आरक्षण को लेकर कुकी और मैतेई समुदाय में 3 मई से हिंसा जारी है। इसमें अब तक 135 लोगों की मौत हो चुकी है।
इंफाल
मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच हिंसा शुरू हुए 2 महीने से ज्यादा बीत चुके हैं। 3 मई को शुरू हुई हिंसा में अब तक 135 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं 420 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
मणिपुर हिंसा की मुख्य वजह हाईकोर्ट का एक आदेश है। इस आदेश में मणिपुर हाईकोर्ट ने राज्य के मैतेई समुदाय को ST का दर्जा देने की सिफारिश की थी। इस आदेश के विरोध में कुकी समुदाय ने 3 मई को एक मार्च बुलाया गया था। इसी मार्च के साथ राज्य में हिंसा की शुरुआत हुई।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार से हिंसा पर अपडेटेड स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा। मामले में अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को गलत बताया था।
मणिपुर हिंसा से जुड़े 10 चुनिंदा फोटोज…
चूराचांदपुर में कुकी समुदाय का एक युवक बंदूक लेकर मैतेई समुदाय के बंकर पर नजर रख रहा है।
मैतेई समुदाय के युवक भी बंदूक और दूरबीन लेकर कुकी समुदाय के बंकरों पर नजर रख रहे हैं।
इंफाल के पास कांगचुप में मैतेई समुदाय के लोग हथियार लेकर घूमते हुए। ये एक पहाड़ी पर जा रहे हैं, जहां फायरिंग हो रही है।
मैतेई समुदाय की महिलाएं कार रोक कर चेक कर रही हैं कि इसके अंदर कुकी समुदाय का कोई शख्स तो नहीं बैठा।
मणिपुर में कई जगह ऐसे बॉक्स लगाए गए थे। लोगों से अपील की गई थी कि वे सुरक्षाकर्मियों से छुड़ाए गए हथियार बॉक्स में ड्रॉप कर दें।
फोटो कुकी समुदाय की किम नीनेंग (43) की है। वे चूराचांदपुर के एक कैंप में रह रही हैं। उनके पति की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। वे उस घटना के बारे में बताते हुए रो पड़ीं।
इंफाल के पास मैतेई समुदाय की लीलापती देवी अपने पति की क्रब पर शोक मनाने के लिए जाती हुईं। उनके पति की भीड़ ने हत्या कर दी थी।
मैतेई समुदाय के लिए बने एक रिलीफ कैंप में कपड़े सुखाती हुई महिला। हिंसा के चलते 65 हजार से ज्यादा लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है।
चूराचांदपुर के पास कार में हुए विस्फोट के बाद घटनास्थल पर जांच करते पैरामिलिट्री फोर्स के जवान।
चूराचांदपुर के पास दूरबीन से गांवों की निगरानी करते भारतीय सेना के जवान।

