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इंदौर में गली मोहल्ले में 20 लोग कर सकेंगे होलिका दहन, शब-ए-बारातमें भी 20 लोगों को जाने की अनुमति

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इंदौर

क्राइसिस मैनेजमेंट की बैठक में होलिका दहन को लेकर किए गए फैसले और फिर उसके विरोध के बाद शनिवार रात कलेक्टर मनीष सिंह ने नई गाइड लाइन जारी कर दी है। अब होलिका दहन पर गली मोहल्ले में 20-20 लोग और शब-ए-बारात में भी 20 लोग शामिल हो सकेंगे। हालांकि शहर में रंग खेलने को लेकर अभी भी प्रतिबंध जारी रहेगा। कोई किसी के घर नहीं जाएगा और न ही बिना कारण के यहां-वहां घूम सकेगा।नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

आदेश में यह कहा गया: 28 और 29 मार्च की दरम्यानी रात में प्रतीकात्मक रूप से काॅलोनी के आंतरिक भागों या गलियों में ही धार्मिक परंपरा का निर्वहन करते हुए सांकेतिक रूप से होलिका दहन किया जा सकेगा। सभी मुख्य मार्गों, चौराहों, बड़े मैदान आदि जगह यह पर्व मनाया जाना प्रतिबंधित रहेगा। कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए होलिका दहन के दौरान अधिकतम 20 लोग उपस्थित रह सकेंगे। क्षेत्रीय थाना प्रभारी, कार्यपालिक मजिस्ट्रेट, क्षेत्रीय सीएसपी और एसडीएम यह सुनिश्चित करेंगे कि कहीं भी मुख्य मार्ग, मुख्य चौराहों या बड़े मैदानों पर प्रतिबंधों का उल्लंघन न रहा हो।

शब-ए-बारात भी प्रतीकात्मक रूप से मनाया जा सकेगा। किसी भी मोहल्ले के निवासी उसी मोहल्ले से संबंधित कब्रिस्तान में जा सकेंगे। कब्रिस्तान कमेटी को यह सुनिश्चित करना होगा कि एक समय में अधिकतम 20 लोग ही कब्रिस्तान के अंदर रहे। दूसरे मोहल्ले के कब्रिस्तान में जाने पर रोक लगाई गई है। क्षेत्रीय थाना प्रभारी, कार्यपालिक मजिस्ट्रेट, क्षेत्रीय सीएसपी और एसडीएम को आदेश का पालन करना होगा। इस दौरान सभी धर्मों के धर्मस्थल पूर्ण रूप से बंद रहेंगे।

आदेश की कॉपी

सीएम ने कहा- परंपराएं निभाएं पर बिना भीड़ के

सीएम शिवराज ने ट्वीट कर कहा कि “अगर परंपरा का निर्वहन जरूरी है तो स्थानीय प्रशासन की अनुमति ले लें। बिना भीड़ के प्रतीकात्मक रूप से परंपरा का निर्वहन करें। इससे परंपरा का निर्वाह भी हो जाएगा और हम संक्रमण से भी बच जाएंगे। उन्होंने कहा कि हमारे त्योहार महत्वपूर्ण हैं, लेकिन कोविड संक्रमण को रोकने के लिए हम ये त्योहार परिवार के साथ घर पर भी मना सकते हैं। संक्रमण रोकना है तो भीड़भाड़ से बचना होगा। त्योहारों की रस्में निभाएं, परंपराएं पूरी करें पर बिना भीड़भाड़ के।” सीएम के इस बयान के बाद अब जिला प्रशासन को तय करना है कि प्रतीकात्मक होलिका दहन के लिए भी परमिशन दी जाए या नहीं।

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