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 *बीआर गवई होंगे पहले एससी मुख्य न्यायाधीश* 

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जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई अगले चीफ जस्टिस होंगे, 14 मई 2025 को कार्यभार संभालेंगे. वे सुप्रीम कोर्ट के पहले एससी समुदाय से सीजेआई होंगे. उन्होंने यूपी में बुलडोजर एक्शन पर रोक लगाई थी.

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश यानी सीजेआई होंगे। मौजूदा सीजेआई संजीव खन्ना ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में जस्टिस गवई के नाम की सिफारिश कानून मंत्रालय को भेज दी है। कानून मंत्रालय ने परंपरा के अनुसार, मौजूदा सीजेआई से उनके उत्तराधिकारी के नाम की सिफारिश मांगी थी। इसके जवाब में सीजेआई खन्ना ने जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई का नाम आगे बढ़ाया। जस्टिस गवई की नियुक्ति कई मायनों में खास है, क्योंकि वह देश के दूसरे दलित मुख्य न्यायाधीश बनने जा रहे हैं।

यूपी में बुल्‍डोजर एक्‍शन पर रोक लगाने वाले जस्‍ट‍िस भूषण रामकृष्ण गवई (Justice Bhushan Ramkrishna Gavai) देश अगले चीफ जस्‍ट‍िस होंगे. वे मौजूदा सीजेआई जस्टिस संजीव खन्ना की जगह लेंगे और 14 मई 2025 को अपना कार्यभार संभालेंगे. जस्टिस गवई का कार्यकाल 23 नवंबर 2025 तक रहेगा. सबसे खास बात, एससी समुदाय से आने वाले वे सुप्रीम कोर्ट के पहले सीजेआई होंगे. जस्टिस गवई को सोशल जस्‍ट‍िस से जुड़े कई महत्‍वपूर्ण फैसलों के ल‍िए जाना जाता है.

जस्टिस बीआर गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ था. उनके पिता आरएस गवई एक प्रसिद्ध राजनेता थे, जो रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (गवई) से सांसद और बाद में राज्यपाल रहे. उनके भाई राजेंद्र गवई भी एक राजनेता हैं. जस्टिस गवई ने अपनी कानून की पढ़ाई नागपुर विश्वविद्यालय से पूरी की और 1985 में वकालत शुरू की. इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट में उन्‍होंने वकालत से की. 2000 में उन्‍हें बॉम्बे हाई कोर्ट में स्थायी जज बनाया गया. 2019 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया.

जस्‍ट‍िस गवई के कुछ फैसले देख‍िए
बुलडोजर कार्रवाई पर रोक- जस्टिस गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने यूपी में बुल्‍डोजर एक्‍शन पर रोक लगाने वाला फैसला सुनाया था. साप कहा था क‍ि किसी भी आरोपी या दोषी की संपत्ति को सिर्फ इस आधार पर बुलडोजर से ध्वस्त करना असंवैधानिक है. कार्यपालिका जज नहीं बन सकती और संपत्ति को ध्वस्त नहीं कर सकती.

स्टैंप एक्ट पर बड़ा फैसला- जस्टिस गवई उस सात-जजों की बेंच का हिस्सा थे, जिसने सर्वसम्मति से फैसला दिया कि स्टैंप एक्ट के तहत अनस्टैम्प्ड एग्रीमेंट स्वीकार्य नहीं हैं. यानी अगर स्‍टैंप ड्यूटी नहीं दी गई है तो उस पर क‍िया गया कोई भी समझौता अवैध माना जाएगा.

मई में संभालेंगे नए CJI की जिम्मेदारी

जस्टिस संजीव खन्ना का कार्यकाल 13 मई को समाप्त हो रहा है। उनके बाद वरिष्ठता के आधार पर जस्टिस बी.आर. गवई अगले सीजेआई के रूप में पदभार संभालेंगे। जस्टिस गवई देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश होंगे। उनको 24 मई, 2019 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था। प्रधान न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल छह महीने से अधिक होगा और वह 23 नवंबर, 2025 को सेवानिवृत्त होंगे।

जानिए कौन हैं जस्टिस बीआर गवई

अमरावती में जन्म, 1985 में शुरू की वकालत

जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती जिले में हुआ। उन्होंने 16 मार्च 1985 को वकालत शुरू की। उन्होंने अपने शुरुआती वर्षों में पूर्व महाधिवक्ता और हाईकोर्ट के जज बैरिस्टर राजा एस. भोसले के साथ 1987 तक कार्य किया। इसके बाद 1987 से 1990 तक बॉम्बे हाई कोर्ट में स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस की।

1990 तक बॉम्बे हाई कोर्ट में की प्रैक्टिस

जस्टिस गवई 1990 के बाद मुख्य रूप से बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ में प्रैक्टिस की। फिर नागपुर नगर निगम, अमरावती नगर निगम और अमरावती विश्वविद्यालय के लिए भी स्थायी वकील रहे। इसके अलावा, उन्होंने सीकोम, डीसीवीएल जैसी विभिन्न स्वायत्त संस्थाओं, निगमों और विदर्भ क्षेत्र की कई नगर परिषदों के लिए नियमित रूप से पैरवी की।

2000 में नागपुर खंडपीठ के लिए पब्लिक प्रॉसीक्यूटर नियुक्त

जस्टिस गवई अगस्त 1992 से जुलाई 1993 तक बॉम्बे हाई कोर्ट, नागपुर खंडपीठ में सहायक सरकारी अभिभाषक और एडिशनल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर नियुक्त किया गया। 17 जनवरी 2000 को बीआर गवई नागपुर खंडपीठ के लिए सरकारी अभिभाषक और पब्लिक प्रॉसीक्यूटर नियुक्त किया गया।

2019 में सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर मिली पदोन्नति

14 नवंबर 2003 को वे बॉम्बे हाई कोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए और 12 नवंबर 2005 को स्थायी न्यायाधीश बने। उन्होंने मुंबई मुख्य पीठ सहित नागपुर, औरंगाबाद और पणजी की बेंच पर विभिन्न प्रकार के मामलों की अध्यक्षता की। 24 मई 2019 को उन्हें भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया। वे 23 नवंबर 2025 को सेवानिवृत्त होंगे।

जस्टिस गवई ने सुनाए कई अहम फैसले

जस्टिस बीआर गवई सुप्रीम कोर्ट में कई संविधान पीठ का हिस्सा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने महत्वपूर्ण फैसले सुनाए हैं।

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