इंदौर
दोनों विश्वयुद्ध की अवधि मिला लें तो भी वे अधिकतम नौ वर्ष होती है, लेकिन इंदौर में जमीन की जंग 15 सालों से चल रही है। इस अवधि में अब 6 हजार एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। बावजूद इसके 20 हजार से ज्यादा लोग सारी जमा पूंजी लगाने के वर्षों बाद भी प्लॉट के लिए तरस रहे हैं। 5 हजार एफआईआर तो साल 2009 की है। बावजूद शहर की 120 संस्थाओं के खिलाफ 1571 शिकायतें लंबित हैं। इनमें आईडीए की स्कीम 171 भी शामिल है।
अब तक तीन बड़ी कार्रवाई फिर भी स्थाई हल नहीं
2009 पहली बार भूमाफिया पर कार्रवाई शुरू हुई। एक सप्ताह में 5078 लोगों पर एफआईआर हुई। कई भूमाफिया जेल गए। पहला केस देवी अहिल्या के विमल लुहाड़िया, जगदीश भावसार व मुकेश अग्रवाल पर हुआ। आईडीए को स्कीम 133 वापस लेना पड़ी। इसमें 4 हजार लोगों को प्लॉट मिले। 2011 तक यह अभियान चला।
2015 में फिर अभियान चलाया गया और 70 से ज्यादा लोगों को जेल भेजा गया था।
2019-20 में कमलनाथ सरकार के दौरान सबसे पहले बॉबी छाबड़ा पर कार्रवाई हुई। गजानन गृह निर्माण सहित अन्य मामलों में उसका ऑफिस, गार्डन तोड़ा गया। बब्बू-छब्बू सहित 15 माफिया के मकान तोड़े।
पुलिस की कार्रवाई का तरीका ही गलत है
जिला प्रशासन और पुलिस माफिया के खिलाफ जो कार्रवाई करती है वह प्रक्रिया ही गलत है। पुलिस इन मामलों में पहले एफआईआर करती है, जबकि एफआईआर का औचित्य नहीं होता। बाद में पुलिस सिविल मामला बता पल्ला झाड़ लेती है। पीड़ित प्लॉटधारक हर बार ठगा जाता है, न्याय नहीं मिल पाता।
– के.एल.हार्डिया, सीनियर एडवोकेट
सीधी बात- मनीष सिंह, कलेक्टर
अभियान कई चलेर लोगों को प्लाॅट कब मिलेंगे?
– कुछ को मौके पर कब्जे दे रहे हैं। अवैध कॉलोनी में प्रक्रिया से आवंटन होगा।
कुर्की की कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?
– जिस जमीन से लाभ कमाया, उसकी सभी रजिस्ट्रियां रद्द करा रहे हैं।
इस बार बॉबी छाबड़ा का नाम क्यों नहीं आया?
– सूदन पर एफआईआर है, जो उससे संबंधित बताते हैं, लेकिन बॉबी पर धमकाने की जानकारी नहीं आई है।
सीधी बात- मनीष कपूरिया, डीआईजी
इतने छापे मारे, लेकिन केवल दो पकड़ पाए?
– टीमें सभी जगह गई थीं, सभी की तलाश जारी है।
क्या इस बार भी सूचना लीक हुई?
– नहीं ऐसा नहीं है। पुलिस मजबूती से जांच करेगी।
फिर आरोपी रात में ही फरार कैसे हो गए?
– सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
इन पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही?
– मजबूत चालान पेश कर सभी को सजा दिलाएंगे।
घपले कैसे-कैसे:
100 करोड़ की जमीन अंडे वाले ने बेच दी
नसीम हैदर को मजदूर पंचायत संस्था में प्रबंधक बताया गया है। वास्तव में वह ठेले पर अंडे बेचने का काम करता है। उसने 100 करोड़ रुपए मूल्य की पांच एकड़ जमीन केशव नचानी, ओमप्रकाश धनवानी को बेची है।
150 करोड़ की जमीन ड्राइवर- नौकर ने बेची
बॉबी छाबड़ा के ड्राइवर रणवीरसिंह सूदन ने देवी अहिल्या की अयोध्यापुरी में 80 करोड़ की 4 एकड़ जमीन संघवी, मद्दा आदि को बेची। रमेश जैन के नौकर रामसेवक पाल ने श्रीराम संस्था की 65 करोड़ की 13 एकड़ जमीन मद्दा को बेची है।
लोकायुक्त को दिया झूठा आश्वासन
6 साल पहले कविता संस्था की शिकायत लोकायुक्त में की गई थी। सहकारिता विभाग ने कहा कि हमारे पास असीमित अधिकार हैं। लोकायुक्त को दखल की जरूरत नहीं है। निराकरण कर देंगे, अब तक शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
20 करोड़ की जमीन समाज को दान की
भू माफिया की हद यह है कि दीपक मद्दा ने 2 जनवरी 2020 को एक तीर्थ स्थल पर आयोजित एक कार्यक्रम में खजराना क्षेत्र की 30 हजार वर्गफीट जमीन धर्मगुरु को दान कर दी। जमीन की कीमत करीब 20 करोड़ रुपए है।

