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14 आईपीएस अफसरों का तबादला, भोपाल के नए कमिश्नर संजय कुमार, राकेश गुप्ता होंगे उज्जैन के आईजी

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भोपाल के नए कमिश्नर बने ये धाकड़ अफसर, जवानों की बाइक पर किया था नक्सली इलाकों का दौरा

भोपाल. मध्य प्रदेश में 14 आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया गया है. हरिनारायण चारी की जगह संजय कुमार को भोपाल का पुलिस कमिश्नर बनाया गया है. हरिनारायण चारी अब स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB) के मुखिया होंगे. संजय तिवारी भोपाल जोन के आईजी बने. चैत्रा एन शहडोल जोन की आईजी बनीं. ललित शाक्यवार को बालाघाट जोन का आईजी बनाया गया है. वहीं पंकज श्रीवास्तव को सीआईडी का आईजी बनाया गया है.

उज्जैन के आईजी उमेश जोगा को ग्वालियर का परिवहन आयुक्त बनाए गया है. वहीं राकेश गुप्ता को उज्जैन का आईजी बनाया गया है. वह दूसरी बार आईजी के पद पर अपनी सेवा देंगे. वहीं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अंशुमन यादव संचालक खेल एवं युवक कल्याण बनाए गए. परिवहन आयुक्त रहे विवेक शर्मा पीटीआरआई के आईजी बनाए गए. डी श्रीनिवास वर्मा को नारकोटिक्स आईजी का प्रभार सौंपा गया है.

भोपाल जोन के आईजी थे आईपीएस अभय सिंह
आईपीएस अभय सिंह अभी तक भोपाल जोन के आईजी थे, अब उन्हें पुलिस महानिरीक्षक (योजना) पुलिस मुख्यालय भोपाल नियुक्त किया गया है. नारकोटिक्स के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक केपी वेंकटेश्वर राव को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, तकनीकी सेवाएं, पुलिस मुख्यालय भोपाल और एंटी नक्सल ऑपरेशन पुलिस मुख्यालय भोपाल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से कार्यमुक्त अनंत कुमार सिंह को विशेष पुलिस महानिदेशक/प्रबंध संचालक मध्य प्रदेश पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन बनाया गया है.

हाल ही में हुआ था 26 IAS अफसरों का तबादला
बताते चलें कि 18 जनवरी को मध्य प्रदेश सरकार ने 26 IAS अफसरों का तबादला किया था. पर्यटन विभाग की जिम्मेदारी टी ईलैयाराजा को सौंपी गई. एस धनराजू को स्वास्थ्य आयुक्त और तरुण राठी को ट्राइबल कमिश्नर बनाया गया. वहीं शिवशेखर शुक्ला को गृह एवं संस्कृति विभाग भेजा गया. नेहा मारव्या सिंह को जनजातीय कार्य विभाग का अपर सचिव बनाया गया. गौतम सिंह को मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल का आयुक्त बनाया गया. वीरेंद्र कुमार को अपर आयुक्त (राजस्व), ग्वालियर संभाग ग्वालियर, राजेश कुमार ओगरे को अपर सचिव, वाणिज्यिक कर विभाग और मनीषा सेंतिया को अपर सचिव, गृह विभाग बनाया गया.

भोपाल के नए कमिश्नर बने ये धाकड़ अफसर, जवानों की बाइक पर किया था नक्सली इलाकों का दौरा

तीन दशक के बाद माओवाद के खौफ के बाद अब बालाघाट नक्सल मुक्त हो चुका है. एक समय ऐसा था कि नक्सलियों का इतना बोल बाला था कि नक्सल प्रभावित इलाकों से गुजरना भी मौत के रास्ते पर चलने जैसा था. इतना मजबूत हो चुका माओवाद आखिर के सालों में अस्तित्व की लड़ाई लड़ने पर मजबूर हुआ, लेकिन ये सब खत्म हो चुका है. इसके पीछे का श्रेय सुरक्षाबलों और उनके अधिकारियों को जाता है. एक ऐसे ही अधिकारी संजय कुमार बालाघाट रहे और उन्होंने नक्सलवाद के चरम और ढलते नक्सलवाद को देखा है. जब नक्सलवाद खत्म हुआ तो सीएम भी तारीफ करने से नही चूके और कहने लगे कि ये ऐसे अफसर हैं, जो जवानों की बाइक से जंगलों की पगडंडी पर गए. अब वह भोपाल कमिश्नर के रूप में अपनी पारी की शुरुआत करेंगे. 29 जनवरी को उनका ट्रांसफर भोपाल हो गया है. ऐसे में लोकल 18 ने बातचीत की, जानिए उन्होंने क्या कुछ बताया.

साल 2006 में पहली बार बालाघाट सीएसपी बनकर आए थे संजय कुमार
आईपीएस संजय कुमार बालाघाट में तीन बार पद पर रहे. साल 2006 में वह बालाघाट सीएसपी बनकर आए. इसके बाद वह साल 2010 में पुलिस अधीक्षक बनकर आए फिर साल 2022 में बालाघाट रेंज के आईजी बनकर आए और नक्सलवाद के खत्म होने तक यहां सेवाएं दी. उन्होंने बताया कि बालाघाट मध्य प्रदेश का सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित रहा. यहां पर वेल ट्रेन्ड फोर्सेस रही, जिन्होंने लगातार अच्छे ऑपरेशन किए. मुख्यमंत्री मोहन यादव हर महीने रिव्यू मीटिंग लेते रहे. स्थानीय लोगों से अच्छे संबंध बनाए गए. यहां पर हॉक फोर्स में कई अधिकारियों अतिरिक्त भर्तियां करवाई गईं. इसके अलावा नक्सल मामलों के लिए स्पेशल डीजी की भी पोस्टिंग की गई. लगातार तय डेडलाइन के लिए मीटिंग हुई. इन्हीं नीतियों ने नक्सलवाद को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई.

नक्सल का चरम और अंत दोनों देखा
आईजी संजय कुमार साल 2010 में बालाघाट एसपी बनकर आए थे फिर आईजी बनकर नक्सल विरोधी अभियानों में शामिल रहे. वह दोनों वक्त बालाघाट में मौजूद रहे, जब नक्सलवाद अपने चरम पर था और अब खत्म हो चुका है. इस पर वे कहते हैं कि दोनों में बेहद अंतर है. तब एक अलग पुलिसिंग थी एक अलग रणनीति, तैयारियां और सावधानी रखनी पड़ती थी. अब उसी जंगल में जाते वक्त उतना ध्यान नहीं रखना होता है. लेकिन फिर भी दूसरे राज्यों में नक्सलवाद को देखते हुए जरूरी सावधानियां बरती जा रही हैं.

आखिरी के 10 सालों में हुए खूब एनकाउंटर
आईजी संजय कुमार साल 2006 में सीएसपी बनकर आए तब भी वह एंटी नक्सल ऑपरेशन में जाया करते थे. बतौर एसपी एंटी नक्सल अभियान में भी काफी शामिल रहे. लेकिन जब आईजी की भूमिका में था, तब एक टारगेटेड अप्रोच थी. तब पूरी फोर्स और लोगों के साथ मिलकर नक्सल विरोधी अभियान में बड़े -बड़े ऑपरेशन चलाए गए. आखिर के सालों में 10 से ज्यादा एनकाउंटर हुए, जिसका श्रेय भी वह सुरक्षा बलों को देते हैं.

आशीष शर्मा की शहादत से हुई निराशा
1 नवंबर को मलाजखंड दलम की सुनिता ओयाम के सरेंडर को टर्निंग प्वाइंट मानते हैं. वह कहते हैं कि सुनीता ने सटीक जानकारियां बताई, जिससे एंटी नक्सल ऑपरेशन में काफी मदद मिली, लेकिन 19 नवंबर को आशीष शर्मा की शहादत से निराशा हुई. इसके बाद जिस दलम ने ये काम किया था वह भी डरा हुआ था. नतीजतन उन नक्सलियों ने महाराष्ट्र के गोंदिया जाकर सरेंडर किया.

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