झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड की राजनीति के प्रमुख स्तंभ शिबू सोरेन के निधनके बाद राज्य में बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। उनके असामयिक निधन ने झारखंड की राजनीतिक व्यवस्था में दो महत्वपूर्ण घटनाओं को जन्म दिया है। अब राज्य समन्वय समिति का पुनर्गठन और राज्यसभा की एक सीट के लिए समय-पूर्व उपचुनाव तय हो गया है।
र्व मुख्यमंत्री और झारखंड की राजनीति के प्रमुख स्तंभ शिबू सोरेन के निधनके बाद राज्य में बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। उनके असामयिक निधन ने झारखंड की राजनीतिक व्यवस्था में दो महत्वपूर्ण घटनाओं को जन्म दिया है। अब राज्य समन्वय समिति का पुनर्गठन और राज्यसभा की एक सीट के लिए समय-पूर्व उपचुनाव तय हो गया है।
25 नवंबर से पहले समन्वय समिति का पुनर्गठन
झारखंड राज्य समन्वय समिति, जिसका गठन नवंबर 2022 में शिबू सोरेन की अध्यक्षता में हुआ था, अब “नेतृत्वहीन” हो गई है। यह समिति, जिसमें राज्यसभा सदस्य सरफराज अहमद, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर, पूर्व मंत्री सत्यानंद भोक्ता, पूर्व मंत्री बंधु तिर्की, झामुमो महासचिव विनोद पांडेय और वरिष्ठ नेता फागू बेसरा जैसे प्रमुख नेता शामिल थे। इस समिति का कार्यकाल 25 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है। हालांकि, गुरुजी के निधन के बाद सरकार के लिए इसका पुनर्गठन करना अब एक तात्कालिक आवश्यकता बन गई है।
6 महीने के भीतर करना होगा राज्यसभा उपचुनाव
शिबू सोरेन के निधन से झारखंड में राज्यसभा की एक सीट खाली हो गई है। नियमानुसार, इस रिक्त सीट पर अगले छह महीने के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है। शिबू सोरेन 22 जून 2020 को राज्यसभा के लिए चुने गए थे और उनका कार्यकाल 21 जून 2026 तक था। उनके निधन के कारण अब निर्वाचन आयोग को समय से पहले ही इस सीट के लिए चुनाव कराना होगा। इस चुनाव में भाजपा के दीपक प्रकाश भी 2020 में ही निर्वाचित हुए थे, जिनका कार्यकाल भी 21 जून 2026 तक है। शिबू सोरेन के निधन ने इस सीट पर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।

