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 *17 जून की ताजा खबर: फिर पटरी पर लौटा मानसून: केरल से कश्मीर तक झमाझम बरसात, भारी बारिश की चेतावनी;’जी-8 से रूस को बाहर करना गलती,इसके लिए ओबामा-ट्रूडो जिम्मेदार’; ट्रंप, ईरानी टीवी स्टूडियो पर भीषण इजरायली बमबारी, भारतीयों को निकालने का काम शुरू, पाकिस्तान की जबरदस्त किरकिरी…* 

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आज के बड़े इवेंट

 इजरायल का ईरानी टीवी स्टूडियो पर हमला, भागी एंकर

तेहरान में इजरायली हमले से सरकारी टेलीविजन स्टेशन में सीधा प्रसारण बाधित हो गया। लाइव टेलीकास्ट के दौरान धमाके की आवाज सुनाई दी, जिसके बाद स्टूडियो में धूल भर गई। हमले से पहले इजरायल ने इलाके को खाली करने की चेतावनी दी थी।

 इजरायल ने लाइव टेलीकॉस्ट के दौरान ईरान के तेहरान में स्थित सरकारी टेलीविजन स्टेशन को उड़ा दिया है। इस कारण चैनल को अपना लाइव टेलीकॉस्ट बंद करना पड़ा। सोशल मीडिया पर इस घटना का एक वीडियो भी शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो में लाइव टेलीकॉस्ट के दौरान एक धमाके की आवाज को सुना जा सकता है। इस कारण चैनल से स्टूडियो में धूल और धुआं भर गया, जिससे टीवी एंकर समेत बाकी क्रू को तुरंत कैमरा छोड़कर बाहर निकलना पड़ा। हालांकि, इस दौरान वहां मौजूद लोग अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाते सुने जा सकते हैं।

इजरायल ने दी थी स्टूडियो खाली करने की चेतावनी

इजरायल ने अपने हमले के पहले ही ईरान की राजधानी तेहरान के उस क्षेत्र को खाली करने की चेतावनी दी थी। यह टीवी स्टूडियो भी उसी इलाके में स्थित है। सोमवार सुबर ईरान ने इजरायल के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन से हमला किया था, जिससे काफी नुकसान पहुंचा। ईरानी हमलों के कारण पूरे इजरायल में हवाई हमलों के सायरन सुनाई दिए। आपातकालीन सेवाओं ने ईरानी हमलों में कम से कम आठ इजरायली नागरिकों के मारे जाने और दर्जनों के घायल होने की सूचना दी है।

इजरायल की सेना ने ईरान की राजधानी के कुछ हिस्सों में रहने वाले लोगों को इजराइली हमलों से पहले वहां से निकल जाने की चेतावनी दी है। ईरान ने सोमवार तड़के इजरायइल पर मिसाइलों से हमला किया, जिसमें कम से कम पांच लोग मारे गए, जबकि इजरायल ने दावा किया कि उसने तेहरान पर हवाई श्रेष्ठता हासिल कर ली है और वह बिना किसी बड़े खतरे का सामना किए ईरानी राजधानी के ऊपर से उड़ान भर सकता है।

इजरायल ने 120 ईरानी मिसाइलों को नष्ट किया

संघर्ष के चौथे दिन, इजरायली सेना ने कहा कि उसने मध्य ईरान में 120 से अधिक सतह से सतह पर मार करने वाले मिसाइल लांचरों को नष्ट कर दिया है, जो ईरान के कुल मिसाइल लांचर का एक तिहाई है। इसने यह भी कहा कि लड़ाकू विमानों ने तेहरान में ईरान के कुद्स फोर्स से संबंधित 10 कमांड केंद्रों पर हमला किया था। कुद्स फोर्स, ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड की एक विशिष्ट शाखा है, जो ईरान के बाहर सैन्य और खुफिया अभियान चलाती है।

ईरान-इजरायल की जंग में ‘चौधरी’ बन रहा था पाकिस्तान

ईरान से संभावित युद्ध के बीच, पाकिस्तान ने इजरायल पर परमाणु हमले की धमकी देने की खबरों का खंडन किया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक ईरानी जनरल के बयान के बाद पाकिस्तान को दो-दो बार स्पष्टीकरण देना पड़ गया।

ईरान-इजरायल के जंग के बीच पाकिस्तान बेवजह चौधरी बन रहा था। लगातार उसकी ओर से ईरान के समर्थन में बयान दिए जा रहे थे। इसी बीच कुछ ऐसा हुआ कि पाकिस्तान पूरी तरह से बैकफुट पर आ गया। इजरायल के साथ जंग के बीच ईरान की ओर से दावा किया गया कि हमला हुआ तो पाकिस्तान नेतन्याहू के देश पर परमाणु हमला कर सकता है। हालांकि ईरान के इस दावे के थोड़ी देर बाद ही पाकिस्तान की हेकड़ी निकल गई। भारत के ईरान और इजरायल दोनों के साथ बेहतर संबंध हैं और पाकिस्तान इस बात को बेहतर समझता है। पाकिस्तान अपनी नापाक चाल से बाज नहीं आ सकता। इस युद्ध में भी वह भारत के खिलाफ मौका तलाश रहा है। हालांकि अब कुछ ऐसा हुआ है जिससे उसने बैठे बिठाए इजरायल को अपना दुश्मन बना लिया है।

पाकिस्तान की क्यों हुई फजीहत, जान लेते हैं

असल में,ईरान से जंग के बीच पाकिस्तान ने इजरायल पर एटम बम से हमला करने की धमकी देने की खबरों को खारिज किया है। पाकिस्तान ने कहा है कि उसने कभी भी इजरायल पर परमाणु बम हमले की धमकी नहीं दी। पाकिस्तान की यह सफाई सोशल मीडिया पर वायरल ईरान के सैन्य अफसर जनरल मोहसेन रेजाई के उस बयान पर आई जिसमें कहा गया है कि अगर इजरायल ने ईरान पर एटम बम चलाया तो पाकिस्तान इजरायल पर परमाणु हमला कर देगा। परमाणु बम को लेकर पाकिस्तान भारत के बाद अब इजरायल से डर गया है।

असल में, पाकिस्तान ने परमाणु परीक्षण के समय अपने न्यूक्लियर बम को इस्लामिक परमाणु कहा था। ऐसा बोलकर पाकिस्तान इस्लामिक देशों में अपनी धाक जमाने की कोशिश की थी। लेकिन इजरायल ने पाकिस्तान के एटमी बम की हवा निकाल दी है। भारत के बाद इजरायल दूसरा देश है जिसने पाकिस्तान के एटमी बम की हवा निकाल दी है। अब सवाल है कि आखिर इजरायल ने ऐसा क्या किया जिससे डरकर पाकिस्तान को यह कहना पड़ा है कि यह बम सिर्फ हमारा है।

इजरायल भले ही ईरान पर हवाई हमले कर रहा हो, लेकिन पाकिस्तान की सेना तनाव में आ गई है। सवाल है आखिर पाकिस्तान को क्यों लगता है कि ईरान के बाद अगला नंबर उसका है? दरअसल में, इजरायल ने जिस तरह से ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया है, उससे पाकिस्तान को अपने एटम बम का खौफ सताने लगा है। पाकिस्तान की संसद में कहा गया कि भारत ने पाकिस्तान के ऊपर हमला किया और उसमें ज्यादातर इजरायल के ड्रोन इस्तेमाल हुए। एक पाकिस्तानी सांसद ने डर जताते हुए कहा कि खुदा न खास्ता, उसका (इजरायल का) दूसरा इशारा पाकिस्तान हो सकता है। इजरायल ने जिस तरह से ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों को निशाना बनाया है, उसके बाद पाकिस्तान को अपने एटम को खोने का खौफ सताने लगा है। पाकिस्तान की संसद में एक संसद सदस्य ने कहा कि पाकिस्तानी कौम की और पाकिस्तानी हूकमत की ये जिम्मेदारी बनती है कि वो अपनी सुरक्षा जी जान से करे, जितना हो सकता है अपना किरदार जरूर अदा करें। हम अपने ईरानी भाइयों के साथ हैं।

ऑपरेशन सिंदूर का डर पाकिस्तान को अब तक सता रहा

ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल किए गए इजरायली ड्रोन का डर अब तक पाकिस्तान के सिर से नहीं उतरा है। पाकिस्तान में बैठकर बिना सबूतों के कुछ लोग कह रहे हैं कि इजरायल को धूल चटाने में पाकिस्तान की बड़ी भूमिका थी। जियो टीवी के पत्रकार हामिद मीर ने कुछ दिन पहले कहा था कि पाकिस्तान के पलटवार में आदमपुर एयरबेस पर हमले में कुछ इजरायली नागरिक भी घायल हुए थे।

नेतन्याहू की वो सौगंध जिससे डर गया पाकिस्तान

यही सब बातें हैं जिससे पाकिस्तान को इजरायल की तरफ से खुद को निशाना बनाए जाने का डर सता रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह इजरायल के इजरायल के पीएम वेंजामिन नेतन्याहू की वो सौगंध है जिसे उन्होंने कुछ वर्ष पहले ली थी जिसमें उन्होंने कहा था कि वो ईरान और पाकिस्तान के परमाणु बमों को तबाह करके रहेंगे। नेतन्याहू ने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘हमारा सबसे बड़ा मिशन उग्रवादी इस्लामी शासन को परमाणु हथियार पाने से रोकना है। परमाणु हथियार इन आतंकी शासन के हाथों में नहीं जाना चाहिए। चाहे वो ईरान हो या फिर पाकिस्तान। इन कट्टरपंथियों के पास परमाणु हथियार होंगे तो डर है कि वो इनसे जुड़े नियमों का पालन नहीं करेंगे।’

पाकिस्तान और इजरायल की दुश्मनी उजागर

वेंजामिन नेतन्याहू की ये बात भले ही पुरानी हो, लेकिन यह पाकिस्तान और इजरायल के बीच दुश्मनी को ही यह बताती है। अब सवाल है कि ईरान के परमाणु ठिकाने तबाह होने के बाद क्या दुनिया पाकिस्तान के परमाणु ठिकाने तबाह होते भी देख सकती है? इजरायल और ईरान के बीच लड़ाई में पाकिस्तान का नाम आने की एक वजह है, ईरान पाकिस्तान के परमाणु बम से इजरायल को मिटाने की धमकी दे रहा है। एक वीडियो में ईरान के सैन्य अफसर जनरल मोहसेन रेजाई को यह कहते हुए देखा जा सकता है जिसमें वो कह रहे हैं कि अगर इजरायल ने ईरान पर एटम बम चलाया तो पाकिस्तान इजरायल पर परमाणु हमला कर देगा।

गौरतलब है कि पाकिस्तान अपने एटम बम को इस्लामिक बताता आया है। उसकी मदद करने वालों में सऊदी अरब जैसे इस्लामिक देश भी रहे हैं जिन्होंने अमेरिकी पाबंदियों से उसे बचाया, पैसे दिए, तेल भी दिए। लेकिन क्या पाकिस्तान का एटम बम शिया बहुल ईरान को बचाने के लिए इस्तेमाल होगा? ये बड़ा सवाल है।

इजरायल को देश नहीं मानता पाकिस्तान

मामला इजरायल से जुड़ा है जिसे पाकिस्तान एक देश के तौर पर स्वीकार नहीं करता। पाकिस्तान की अफसरशाही से लेकर हरेक नेता तक इजरायल के अस्तित्व को नकारते रहे हैं। बहरहाल, ईरान के वायरल हालिया बयान से सवाल उठा कि क्या पाकिस्तान इजरायल पर एटम गिराएगा। क्या इस्लाम के नाम पर ईरान-इजरायल की जंग पाकिस्तान कूदेगा?

लेकिन डरके मारे इस पर पाकिस्तान ने बकायदा बयान जारी कर सफाई दी कि पाकिस्तान ने इजरायल को एटम बम की धमकी नहीं दी। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तानी संसद में बयान देकर ईरान के दावे को खारिज कर दिया। उन्होंने संसद में कहा कि 14 जून को जारी बयान में ईरान का समर्थन किया गया, लेकिन इजरायल को एटम बम की धमकी का कोई जिक्र नहीं था। हालांकि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ख्वाजा आसिफ ने भारत को एटम बम की गीदड़भभकी दी थी, तब गाजा का जिक्र किया था। पाकिस्तान का यह बयान खतरे का निशान है। ऐसे में नेतन्याहू का यह बयान पाकिस्तान के लिए चेतावनी है कि पाकिस्तान-ईरान परमाणु बम की धमकी देना बंद करें।

पाकिस्तान ने डरकर दूसरी बार दी सफाई

पाकिस्तान कितना डरा हुआ है, यह पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार के बयान से समझा जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘हमारा बम सिर्फ हमारे लिए है। ईरान का एटम बम को लेकर दावा पूरी तरह से गलत है। पाकिस्तान का एटम बम पूरी तरह से उसका है।’ इशाक डार ने संसद में कहा कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल कि ईरान के एक जनरल पाकिस्तान से परमाणु मदद मिलने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने इसे झूठी और गैरजिम्मेदाराना खबर करार दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का एटम बम हमारी अपनी सुरक्षा के लिए है। पाकिस्तान सरकार की तरफ से ऐसा कोई बयान नहीं दिया गया है। उन्होंने ईरान के जनरल के बयान को AI द्वारा बनाया गया बताया।

अमेरिका पहुंच बुरे फंसे असीम मुनीर, ईरान-इजरायल युद्ध ने उलझाया

पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर अमेरिका में हैं, ताकि दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारा जा सके, खासकर मई में भारत के साथ तनाव बढ़ने के बाद। हालांकि, ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच पाकिस्तान के ईरान के समर्थन ने अमेरिका के साथ मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर मई में भारत के साथ सैन्य तनाव बढ़ने के बाद तथाकथित रणनीतिक यात्रा पर अमेरिका में हैं। इससे पहले, रिपोर्टों में बताया गया था कि मुनीर को शनिवार को वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी सैन्य परेड में आमंत्रित किया गया था। हालांकि, बाद में व्हाइट हाउस ने इन रिपोर्टों का खंडन करते हुए कहा कि समारोह में किसी भी विदेशी सैन्य नेता को आमंत्रित नहीं किया गया था। हालांकि, पाकिस्तान ने पहले इसे अपनी कूटनीतिक जीत और अमेरिका में धाक के तौर पर जमकर प्रचारित किया था।

अमेरिका को रिझाने की कोशिश में मुनीर

नए-नए फील्ड मार्शल बने असीम मुनीर अमेरिका के साथ संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी कोशिश अमेरिका को पाकिस्तान के ज्यादा करीब करने की है, ताकि पहले वाली रियायतों को फिर से हासिल किया जा सके। अमेरिकी सैन्य और राजनीतिक अधिकारियों के हालिया बयानों ने भी पाकिस्तान को बढ़ावा दिया है। कुछ दिनों पहले ही अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख माइकल कुरिला ने यूएस हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमिटी की बैठक से पहले एक टेस्टमोनी में पाकिस्तान के साथ संबंधों को अहम बताया था।

मुनीर ऐसे वक्त अमेरिका पहुंचे हैं, जब ईरान और इजरायल संघर्ष में व्यस्त हैं। शुक्रवार को इजरायल ने ईरानी परमाणु सुविधाओं पर हमला किया था। इसके बाद पाकिस्तान ने ईरान का समर्थन करने का ऐलान किया और इजरायल की जमकर आलोचना की। पाकिस्तान के नेता मुस्लिम देशों से एकजुट होने और ईरान के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई की निंदा कर रहे हैं। इस बीच एक शीर्ष ईरानी जनरल के हवाले से कहा गया कि पाकिस्तान ने कसम खाई है कि अगर यरुशलम तेहरान के खिलाफ इसी तरह का रास्ता अपनाता है तो वह इजरायल पर परमाणु बम गिराएगा।

मुनीर के लिए सबसे बड़ी परेशानी यही है। अगर पाकिस्तान इजरायल के खिलाफ खुलकर ईरान की मदद करता है और सैन्य समर्थन मुहैया कराता है तो इससे अमेरिका नाराज हो सकता है। अमेरिका ने भले ही ईरान पर इजरायली हमलों की मंजूरी देने से इनकार किया है, लेकिन वह इस संघर्ष में पूरी तरह से तेल अवीव का सबसे करीबी सहयोगी बना हुआ है। रविवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि संघर्ष में अमेरिका इजरायल के साथ खड़ा है। उन्होंने पहले तेहरान को धमकी दी थी कि अगर अमेरिका पर किसी भी तरह से हमला किया गया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

अमेरिका में कैसे घिरा पाकिस्तान

अमेरिका स्थित दक्षिण एशिया के विश्लेषक माइकल कुगेलमैन ने डॉन को बताया कि मध्य पूर्व में संकट पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल के साथ अमेरिकी जुड़ाव को सीमित कर सकता है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान अमेरिकी समर्थन हासिल करना चाहता है, लेकिन उसने इजरायली हमलों की निंदा की है और तेहरान के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए काम कर रहा है। जनरल मुनीर का इजरायल के सबसे करीबी सहयोगी और ईरान के मुख्य विरोधी की राजधानी में ऐसे तनावपूर्ण समय में होना कुछ असहज बातचीत का कारण बन सकता है।” कुगेलमैन ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा अमेरिका के साथ अपने सुरक्षा संबंधों को फिर से शुरू करने के व्यापक प्रयास “कठिन” बना रहेगा।

इजरायली हमलों के दहशत से ईरान से भाग रहे लोग, बॉर्डर इलाकों में जाम

इजरायल के भीषण हमलों के बीच ईरान की राजधानी तेहरान से भारी संख्या में लोगों का पलायन शुरू हो चुका है। राजधानी तेहरान में विस्फोटों की आवाजें रातभर गूंजती रही हैं। सआदत आबाद जैसे अमीर इलाकों तक हमलों की जद में आने के बाद अब शहरवासियों का पलायन शुरू हो गया है। सआदत आबाद के एक निवासी ने CNN की रिपोर्ट में कहा है कि “विस्फोट इतने जोरदार थे कि पूरा अपार्टमेंट कांप उठा। पड़ोसी इमारत में आग लग गई। 

इजरायल के भीषण हमलों के बीच ईरान की राजधानी तेहरान से भारी संख्या में लोगों का पलायन शुरू हो चुका है। राजधानी तेहरान में विस्फोटों की आवाजें रातभर गूंजती रही हैं। सआदत आबाद जैसे अमीर इलाकों तक हमलों की जद में आने के बाद अब शहरवासियों का पलायन शुरू हो गया है। सआदत आबाद के एक निवासी ने CNN की रिपोर्ट में कहा है कि “विस्फोट इतने जोरदार थे कि पूरा अपार्टमेंट कांप उठा। पड़ोसी इमारत में आग लग गई। लोग घबराकर नीचे भागने लगे। छोटे बच्चों को संभालना मुश्किल हो गया।” इजराइल की तरह ईरान की राजधानी तेहरान में आधुनिक बम आश्रय नहीं हैं, इसलिए शहर को सुरंगों, तहखानों या पुराने आश्रयों में लोग जान बचाने के लिए छिपने पर मजबूर हैं। इनका इस्तेमाल आखिरी बार 1980 के दशक के ईरान-इराक युद्ध में किया गया था।

तेहरान के नगर परिषद के चेयरमैन मेहदी चमरान ने रविवार को संवाददाताओं से कहा कि “तेहरान में कोई आश्रय स्थल नहीं है, रात में लोग तहखानों में चले गए थे।” उन्होंने आगे कहा कि मेट्रो का इस्तेमाल “अत्यधिक संकट में” आश्रय स्थल के रूप में किया जा सकता है, लेकिन “हमें इस सिस्टम को बंद करना होगा।” ईरान सरकार की तरफ से जारी बयान में तेहरान में मेट्रो रविवार रात से लोगों को आश्रय देने के लिए 24 घंटे खुली रहने की घोषणा की गई है। सरकार ने कहा है कि स्कूल और मस्जिदें भी खुली रहेंगी। सआदत आबाद के लोगों का कहना है कि बुजुर्ग लोग मौजूदा स्थिति की तुलना इराक-ईरान युद्ध से कर रहे हैं जब इराक ने सद्दाम हुसैन के शासनकाल के दौरान ईरान पर हमला किया था

सीएनएन से बात करते हुए कई लोगों का कहना है कि वो देश की इस्लामिक सरकार और उसकी नीतियों का समर्थन नहीं करते हैं, लेकिन इजरायल लोगों की आबादी को निशाना बना रहा है, जो सरासर गलत है। लोगों का कहना है कि इजरायल अच्छी तरह से जानता है कि परमाणु ठिकाने कहां हैं, फिर भी वो शहरी आबादी इलाकों में बमबारी कर रहा है। सीएनएन की रिपोर्ट में कहा गया है कि तेहरान के हालात अब तेजी से बिगड़ रहे हैं। लोग भारी संख्या में शहर छोड़कर उत्तर की ओर कास्पियन सागर के किनारे ग्रामीण इलाकों की ओर जा रहे हैं, लेकिन नेशनल हाईवे पर लंबा ट्रैफिक जाम है। कई परिवार बच्चों और बुजुर्गों को लेकर सूटकेस और पानी की बोतलें बांधकर गाड़ियों में निकल पड़े हैं। दूसरी तरफ ईरानी एक्सपर्ट्स ने कहा है कि ईरान में आवासीय क्षेत्रों पर हमला करके, इजराइल ने “रूबिकॉन को पार कर लिया है” यानि उस बिंदु को पार कर लिया है, जहां से वापस लौटना संभव नहीं है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि तेहरान उसी तरह के हमलों का जवाब दे रहा है।

राजधानी तेहरान में फिलहाल दुकानें बंद हैं, बाजार सूने हैं और ऑफिस आने से लोग कतरा रहे हैं। कुछ इलाकों में एटीएम से सीमित रुपये ही निकाले जा सकते हैं। जबकि पेट्रोल स्टेशनों पर लंबी कतारें लगी हैं। प्रति वाहन 25 लीटर पेट्रोल भरवाने की सीमा तय कर दी गई है। तेहरान से एक परिवार ने CNN को बताया है कि “हम नहीं चाहते कि हम अपना घर छोड़ें, लेकिन बच्चों को खतरे में नहीं डाल सकते। सरकार ने कई सैन्य अधिकारियों को ऊपरी-मध्यम वर्गीय रिहायशी इलाकों में रखा है, जिससे आम नागरिक खतरे में आ गए हैं।” इसी तरह, दक्षिणी शहर शीराज में भी पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें और खाद्य सामग्री की जमाखोरी देखी जा रही है। शहर के चारों ओर सूटकेस और पानी से लदे परिवारों से भरी गाड़ियां देखी जा रही हैं, जिनमें से कई परिवार ग्रामीण इलाकों की ओर जा रहे हैं।

एक साथ 28 टैंकर एयरक्राफ्ट! अमेरिका ने क्या किया कि मचा हड़कंप, ईरान के छूटे पसीने, इजरायल खुश

ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच रविवार शाम को दो दर्जन से अधिक अमेरिकी वायुसेना के एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर एयरक्राफ्ट फ्लाइट-ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर पर दिखाई दिए। इनमें केसी-135आर और केसी-46ए टैंकर शामिल थे। ये सभी टैंकर हवा में लड़ाकू विमानों में ईंधन भरने के काम आते हैं। फ्लाइट-ट्रैकिंग के दौरान 28 की संख्या में ये अमेरिकी एरियल रिफ्यूलर अटलांटिक के ऊपर पूर्व की ओर बढ़ रहे थे। यह स्पष्ट नहीं है कि वे अपने साथ लड़ाकू विमानों को लेकर जा रहे थे या नहीं। दरअसल, मिशन के दौरान लड़ाकू विमान अपने ट्रांसपोंडर ऑफ कर लेते हैं। ऐसे में सामान्य फ्लाइट ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर से इन्हें नहीं देखा जा सकता है।

एक साथ 28 एरियल रिफ्यूलर टैंकर हवा में

एक साथ 28 मिलिट्री एरियल रिफ्यूलर टैंकरों की आवाजाही असामान्य मानी जा रही है। खासकर मध्य-पूर्व संकट के बीच इनकी सामूहिक उड़ान ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इतने बड़े पैमाने पर एरियल रिफ्यूलरों की तैनाती के सटीक कारण किसी को पता नहीं है। हालांकि आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका इजरायल और ईरान के बीच मौजूदा संघर्ष में बदलाव या संभावित बदलाव की तैयारी कर रहा है।

सभी टैंकरों के फ्लाइट ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर पर दिखाई देने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है। यूजर्स पूछ रहे हैं कि अमेरिका को आखिर ऐसा क्या काम आ गया कि उसने एक साथ 28 एरियल रिफ्यूलर एयरक्राफ्ट को हवा में उड़ा दिया। बड़ी बात यह है कि ये सभी रिफ्यूलर एक साथ पूर्व की ओर बढ़ते दिख रहे हैं, जिस तरफ यूरोप, मध्य पूर्व और एशिया है। कुछ लोगों का कहना है कि नॉर्वे में एक बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास शुरू होने वाला है, लेकिन इसके लिए हवा में ईंधन भरने वाले इतने ज्यादा विमानों को तैनात करने की कोई आवश्यकता नहीं है। ऐसा कोई अन्य स्पष्ट अभ्यास या प्रतिबद्धता नहीं है जिसके लिए इस तरह के ऑपरेशन की आवश्यकता होगी। दूसरी ओर, कहा जा रहा है कि ये वही विमान है, जिनकी आवश्यकता होगी यदि अमेरिका इज़रायल के ऑपरेशन राइजिंग लायन के लिए अपना समर्थन बदलने जा रहा है

क्या इजरायल को हवाई मदद देने जा रहा अमेरिका

इजरायल के पास मजबूत हवाई ईंधन भरने की क्षमता नहीं है, उसके पास सैकड़ों लड़ाकू विमानों का समर्थन करने के लिए केवल कुछ पुराने 707 टैंकर (लगभग सात चालू) उपलब्ध हैं। ईरान में लंबी दूरी के हमलों के लिए सॉर्टी जनरेशन की बात करें तो यह एक बहुत बड़ा सीमित कारक है। यह इस बात को भी गंभीर रूप से सीमित करता है कि विमान अपने निर्धारित लक्ष्य क्षेत्र में एक बार कितनी देर तक स्टेशन पर रह सकते हैं और वे ईरानी क्षेत्र में कितनी गहराई तक प्रवेश कर सकते हैं।

कहीं ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका तो नहीं होगा शामिल

इसका मतलब यह होगा कि अमेरिका सीधे हवाई युद्ध में उतरेगा या उस विकल्प को क्रियान्वित करने में अधिक सक्षम होने की तैयारी कर रहा है। इन टैंकरों की आवश्यकता ऐसे अभियानों के लिए होगी, साथ ही इजरायली विमानों में ईंधन भरने के लिए भी। यह, निश्चित रूप से, अमेरिकी नीति में एक बड़ा बदलाव होगा, और इसका पूरे क्षेत्र में व्यापक प्रभाव हो सकता है, खासकर इस संभावना के संदर्भ में कि ईरान अमेरिकी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना शुरू कर देगा। यह परिदृश्य उल्टा भी हो सकता है यदि ईरान क्षेत्र में अमेरिकी हितों को लक्षित करता है, और फिर अमेरिका सीधे संघर्ष में प्रवेश करता है। ऐसी आकस्मिकता के लिए टैंकरों को पहले से तैनात रखना बहुत मददगार होगा।

आज और कल इन राज्यों में अलर्ट

मानसून ने अपेक्षित गति पकड़ ली है और अगले दस दिनों में पश्चिमी तट, मध्य और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना है, जिससे तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आएगी। मध्य भारत में अगले 4-5 दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में 2-4 डिग्री सेल्सियस गिरावट आने की संभावना है।

कुछ दिन के ठहराव के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून पटरी पर लौट आया है। सोमवार को मानसून दक्षिण पश्चिम मध्य प्रदेश तक पहुंच गया। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और गुजरात व मध्य प्रदेश के कुछ और हिस्सों तक मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। पश्चिमी हिमालयी राज्यों में मानसून पूर्व और गुजरात से लेकर अरुणाचल प्रदेश और मुंबई से लेकर केरल तक झमाझम मानसूनी बारिश हो रही है। मुंबई के कई इलाकों में जलभराव हो गया है और रेल व हवाई सेवा भी प्रभावित हुई है। अगले दो दिन भारी से बहुत भारी बारिश को लेकर गुजरात के लिए रेड अलर्ट, उत्तर प्रदेश समेत 18 राज्यों के लिए ऑरेंज और जम्मू-कश्मीर समेत 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा कि मानसून के सक्रिय होने से इस हफ्ते पूरे मध्य भारत तक बारिश होने की संभावना है। इससे तपती गर्मी से राहत मिलेगी। आईएमडी के एक अधिकारी ने बताया कि सोमवार को मॉनसून की बारिश ने लगभग पूरे पश्चिमी राज्य महाराष्ट्र को कवर कर लिया और पड़ोसी गुजरात और मध्य प्रदेश में भी प्रवेश कर गया। एक अन्य मौसम अधिकारी ने बताया कि मानसून ने अपेक्षित गति पकड़ ली है और अगले दस दिनों में पश्चिमी तट, मध्य और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना है, जिससे तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आएगी। मध्य भारत में अगले 4-5 दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में 2-4 डिग्री सेल्सियस गिरावट आने की संभावना है।

आज और कल इन राज्यों में अलर्ट
आईएमडी ने 17 और 18 जून को पूरे देश में भारी से बहुत भारी बारिश को लेकर रेड, ऑरेंज और यलो अलर्ट जारी किया है। गुजरात के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया। वहीं, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, गोवा, तटीय कर्नाटक, केरल और असम को छोड़कर पूर्वोत्तर के सभी छह राज्यों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया। असम, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, पुडुचेरी और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह के लिए यलो अलर्ट जारी हुआ है।

मुंबई में कई इलाके जलमग्न
मायानगरी मुंबई में सोमवार को मूसलाधार बारिश से कई इलाके जलमग्न हो गए और सड़क यातायात, उपनगरीय लोकल ट्रेन सेवा और मेट्रो रेल सेवाएं बाधित हुईं। हवाई सेवाओं पर भी असर पड़ा। महानगर में औसतन 100 मिमी तक बारिश रिकॉर्ड की गई। मंगलवार को समुद्र में ऊंची लहरे उठने की चेतावनी भी जारी की गई है। कई जगह तेज हवाएं भी चलीं और ओवरहेड तारों पर प्लास्टिक शीट गिरने से घाटकोपर-अंधेरी-वर्सोवा लाइन पर मेट्रो सेवा प्रभावित हुई। महानगर में 1 जून के बाद से वर्षा जनित घटनाओं में 18 लोगों की मौत भी हो गई है।

इंडिगो ने जारी की एडवाइजरी
मुंबई में भारी बारिश के बीच इंडिगो एयरलाइंस ने ट्रवेल एडवाइजरी जारी कर यात्रियों से बदलते शेड्यूल के लिए तैयार रहने के लिए कहा है। यात्रियों से कहा गया है कि वे अपने विमान पर नजर रखें और उसी के अनुसार अपनी यात्रा की योजना बनाएं। इंडिगो ने एक्स पर लिखा है कि इस समय मुंबई में भारी बारिश हो रही है जिससे उड़ानों के शेड्यूल में बदला किए जा रहे हैं। उड़ान में संभावित देरी के लिए तैयार रहें और अपनी यात्रा के लिए अतिरिक्त समय दें।

उत्तरी केरल में बारिश का कहर, रेल सेवा बाधित
रेड अलर्ट के बीच उत्तरी केरल में हुई भारी बारिश से आम जनजीवन के साथ ही सड़क और रेल सेवा बुरी तरह प्रभावित हुई। नदियों का जल स्तर बढ़ गया और जलाशय भी लबालब भर गए। कन्नूर और कासरगौड़ा जिलों में बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों में भरने से कई लोगों को राहत शिविरों में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। कन्नूर में लोगों को घुटनों से ऊपर तक पानी के बीच गुजरते देखा गया। कासरगोड में तेजस्विनी पूझा सहित प्रमुख नदियां उफान पर हैं, जिसके कारण अधिकारियों ने जल निकायों में जाने के खिलाफ चेतावनी जारी की है। आईएमडी ने पहले ही कहा था कि मानसून के सक्रिय होने से केरल के साथ ही लक्ष्यद्वीप में भारी बारिश होगी।  

जम्मू में मानसून पूर्व बारिश, पारा गिरा
जम्मू-कश्मीर में प्री-मानसून की दस्तक के साथ ही पारे में 5.8 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। सोमवार को भी कुछ इलाकों में बारिश हुई। 50 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चलीं। अमरनाथ यात्रा तक केंद्रशासित प्रदेश में मानसून के सक्रिय होने की संभावना है। कटड़ा में अधिकमत तापमान 29.9 डिग्री दर्ज किया गया।

‘सबको तुरंत तेहरान खाली कर देना चाहिए’, ट्रंप ने ईरान को दी सीधी धमकी; समझौते की बात भी कही

ईरान और इस्राइल के बीच संघर्ष तेज होते जा रहा है। इस्राइल ने दावा किया है कि उसने ईरान के दो तिहाई से ज्यादा वायु रक्षा और मिसाइल प्रणालियों को ध्वस्त कर उसके आधे से अधिक आसमान पर नियंत्रण कर लिया है। इस्राइली हमले में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के खुफिया प्रमुख समेत तीन शीर्ष अधिकारी भी मारे गए…

ईरान और इस्राइल के बीच संघर्ष तेज होते जा रहा है। इस्राइल ने दावा किया है कि उसने ईरान के दो तिहाई से ज्यादा वायु रक्षा और मिसाइल प्रणालियों को ध्वस्त कर उसके आधे से अधिक आसमान पर नियंत्रण कर लिया है। इस्राइली हमले में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के खुफिया प्रमुख समेत तीन शीर्ष अधिकारी भी मारे गए हैं। ईरान ने भी इस्राइस के तेल अवीव और बंदरगाह शहर हाफिया पर रातभर 100 से ज्यादा मिसाइलें दागी, जिसमें 8 लोगों की मौत हो गई और कम से कम 100 लोग घायल हुए हैं। कई इमारतों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। वहीं सोमवार देर रात इस्राइल ने ईरानी सरकारी मीडिया के दफ्तर को भी निशाना बनाया।

अमेरिकी विदेश विभाग ने 16 जून को इस्राइल, पश्चिमी तट और गाजा के लिए ट्रैवल एडवायजरी जारी की है। यह एडवायजरी लेवर 4 की है। इसके जरिए अमेरिका ने अपने नागरिकों से कहा है कि इन स्थानों की यात्रा न करें। 

ट्रंप ने दी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पोस्ट कर ईरान को चेतावनी दी है। ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा कि ईरान को उस ‘समझौते’ पर हस्ताक्षर करना चाहिए था जिस पर हस्ताक्षर करने के लिए मैंने उनसे कहा था। यह कितनी शर्म की बात है अब मानव जीवन की बर्बादी हो रही है। उन्होंने धमकी देते हुए कहा कि खुले और सीधे शब्दों में कहें तो, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकता। मैंने यह बार-बार कहा है। साथ ही भविष्य में और भी क्रूर हमलों का संकेत देते हुए ट्रंप ने कहा कि सभी को तुरंत तेहरान खाली कर देना चाहिए।

ईरानी हमले के बाद इस्राइल की हाइफा रिफाइनरी सुविधाएं बंद
इस्राइल के हाइफा स्थित बाजान समूह ने कहा कि ईरान के हमले में भाप और बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाले एक पावर स्टेशन को भारी नुकसान पहुंचने के बाद सभी रिफाइनरी सुविधाएं बंद कर दी गई हैं। समूह ने कहा कि ईरानी हमले में कंपनी के तीन कर्मचारियों की मौत हो गई। यह रिफाइनरी हाइफा खाड़ी में स्थित है।

इस्राइल का ईरान के सरकारी टीवी के दफ्तर पर हमला, स्टूडियो मलबे में बदला
इस्राइल ने ईरान के सरकारी टीवी चैनल के दफ्तर पर भीषण हमला किया। सोमवार यह हमला तब हुआ जब टीवी चैनल के दफ्तर के स्टूडियो से लाइव प्रसारण चल रहा था। हमले से एक घंटे पहले ही इस्राइल ने तेहरान के लोगों से वह इलाका खाली करने को कहा था जहां टीवी स्टूडियो स्थित हैं।

सरकारी टीवी इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान न्यूज नेटवर्क के रिपोर्टर ने कहा कि इस्राइल के हमले केबाद स्टूडियो धूल से भर गया। एंकर सहर इमामी जैसे ही कैमरे के पीछे की स्क्रीन कट गई, वह भागकर कैमरे से दूर चली गईं और लोगों को अल्लाहु अकबर कहते हुए सुना गया। बाद में पहले से रिकॉर्ड किए गए कार्यक्रम के साथ टीवी का प्रसार शुरू किया गया। दूसरे स्टूडियो से लाइव आई एंकर ने कहा कि हमले में कई रिपोर्टरों की मौत हुई है। वहीं, इस्राइल के रक्षा मंत्री इस्राइल काट्स ने कहा कि टीवी चैनल पर हमारे खिलाफ भड़काऊ प्रसारण किया जा रहा था, इसलिए हमला किया गया।

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‘जी-8 से रूस को बाहर करना गलती,इसके लिए ओबामा-ट्रूडो जिम्मेदार’; ट्रंप

जी-7 की बैठक में शामिल होने के लिए कैननास्किस पहुंचे ट्रंप ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ द्विपक्षीय बातचीत में कहा कि क्रीमिया पर कब्जे के बाद रूस को जी-8 से बाहर करना गलती थी। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि अगर आपके साथ रूस होता तो अभी युद्ध नहीं होता।

सात देशों के समूह यानी जी-7 की बैठक में शामिल होने कनाडा पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समूह में रूस की वापसी की बात कही है। उन्होंने कहा कि यह समूह कभी जी-8 हुआ करता था। लेकिन रूस को इस समूह से निकाल दिया गया। उन्होंने रूस को बाहर करने को गलती बताया और इसके लिए पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो  को जिम्मेदार ठहराया। इस दौरान उन्होंने जी-7 में चीन को भी शामिल करने की बात कही। उन्होंने कहा कि वह चाहेंगे कि यह समूह जी-8 या जी-9 हो जाए। 

जी-7 की बैठक में शामिल होने के लिए कैननास्किस पहुंचे ट्रंप ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ द्विपक्षीय बातचीत में कहा कि क्रीमिया पर कब्जे के बाद रूस को जी-8 से बाहर करना गलती थी। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि अगर आपके साथ रूस होता तो अभी युद्ध नहीं होता। अगर चार पहले ट्रंप राष्ट्रपति होते तो भी अभी युद्ध नहीं होता। उनका इशारा यूक्रेन-रूस और इस्राइल-ईरान युद्ध की तरफ था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस्राइल और ईरान से तुरंत बातचीत शुरू करने का आह्वान भी किया।

ईरान-इस्राइल जंग में अमेरिका की भूमिका पर खुलकर नहीं बोले ट्रंप
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ने हमेशा इस्राइल का समर्थन किया है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं कहा कि क्या ईरान और इस्राइल के बीच बढ़ते संघर्ष में अमेरिका सीधे तौर पर शामिल होगा। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर बात नहीं करना चाहते। लेकिन यह जरूर कहा कि ईरान यह युद्ध नहीं जीत रहा है। गौरतलब है कि 2014 में यूक्रेन से क्रीमिया को अलग करने के बाद रूस को जी-8 से बाहर कर दिया गया था और उसके बाद यह समूह जी-7 हो गया था।

इस्राइल-ईरान तनाव कम करना होगा
यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच कनाडा के चट्टानी पहाड़ों वाले शहर कैननास्किस में जी-7 का दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन सोमवार से शुरू हुआ। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा कि सभी जी-7 नेता इस बात पर सहमत हैं कि उन्हें इस्राइल और ईरान के बीच तनाव कम करने का रास्ता खोजना होगा, क्योंकि दोनों देशों के बीच संघर्ष से गाजा में आग भड़कने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचने का खतरा है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति से बातचीत हुई। वहीं, बैठक में शामिल होने के लिए रवाना होने से पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने कहा कि कोई भी नहीं चाहता कि ईरान को परमाणु हथियार मिले और हर कोई चाहता है कि चर्चा और बातचीत फिर से शुरू हो।

इस्राइल-ईरान से तनाव कम करने का आह्वान
वहीं, राजनयिक सूत्रों ने कहा कि जी-7 की बैठक में एक संयुक्त बयान जारी किए जाने की उम्मीद है जिसमें इस्राइल और ईरान से तनाव कम करने, संयम बरतने और आपसी मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति के रास्ते पर लौटने का आग्रह किया जाएगा। इस संबंध में एक मसौदा भी तैयार कर लिया गया है जिसमें दोनों पक्षों से संघर्ष कम करने का आह्वान किया गया है। हालांकि, ट्रंप ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किया है और व्हाइट हाउस के अधिकारियों का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति हस्ताक्षर नहीं करेंगे। मसौदे में यह भी कहा गया है कि इस्राइल को खुद का बचाव करने का अधिकार है।

DRDO-IIT दिल्ली ने विकसित की क्वांटम आधारित सुरक्षित संचार तकनीक; हैकिंग मुक्त अबाधित संचार की खुली राह

संचार के क्षेत्र में क्वांटम का उपयोग करने से अटूट एन्क्रिप्शन मिलता है जिसके कारण इस संचार को हैक नहीं किया सकता। इसके कारण यह तकनीक रक्षा, वित्त और दूरसंचार जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में डाटा को सुरक्षित रखने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी संचार में बेहद मददगार साबित होगी। 

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-दिल्ली के साथ मिलकर क्वांटम आधारित सुरक्षित संचार तकनीक के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी हासिल की है। इसके तहत, आईआईटी दिल्ली परिसर में स्थापित एक फ्री-स्पेस ऑप्टिकल लिंक के जरिए एक किलोमीटर से अधिक की दूरी पर क्वांटम की संलिप्तता का उपयोग करके फ्री स्पेस क्वांटम सुरक्षित संचार हासिल किया गया।

संचार के क्षेत्र में क्वांटम का उपयोग करने से अटूट एन्क्रिप्शन मिलता है जिसके कारण इस संचार को हैक नहीं किया सकता। इसके कारण यह तकनीक रक्षा, वित्त और दूरसंचार जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में डाटा को सुरक्षित रखने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी संचार में बेहद मददगार साबित होगी। यह दोहरे उपयोग वाली तकनीक है जिसका इस्तेमाल रक्षा के साथ-साथ सामान्य संचार में भी किया जा सकेगा।

रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि आईआईटी दिल्ली में किए गए प्रयोग के दौरान 7 प्रतिशत से कम की क्वांटम बिट त्रुटि दर के साथ लगभग 240 बिट प्रति सेकंड की सुरक्षित केईवाई दर प्राप्त की। इसने भविष्य में क्वांटम सुरक्षित संचार और क्वांटम साइबर सुरक्षा में अनुप्रयोगों के लिए नया मार्ग खोल दिया है। इन अनुप्रयोगों में लंबी दूरी के क्वांटम वितरण (क्यूकेडी), क्वांटम नेटवर्क का विकास और भविष्य का क्वांटम इंटरनेट शामिल हैं। डीआरडीओ और आईआईटी का ये प्रयास राष्ट्रीय विकास के लिए क्वांटम प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाने के भारत के व्यापक उद्देश्यों के अनुरूप हैं।

रक्षा मंत्रालय के बयान में कहा गया है, क्वांटम संलिप्तता आधारित क्यूकेडी से सुरक्षा और कार्यक्षमता दोनों को बढ़ाकर कई महत्वपूर्ण लाभ हासिल हो सकते हैं। भले ही उपकरण को हैक किया गया हो या यह अपूर्ण हों, क्वांटम की संलिप्तता से केईवाई वितरण की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

पहले भी हो चुका है क्वांटम संचार का प्रदर्शन
इससे पहले, 2022 में डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने विंध्याचल और प्रयागराज के बीच भूमिगत डार्क ऑप्टिकल फाइबर का उपयोग करते हुए भारत का पहला इंटरसिटी क्वांटम संचार लिंक प्रदर्शित किया था। वहीं, 2024 में, एक अन्य डीआरडीओ समर्थित परियोजना में टेलीकॉम-ग्रेड ऑप्टिकल फाइबर के 100 किमी स्पूल पर एंटैंगलमेंट का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया और क्वांटम की (केईवाई) वितरित की।

अब मोबाइल फोन के कारोबार में उतरेगा अमेरिकी राष्ट्रपति का परिवार; ट्रंप ब्रांड को भुनाने की एक और कोशिश

बीते महीने ट्रंप के परिवार ने वियतनाम में गोल्फ कोर्स, होटल और रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए 1.5 बिलियन डॉलर का साझेदारी समझौते को मंजूरी दी थी। हालांकि, इन सौदाें की शुरुआत ट्रंप के निर्वाचन से पहले हो गई थी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का परिवार अब मोबाइल फोन निर्माण के नए कारोबार में उतरेगा। इसका नाम ट्रंप मोबाइल होगा। यह कदम तब उठाया गया है जब डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च सांविधानिक पद पर हैं। उनकी इस बात को लेकर आलोचना हो रही है कि वे अपनी निजी व्यावसायिक हितों के लिए सार्वजनिक नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं। इसे ट्रंप ब्रांड की लोकप्रियता को भुनाने की एक और कोशिश करार दिया जा रहा है। ट्रंप ऑर्गनाइजेशन के कार्यकारी उपाध्यक्ष और डोनाल्ड ट्रंप के बेटे एरिक ट्रंप ने कहा कि ट्रंप मोबाइल अमेरिका में निर्मित फोन बेचेगा और देश में ही एक कॉल सेंटर संचालित करेगा।

इस नई मोबाइल फोन और सेवा को टी1 मोबाइल नाम दिया गया है। इसकी घोषणा मध्य पूर्व में कई रियल एस्टेट सौदों के बाद हुई है, जिसमें कतर में एक गोल्फ परियोजना भी शामिल है। पिछले महीने उनके परिवार ने वियतनाम में गोल्फ कोर्स, होटल और रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए 1.5 बिलियन डॉलर का साझेदारी समझौते को मंजूरी दी थी। हालांकि, इन सौदाें की शुरुआत ट्रंप के निर्वाचन से पहले हो गई थी। व्यवसायों में ट्रंप के नाम से जुड़ाव पर अमेरिका के व्यापारिक और राजनीतिक हलकों में विवादों का नया दौर शुरू हो गया है। गौरतलब है कि मोबाइल फोन कंपनियों की नियामक संस्था फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन ने उन मीडिया संस्थानों की जांच शुरू की है, जिन्हें ट्रंप नापसंद करते हैं।

भारत में आईफोन निर्माण को लेकर टैरिफ की धमकी दे चुके हैं ट्रंप
एरिक ट्रंप ने सोमवार को कहा कि उपभोक्ताओं को ऐसा फोन मिलना चाहिए जो किफायती हो, उनके मूल्यों के अनुरूप हो। यह कंपनी एक अत्यंत प्रतिस्पर्धी बाजार में प्रवेश कर रही है। इसके पहले भारत में आईफोन निर्माण को लेकर लेकर डोनाल्ड ट्रंप एपल की आलोचना कर चुके हैं। ट्रंप ने एपल पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी थी।

‘इस्राइली हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बहुत पीछे धकेला’; नेतन्याहू ने ट्रंप का जताया आभार

इस्राइली पीएम ने कहा कि इस्राइल ईरानी सरकार को गिराने की कोशिश नहीं कर रहा है, लेकिन हमलों के परिणामस्वरूप अगर ऐसा होता है तो उन्हें आश्चर्य नहीं होगा। उन्होंने कहा कि खामेनेई का शासन बहुत कमजोर है। इस दौरान नेतन्याहू ने यह भी कहा कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ दैनिक संपर्क में हैं।
 इस्राइल और ईरान के बीच हमले लगातार जारी हैं। ईरान और इस्राइल के बीच संघर्ष तेज होता जा रहा है। इस्राइल ने दावा किया है कि उसने ईरान के दो तिहाई से ज्यादा वायु रक्षा और मिसाइल प्रणालियों को ध्वस्त कर उसके आधे से अधिक आसमान पर नियंत्रण कर लिया है। इस्राइली हमले में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के खुफिया प्रमुख समेत तीन शीर्ष अधिकारी भी मारे गए हैं। इस बीच, इस्राइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस्राइली हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बहुत, लंबे समय के लिए पीछे धकेल दिया है।

इस्राइली पीएम ने कहा कि इस्राइल ईरानी सरकार को गिराने की कोशिश नहीं कर रहा है, लेकिन हमलों के परिणामस्वरूप अगर ऐसा होता है तो उन्हें आश्चर्य नहीं होगा। उन्होंने कहा कि खामेनेई का शासन बहुत कमजोर है। इस दौरान नेतन्याहू ने यह भी कहा कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ दैनिक संपर्क में हैं।

ट्रंप का जताया आभार
वहीं, एक न्यूज चैनल को साक्षात्कार देते हुए नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ इस्राइल का समर्थन करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का आभार जताया। साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिका के लिए भी खतरा है। उन्होंने कहा कि आज तेल अवीव है, कल न्यूयॉर्क होगा। उन्होंने कहा कि मैं अमेरिका फर्स्ट को समझता हूं लेकिन अमेरिका डेड नहीं चाहता। वे(ईरान) यही चाहते हैं। ईरान हमेशा युद्ध चाहता है। वह हमें परमाणु युद्ध के मुहाने पर खड़ा करना चाहता है। हम उसकी आक्रामकता को रोक रहे हैं। 

हमारी लड़ाई बुराई के खिलाफ- नेतन्याहू
नेतन्याहू ने अपने हमलों को बुराई के खिलाफ अच्छाई की लड़ाई बताते हुए कहा कि हमारी लड़ाई बुराई के खिलाफ है। हम मानवता की सेवा में जो कुछ भी कर रहे हैं, ट्रंप उसके साथ खड़े हैं। ट्रंप अच्छाई के पक्ष में है। इसके लिए मैं उनका धन्यवाद करता हूं। इस दौरान उन्होंने ईरान पर इस्राइल के हमलों को लेकर कहा कि यह तब तक जारी रहेंगे जब तक कि बुराई हार नहीं जाती। 

ईरान ट्रंप को मारना चाहता है : नेतन्याहू
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान के इस्लामी शासन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने परमाणु कार्यक्रम के लिए खतरा माना है और उनकी हत्या के लिए सक्रिय रूप से काम किया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने कहा कि ईरान ट्रंप को मारना चाहता है। वह उसके दुश्मन नंबर एक हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप के निर्णायक नेता हैं। उन्होंने कभी भी दूसरों की तरह उनके साथ सौदेबाजी करने का रास्ता नहीं अपनाया, जिससे उन्हें मूल रूप से यूरेनियम को समृद्ध करने का रास्ता मिल गया। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि ईरान शासन के निशाने पर वह खुद भी हैं।  

नेतन्याहू बोले, हम जीत के रास्ते पर
इससे पहले, इस्राइल प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान की अपील को दरकिनार करते हुए कहा कि हम जीत के रास्ते पर हैं। उन्होंने एक एयरबेस पर इस्राइली सैनिकों से कहा कि इस्राइल अपने दो मुख्य लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पहला-ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना और दूसरा- उसकी मिसाइलों को नष्ट करना। उन्होंने कहा, हम जीत की राह पर हैं। हम तेहरान के नागरिकों से कह रहे हैं कि शहर को खाली करो हम कार्रवाई कर रहे हैं।

इस्राइली सेना का दावा ईरान के आधे आसमान पर हमारा कब्जा
इससे पहले, इस्राइली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने सोमवार को कहा कि हमने ईरानी वायु रक्षा और मिसाइल प्रणालियों को इस हद तक कमजोर कर दिया है कि हमारे लड़ाकू विमान अब बिना किसी बड़े खतरे का सामना किए बिना तेहरान के ऊपर उड़ान भर सकते हैं। अब पश्चिमी ईरान से तेहरान तक के आसमान हमारे विमानों के नियंत्रण में हैं। हमारी सेना ने रात भर के अभियानों में इस्राइल पर हमला करने वाले ईरान के 120 से अधिक सतह से सतह पर मार करने वाले मिसाइल लांचरों को नष्ट कर दिया है।

ईरान के और तीन शीर्ष अधिकारी मारे गए
वहीं, इस्राइली सेना ने रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की खुफिया इकाई के प्रमुख सहित चार वरिष्ठ खुफिया अधिकारियों को मार गिराने का दावा किया है। ईरान की सरकारी सरकारी मीडिया ने तीन अधिकारियों के मारे जाने की पुष्टि की है। इनमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) कोर के खुफिया प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद काजमी और उनके डिप्टी हसन मोहाकिक और आईआरजीसी के तीसरे खुफिया अधिकारी मोहसेन बाघेरी शामिल हैं।

दोनों तरफ जानमाल का भारी नुकसान
ईरान और इस्राइल को एक-दूसरे के खिलाफ हमलों में भारी जानमाल का नुकसान उठाना पड़ा है। ईरान ने इस्राइल पर अब तक 370 मिसाइलें और सैकड़ों ड्रोन दागे हैं जिनमें कुल 24 लोगों की मौत हुई है और 500 से अधिक घायल हुए हैं। वहीं, ईरान ने कहा है कि इस्राइल के हमले में अब तक 224 लोग मारे गए हैं और 1277 घायल हुए हैं, हालांकि मानवाधिकार समूहों ने 400 से अधिक मौतों का दावा किया है जिनमें 197 नागरिक हैं। इस्राइली हमले में ईरान में सैन्य और परमाणु ठिकानों समेत तेल और प्राकृतिक गैस क्षेत्र और अन्य बुनियादी ढांचों को भारी नुकसान हुआ है।

कुद्स फोर्स के 10 कमांड केंद्रों पर हमला
इस्राइली सेना ने कहा है कि ईरान को रिहायशी इलाकों पर हमले की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। इस्राइल के लड़ाकू विमानों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के कुद्स फोर्स से संबंधित तेहरान में 10 कमांड केंद्रों पर भी हमला किया। कुद्स फोर्स रिवोल्यूशनरी गार्ड की एक विशिष्ट शाखा है जो ईरान के बाहर सैन्य और खुफिया अभियान चलाती है।

परमाणु अप्रसार संधि से बाहर निकलेगा ईरान
ईरान ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) से बाहर निकलने की घोषणा की है। सोमवार को ईरान ने कहा कि उसकी संसद एनपीटी से बाहर निकलने के लिए एक विधेयक तैयार कर रही है। हालांकि, उसने यह भी कहा कि तेहरान सामूहिक विनाश के हथियार विकसित करने का विरोध करता रहेगा। विधेयक पारित होने में कई सप्ताह लग सकते हैं। माना जाता है कि इजरायल के पास बहुत बड़ा परमाणु शस्त्रागार है, लेकिन न तो वह इसकी पुष्टि करता है और न ही इनकार करता है। यह पश्चिम एशिया का एकमात्र ऐसा देश है जिसने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

 अब जमकर बरसेंगे बदरा, भारी बारिश की चेतावनी;

प्रदेश में मानसून की आहट महसूस होने लगी है। सोमवार को लगभग पूरे प्रदेश में कहीं ज्यादा तो कहीं धीमी बारिश हुई। इससे तापमान में गिरावट महसूस की गई। पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के 75 फीसदी जिलों में बारिश हुई। हीट वेव जैसे हालात कहीं नजर नहीं आए। मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को भी ऐसा ही मौसम रहेगा। बुधवार से प्रदेश के कई स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है।

मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार शाम पांच बजे तक बरेली में सबसे ज्यादा बारिश 149.4 मिमी दर्ज की गई। सहारनपुर में भी 120 मिमी बारिश हुई। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि तराई क्षेत्र में सोमवार को अच्छी बारिश हुई। पूर्वांचल में भी ठीक-ठाक बारिश सोमवार को हुई। बारिश ने पूरे प्रदेश के मौसम को बदल दिया है और लू जैसी परिस्थितियां किसी भी जनपद में नजर नहीं आई। लगभग सभी जगह तापमान सामान्य से नीचे आ गया।

प्रदेश भर में तापमान में औसतन 2-4 डिग्री की गिरावट महसूस की गई, जो आगे तीन से चार दिन में 3-7 डिग्री तक हो सकती है। पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश के बीच 40 से 50 किमी. प्रति घंटा की रफ्तार से हवा चली और यही क्रम मंगलवार को भी जारी रहेगा। कहीं कहीं मेघगर्जन के साथ वज्रपात की आशंका भी जताई जा रही है। 18 और 19 जून को भारी बारिश की चेतावनी भी मौसम विभाग की ओर से जारी की गई है।

आज यहां पर मेघगर्जन के साथ वज्रपात के आसार
सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, देवरिया, गोरखपुर, संतकबीर नगर, बस्ती, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और आसपास के इलाकों में।

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