जल जीवन मिशन घोटाले में एसीबी की एसआईटी ने जयपुर, बाड़मेर, उदयपुर, करौली, दिल्ली समेत कई जगहों पर दबिश देकर 9 आरोपी अधिकारियों को गिरफ्तार किया, 960 करोड़ के फर्जी टेंडर का खुलासा हुआ. जांच में सामने आया कि केस संख्या 145/2024 से जुड़े मामले में फर्म मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी के प्रोपराइटर महेश मित्तल और मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी के प्रोपराइटर पदमचंद जैन ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र तैयार किए.
जल जीवन मिशन में हुए कथित हजारों करोड़ के भ्रष्टाचार मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो की एसआईटी ने मंगलवार तड़के बड़ी कार्रवाई की. सुबह अलग-अलग जगहों पर दबिश देकर 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. यह कार्रवाई एसीबी ब्यूरो में दर्ज प्रकरण संख्या 245/2024 की जांच के तहत की गई. बताया जा रहा है कि करीब डेढ़ दर्जन टीमों ने जयपुर, बाड़मेर, उदयपुर, करौली, दिल्ली और अन्य राज्यों में एक साथ कार्रवाई की.
एसआईटी ने जिन 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया उनमें दिनेश गोयल हाल मुख्य अभियंता प्रशासन, के डी गुप्ता हाल मुख्य अभियंता ग्रामीण, सुभांशु दीक्षित तत्कालीन सचिव आरडब्ल्यूएसएसएम हाल अतिरिक्त मुख्य अभियंता जयपुर क्षेत्र द्वितीय, सुशील शर्मा हाल वित्तीय सलाहकार अक्षय ऊर्जा, निरिल कुमार हाल मुख्य अभियंता चूरू, विशाल सक्सेना अधिशाषी अभियंता हाल निलंबित, अरुण श्रीवास्तव अतिरिक्त मुख्य अभियंता हाल सेवानिवृत, डी के गौड़ तत्कालीन मुख्य अभियंता व तकनीकी सदस्य हाल सेवानिवृत और महेंद्र प्रकाश सोनी तत्कालीन अधीक्षण अभियंता हाल सेवानिवृत शामिल हैं.
फर्जी प्रमाण पत्र से 960 करोड़ के टेंडर
जांच में सामने आया कि केस संख्या 145/2024 से जुड़े मामले में फर्म मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी के प्रोपराइटर महेश मित्तल और मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी के प्रोपराइटर पदमचंद जैन ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र तैयार किए.
इन फर्जी दस्तावेजों को जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत कर अलग-अलग टेंडरों में लगाया गया. इस तरह करीब 960 करोड़ रुपये के टेंडर हासिल किए गए.
टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप
जांच में यह भी सामने आया कि 50 करोड़ रुपये से ऊपर के मेजर प्रोजेक्ट्स की निविदाओं में साइट विजिट प्रमाण पत्र की बाध्यता नियमों के खिलाफ शामिल की गई. इससे बोलीदाताओं की पहचान उजागर हुई और टेंडर पूलिंग को बढ़ावा मिला. आरोप है कि अप्रत्याशित रूप से ऊंचे टेंडर प्रीमियम को अधिकारियों ने मंजूरी दी. इससे बड़े स्तर पर हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के सबूत मिले हैं.
आगे और खुलासे संभव
एसीबी की एसआईटी अब आरोपियों से पूछताछ कर रही है. जांच का दायरा और बढ़ सकता है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और नाम सामने आ सकते हैं. जल जीवन मिशन जैसे बड़े प्रोजेक्ट में इस तरह के आरोपों ने सिस्टम पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. फिलहाल एजेंसी ने साफ किया है कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ेगी और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

