गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे देश में बड़े घूम-धाम से मनाया जा रहा है. चाहे उत्तर भारत हो या दक्षिण, हर राज्य में गणपति बप्पा के जयकारे गूंज रहे हैं. लेकिन जब बात आती है महाराष्ट्र की, तो गणेशोत्सव की भव्यता का अंदाजा वहीं जाकर लगाया जा सकता है. मुंबई का लालबाग के राजा जहां हर साल लाखों भक्तों दर्शन देते है, वहीं इस बार गुजरात के सूरत शहर ने भी देशभर का ध्यान खींच लिया है. वजह है 16 फीट ऊंची और 6 फीट चौड़ी ऐसी गणेश प्रतिमा, जो पूरी तरह टिशू पेपर से बनाई गई है.
यह अनूठी पहल ‘सरकार गणेश उत्सव मंडल’ ने की है. मंडल ने दावा किया है कि यह गुजरात की अब तक की सबसे बड़ी पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमा है. खास बात यह है कि इसे न तो प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) से गढ़ा गया है और न ही पारंपरिक मिट्टी से, बल्कि 350 किलो टिशू पेपर का इस्तेमाल कर इसे आकार दिया गया है.
एक महीने की मेहनत से बनी अद्भुत प्रतिमा
मुंबई के 15 अनुभवी कारीगरों ने लगभग एक महीने की कठिन मेहनत के बाद इस प्रतिमा को तैयार किया. मूर्ति में बारीक से बारीक सजावट और शिल्पकारी इतनी शानदार है कि पहली नजर में किसी को भी यह यकीन करना मुश्किल होगा कि यह सिर्फ टिशू पेपर से बनी है. गणपति के आभूषणों से लेकर उनकी मुद्रा तक हर पहलू को बड़ी बारीकी से गढ़ा गया है.
परंपरा के साथ पर्यावरण का संदेश
मंडल के सागर राजपूत ने बताया कि इस पहल के पीछे प्रेरणा मुंबई में माधी गणेश उत्सव से मिली. वहां POP मूर्तियों के विसर्जन पर प्रतिबंध था. इसी से उन्हें विचार आया कि क्यों न गणेश प्रतिमा को पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल बनाया जाए. उनका मानना है कि इस कदम से श्रद्धालु परंपरा को निभाते हुए प्रकृति की रक्षा भी कर सकते हैं.
गौरतलब है कि पारंपरिक POP मूर्तियों के कारण विसर्जन के वक्त नदियों और समुद्रों में प्रदूषण बढ़ता है. केमिकल रंग और प्लास्टर जीवन के लिए खतरा बनते हैं. ऐसे में टिशू पेपर की यह मूर्ति एक स्थायी और सुरक्षित विकल्प पेश करती है.
विसर्जन का अनोखा इंतजाम
इस बार इस प्रतिमा का विसर्जन पारंपरिक तरीके से समुद्र या नदी में नहीं होगा. मंडल ने इसके लिए एक विशेष झील तैयार की है. जैसे ही मूर्ति पानी में उतरेगी, टिशू पेपर आसानी से घुल जाएगा और पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा. विसर्जन के बाद बचा हुआ लुगदी प्राकृतिक खाद के रूप में खेतों में इस्तेमाल किया जाएगा. इस तरह यह पहल एक संपूर्ण पर्यावरणीय चक्र का उदाहरण बन रही है.
सूरत में इस प्रतिमा के आगमन के लिए भव्य शोभायात्रा निकाली गई. हजारों भक्त इस जुलूस में शामिल हुए. ढोल-नगाड़ों की थाप और “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारों से पूरा शहर गूंज उठा. भक्तों के चेहरों पर गणेशजी के स्वागत की खुशी और उत्साह साफ झलक रहा था. यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक था, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि आस्था और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं
विजयवाड़ा में 72 फीट ऊंची इको-फ्रेंडली डुंडी गणपति प्रतिमा
देश के अलग-अलग हिस्सों में गणेशोत्सव की धूम है. हर शहर, हर पंडाल अपनी थीम, अपनी परंपरा और अपनी भव्यता के साथ भगवान गणेश का स्वागत कर रहा है. इसी क्रम में आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में स्थापित 72 फीट की गणेश प्रतिमा भक्तों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.

प्रतिमा पूरी तरह से इको-फ्रेंडली
गणेश सेवा समिति की ओर से यह प्रतिमा बनाई गई है. खास बात यह है कि यह प्रतिमा पूरी तरह से इको-फ्रेंडली है. समिति के सदस्यों के अनुसार, इस विशाल मूर्ति के निर्माण में नारियल के रेशे, जूट, मिट्टी, भूसी और बोरे जैसे प्राकृतिक व सुरक्षित सामग्री का उपयोग किया गया है, जिससे पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों को कोई नुकसान न हो.
समिति के अनुसार, अब तक जहां कहीं भी 72 फीट ऊंची गणेश प्रतिमाएं स्थापित की गईं, वे सभी खड़ी मुद्रा में थीं. लेकिन इस बार विशेष रूप से भगवान गणपति को सिंहासन पर विराजित मुद्रा में दर्शाया गया है. इस बदलाव के चलते मूर्ति की चौड़ाई भी पिछले साल की तुलना में लगभग 30 फीट बढ़ गई है.
निर्माण में 90 दिनों तक सैकड़ों कारीगरों ने की मेहनत
इस भव्य प्रतिमा के निर्माण में लगभग 90 दिनों तक सैकड़ों कारीगरों ने दिन-रात मेहनत की. मूर्ति के दोनों ओर भगवान परमेश्वर (राजराजेश्वर स्वामी) और मां कनक परमेश्वरी की मूर्तियां भी स्थापित की गई हैं. बुधवार सुबह इस प्रतिमा की पहली पूजा विजयवाड़ा के सांसद केसिनेनी शिवनाथ और उनकी पत्नी ने की.
समिति ने बताया कि इसी मैदान में पहले एक बार पानी 5 फीट तक बढ़ गया था. उस समय भक्तों के सुरक्षित दर्शन सुनिश्चित करने के लिए एक फुट-ओवर ब्रिज की व्यवस्था की गई. राज्य के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने समिति को आश्वासन दिया कि ऐसी स्थिति दोबारा नहीं होगी, और अपने वचन के अनुसार, उन्होंने गुडीमेट्टा में एक रिटेनिंग वॉल का निर्माण किया.
हर सुबह हवन और शाम को विशेष पूजाएं आयोजित की जाएंगी. समिति का विश्वास है कि इस वर्ष कार्यसिद्धि महाशक्ति गणपति के दर्शन करने वाले सभी भक्तों की मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होंगी.
भक्तों के दर्शन में कोई नहीं होगी कमी
भक्तों के लिए दर्शन की व्यवस्था में कोई कमी न हो, इसके लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं. सुरक्षा के लिए पुलिस बल और निजी सुरक्षाकर्मी तैनात हैं. महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि सभी भक्त खुशी-खुशी भगवान डुंडी गणपति के दर्शन कर सकें.
एक स्थानीय नागरिक आर्यन ने कहा कि भगवान गणेश सभी की मनोकामनाएं पूरी करें, यही कामना है. उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि सभी अपने परिवार के साथ जरूर डुंडी गणपति आएं.
हैदराबाद ने 69 फिट प्रतिमा को किया स्थापित
वहीं इस खास पर्व को लेकर हैदराबाद भी कम उत्साह में नहीं है, उसने भी अपनी परंपरा और भव्यता के साथ भगवान गणेश का स्वागत किया. भगवान गणेश के स्वागत में हैदराबाद के खैतराबाद में 69 फिट ऊंची मूर्ति को स्थापित किया है.