अग्नि आलोक

*24 जुलाई की ताजा खबर: भारत-ब्रिटेन के बीच ऐतिहासिक समझौता, ईरान फिर इजरायल से जंग के लिए तैयार, ‘उड़ते ताबूत’ को अलविदा..,दिल्ली से इस साल 8000 लोग लापता,क्या इस्तीफे के बाद धनखड़ का दफ्तर सील कर दिया गया है?* 

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आज के बड़े इवेंट
> भारत और ब्रिटेन के बीच आज होगा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, पीएम मोदी लंदन में करेंगे साइन।

इस्कॉन रेस्टोरेंट में चिकन खाने वाले यूट्यूबर ने मांगी माफी

लंदन के इस्कॉन रेस्टोरेंट में नॉनवेज खाने का वीडियो बनाने वाले ब्रिटिश यूट्यूबर ने माफी मांगी है। सोशल मीडिया पर आलोचना बढ़ने के बाद उसने कहा कि उसे पता नहीं था कि रेस्टोरेंट मंदिर परिसर में स्थित है। उसने कहा कि यह गलती अनजाने में हुई है। उधर, इस्कॉन ने कहा कहा है कि वह यूट्यूबर को माफ करता है।

ब्रिटिश यूट्यूबर ‘सेन्ज़ो’ ने लंदन स्थित इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन) के रेस्टोरेंट में चिकन खाते हुए एक वीडियो बनाने के बाद माफी मांग ली है। इस यूट्यूबर की हरकत का सोशल मीडिया पर भारी विरोध हुआ था। कई लोगों ने यूट्यूबर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। अपने वीडियो में अफ्रीकी मूल के सेन्जो को रेस्टोरेंट परिसर में घुसते और कर्मचारियों से पूछते हुए दिखाया गया है कि क्या वहां मीट सर्व किया जाता है। जब उन्हें बताया गया कि रेस्टोरेंट में केवल शाकाहारी भोजन ही मिलता है, तो उन्होंने चिकन का एक डिब्बा निकाला और रेस्टोरेंट के अंदर खाना शुरू कर दिया।

रेस्टोरेंट में नॉनवेज खाता दिखा था यूट्यूबर

ब्रिटिश यूट्यूबर को कर्मचारियों और ग्राहकों को मांसाहारी भोजन प्रदर्शित करते हुए देखा जा सकता है, जिससे आसपास मौजूद सभी लोग असहज हो गए। जाने के लिए कहने के बावजूद उस यूट्यूबर ने चिकन खाना जारी रखा, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रेस्टोरेंट से बाहर निकाल दिया। उसके इस हरकत की सोशल मीडिया पर व्यापक निंदा हुई। कई यूजर्स ने इसके पीछे के मकसद पर सवाल उठाए। कुछ ने इसे हिंदू आहार और धार्मिक मूल्यों का जानबूझकर अपमान बताया।

आलोचना बढ़ने के बाद यूट्यूबर सेंजो ने अपनी गलती स्वीकार की। उसने कहा, “मैंने हद पार कर दी।” सेंजो ने स्वीकार किया कि वह अपने यूट्यूब चैनल के लिए एक वीडियो सीरीज़ के तहत इलाके के सभी शाकाहारी रेस्टोरेंट में गए थे। उन्होंने कहा, “अगर मुझे पता होता कि रेस्टोरेंट मंदिर के पास है, तो मैं उस शरारत का वीडियो बनाकर कभी नहीं जाता।” उन्होंने कहा कि उन्होंने रेस्टोरेंट से संपर्क किया और अपने कृत्य के लिए व्यक्तिगत रूप से माफी मांगने के लिए वहां जाने की प्लानिंग की है।

यूट्यूबर ने स्वीकार किया कि उनकी हरकतें “गलत समय पर और गैर-ज़िम्मेदाराना” थीं और हिंदू समुदाय के बारे में जानकारी लेने पर उन्हें एहसास हुआ कि उनकी “शरारत” ने उनके मूल्यों को गहरा ठेस पहुंचाई है। उन्होंने कहा, “वे जानवरों और लोगों के प्रति हिंसा में विश्वास नहीं करते। मेरे कृत्य समुदाय के लिए अपमानजनक थे, और मैं तहे दिल से और ईमानदारी से माफी मांगता हूं।” उन्होंने आगे कहा, “भगवान ही जाने कि उन पर क्या बीत रही होगी, जब वे खुद को सोशल मीडिया पर किसी ऐसी चीज के लिए देख रहे होंगे जिसे मैं मजाक कहूंगा, लेकिन असल में, यह मजाक नहीं था।”

क्या बिहार चुनाव 2025 नहीं लड़ेंगे तेजस्वी? दे दिया बड़ा बयान

राजद नेता तेजस्वी यादव ने चुनाव बहिष्कार पर एक बड़ा बयान दिया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या विपक्ष मिलकर चुनाव का बहिष्कार कर सकता है, तो उन्होंने कहा कि इस पर बात हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि वे देखेंगे कि जनता क्या चाहती है और सबकी क्या राय है? 

  बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और राजद नेता तेजस्वी यादव ने चुनाव बहिष्कार को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर चुनाव निष्पक्ष नहीं होते हैं, तो बहिष्कार भी एक विकल्प हो सकता है। तेजस्वी यादव ने SIR (Special Intensive Revision) ड्राइव को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अब सरकार वोटर चुन रही है, न कि वोटर सरकार। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर विपक्षी पार्टियां आपस में चर्चा कर सकती हैं।

बिहार चुनाव 2025 नहीं लड़ेंगे तेजस्वी?

तेजस्वी यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि चुनाव के बहिष्कार पर चर्चा हो सकती है। उन्होंने कहा कि वे देखेंगे कि जनता क्या चाहती है और बाकी पार्टियों की क्या राय है। तेजस्वी ने आगे कहा कि जब चुनाव ईमानदारी से नहीं करवाया जा रहा है, तो चुनाव क्यों करवा रहे हैं? उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि ऐसा करे कि भाजपा को एक्सटेंशन दे दो। पत्रकार ने सवाल पूछा कि क्या विपक्ष आपसी सहमति से चुनाव बहिष्कार का फैसला ले सकता है? फिर राजद नेता तेजस्वी यादव कहते हैं, ‘इस पर भी चर्चा हो सकती है। हम देखेंगे कि जनता क्या चाहती है और सबकी क्या राय है?’

इजरायल से जंग के लिए ईरान तैयार, नहीं रोकेगा परमाणु कार्यक्रम

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इजरायल को युद्ध की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर इजरायल फिर से हमला करता है तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरान परमाणु कार्यक्रम और शांतिपूर्व कार्य के लिए यूरेनियम संवर्धन से पीछे नहीं हटेगा। 

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि उनका देश इजरायल के खिलाफ युद्ध के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि अगर इजरायल युद्ध छेड़ता है तो उनका देश जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे ईरान और इजरायल के बीच युद्धविराम को लेकर आशावादी नहीं हैं। ईरानी राष्ट्रपति ने इस बात की पुष्टि की कि तेहरान शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है। पिछले महीने इजरायल ने ईरानी परमाणु ठिकानों पर हमला किया था और उनके कई शीर्ष परमाणु वैज्ञानिकों को मार दिया था। इसके बाद इजरायल के कहने पर अमेरिका ने भी बी-2 बमवर्षकों के जरिए ईरानी परमाणु संयंत्रों पर बंकर बस्टर बम गिराए थे।

इजरायल का मुकाबला करने के लिए ईरान तैयार

पेजेशकियन ने बुधवार को अल जजीरा के साथ एक इंटरव्यू में कहा, “हम इज़राइल के किसी भी नए सैन्य कदम के लिए पूरी तरह तैयार हैं और हमारे सशस्त्र बल इजरायल के भीतर फिर से हमला करने के लिए तैयार हैं।” उन्होंने कहा कि ईरान उस युद्धविराम पर निर्भर नहीं है जिसने 12 दिनों के युद्ध को समाप्त किया था। पेजेशकियन ने कहा, “हम इसे लेकर बहुत आशावादी नहीं हैं। इसलिए हमने किसी भी संभावित स्थिति और किसी भी संभावित प्रतिक्रिया के लिए खुद को तैयार कर लिया है। इजरायल ने हमें नुकसान पहुंचाया है, और हमने भी उसे नुकसान पहुंचाया है। उसने हमें जोरदार प्रहार किए हैं, और हमने उसकी गहराई में जाकर उसे कड़ी चोट पहुंचाई है, लेकिन वह अपने नुकसान को छुपा रहा है।”

ईरान का शीर्ष नेतृत्व खत्म करने में इजरायल फेल

उन्होंने आगे कहा कि इजरायल के हमलों, जिनमें प्रमुख सैन्य अधिकारियों और परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या हुई और परमाणु प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा, का उद्देश्य ईरान के शीर्ष नेतृत्व को “खत्म” करना था, “लेकिन वह ऐसा करने में पूरी तरह विफल रहा है।” इजरायली हमलों में ईरान में 900 से ज्यादा लोग मारे गए, जिनमें से ज्यादातर आम नागरिक थे। वहीं, 24 जून को युद्धविराम लागू होने से पहले ईरानी हमलों में इजरायल में कम से कम 28 लोग मारे गए थे।

यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम जारी रहेगा

पेजेशकियन ने कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय विरोध के बावजूद अपना यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम जारी रखेगा और कहा कि उसकी परमाणु क्षमताओं का विकास “अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के दायरे में” किया जाएगा। उन्होंने कहा, “ट्रंप कहते हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए और हम इसे स्वीकार करते हैं क्योंकि हम परमाणु हथियारों को अस्वीकार करते हैं और यह हमारी राजनीतिक, धार्मिक, मानवीय और रणनीतिक स्थिति है।” उन्होंने कहा, “हम कूटनीति में विश्वास करते हैं, इसलिए भविष्य की कोई भी बातचीत दोनों पक्षों के लिए जीत वाली होनी चाहिए, और हम धमकियों और हुक्मों को स्वीकार नहीं करेंगे।”

हमारी परमाणु क्षमताएं हमारे वैज्ञानिकों के दिमाग में

ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि ट्रंप का यह दावा कि “हमारा परमाणु कार्यक्रम समाप्त हो गया है, सिर्फ एक भ्रम है।” उन्होंने कहा, “हमारी परमाणु क्षमताएं हमारे वैज्ञानिकों के दिमाग में हैं, न कि हमारे प्रतिष्ठानों में।” पेजेशकियन की टिप्पणी ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची की पूर्व की टिप्पणियों से मिलती-जुलती है, जिन्होंने सोमवार को प्रसारित अमेरिकी प्रसारणकर्ता फॉक्स न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि तेहरान अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को कभी नहीं छोड़ेगा, बल्कि अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं के लिए बातचीत के ज़रिए समाधान के लिए तैयार है, जिसमें वह प्रतिबंधों के हटने के जवाब में इस कार्यक्रम के शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए होने की गारंटी देगा।

इंडिया आउट से वेलकम मोदी तक… बदले मालदीव के सुर

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे को लेकर काफी उत्सुक हैं। पीएम मोदी मालदीव के स्वतंत्रता दिवस पर बतौर मुख्य अतिथि 25 जुलाई को माले पहुंचेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बैठक भी होगी। ऐसे में जानें कि भारत-मालदीव संबंधों में बदलाव कैसे आया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 जुलाई को दो दिवसीय यात्रा पर मालदीव जाने वाले हैं। उनकी इस यात्रा को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता है। अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी मालदीव के स्वतंत्रता दिवस समारोह में ‘मुख्य अतिथि’ के रूप में शामिल होंगे। यह मोहम्मद मुइज्जू के राष्ट्रपति बनने के बाद भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा भी होगी। मुइज्जू वही राजनेता हैं, जिन्होंने इंडिया आउट के नारे के साथ मालदीव का राष्ट्रपति चुनाव जीता था। उन्होंने सरकार बनाते ही मालदीव में मौजूद भारतीय सैनिकों को देश छोड़ने का भी आदेश दिया था। ये सैनिक मालदीव के नागरिक सेवाओं की मदद कर रहे थे। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर भारत-मालदीव संबंधों में अचानक इतना बदलाव कैसे आया।

भारत ने बताया- कैसे बदले संबंध

मंगलवार को विदेश मंत्रालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि भारत ने दोनों देशों के बीच संबंधों को बहाल करने के लिए कड़ी मेहनत की है। उन्होंने कहा, “हमेशा ऐसी घटनाएं होंगी जो संबंधों को प्रभावित करेंगी या उनमें दखल देने की कोशिश करेंगी। लेकिन मुझे लगता है कि यह इस बात का प्रमाण है कि इस रिश्ते पर कितना ध्यान दिया गया है, जिसमें उच्चतम स्तर पर भी ध्यान दिया गया है।”उन्होंने आगे कहा, “हम इस पर काम करते रहे हैं और मुझे लगता है कि इसके परिणाम आपके सामने हैं। मुझे लगता है कि हम मालदीव में अपने सहयोगियों के साथ भी इस बारे में स्पष्टता और आश्वासन देने के लिए बहुत करीबी चर्चा कर रहे हैं कि हम द्विपक्षीय रूप से क्या करना चाहते हैं, और मुझे लगता है कि इसका परिणाम सभी के सामने है।”

मालदीव को 50 मिलियन डॉलर का कर्ज दे चुका है भारत

उन्होंने कहा कि भारत मालदीव को और वित्तीय सहायता प्रदान करने के तरीकों पर विचार करेगा। भारत पहले ही 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर का ऋण जारी कर चुका है और 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर और 30 बिलियन एमवीआर की मुद्रा अदला-बदली की व्यवस्था कर चुका है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मुइज्जू आपसी हितों के मुद्दों पर चर्चा करेंगे और ‘व्यापक आर्थिक एवं समुद्री सुरक्षा साझेदारी’ के लिए भारत-मालदीव संयुक्त दृष्टिकोण के कार्यान्वयन में प्रगति का जायजा लेंगे।

मालदीव को कर्ज की सख्त जरूरत

मालदीव इस वक्त आर्थिक संकट से गुजर रहा है। ऐसे में मालदीव में कई बुनियादी ढांचा परियोजनाएं पैसों के अभाव में अटकी पड़ी हैं। मालदीव को चीन से भी मदद नहीं मिल रही है। ऐसे में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू को भारत दिखाई दे रहा है। मुइज्जू के नेतृत्व वाली सरकार अगले साल होने वाले स्थानीय परिषद चुनावों से पहले प्रमुख परियोजनाओं के लिए भारत से लगभग 7 अरब यूरो (MVR) उधार लेने की कोशिश कर रही है। मालदीव के न्यूज पोर्टल अधाधु की रिपोर्ट के अनुसार, मुइज्जू सरकार वर्तमान में भारत सरकार से वित्तीय सहायता लेने के लिए बातचीत कर रही है।

ब्रिटेन के साथ डील नहीं ये ट्रंप को मोदी का मैसेज है…

भारत और ब्रिटेन के बीच एक बड़ा व्यापार समझौता होने जा रहा है, जिससे दोनों देशों के आर्थिक रिश्ते मजबूत होंगे। इस समझौते के तहत भारतीय उत्पादों का निर्यात सस्ता होगा और ब्रिटेन से आने वाली व्हिस्की व कारों के दाम घटेंगे। लक्ष्य है कि 2030 तक व्यापार को दोगुना करके 120 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए।

भारत और ब्रिटेन के बीच एक बड़ा व्यापार समझौता होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिटेन यात्रा के दौरान गुरुवार को दोनों देश एक एफटीए यानी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करेंगे। इस समझौते से चमड़ा, जूते और कपड़ों जैसे भारतीय उत्पादों का निर्यात सस्ता होगा। वहीं, ब्रिटेन से आने वाली व्हिस्की और कारों के दाम भी कम होंगे। इस समझौते का लक्ष्य है कि 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करके 120 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए। यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करेगा। सिर्फ इतना ही नहीं, इससे अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप को सीधे मैसेज दिया जाएगा कि समझौते डांट-डपट या टैरिफ की धमकी से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास से होते हैं। यह भारत की ‘इंतजार करो’ की रणनीति की बड़ी जीत भी है।

भारत और ब्रिटेन के बीच एफटीए किसी जल्दबाजी या आर्थिक दबाव के कारण नहीं हुआ है। अलबत्‍ता, यह धैर्यपूर्ण कूटनीति और एक-दूसरे की ‘रेड लाइन’ (ऐसी सीमाएं जिन पर कोई समझौता नहीं होगा) के प्रति सम्मान का नतीजा है। यह समझौता ट्रंप की ‘टैरिफ से चलने वाली रणनीति’ से बिल्कुल अलग है। इससे अमेरिका को कई महत्वपूर्ण बातें समझने को मिलेंगी।

जल्‍दबाजी में नहीं होते समझौते

भारत-ब्रिटेन एफटीए पर 2022 में बातचीत शुरू हुई थी। इसे मई 2025 में पूरा किया गया। बीच में कई बार समय-सीमाएं चूकीं। मसलन, दिवाली 2022 की डेडलाइन। लेकिन, दोनों देशों ने जल्दबाजी में कोई समझौता करने के बजाय इंतजार किया। एक संतुलित और टिकाऊ समझौता करने के लिए जरूरी समय लिया। यह ट्रंप के उस रवैये से बिल्कुल अलग है जहां वह अक्सर टैरिफ की धमकी देकर और मनमानी समयसीमा तय करके व्यापार समझौतों को जल्दबाजी में पूरा करना चाहते हैं। भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं में भी ट्रंप ने ऐसी ही डेडलाइन तय की हैं, जो अक्सर पार हो जाती हैं। लेकिन, कोई ठोस समझौता नहीं होता। भारत-ब्रिटेन डील दिखाती है कि धैर्य और रणनीतिक सोच से बेहतर परिणाम मिलते हैं।

भारत-ब्रिटेन समझौता एक मिसाल है। यह इस बात का उदाहरण है कि कैसे मजबूत और दीर्घकालिक व्यापारिक साझेदारियां डर या दबाव पर नहीं, बल्कि विश्वास और सम्मान पर बनती हैं। दोनों देशों ने अपनी मुख्य मांगों पर समझौता नहीं किया। लेकिन, साझा जमीन तलाशने के लिए वास्तविक राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई। इसके उलट ट्रंप प्रशासन की रणनीति टैरिफ की धमकियों और जबरदस्ती पर बहुत अधिक निर्भर करती है। इससे भारत जैसे संप्रभुता और नीतिगत स्वतंत्रता को महत्व देने वाले पार्टनर्स को दूर करने का जोखिम रहता है। यह डील अमेरिका को संदेश देती है कि कूटनीति और सम्मान ही स्थायी समझौतों की कुंजी हैं।

धैर्य कमजोरी नहीं, बल्कि एक रणनीति

भारत, ब्रिटेन और अमेरिका जैसी बड़ी और विविध अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार वार्ताओं में जटिल नीतिगत, कानूनी और राजनीतिक मुद्दे शामिल होते हैं। भारत एक लोकतांत्रिक देश है। इसकी गहरी आर्थिक प्राथमिकताएं और राजनीतिक संवेदनशीलताएं हैं। टैरिफ संरचनाओं से लेकर श्रम गतिशीलता और सामाजिक सुरक्षा अधिकारों तक के मुद्दे लाखों हितधारकों को प्रभावित करते हैं। भारत-ब्रिटेन डील दिखाती है कि इन जटिलताओं को छोटी समयसीमा या आर्थिक दंड की धमकी देकर हल नहीं किया जा सकता। अमेरिका को यह समझना चाहिए कि भारत जैसे देश अपनी आंतरिक संवेदनशीलता के कारण जल्दबाजी में कोई भी समझौता नहीं करेंगे।

भारत ने इन वार्ताओं में दबाव में आकर झुकने के बजाय इंतजार करने का संकेत दिया है। यह अमेरिकी वार्ताकारों को सोचने पर मजबूर करना चाहिए। ट्रंप प्रशासन को यह समझना चाहिए कि विश्वास और सम्मान पर आधारित विश्वसनीय, दीर्घकालिक व्यापारिक साझेदारियां ही टिकती हैं। भारत-ब्रिटेन FTA यह दिखाता है कि धैर्य कमजोरी नहीं, बल्कि एक रणनीति है। यह दीर्घकालिक सफलता की ओर ले जाती है। अमेरिका को ब्रिटेन के धैर्य और कूटनीतिक दृढ़ता से सीख लेनी चाहिए।

दोनों के लिए विन-विन मॉडल

भारत-ब्रिटेन एफटीए से दोनों देशों को ठोस आर्थिक लाभ होने की उम्मीद है। भारत को चमड़ा, जूते और कपड़ों जैसे श्रम-प्रधान उत्पादों के निर्यात में रियायती दरों का लाभ मिलेगा। वहीं, ब्रिटेन से व्हिस्की और कारों का आयात सस्ता हो जाएगा। यह समझौता 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 120 अरब डॉलर तक पहुंचाने में मदद करेगा। यह दिखाता है कि जब दोनों पक्ष एक-दूसरे के हितों का ध्यान रखते हुए बातचीत करते हैं तो कैसे ‘विन-विन’ स्थिति बनती है। ट्रंप प्रशासन को ऐसे ‘विन-विन’ समझौतों पर ध्यान देना चाहिए। बजाय इसके कि वह सिर्फ एकतरफा लाभ हासिल करने की कोशिश करे।

कपड़े उतराने को किया मजबूर, नौ घंटे तक बेंगलुरु में दो महिला को रखा बंधक, डिजिटल अरेस्ट में लांघी सारी हदें

 कर्नाटक के बेंगलुरु से डिजिटल अरेस्ट का घिनौना चेहरा सामने आया है। मुंबई से पुलिसकर्मी बनकर दो महिलाओं को डिजिटल अरेस्ट करने के बाद जालसाज ने कपड़े उतरने को विवश किया। डिजिटल अरेस्ट में नौ घंटे तक बंधक बनाकर रखा। कर्नाटक की राजधानी में रहने वाली दो महिलाओं के साथ यह घटना 17 जुलाई को हुई। इस घटना ने मानसिक तौर पर दोनों महिलाओं को अंदर तक हिला दिया है। महिलाओं ने पुलिस को अपनी आपबीती में बताया है कि कैसे उन्हें वीडियो कॉल पर पर पुलिस अधिकारी के तौर पेश हुए शख्स ने कपड़े उतारने को मजबूर किया।

मेडिकल जांच का दिया हवाला
पुलिस के अनुसार यह घटना 17 जुलाई को हुई जब महिला और उसकी बचपन की दोस्त को एक व्यक्ति का फ़ोन आया जिसने खुद को मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन से होने का दावा किया।महिलाओं को नौ घंटे तक वीडियो कॉल पर रखा गया, जहां कथित तौर पर उन्हें ऑनलाइन मेडिकल जांच के लिए कपड़े उतारने पर मजबूर किया गया। धोखेबाजों ने महिलाओं को जन्मचिह्नों (बर्थ मॉर्क) और तिलों की पहचान के लिए कपड़े उतारने का आदेश दिया। इस दौरान उन्होंने वीडियो रिकॉर्ड किए और महिलाओं की तस्वीरें लीं।

जांच में जुटी बेंगलुरु पुलिस
पुलिस को इस घटना के बारे में तब पता चला जब शनिवार को एक 46 साल महिला पूर्वी सीईएन पुलिस स्टेशन पहुंची। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत शिकायत दर्ज की गई। महिला ने बताया कि महिला और उसकी बचपन की दोस्त को एक व्यक्ति का फ़ोन आया जिसने खुद को मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन का अधिकारी बताया। ‘अधिकारी’ ने महिला और उसकी दोस्त, जो थाईलैंड में योग प्रशिक्षक है और वहां आई थी, पर मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का आरोप लगाया। उन पर जेट एयरवेज़ मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़े होने का आरोप लगाया गया। शिकायत के अनुसार, जब महिला ने इन आरोपों से इनकार किया, तो धोखेबाज़ ने पीड़िता के डेबिट कार्ड की विशिष्ट जानकारी साझा की और विश्वसनीयता स्थापित करने की कोशिश की।

फर्जी दस्तवेजों झांसे में लिया
महिला ने पुलिस को बताया है कि आरोपी ने गिरफ्तारी वारंट और एक फर्जी सीबीआई पहचान पत्र सहित कई फर्जी दस्तावेज दिए। ये दस्तावेज़ इतने विश्वसनीय थे कि महिलाओं को लगा कि वे अधिकारियों से बात कर रही हैं। महिला ने बताया कि हमें घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी, क्योंकि उनका दावा था कि हम पर नज़र रखी जा रही है। इसके बाद महिलाओं से सत्यापन के लिए एक विशिष्ट खाते में पैसे ट्रांसफर करने को कहा गया और उन्हें पूरा पैसा वापस करने का वादा किया गया। इसके बाद प्रशिक्षक ने धोखेबाजों को 58,447 रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब महिलाओं को नग्न होने का कहा गया तब उन्हें यह नहीं पता था कि उनकी रिकॉर्डिंग की जा रही है।


फोटो भेजकर जालसाधों धमकाया

पीड़ित महिला ने पुलिस को आपबीती में बताया हैकि घंटों की प्रताड़ना के बाद प्रशिक्षक ने व्हाट्सएप कॉल के ज़रिए अपने एक दोस्त से संपर्क किया। जिसने उन्हें कॉल डिस्कनेक्ट करने और तुरंत कोई भी पैसा ट्रांसफर करने से मना करने की सलाह दी। जब धोखेबाज महिलाओं से संपर्क नहीं कर पाए, तो उन्होंने उन्हें तस्वीरें और वीडियो भेजकर उन्हें सार्वजनिक करने की धमकी दी। हालांकि दोनों महिलाओं ने तस्वीरें डिलीट कर दीं और पुलिस से संपर्क किया। पुलिस के अनुसार पूरे मामले की जांच की जा रही है।

क्या इस्तीफे के बाद जगदीप धनखड़ का दफ्तर सील कर दिया गया है?

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के भ्रामक दावे किए जा रहे हैं। एक दावा है कि उपराष्ट्रपति के आवास को सील कर दिया गया है। पीआईबी ने इस दावे को पूरी तरह से गलत बताया है। पीआईबी ने कहा है कि यह खबर भ्रामक है।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर तमाम तरह के दावे किए जा रहे हैं। अटकलों का बाजार भी गर्म है। इसी क्रम में एक दावा यह भी किया जा रहा है कि उपराष्ट्रपति के दफ्तर को सरकार द्वारा सील कर दिया गया है और पूर्व उपराष्ट्रपति को तुरंत अपना सरकारी आवास खाली करने के लिए कहा गया है। तो चलिए बताते हैं इस खबर की आखिर सच्चाई क्या है।

दरअसल, भारत सरकार की नोडल एजेंसी पीआईबी ने फैक्ट चेक करके इस दावे की हवा निकाल दी है। पीआईबी ने इसकी सच्चाई को उजागर कर दिया है। दरअसल, पीआईबी ने एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि सोशल मीडिया पर यह दावा व्यापक रूप से किया जा रहा है कि उपराष्ट्रपति के आधिकारिक दफ्तर को सील कर दिया गया है और पूर्व उपराष्ट्रपति को तुरंत अपना आवास खाली करने के लिए कहा गया है। लेकिन यह खबर पूरी तरह से भ्रामक और झूठी है। गलत सूचनाओं पर ध्यान न दें। किसी भी खबर को शेयर करने से पहले हमेशा आधिकारिक स्रोतों से उसकी पुष्टि कर लें।

फिलहाल जगदीप धनखड़ का ठिकाना कहां हैं?
बता दें कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ फिलहाल पार्लियामेंट कैंपस के पास चर्च रोड पर बने उपराष्ट्रपति एनक्लेव में रह रहे हैं। वह पिछले साल ही इस बंगला में शिफ्ट हुए थे। यानी उपराष्ट्रपति फिलहाल दिल्ली में ही हैं। अब पीएम मोदी के विदेश से लौटने के बाद इसपर और सियासत तेज हो सकती है।

मिग-21 के र‍िटायरमेंट के बाद निजी कंपनियां संभालेंगी मोर्चा, इन पर बड़ा दारोमदार

भारतीय वायुसेना अपने पुराने मिग-21 विमानों को धीरे-धीरे हटा रही है। ये विमान ‘उड़ता ताबूत’ के नाम से जाने जाते थे। इनकी जगह अब स्‍वदेशी तेजस विमान लेंगे। रक्षा मंत्रालय ने निजी कंपनियों को भी तेजस के उत्‍पादन में शामिल किया है। सरकार पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के विकास पर भी ध्‍यान दे रही है।

 भारतीय वायुसेना आखिरकार अपने दशकों पुराने मिग-21 लड़ाकू विमानों को चरणबद्ध तरीके से हटा रही है। इन्‍हें अक्सर ‘उड़ता ताबूत’ कहा जाता है। 2006 की फिल्म ‘रंग दे बसंती’ ने इन विमानों से जुड़े हादसों की वास्तविकता को उजागर किया था। मई 2023 में हनुमानगढ़, राजस्थान में हुई मिग-21 दुर्घटना ने एक बार फिर इसकी पुष्टि की। सितंबर 2025 तक वायुसेना की नंबर 23 स्क्वाड्रन अपने बचे हुए ‘बाइसन’ वेरिएंट विमान भी हटा देगी। इससे इन विमानों की छह दशकों की सेवा का अंत हो जाएगा। यह सिर्फ एक विमान का रिटायरमेंट नहीं है, बल्कि भारत के रक्षा आधुनिकीकरण में उम्रदराज प्लेटफार्मों, रुकी हुई परियोजनाओं और महत्वाकांक्षा के बीच के अंतर के एक अध्याय का अंत है। मिग-21 की अंतिम विदाई और एचएएल की चुनौतियों के बीच अब निजी रक्षा फर्मों को बढ़ावा मिलेगा। भारतीय वायुसेना के लिए निजी फर्मों की अहमियत काफी ज्‍यादा बढ़ने वाली है। पांचवीं पीढ़ी की लड़ाकू विमानों का भविष्‍य इन्‍हीं पर टिका है। यह बड़े बदलाव का संकेत देता है।

1963 में मिग-21 को भारत के पहले सुपरसोनिक फाइटर जेट के रूप में शामिल किया गया था। भारतीय वायुसेना के इतिहास का यह अभिन्न अंग रहा है। इसने 1965 और 1971 के युद्धों, कारगिल संघर्ष (1999) और बालाकोट हवाई हमलों (2019) सहित हर बड़े सैन्य अभियान में हिस्‍सा लिया। भारत ने 850 से ज्‍यादा मिग-21 विमान हासिल किए। भारतीय वायुसेना का ये अब तक का सबसे बड़ा लड़ाकू बेड़ा था। इसमें से लगभग 600 का निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने घरेलू स्तर पर किया। हालांकि, इसका एक उपनाम ‘उड़ता ताबूत’ भी था। यह अपने दुर्घटना रिकॉर्ड के लिए बदनाम था। कई पायलटों ने इसमें अपनी जान गंवाई। इन विमानों को लंबे समय तक सेवा में रखा गया। इनकी जगह लेने के लिए कोई और सही विकल्‍प नहीं था।

मिग-21 को बदलने की मूल योजना स्वदेशी तेजस Mk-1A विमानों से थी। फरवरी 2021 में रक्षा मंत्रालय ने एचएएल के साथ 83 तेजस Mk-1A जेट के लिए 48,000 करोड़ रुपये का अनुबंध किया था। पहली डिलीवरी मार्च 2024 तक होनी थी। लेकिन, यह डेडलाइन बीत गई। एक भी जेट डिलीवर नहीं हुआ।

एचएल के पास अपनी तरह की चुनौतियां

एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने सार्वजनिक रूप से एचएएल से समय पर वादे पूरे करने की अपील की थी। एचएएल ने इस देरी के लिए जीई एयरोस्पेस से इंजन की सप्‍लाई में देरी को मुख्य कारण बताया था। मध्य-2025 तक एचएएल को सिर्फ एक इंजन मिला था, जबकि 12 और मार्च 2026 तक अपेक्षित हैं। एचएएल ने उत्पादन बढ़ाने के लिए अपनी बेंगलुरु सुविधा का पुनर्गठन किया है। एक समानांतर असेंबली लाइन भी जोड़ी है। इसका लक्ष्य प्रति वर्ष 16 जेट डिलीवर करना है, बशर्ते सप्‍लाई चेन स्थिर रहे। कुल 83 जेट 2028 तक पूरे करने का लक्ष्य है। इसके बाद 97 और Mk-1A के लिए 67,000 करोड़ रुपये का लंबित ऑर्डर 2031 तक पूरा किया जाएगा। लेकिन, यह सब अभी भी एक नाजुक सप्‍लाई चेन को ठीक करने और एचएएल के डिलीवरी रिकॉर्ड को बेहतर बनाने पर निर्भर करता है।

अब फ्रंट लाइन में निजी रक्षा फर्में

इस तात्कालिकता को पहचानते हुए रक्षा मंत्रालय ने रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में पांच-सदस्यीय रक्षा सशक्तिकरण समिति का गठन किया। इस समिति ने हल्के लड़ाकू विमान (LCA) तेजस उत्पादन श्रृंखला को रफ्तार देने के लिए निजी खिलाड़ियों को शामिल करने का प्रस्ताव दिया। यह प्रक्रिया अब चल रही है। अल्फा टोकोल इंजीनियरिंग, VEM टेक्नोलॉजीज, L&T, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, डायनामिक टेक्नोलॉजीज, लक्ष्मी मशीन वर्क्स और एम्फेनोल जैसी निजी फर्मों ने तेजस Mk-1A के विभिन्न हिस्सों की सप्‍लाई शुरू कर दी है। एचएएल ने भी उत्पादन बढ़ाने के लिए तीन उत्पादन लाइनें खोली हैं। इनमें से एक नासिक में है। इसका लक्ष्य 2026-27 तक सालाना 30 विमानों का उत्पादन करना है।

पांचवीं पीढ़ी के विमान: निजी फर्मों पर दारोमदार

अगला बड़ा कदम एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम है। इसके तहत भारत का पहला पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर बनाया जाना है। इस बार, एचएएल का निष्पादन पर एकाधिकार नहीं होगा। एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) निजी फर्मों को स्वतंत्र रूप से बोली लगाने, कंसोर्टियम बनाने या विदेशी OEM के साथ साझेदारी करने के लिए आमंत्रित करेगी। सरकार रफ्तार, पैमाने और जवाबदेही चाहती है। वह यह स्पष्ट कर रही है कि एचएएल के पास अब प्रमुख लड़ाकू जेट कार्यक्रमों के लिए विशेष अधिकार नहीं हैं। 15,000 करोड़ रुपये का आवंटन पांच उड़ान प्रोटोटाइप और व्यापक उड़ान-परीक्षण के लिए किया गया है। भारतीय वायुसेना का लक्ष्य 2040 के दशक की शुरुआत तक सात स्क्वाड्रन या लगभग 126 जेट प्राप्त करना है।

ड्रोन के विकास में निजी रक्षा क्षेत्र की भूमिका

पिछले कुछ वर्षों में भारत की निजी रक्षा कंपनियां हाशिये से इकोसिस्‍टम के केंद्र में आ गई हैं। टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, L&T, पारस डिफेंस, अल्फा डिजाइन और भारत फोर्ज जैसी कंपनियां अब सिर्फ सप्‍लायर नहीं हैं, बल्कि साझेदार भी हैं। सरकार की iDEX और SRIJAN जैसी पहलों ने इस बदलाव को बढ़ावा दिया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में रक्षा निर्यात 24,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। सरकार इसे 2029 तक दोगुना करना चाहती है। अडानी डिफेंस, पारस डिफेंस, आईडियाफोर्ज और IG ड्रोन भी इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

दिल्ली से इस साल 8000 लोग लापता, नहीं लग रहा सुराग

दिल्ली में इस साल 1 जनवरी से 23 जुलाई के बीच 7880 से ज़्यादा लोग लापता हो गए हैं, जिनमें सबसे ज्यादा मामले बाहरी उत्तरी जिले में दर्ज हुए हैं। जिनपेट के आंकड़ों के अनुसार, लापता लोगों में 4753 महिलाएं और 3133 पुरुष शामिल हैं।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से इस वर्ष एक जनवरी से 23 जुलाई के बीच लापता हुए 7880 से अधिक लोगों का अबतक कोई सुराग नहीं मिल पाया है, और ऐसे मामलों की सबसे अधिक संख्या बाहरी उत्तरी जिले की है। यह जानकारी जोनल इंटीग्रेटेड पुलिस नेटवर्क (जिपनेट) के आंकड़ों से मिली है।

लापता में महिलाएं अधिक
जिपनेट के मुताबिक जिन व्यक्तियों का सुराग नहीं मिला है उनमें 4,753 महिलाएं और 3,133 पुरुष शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक बाहरी उत्तरी दिल्ली जिले में गुमशुदगी के सबसे अधिक 908 मामले दर्ज किये गए हैं, जो बवाना, स्वरूप नगर और समयपुर बादली जैसे इलाकों के हैं। इसके मुताबिक नयी दिल्ली जिले में लापता लोगों की संख्या सबसे कम 85 है।

उच्च सुरक्षा वाले नयी दिल्ली क्षेत्र में तिलक मार्ग, चाणक्यपुरी और संसद मार्ग जैसे क्षेत्र शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक उत्तर पूर्वी जिले में 730 मामले दर्ज किए गए, जो दूसरे स्थान पर है। इसके बाद दक्षिण पश्चिम जिले में 717, दक्षिण पूर्व जिले में 689 और बाहरी जिले में 675 मामले दर्ज किए गए।

किस इलाके से कितने मिसिंग
जिपनेट के मुताबिक द्वारका में 644, उत्तर पश्चिम जिले में 636, पूर्वी जिले में 577 और रोहिणी जिले में गुमशुदगी के 452 ऐसे मामले दर्ज किए गए। मध्य जिले में 363 लोगों का सुराग नहीं मिल पाया है, जबकि उत्तर, दक्षिण और शाहदरा जिलों में क्रमश: 348, 215 और 201 लोग अब भी लापता हैं।

आंकड़ों के मुताबिक एक जनवरी से 23 जुलाई के बीच 1,486 शव अज्ञात लोगों के मिले जिनमें से अधिकांश पुरुषों के थे। आंकड़ों के अनुसार, उत्तरी जिले में सबसे अधिक 352 शव मिले जिनकी शिनाख्त स्थापित नहीं हो सकी। इनमें कोतवाली, सब्जी मंडी और सिविल लाइंस जैसे इलाके शामिल हैं।

इसी प्रकार मध्य जिले में 113, उत्तर पश्चिम में 93, दक्षिण पूर्व में 83, दक्षिण पश्चिम और उत्तर पूर्व में 73-73, बाहरी में 65, पूर्व और नई दिल्ली में 55-55, पश्चिम और बाहरी उत्तर में 54-54, रोहिणी में 44, शाहदरा में 42, द्वारका में 35, दक्षिण में 26 और रेलवे में 23 शव मिले जिनकी शिनाख्त नहीं हो सकी।

क्या है जिनपेट
जिपनेट एक केंद्रीकृत डेटाबेस है जिसका इस्तेमाल कानून प्रवर्तन एजेंसियां लापता व्यक्तियों और अज्ञात शवों का पता लगाने के लिए करती हैं। यह डेटाबेस कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का डेटा संकलित करता है।

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