अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर 25% टैरिफ लगाने और उसे ‘डेड इकॉनमी’ बताने के बाद चौतरफा आलोचनाओं से घिर गए हैं। टेस्टबेड के प्रेसीडेंट किर्क लुबिमोव ने इसे बड़ी भू-राजनीतिक भूल बताते हुए कहा कि यह चीन के बढ़ते प्रभुत्व को कम करने की अमेरिकी रणनीति के खिलाफ है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चौतरफा निशाने पर आ गए हैं। भारत को लेकर उनका नजरिया लोगों को अखर गया है। 25% टैरिफ लगाने के बाद भारत को ‘डेड इकॉनमी’ बताकर मखौल उड़ाने के लिए ट्रंप की आलोचना होने लगी है। इसे अमेरिका के भू-राजनीतिक हितों के लिए बड़ी भूल माना जा रहा है। मैनेजमेंट कंसल्टिंंग फर्म टेस्टबेड के प्रेसीडेंट किर्क लुबिमोव ने इस कदम को ‘बड़ी भू-राजनीतिक चूक’ बताया है। उनके मुताबिक, यह चीन के बढ़ते प्रभुत्व को कम करने की अमेरिकी स्ट्रैटेजी के खिलाफ है। लुबिमोव का तर्क है कि भारत चीन का ऑप्शन हो सकता है। लेकिन, टैरिफ लगाकर अमेरिका अपने संभावित सहयोगी को ही दूर कर रहा है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। जल्द ही वह तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। यह स्थिति दिखाती है कि अमेरिकी टैरिफ से भारत पर तत्काल प्रभाव पड़ सकता है। लेकिन, भारत अपनी अर्थव्यवस्था की मजबूती और वैश्विक स्थिति को लेकर आश्वस्त है।
इसके पहले जाने-माने इतिहासकार विलियम डेलरिम्पल ने भी ट्रंप के भारत की अर्थव्यवस्था को ‘डेड’ बताने वाले बयान को खारिज किया था। इतिहासकार ने अपनी बात के पक्ष में ठोस आर्थिक आंकड़े दिए थे। उनका कहना था कि भारत ग्रोथ की दौड़ में भारत से बहुत आगे है। पिछले साल भारत अमेरिका के मुकाबले दोगुनी तेजी से बढ़ा। इस वह अमेरिका से तीन गुना ज्यादा रफ्तार से बढ़ सकता है।
भारत को लेकर ट्रंप के रुख की तीखी आलोचना
अब टॉप व्यावसायिक मंच टेस्टबेड के चीफ किर्क लुबिमोव ने भारत के खिलाफ ट्रंप के रुख की आलोचना की है। वह भारत पर टैरिफ लगाने के फैसले से असहमत हैं। उन्होंने इसे बड़ी भू-राजनीतिक भूल बताया है। उनका कहना है कि इससे एशिया में अमेरिका के रणनीतिक लक्ष्यों पर बुरा असर पड़ सकता है।
लुबिमोव ने रविवार को कहा कि ट्रंप का टैरिफ लगाने का तरीका भू-राजनीतिक रणनीति को बिल्कुल भी ध्यान में नहीं रखता है। ट्रंप अब भारत से झगड़ा कर रहे हैं। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कई देशों में सम्मान है। उनका काफी ज्यादा प्रभाव है।
लुबिमोव ने यह भी कहा कि ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की भूमिका को चीन के दबदबे को कम करने के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि भारत चीन से उत्पादन को ट्रांसफर करने के लिए एक स्वाभाविक देश हो सकता है। अमेरिका 50 सेंट के टूथब्रश नहीं बनाएगा।भारत के साथ हथौड़े और कील का नजरिया नहीं चलेगा
लुबिमोव ने सुझाव दिया कि भारत के साथ हथौड़े और कील का नजरिया अपनाने के बजाय अमेरिका को आर्थिक सहयोग करना चाहिए। कनाडा प्राकृतिक संसाधनों की जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है। उन्होंने इसे बड़ा मिस कैलकुलेशन बताया। एक्सपर्ट के अनुसार, इन देशों के नेता दीर्घकालिक सोचते हैं। ट्रंप का 4 साल का कार्यकाल उनके लिए एक झटके जैसा होगा।
हाल ही में भारत और रूस पर हमला करते हुए ट्रंप ने कहा था कि उन्हें परवाह नहीं है कि भारत रूस के साथ क्या करता है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि 1 अगस्त से भारत से आने वाले सभी सामानों पर 25% टैरिफ लगेगा। साथ ही, रूस से कच्चे तेल (क्रूड) और सैन्य हार्डवेयर खरीदने पर भारत पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।
लुबिमोव की यह टिप्पणी ट्रंप की ओर से भारत और रूस पर किए गए हमले के बाद आई है। भारत अभी चीन के बाद रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। यूक्रेन युद्ध से पहले भारत का आयात 1% से भी कम था। यह अब बढ़कर 35% से ज्यादा हो गया है। ट्रंप का जुर्माना भारत को अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद रूस के साथ व्यापार जारी रखने के लिए सीधे तौर पर टारगेट होने वाला पहला देश बनाता है।
इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन ने ईरानी पेट्रोकेमिकल उत्पादों की खरीद और बिक्री में शामिल छह भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं। यह कार्रवाई 20 वैश्विक संस्थाओं को टारगेट करने वाली एक व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है।

