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*बालाघाट जिले में 10 नक्सलियों ने किया सरेंडर, 2 करोड़‌ 36 लाख रुपए का था इनाम*

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मध्य प्रदेश के नक्सल प्रभावित जिला बालाघाट जिले में सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। इनामी नक्सली कबीर समेत कुल 10 नक्सलियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। सरेंडर करने वाले नक्सलियों में 6 पुरुष और 4 महिला नक्सली शामिल हैं। नक्सलियों पर था 2 करोड़‌ 36 लाख का इनाम था। सभी नक्सली कान्हा भूरम दलम (केबी डिवीजन) के हैं। यह मध्य प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा सरेंडर हुआ है। यह पूरा ऑपरेशन बेहद गोपनीय रखा गया था और इसमें एक फॉरेस्ट गार्ड की अहम भूमिका रही।

खबरों के अनुसार, मध्य प्रदेश के नक्सल प्रभावित जिला बालाघाट जिले में सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। इनामी नक्सली कबीर समेत कुल 10 नक्सलियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। सरेंडर करने वाले नक्सलियों में 6 पुरुष और 4 महिला नक्सली शामिल हैं। नक्सलियों पर था 2 करोड़‌ 36 लाख का इनाम था।

सभी नक्सली कान्हा भूरम दलम (केबी डिवीजन) के हैं। यह मध्य प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा सरेंडर हुआ है। यह पूरा ऑपरेशन बेहद गोपनीय रखा गया था और इसमें एक फॉरेस्ट गार्ड की अहम भूमिका रही। उसी ने नक्सलियों और पुलिस के बीच संपर्क स्थापित करवाया।

जंगल से निकलकर यह सभी नक्सली सीधे बालाघाट रेंज के आईजी के सामने सरेंडर करने पहुंचे। दरअसल, केंद्र सरकार ने नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने की डेडलाइन मार्च 2026 तय की गई थी, जिसके बाद से सुरक्षाबलों की कार्रवाई तेज हो गई. नतीजतन बालाघाट में या तो नक्सलियों का एनकाउंटर हुआ या फिर उन्होंने सरेंडर किय

केबी डिवीजन का प्रमुख कबीर छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का रहने वाला है, जो 3 राज्यों का मोस्ट वांटेड था। मुख्यमंत्री मोहन यादव की उपस्थिति में औपचारिक आत्मसमर्पण से राज्य में नक्सल विरोधी अभियान मजबूत होगा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्‍सलियों को संविधान की प्रति प्रदान कर उन्‍हें मुख्यधारा से जोड़ा। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने अपने हथियार मुख्यमंत्री को सौंपे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप सरकार मध्य प्रदेश को नक्सल मुक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि एक भी व्यक्ति को हथियार उठाने की अनुमति नहीं है। मुख्यमंत्री ने नक्सलियों से आह्वान किया कि वे सरकार की पुनर्वास नीति अपनाएं। सरकार उनके जीवन को सुरक्षित करने, विकास सुनिश्चित करने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी।

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