Site icon अग्नि आलोक

 *मध्य प्रदेश के हर आदिवासी बच्चे की पढ़ाई का खर्च उठाएगी सरकार,कोल जनजातीय सम्मेलन में सीएम मोहन यादव की घोषणा*

Share

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ब्यौहारी में आयोजित राज्य स्तरीय कोल जनजातीय सम्मेलन में शामिल होने के लिए पहुंचे. इस दौरान उन्होंने कई बड़ी घोषणाएं की हैं.

 मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के ब्यौहारी में राज्य स्तरीय कोल जनजातीय सम्मेलन का आयोजन किया गया. इसमें पूरे प्रदेश से जनजाति समाज के लोग शामिल होने के लिए पहुंचे. इस खास आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल हुए. उन्होंने समाज के लोगों को संबोधित किया और कई बड़े ऐलान किए. उन्होंने कहा कि जनजाति समाज के बच्चों के पढ़ाई का खर्च सरकार उठाएगी. सीएम ने कहा कि जनजातीय समाज का समृद्ध एवं गौरवशाली इतिहास रहा है. समाज ने देश की स्वतंत्रता एवं विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. जनजातीय कोल समाज प्राचीन काल से ही अपनी वीरता एवं गंभीरता के लिए जाना जाता है.

बनाए जाएंगे खास छात्रावास

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जनजातीय समाज के बेटा, बेटियों की शिक्षा तथा कोचिंग का खर्च सरकार उठाएगी. प्रदेश के सभी संभागों में 24-24 करोड़ के लागत वाले 100-100 सीटर बालक एवं बालिका छात्रावास एवं परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केन्द्र खोले जाएंगे. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ब्यौहारी में राज्य स्तरीय कोल जनजातीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने 330 करोड़ रुपये लागत के 55 विकास कार्यों का लोकार्पण ओर 52 कार्यों का भूमिपूजन भी किया.

250 करोड़ का राखी गिफ्ट – सीएम यादव

सीएम मोहन यादव ने ऐलान किया, ‘रक्षाबंधन में प्रदेश की लाडली बहनों को उपहार के रूप में 250 रुपये सप्रेम दिए जाएंगे. जनजातियों के खिलाफ होने वाले झूठे प्रकरणों की जांच कराकर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी.’ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान बिरसा मुण्डा की जीवनी स्कूली पाठ्क्रम में शामिल करने तथा 13 जिलों में कन्या शिक्षा परिसरों का नाम माता शबरी के नाम पर रखने की घोषणा की.

जनजातीय नायकों का स्मरण

सीएम यादव ने राजा भभूतसिंह के योगदान का स्मरण भी किया. राजा भभूतसिंह के सम्मान में उनके शासन केंद्र पचमढ़ी में कैबिनेट बैठक का आयोजन किया गया. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कौल समाज में अनेक गौरवशाली व्यक्तित्व रहे हैं इनमें बुधु भगत और मदारा महतो भी शामिल हैं. कोल समाज इनके कृतित्व से गौरवान्वित है. वर्ष 1831 और 1832 में इन जनजातीय नायकों के नेतृत्व में अंग्रेजों के अत्याचारों के विरूद्ध संघर्ष किया था.

Exit mobile version