- हवा-हवाई ना बन जाए सिंधिया जी की घोषणा… नए अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट का सुझाव… मास्टर प्लान में हो सकता है प्रावधान भी
इंदौर। नागरिक उड्डयन मंत्री के रूप में इंदौर आए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एयरपोर्ट के विस्तार की घोषणा करते हुए 2300 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की बात भी कही और बोले कि इस संबंध में उनकी मुख्यमंत्री से भी चर्चा हुई है। मगर सवाल यह है कि वर्तमान एयरपोर्ट तो अब शहरसे ही जुड़ गया है और वहां इतनी बड़ी जमीन अब उपलब्ध ही नहीं है, जिसके चलते विस्तार की योजनाएं संभव ही नहीं हो पाएगी। आसपास कालोनियों से लेकर कई तरह के निर्माण हो चुके हैं और एयरपोर्ट के आगे गोम्मटगिरी, बिजासन माता मंदिर सहित अन्य संस्थाएं भी मौजूद हैं। प्रतिनिधि ने श्री सिंधिया को यह भी सलाह दी कि 2300 एकड़ जमीन वर्तमान एयरपोर्टपर तो मिलना संभव नहीं है, जिसके चलते अन्य जगह पर नए अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट का निर्माण किया जाना चाहिए और इसका प्रावधान इंदौर के आगामी मास्टर प्लान में अभी आसानी से किया जा सकता है।
इंदौर एयरपोर्ट) को भले ही कागजों पर अंतर्राष्ट्रीय घोषित कर दिया हो, लेकिन उड़ानों का लाभ अभी तक नहीं मिल पाया। एक मात्र इंदौर-दुबई, अंतर्राष्ट्रीय फ्लाइट जैसे-तेसे शुरू हुई थी। वह भी कोरोना (Corona) के चलते बंद हो गई। हालांकि इस संबंध में भी श्री सिंधिया ने कल जानकारी दी कि इंदौर-दुबई की अंतर्राष्ट्रीय उड़ानल्द शुरू होगी। उनका मंत्रालय तैयार है और दुबई सरकार जैसे ही उड़ानों को मंजूरी देगी हम यह फ्लाइट शुरू कर देंगे। वहीं श्री सिंधिया ने इंदौर एयरपोर्ट के भविष्य में होने वाले विस्तार की भी जानकारी दी और कहा कि आने वाले दिनों में कई उड़ानें भी शुरू होगी। उनके मंत्री बनने के बाद इंदौर, भोपाल, जबलपुर को नई उड़ानों की सौगात भी मिली है। देशभर में 100 नए हवाई अड्डे विकसित होना है जिनमें से 59 तैयार भी हो गए हैं। इंदौर में 2300 एकड़ जमीन लेकर मौजूदा रन-वे को डबल किया जाएगा। मगर लाख टके का सवाल यह है कि वर्तमान एयरपोर्ट के आसपास 2300 एकड़ की विशाल खाली जमीन उपलब्ध ही नहीं है, जिसकी बजाय अब नए एयरपोर्ट का प्रावधान आगामी मास्टर प्लान में करना चाहिए। कल श्री सिंधिया को इस संबंध में अग्निबाण प्रतिनिधि ने अलग से हुई चर्चा में सलाह भी दी, जो उन्हें पसंद भी आई। दरअसल, इंदौर का मास्टर प्लान इसी साल खत्म हो रहा है और आगामी 2035 के मास्टर प्लान की तैयारी चल रही है। लिहाजा शहर के बाहरी हिस्से में 2300 एकड़ जमीन मास्टर प्लान में नए एयरपोर्ट के लिए चिन्हित की जा सकती है, जहां पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर का एयरपोर्ट बने और वर्तमान एयरपोर्ट को डोमेस्टिक फ्लाइटों के लिए इस्तेमाल किया जाए, जैसे कई बड़े शहरों में होता भी है।
20 एकड़ जमीन ही बड़ी मुश्किल से हासिल हुई
वर्तमान एयरपोर्ट के विस्तार में ही तमाम बाधाएं आती रही है और सालों की मशक्कत के बाद पिछले दिनों 20 एकड़ जमीन एयरपोर्ट अथॉरिटी को सौंपी जा सकी। यह जमीन भी प्रदेश सरकार ने उषा राजे ट्रस्ट से सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई जीतने के बाद हासिल की। इस जमीन पर पार्किंग सहित अन्य सुविधाएं विकसित होना है। हालांकि वन विभाग की एनओसी से लेकर कुछ झंझटें लगातार जारी रही। जब 20 एकड़ जमीन ही वर्षों की मशक्कत के बाद हासिल हुई तो 2300 एकड़़ जमीन कहां से आएगी, जिसके चलते श्री सिंधिया की घोषणा हवा-हवाई ना साबित ना हो जाए। नया टर्मिनल भवन, होटल, पार्किंग सहित अन्य अभी कागजों पर ही है।
5 हजार करोड़ से अधिक का मुआवजा कौन बांटेगा..?
नए भूमि अधिग्रहण कानून के लागू होने के बाद वैसे भी निजी जमीनों का अधिग्रहण अत्यंत जटील और महंगा हो गया है। दो से चार गुना नकद मुआवजे का प्रावधान इस एक्ट में किया गया है। लिहाजा 2300 एकड़ जमीन अगर एयरपोर्ट विस्तार के लिए अधिग्रहित की जाएगी तो उसके बदले 5 हजार करोड़ से अधिक का मुआवजा बांटना पड़ेगा। मुआवजे की राशि राज्य शासन को ही वहन करना पड़ती है और प्रदेश सरकार की माली हालत खस्ता है। पहले भी वह रेलवे, एयरपोर्ट से लेकर अन्य बड़े प्रोजेक्टों में भू-अधिग्रहण इसीलिए नहीं कर पाई, क्योंकि मुआवजा देने के लिए इतना पैसा ही नहीं है। हालांकि श्री सिंधिया ने कहा कि इस संबंध में उनकी मुख्यमंत्री से बात हो गई है।

