ के दौरान किसी को बाहर आने-जाने की इजाजत नहीं दी। सुरक्षा में उतरौला पुलिस मुस्तैद रही।

सूत्रों के अनुसार जांच में बड़े पैमाने पर धन शोधन का मामला सामने आया है। अब ईडी के अधिकारी सभी ठिकानों से मिले सुबूतों की पड़ताल के बाद छांगुर को अपनी कस्टडी में लेगा, जिसके बाद उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी।

पीएम मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर, जंगलराज, रोजगार, माओवाद पर की बात; जानिए क्या-क्या कहा

पीएम मोदी ने सीएम नीतीश कुमार की भी तारीफ की। कहा कि नीतीश जी की सरकार ने यहां लाखों युवाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ सरकार में नियुक्ति भी दी है और नीतीश जी ने अभी बिहार के नौजवानों के रोजगार के लिए नए निश्चय भी लिए हैं। केंद्र सरकार कंधे से कंधा मिलाकर उनका साथ दे रही है।

क्या छत्तीसगढ़ में हुआ शराब घोटाला: क्यों पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे को ED ने किया गिरफ्तार, क्या हुए खुलासे?

छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले का मामला क्या है? इस पर अब तक क्या-क्या सामने आया है? प्रवर्तन निदेशालय की टीम भूपेश बघेल के घर छापेमारी के लिए क्यों पहुंच गई? मामले में इससे पहले किन-किन बड़े नामों की गिरफ्तारी हुई है? साथ ही यह घोटाला कितना बड़ा है? आइये जानते हैं…

छत्तीसगढ़ में शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शराब घोटाले से जुड़े मामले में छापेमारी की। इस दौरान केंद्रीय एजेंसी ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल से जुड़े ठिकानों पर रेड की। इसके बाद ईडी ने चैतन्य को गिरफ्तार कर लिया। प्रवर्तन निदेशालय के इस कदम के बाद छत्तीसगढ़ में सियासी सरगर्मियां शुरू हो गई हैं।

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले का मामला क्या है? इस पर अब तक क्या-क्या सामने आया है? प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल के ठिकानों पर छापेमारी क्यों की? मामले में इससे पहले किन-किन बड़े नामों की गिरफ्तारी हुई है? साथ ही यह घोटाला कितना बड़ा है? आइये जानते हैं…

छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले का मामला क्या है?
छत्तीसगढ़ में 2018 में कांग्रेस ने चुनाव जीता और भूपेश बघेल मुख्यमंत्री बने। बताया जाता है कि शराब घोटाले की शुरुआत अगले ही साल 2019 में हो गई। इससे 2022 तक छत्तीसगढ़ में शराब के जरिए काली कमाई की गई। प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि यह सब भूपेश बघेल सरकार की नाक के नीचे हुआ। 

शराब घोटाले का मामला क्या है?

मामले का नोएडा से क्या जुड़ाव?


ईडी का कहना है कि घोटाले में कथित तौर पर संलिप्त लोगों ने नकली होलोग्राम को बनाने के लिए उत्तर प्रदेश के नोएडा में होलोग्राफी का काम करने वाली प्रिज्म होलोग्राफी सिक्योरिटी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को टेंडर दिया था। यह कंपनी होलोग्राम बनाने के लिए पात्र नहीं थी, फिर भी नियमों में संशोधन करके यह टेंडर कंपनी को दे दिया गया था। एक और खुलासा यह हुआ कि यह कंपनी छत्तीसगढ़ के ही एक नौकरशाह से जुड़ी थी। 

क्या था संचालन का तरीका?
2017 में छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री रमन सिंह की सरकार ने एक नई आबकारी नीति का एलान किया था। इसके तहत छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) की स्थापना की गई। इस संस्थान को शराब उत्पादकों से शराब खरीदने और अपने स्टोर्स के जरिए बेचने का काम दिया गया। छत्तीसगढ़ सरकार इस योजना के जरिए शराब बिक्री का पूरा रिकॉर्ड केंद्रीकृत करना चाहती थी। 

ईडी का कहना है कि रमन सिंह सरकार की योजना साफ थी। लेकिन जब 2018 में छत्तीसगढ़ में सरकार बदली तो सीएसएमसीएल का प्रबंधन भी बदल दिया गया। इस तरह शराब सिंडिकेट ने इस पर कब्जा जमा लिया और एक समानांतर आबकारी विभाग शुरू कर दिया। इस सिंडिकेट में राज्य के वरिष्ठ नौकरशाहों से लेकर नेता और आबकारी विभाग के अधिकारी शामिल हो गए। 

तीन साल तक कैसे हुआ शराब घोटाले का ‘खेला’?

  1. फरवरी 2019 में भारतीय दूरसंचार सेवा (आईटीएस) के अफसर अरुण पति त्रिपाठी को सीएसएमसीएल का प्रमुख बनाया गया। 
  2. मई 2019 में उन्होंने निगम में प्रबंध निदेशक की जिम्मेदारी संभाली। ईडी के मुताबिक, इसके बाद से सरकारी वेंड्स से शराब की अवैध बिक्री शुरू हुई।
  3. अवैध बिक्री में मदद के लिए अफसरों ने उस कंपनी को ही बदल दिया, जो शराब की बोतलों में लगने वाले होलोग्राम, यानी इसके असली होने का प्रमाण बनाती थी। 
  4. इसकी जगह एक दूसरी कंपनी को होलोग्राम बनाने का ठेका दे दिया गया। इस कंपनी को असली होलोग्राम बनाने के साथ कुछ नकली होलोग्राम बनाने के लिए भी कहा गया। 
  5. नकली होलोग्राम को कथित तौर पर सीधे त्रिपाठी को भेज दिया जाता था, जो कि इसे देशी शराब के उत्पादकों को भेजते थे। यह उत्पादक कुछ बोतलों में असली और कुछ में नकली होलोग्राम लगाते थे। 
  6. इन डुप्लिकेट होलोग्राम के साथ-साथ डुप्लिकेट बोतलें भी हासिल की गईं। इनमें शराब भरकर राज्य के वेयरहाउस की जगह सीधे ठेकों में पहुंचाया जाने लगा।

ईडी ने इस मामले में कोर्ट को बताया है कि इन कारगुजारियों के चलते छत्तीसगढ़ में अगले तीन साल तक बड़ी मात्रा में शराब को अवैध तरह से सप्लाई किया गया। करीब 40 लाख लीटर शराब सरकारी रिकॉर्ड में नहीं आ पाई। इनकी खरीद-बिक्री का कोई ब्योरा नहीं रखा गया। बल्कि इस घोटाले में डिस्टिलर से लेकर ट्रंसपोर्टर (लाने-ले जाने वाले), होलोग्राम बनाने वाले, बोतल बनाने वाले, आबकारी अधिकारी और नेताओं का हिस्सा तय था। चौंकाने वाली बात यह है कि घोटाले में शामिल लोगों की कमाई का जरिया सिर्फ शराब की अवैध तरह से बिक्री से ही नहीं बना, बल्कि आबकारी अधिकारी उत्पादकों से वैध बिक्री पर भी अवैध कमीशन ले रहे थे। 

कैसे खुला घोटाले का राज?
ईडी ने मामले में जब जांच शुरू की तो सामने आया कि छत्तीसगढ़ में शराब की बोतलों पर लगने वाले होलोग्राम का टेंडर कारोबारी विधु गुप्ता की कंपनी ने जीता। हालांकि, यह टेंडर उन्हें अवैध कमीशन से मिला। जब प्रवर्तन निदेशालय ने विधु को गिरफ्तार किया तो उन्होंने मामले में बघेल सरकार की तरफ से सीएसएमसीएल के एमडी बनाए गए अरुणपति त्रिपाठी, रायपुर महापौर के बड़े भाई शराब कारोबारी अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा का नाम लिया। जब ईडी ने इन तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया, तो मामले में और भी खुलासे हुए। 

इस मामले में अब तक किस-किस पर जांच, कौन गिरफ्तार?
एसीबी और ईओडब्ल्यू ने ईडी के पत्र के आधार पर जनवरी 2024 में एफआईआर दर्ज की। ईओडब्ल्यू के दर्ज एफआईआर में आईएएस अनिल टुटेजा (कथित घोटाले के दौरान वाणिज्य-उद्योग विभाग के संयुक्त सचिव), अरुणपति त्रिपाठी, कांग्रेस के नेता और रायपुर के मेयर एजाज ढेबर के बड़े भाई, शराब कारोबारी अनवर ढेबर को घोटाले का मास्टरमाइंड बताया है। शराब घोटाला से होने वाली आमदनी का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं तीनों को जाता था। ईडी ने इन तीनों ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

बघेल सरकार के आबकारी मंत्री की क्यों हुई थी गिरफ्तारी?

ईडी के मुताबिक, लखमा से पूछताछ की गई, तो उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया। ऐसे में एजेंसी ने तर्क दिया कि कांग्रेस नेता मामले में सबूतों को नष्ट करने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में उन्हें गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां उन्हें रिमांड पर भेज दिया।

 ‘बंगलूरू भगदड़ जांच रिपोर्ट पर अगली बैठक में होगी चर्चा’, सीएम सिद्धारमैया का बड़ा बयान

कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि बंगलूरू भगदड़ की जांच रिपोर्ट अगली कैबिनेट बैठक में चर्चा के लिए लाई जाएगी। यह रिपोर्ट जस्टिस जॉन माइकल कुन्हा की एक सदस्यीय समिति ने सौंपी थी।

क्रेज, रिलीज से सालभर पहले सिर्फ एक मिनट में बिके पहली स्क्रीनिंग के टिकट

हॉलीवुड के जाने-माने निर्देशक क्रिस्टोफर नोलन एक बार फिर सिनेमा प्रेमियों के लिए खास सौगात लेकर आने वाले हैं। उनकी मच अवेटेड फिल्म ‘द ओडिसी’ की पहली स्क्रीनिंग के टिकट कुछ ही मिनटों में बिक गए, वो भी फिल्म की रिलीज से पूरे एक साल पहले। हालांकि ये पहली बार नहीं है जब नोलन की फिल्म को लेकर इस कदर दीवानगी देखने को मिली है, इससे पहले ‘द डार्क नाइट’ समेत कई फिल्मों को कुछ ऐसा ही प्यार मिल चुका है।

एक साल पहले ही थिएटर हुआ हाउसफुल
आईमैक्स ने गुरुवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट से जानकारी दी कि ‘द ओडिसी’ की शुरुआती स्क्रीनिंग के टिकट बिक्री के लिए जैसे ही खुले, मिनटों में पूरी तरह से सोल्ड आउट हो गए। यह फिल्म 17 जुलाई, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी, लेकिन 17 से 19 जुलाई 2026 की प्रीव्यू स्क्रीनिंग्स के लिए अमेरिका के प्रमुख थिएटर्स पहले ही हाउसफुल हो चुके हैं।

फिल्म की स्टाराकास्ट
‘द ओडिसी’ में हॉलीवुड की सबसे बड़ी स्टारकास्ट देखने को मिलेगी। फिल्म में मैट डेमन, टॉम हॉलैंड, जेंडाया, रॉबर्ट पैटिनसन, लुपिता न्योंगो, ऐनी हैथवे और चार्लीज थेरॉन जैसे दिग्गज सितारे नजर आएंगे। ऐसे सितारों की मौजूदगी से पहले ही ये फिल्म चर्चा में थी, लेकिन टिकट बुकिंग ने अब इस बात का सबूत भी दे दिया है कि फिल्म रिलीज होते ही धमाल मचाने वाली है।

महिला सशक्तिकरण पर बोले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत…’महिलाओं को पिछड़ी परंपराओं से मुक्त करना जरूरी

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण से ही देश का विकास संभव है। समाज में महिलाओं को पिछड़ी परंपराओं और रुढ़ियों से मुक्त किया जाना चाहिए, क्योंकि महिलाओं को पुरुषों के बराबर सभी योग्यताएं प्राप्त हैं। उन्होंने कहा- महिलाओं की स्वतंत्रता से पूरा समाज लाभान्वित होता है।

‘महिलाएं किसी भी समाज का सबसे अहम हिस्सा’
मोहन भागवत ने कहा, ‘महिलाएं किसी भी समाज का सबसे अहम हिस्सा होती हैं। पुरुष जीवनभर काम करता है, महिला भी जीवनभर काम करती है, लेकिन उससे आगे जाकर वह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती है। बच्चों के मन और संस्कार मां के स्नेह में ही विकसित होते हैं।’

उन्होंने आगे कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल समाज के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के विकास के लिए अनिवार्य है। मोहन भागवत ने कहा, ‘ईश्वर ने महिलाओं को एक अतिरिक्त विशेषता दी है, जिससे वे वह सब कर सकती हैं जो पुरुष नहीं कर पाते। साथ ही, उन्हें पुरुषों के जैसे सभी गुण भी दिए हैं। इसलिए वे पुरुषों के बराबर हर काम कर सकती हैं।’

‘महिला आगे बढ़ती है, तो वह पूरे समाज को आगे ले जाती है’
उन्होंने यह भी कहा कि पुरुषों को यह सोचना कि वे महिलाओं को ऊपर उठाएंगे, यह एक अहंकार की बात है। ‘ऐसा सोचने की कोई जरूरत नहीं है। महिलाओं को बस स्वतंत्र छोड़ देना चाहिए, उन्हें पिछड़ी परंपराओं से मुक्त करना चाहिए और उन्हें खुद को विकसित करने देना चाहिए। जब एक महिला आगे बढ़ती है, तो वह पूरे समाज को आगे ले जाती है।’ इस कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने उद्योगवर्धिनी संस्था की तरफ से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों की भी सराहना की।

ईडी की रडार पर ‘AAP’ नेता: मनी लॉन्ड्रिंग के तीन नए केस दर्ज, पूर्व सीएम आतिशी ने कसा भाजपा पर तंज

आम आदमी पार्टी के नेता एक बार फिर ईडी की रडार पर आ गए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली सरकार के कार्यकाल के दौरान सामने आए तीन बड़े कथित घोटालों में मनी लॉन्ड्रिंग के केस दर्ज कर लिए हैं। ये मामले अस्पताल निर्माण, सीसीटीवी परियोजना और शेल्टर होम से संबंधित हैं। ईडी ने इन मामलों में इन्फोर्समेंट केस इनफॉर्मेशन रिपोर्ट दर्ज की है और जल्द ही आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं को पूछताछ के लिए समन भेजे जा सकते हैं।

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और आप नेता आतिशी ने ईडी के द्वारा आम आदमी पार्टी के नेताओं पर केस दर्ज करने पर कहा कि भाजपा ने जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करना फिर शुरू कर दिया है।आतिशी ने आगे कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने अपनी जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल कर रही है। आप के नेताओं पर फर्जी मामले दर्ज करना शुरू कर दिया गया है। आगे लिखा कि यह सब गुजरात के विसावदर में आए चुनावी परिणाम की वजह से हो रहा है। यहां भाजपा के तमाम प्रयासों और हथकंडों के बाद भी आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार ने भारी मतों से जीत हासिल की थी।

बीजेपी ने जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करना फिर शुरू किया‼️

भारतीय जनता पार्टी ने अपनी जांच एजेंसियों का ग़लत इस्तेमाल करना फिर से शुरू कर दिया है। AAP के नेताओं पर फ़र्ज़ी मामले दर्ज करना फिर शुरू कर दिया गया है।

यह सब गुजरात के विसावदर में आए चुनावी परिणाम की वजह से किया जा… pic.twitter.com/YQyDJgUnWv

पहला मामला 5,590 करोड़ रुपए के अस्पताल निर्माण घोटाले से जुड़ा हुआ है। इस घोटाले में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज और सत्येंद्र जैन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। साल 2018-19 में दिल्ली सरकार द्वारा 24 अस्पताल परियोजनाएं मंजूर की गई थीं। इन आईसीयू अस्पतालों को छह महीने में तैयार करना था, लेकिन तीन साल बाद भी निर्माण कार्य अधूरा है। अब तक करीब 800 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं, लेकिन सिर्फ 50 प्रतिशत काम ही पूरा हुआ है। इसके अलावा, एलएनजेपी अस्पताल की लागत 488 करोड़ से बढ़कर 1,135 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है।

दूसरा मामला 571 करोड़ रुपए के सीसीटीवी घोटाले से जुड़ा है। 2019 में दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों में 1.4 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना बनाई गई थी। यह ठेका भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (भेल) को दिया गया, लेकिन परियोजना समय पर पूरी नहीं हुई। भेल पर 17 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया, जिसे बाद में बिना किसी स्पष्ट कारण के माफ कर दिया गया था।

तीसरा मामला 207 करोड़ की गड़बड़ी का डीयूएसआईबी शेल्टर होम घोटाले से जुड़ा है। दिल्ली अर्बन शेल्टर इंप्रूवमेंट बोर्ड (डीयूएसआईबी) से जुड़ी परियोजनाओं में भी गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है।

आरोप है कि फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद के जरिये 207 करोड़ रुपए की हेराफेरी की गई। लॉकडाउन के दौरान कागजों में दिखाया गया कि 250 करोड़ रुपए का शेल्टर होम का काम ‘घोस्ट वर्कर्स’ के नाम पर दर्शाया गया। इन कर्मचारियों की सैलरी नेताओं तक कमीशन के रूप में पहुंचाने का आरोप है।

सूत्रों के अनुसार, इन सभी मामलों की जांच सीबीआई और एसीबी पहले से ही कर रही हैं और इन्हीं जांच एजेंसियों की एफआईआर के आधार पर ईडी ने अब मनी लॉन्ड्रिंग के केस दर्ज किए हैं। संभावना है कि जल्द ही आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं से पूछताछ शुरू हो सकती है।

बिहार चुनाव से पहले सीएम नीतीश कुमार की पार्टी को एक और झटका, अब इस नेता ने छोड़ा जदयू

एक ओर बिहार चुनाव को लेकर सीएम नीतीश कुमार राज्यवासियों को नई-नई सौगातें दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर से उनकी पार्टी के पुराने सदस्य अपना इस्तीफा दे रहे हैं।  जदयू के अति पिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव धर्मेंद्र चौहान पार्टी से इस्तीफा देने के बाद अब पार्टी के एक और नेता ने अपना इस्तीफा दे दिया। पूर्व विधान परिषद सदस्य विनोद कुमार सिंह ने कहा कि वर्तमान परिस्थियों के अनुसार जदयू में मेरा रहना कठिन होता जा रहा है। इसलिए मैं इस्तीफा दे रहा हूं।

शून्य से शीर्ष तक की यात्रा में मैं सहभागी रहा
पूर्व एमएलसी विनोद कुमार सिंह ने जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के नाम लिखे पत्र में कहा कि आपके उच्च नैतिक मूल्य एवं सर्वजन कल्याण की विचारधारा से प्रेरित होकर मैं जदयू में शामिल हुआ। दल के हरेक संघर्ष में निरंतर साथ रहा। आपके नेतृत्व में ही मेरी आस्था रही है। पार्टी की स्थापना से लेकर जो शून्य से शीर्ष तक की यात्रा रही है, इसमें मैं भी सहभागी रहा हूं। इस अवधि में कई दौर आए। आपके नेतृत्व और निर्देश में मैं पार्टी कार्यकर्ता के रूप में मैं सक्रिय रहा। हम अपने आपको भाग्यशाली समझते हैं कि इस अवधि में हमारे साथ निरंतर

जदयू की प्राथमिक सदस्यता से त्याग पत्र दे रहा
विनोद कुमार सिंह ने कहा कि आपका (सीएम नीतीश कुमार) आशीर्वाद बना रहा। आपके आशीर्वाद से ही मैं बिहार विधान परिषद का सदस्य बना। लेकिन, वर्तमान राजनीतिक स्थिति में जदयू में बने रहना मेरे लिए निरंतर कठिन होता जा रहा है। दल अपनी घोषित नीतियों के अनुसार नहीं चल रहा है। यह हमारी ही नहीं, पार्टी के आम कार्यकर्ताओं की भावना है कि दल में पहले की तरह समर्पित कार्यकर्ताओं की जरूरत नहीं रह गई है। इसलिए मैं जदयू की प्राथमिक सदस्यता से त्याग पत्र दे रहा हूं। मेरे मन में आपके प्रति गहरा आदर और सम्मान है. यह हमेशा बना रहेगा। निवेदन है कि मेरा त्याग पत्र स्वीकार करने की कृपा करें।

न कोई बड़ा ट्विस्ट, न हाई-वोल्टेज ड्रामा; फिर भी अहान-अनीत की जोड़ी ने दिल जीत लिया

कुछ फिल्में आपको हंसाती हैं, कुछ रुलाती हैं…फिर कुछ ऐसी होती हैं जो लंबे वक्त तक दिल में बस जाती हैं। ‘सैयारा’ उन्हीं फिल्मों में से एक है। फिल्ममेकर मोहित सूरी, जो पहले भी ‘आशिकी 2’, ‘वो लम्हे’, ‘जहर’ और ‘एक विलेन’ जैसी इमोशनल लव स्टोरीज दे चुके हैं, इस बार यशराज फिल्म्स के साथ मिलकर एक बार फिर टूटे दिलों की आवाज लेकर आए हैं।1

सैयारा

कलाकार

आहान पांडे और अनीत पड्डा

लेखक

रोहन शंकर और संकल्प सदानाह

निर्देशक

मोहित सूरी

निर्माता

आदित्य चोपड़ा और अक्षय विधानी

रिलीज

18 जुलाई 2025

‘सैयारा’ एक इमोशनल लव स्टोरी है, जिसमें दो टूटे हुए दिल एक-दूसरे की आवाज बनते हैं। वाणी बत्रा (अनीत पड्डा) को कविताएं लिखना बेहद पसंद है, लेकिन वह ये बात दुनिया से छुपाकर रखती है। शादी के दिन उसका मंगेतर उसे छोड़ जाता है, जिससे वह अंदर से टूट जाती है और लिखना भी छोड़ देती है। छह महीने बाद वाणी को पत्रकार की नौकरी मिलती है, जहां उसकी मुलाकात होती है कृष कपूर (आहान पांडे) से, सिंगर बनने की कोशिश में लगा गुस्सैल और अकेला लड़का। जब कृष वाणी की एक पुरानी कविता पढ़ता है, तो वह उस पर गीत लिखने के लिए कहता है। काम के दौरान दोनों एक-दूसरे के करीब आते हैं और उनके बीच एक अनकहा रिश्ता बनने लगता है। मगर प्यार की इस राह में कई उलझनें हैं। क्या इनका रिश्ता इन सभी मुश्किलों से गुजर पाएगा? यही फिल्म का असली सवाल है।

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अभिनय
आहान पांडे ने कृष के किरदार को अच्छे से निभाया है। शुरुआत में थोड़े रुखे लगते हैं, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, उनकी आंखों और हावभाव से इमोशंस झलकने लगते हैं। उनका किरदार बाहर से सख्त लेकिन अंदर से बेहद भावुक है। अनीत पड्डा ने वाणी के किरदार को बहुत ही सच्चाई और मासूमियत से निभाया है। वाणी की जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आता है जो ऑडियंस को झकझोर देता है। स्क्रीन पर उनका डर, स्ट्रगल और फिर भी मुस्कराते रहना, ये सब बहुत असरदार लगता है। उनकी मासूमियत और इमोशंस स्क्रीन पर पूरी तरह महसूस होते हैं। इस बात में कोई दोराय नहीं कि आहान और अनीत की जोड़ी में एक ताजगी और ईमानदारी है, जो आजकल के कई नए कलाकारों में नहीं दिखती।

स्क्रीनप्ले
कुछ सीन जरूरत से ज़्यादा वक्त लेते हैं और थोड़ा प्रेडिक्टेबल भी हैं। लेकिन फिल्म का इमोशनल ग्रैविटी उसे बैलेंस कर देता है। दूसरे हाफ में वाणी और कृष के बीच के इमोशनल मोमेंट्स दिल को छू जाते हैं…बिना कुछ कहे भी बहुत कुछ कह जाते हैं।

निर्देशन
मोहित सूरी, जिन्होंने ‘आशिकी 2’, ‘एक विलेन’, ‘वो लम्हे’ जैसी भावनात्मक फिल्में बनाई हैं, उन्होंने ‘सैयारा’ में भी वही दर्द और गहराई दिखाने की कोशिश की है। कहानी के कुछ हिस्से थोड़े लंबे जरूर लगते हैं, लेकिन उनका इमोशनल ट्रीटमेंट ऑडियंस को बांधे रखता है। मोहित ने पहली बार यशराज फिल्म्स के साथ काम करते हुए अपने अंदाज में एक नई जोड़ी को पेश किया है और उन्होंने इसे एक यादगार अनुभव बना दिया है।

संगीत
फिल्म का म्यूजिक इसकी आत्मा है। टाइटल ट्रैक ‘सैयारा’ दिल छू जाता है और खत्म होने के बाद भी जहन में रहता है। बाकी गाने उतना प्रभाव नहीं छोड़ते, लेकिन बैकग्राउंड स्कोर हर इमोशनल सीन को और गहराई देता है। मिथून, फहीम अब्दुल्ला, विशाल मिश्रा, सचेत-परंपरा और तनिष्क बागची की टीम ने कहानी के इमोशंस को संगीत से खूबसूरती से जोड़ा है।

सैयारा 

कमजोर पहलू
फिल्म की शुरुआत थोड़ी धीमी लगती है, जिससे ऑडियंस को कहानी में घुलने-मिलने में थोड़ा समय लगता है। कुछ सीन जरूरत से ज्यादा लंबे हैं और कुछ डायलॉग्स बार-बार जैसे लगते हैं। कई जगहों पर कहानी पहले से समझ में आने लगती है, खासकर अगर आपने पहले भी रोमांटिक फिल्में देखी हैं। फिल्म में कोई बड़ा ट्विस्ट या चौंकाने वाला मोड़ नहीं है, जिससे यह थोड़ी सीधी-सादी लगती है। क्लाइमेक्स और कुछ इमोशनल सीन में इमोशंस ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए हैं, जो कुछ ऑडियंस को थोड़ी बोरिंग लग सकती हैं।

फाइनल वर्डिक्ट: देखें या नहीं?
‘सैयारा’ एक सीधी-सादी लेकिन असरदार प्रेम कहानी है, जो ऑडियंस के दिल में उतर जाती है। ये फिल्म सिर्फ एक लव स्टोरी नहीं, बल्कि रिश्तों की गहराई और सच्चे प्यार की ताकत को दिखाती है। अगर आप इमोशनल, सच्ची एक्टिंग और खूबसूरत म्यूजिक वाली फिल्में पसंद करते हैं, तो ‘सैयारा’ जरूर देखें। ये फिल्म आपको इमोशंस की उस दुनिया में ले जाएगी, जहां हर सीन कुछ महसूस कराता है।

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