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 ब्रज की गलियों में होली का उल्लास चरम पर:नंद भवन में लड्डू गोपाल की होली!

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ब्रज की गलियों में होली का उल्लास अपने चरम पर है. बरसाना की लट्ठमार होली के बाद अब नंदगांव के नंद भवन में भक्ति और रंगों का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है. जहां एक ओर लड्डू गोपाल और बड़े भाई बलराम के बीच हर्बल गुलाल से होली खेली गई, वहीं दूसरी ओर नंदगांव की हुरियारिनों ने बरसाना के हुरियारों पर लट्ठ बरसाकर इस परंपरा को जीवंत कर दिया.

नंदगांव के ऐतिहासिक नंद भवन में स्थित लड्डू गोपाल मंदिर में जैसे ही कान्हा पहुंचे, माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया. वहां उनके बड़े भाई बलराम ने हर्बल गुलाल लगाकर उनका स्वागत और अभिवादन किया. लड्डू गोपाल के गालों पर गुलाल लगते ही पूरे मंदिर का वातावरण सतरंगी हो गया. यह दृश्य इतना मनमोहक था कि वहां मौजूद हर श्रद्धालु अपनी सुध-बुध खो बैठा और मंदिर परिसर में रंगों की बारिश होने लगी.

बरसाना की प्रसिद्ध लट्ठमार होली के अगले दिन नंदगांव में इसका दूसरा हिस्सा खेला गया. इस बार लट्ठ बरसाना के हुरियारों (पुरुषों) पर पड़ रहे थे और हाथ में लाठियां लिए नंदगांव की हुरियारिनें (महिलाएं) तैयार खड़ी थीं. बरसाना के हुरियारों को सबक सिखाने और प्रेम की इस जंग में जीतने के लिए महिलाएं एकजुट होकर उन पर लट्ठ बरसाती नजर आईं. यह परंपरा सदियों से चली आ रही है जो राधा-कृष्ण के प्रेम और हंसी-ठिठोली को दर्शाती है.

ऐसी मान्यता है कि ब्रज की होली के दौरान स्वर्ग के देवता भी धरती पर आ जाते हैं. होली का आनंद इतना गहरा होता है कि जब तक यह उत्सव पूरी तरह संपन्न नहीं हो जाता, देवता अपने लोक वापस नहीं लौटते. इस बार नंद भवन में लड्डू गोपाल और बलराम की जोड़ी को साथ में होली खेलते देख श्रद्धालुओं को ऐसा लगा मानो साक्षात द्वापर युग जीवंत हो उठा हो.

नंद भवन के प्रांगण में होली अपने चरम पर दिखी. गोस्वामी समाज के लोग श्रद्धालुओं के साथ मिलकर होली के पारंपरिक पद गाते और गुलाल उड़ाते नजर आए. बलराम ने जब अपने छोटे भाई लड्डू गोपाल को तिलक लगाया और गुलाल उड़ाया, तो भक्तों ने जयकारों से आसमान गुंजा दिया. भाई-भाई के इस प्रेम और होली के उल्लास ने सबका मन मोह लिया.

ब्रज में होली का आनंद लेने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचे हुए हैं. हर कोई अपने ठाकुर जी के साथ होली खेलने को बेताब दिखा. भगवान और भक्त के बीच का यह प्रेमपूर्ण संवाद देखकर वहां का माहौल भावुक और ऊर्जा से भरा हुआ था. श्रद्धालु इस बात से निहाल थे कि उन्हें साक्षात प्रभु के सानिध्य में रंग खेलने का मौका मिल रहा है.

भगवान कृष्ण और बलराम के सखा भी इस मस्ती में पीछे नहीं रहे. ये सखा बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं पर बड़ी-बड़ी पिचकारियों से प्राकृतिक रंग बरसा रहे थे. जब श्रद्धालुओं के तन पर ब्रज का पावन रंग पड़ता, तो वे खुशी से झूम उठते. ब्रज की इस गलियों में रंग डलवाना हर भक्त अपना सौभाग्य समझता है.

जैसे ही पुजारी जी ने नंद भवन का पर्दा हटाया, हजारों की संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं की भीड़ अपने आराध्य के दर्शन पाकर धन्य हो गई. मंदिर में चारों तरफ से गुलाल की बारिश शुरू हो गई. भक्तों ने नाचते-गाते हुए अपने भगवान को होली की शुभकामनाएं दीं. मंदिर का कोना-कोना अबीर और गुलाल की खुशबू से महक उठा, जिससे पूरा नंदगांव ‘नंद के आनंद भयो’ के जयकारों से गूंज उठा.

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