इंदौर
इंदौर-बैतूल नेशनल हाईवे पर बायपास से देवगुराड़िया तक 600 मीटर हिस्से को ब्लैक स्पॉट घोषित किया गया है। हाईवे को टूलेन से फोरलेन करने के लिए यहां अभी काम चल रहा है। पहले से ही रोड संकरा था, काम के कारण और जगह कम हो गई। इसके कारण आए दिन यहां हादसे हो रहे हैं। छह माह में 128 हादसे खुड़ैल थाने में दर्ज हुए हैं। इनमें आठ जानें चली गई।
इसके बावजूद आठ माह पहले रोड सुधार के लिए मिली 3 करोड़ राशि का उपयोग नहीं हो रहा है। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों का कहना है कि फोरलेन में 29 पेड़ बाधक हैं। उन्हें काटने की अनुमति के लिए जिला प्रशासन और वन विभाग को पत्र भेज चुके हैं। पांच महीने से पहले कलेक्टर कार्यालय और अब वन विभाग के बीच फाइल घूम रही है।
एडीएम पवन जैन ने बताया कि कुछ पेड़ सागवान के हैं। उनकी अनुमति कलेक्टर कार्यालय को नहीं बल्कि वन विभाग को देना है। हमने पीडब्ल्यूडी को वन विभाग से काटे जाने वाले पेड़ों का वैल्यूएशन कराने को कहा है। हमारे अधिकार क्षेत्र के पेड़ों की अनुमति हम जल्द जारी कर देंगे।
बिजली पोल शिफ्टिंग को लेकर भी यही हाल है। हाइवे के इस हिस्से से रोजाना छोटे और बड़े करीब 10 हजार वाहन गुजरते हैं। सबसे ज्यादा दुर्घटना हाईवे से देवगुराड़िया शिव मंदिर की ओर जाने वाले जोड़ पर होते हैं। ढलान और अतिक्रमण के चलते वाहन चालक एक-दूसरे को देख नहीं पाते।
टूलेन को फोरलेन करना है
- 10 हजार वाहन रोजाना यहां से गुजरते हैं।
- 80% हादसे का शिकार दोपहिया वाहन।
- 08 हमाह पहले सुधार के लिए मिली थी राशि।
डरा रहे हादसे एक दिन में फिसले 53 बाइक सवार
पिछले 40 साल से होटल चला रहे हैं हरीश गोस्वामी कहते हैं इतने सालों में 50 से ज्यादा मौतें देख चुका हूं। इसी साल बारिश के दौरान एक दिन में हमने 53 बाइक सवारों को काली मिट्टी के चलते फिसलते देखा है। स्थानीय रहवासी माणक दांगी बताते हैं एक दो महीने महीने में ही 4-5 मौत हो चुकी है। पहले एक पैदल जा रही लड़की कुचल गई तो वैक्सीन लगाकर स्कूटी में अपनी सास के साथ आ रही बहू की मौत हो गई। स्कार्पियो एक्सीडेंट में भी जान जा चुकी है।
हादसे के 2 बड़े कारण – ढलान और अतिक्रमण
देवगुराड़िया के आसपास सड़क के दोनों तरफ अतिक्रमण के चलते, मंदिर की तरफ से हाईवे से जुड़ने वाली सड़क नजर नहीं आती। हालांकि एक तरफ के अतिक्रमण हटाने के बाद दुर्घटनाओं में थोड़ी कमी आई है। मंदिर को हाईवे से जोड़ने वाली सड़क तीखी ढलान पर है। अंधा मोड़ होने से अक्सर जंक्शन के आसपास बहुत हादसे होते हैं। बरसात में महज दो लाइन के इस टुकड़े के दोनों तरफ, काली मिट्टी और जानलेवा हो जाती है।

