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*डेढ़ साल में 205 मुठभेड़ , 427 नक्सली मारे, 544 हथियार, 666 आईईडी जब्त*

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एक सीनियर नेता ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अब नक्सलियों का सपोर्ट बेस खत्म हो गया है। करीब 750-800 नक्सली बचे होंगे और उसमें भी हथियार लेकर घूमने वाले करीब 200 हैं, बाकी लोग अंडरग्राउंड हैं। उन्होंने बताया कि नक्सलियों का सपोर्ट बेस खत्म करना एक बड़ी सफलता है। जंगलों में बसे गांवों तक जहां नक्सलियों का प्रभाव होता था वहां तक विकास पहुंचा है। बिजली पहुंची, सस्ता चावल पहुंचा। हर सुरक्षा कैंप के पास स्कूल बने हैं, राशन की दुकान खुली है, कैंप की मेडिकल फेसिलिटी आम लोग भी इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पहले नक्सलियों की जनताना सरकार में जो लोग थे वे अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल हो रहे हैं और चुनाव लड़ कर मुख्यधारा में आए हैं।

छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियानों के बीच गृह मंत्री अमित शाह अगले हफ्ते छत्तीसगढ़ जा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक वे 16 जून को बस्तर में नक्सल विरोधी ऑपरेशंस में शामिल जवानों से मुलाकात कर सकते हैं। साथ ही वे सुरक्षा की स्थिति की भी समीक्षा करेंगे। सिक्योरिटी फोर्स के अधिकारियों के साथ मीटिंग के अलावा वे विकास कामों की भी समीक्षा करेंगे।

छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ महीनों में नक्सल विरोधी ऑपरेशंस में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। बसवा राजू, चलपति उर्फ अप्पाराव, सुधाकर जैसे कई बड़े नक्सली नेता मुठभेड़ में मारे गए। पिछले डेढ़ साल में 205 मुठभेड़ हुई जिसमें 427 नक्सली मारे गए। 544 हथियार, 666 आईईडी जब्त की गई। 1451 को गिरफ्तार किया गया और 1428 ने आत्मसमर्पण किया।

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का सपोर्ट बेस खत्म

एक सीनियर नेता ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अब नक्सलियों का सपोर्ट बेस खत्म हो गया है। करीब 750-800 नक्सली बचे होंगे और उसमें भी हथियार लेकर घूमने वाले करीब 200 हैं, बाकी लोग अंडरग्राउंड हैं। उन्होंने बताया कि नक्सलियों का सपोर्ट बेस खत्म करना एक बड़ी सफलता है। जंगलों में बसे गांवों तक जहां नक्सलियों का प्रभाव होता था वहां तक विकास पहुंचा है। बिजली पहुंची, सस्ता चावल पहुंचा। हर सुरक्षा कैंप के पास स्कूल बने हैं, राशन की दुकान खुली है, कैंप की मेडिकल फेसिलिटी आम लोग भी इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पहले नक्सलियों की जनताना सरकार में जो लोग थे वे अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल हो रहे हैं और चुनाव लड़ कर मुख्यधारा में आए हैं।

क्सलियों के खात्मे के साथ ही छत्तीसगढ़ में राजनीति स्तर पर भी पैदा होने वाले गैप को भरने की कोशिश हो रही है। नक्सलवाद एक विचारधारा के साथ चलता रहा। जहां इनका प्रभाव था, वहां लोग अब राजनीति की कौन सी धारा की तरफ मुड़ेंगे ये राजनीतिक दलों के लिए बड़ा सवाल है और उस गैप को भरने की कोशिश में सभी राजनीतिक दल लगे हुए हैं। कुछ दिन पहले ही छत्तीसगढ़ के आदिवासी नेताओं में बड़ा चेहरा अरविंद नेताम को नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय आमंत्रित किया गया। आदिवासी नेता अरविंद नेताम इंदिरा गांधी और नरसिम्हा राव मंत्रिमंडल में केंद्रीय मंत्री थे। कांग्रेस छोड़ने के बाद नेताम ने अगस्त 2023 में हमर राज पार्टी बनाई, जो आदिवासी समूहों का एक संगठन है।

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