आज के बड़े इवेंट
> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज विदेशी दौरे पर मालदीव पहुंचेंगे
ब्रिटेन के साथ ट्रेड डील के बाद भारत में क्या होगा सस्ता?
भारत और ब्रिटेन ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की मौजूदगी में यह समझौता हुआ। इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार में बढ़ोतरी होगी। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटिश मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड ने हस्ताक्षर किए।
भारत और ब्रिटेन ने ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) किया है। गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन में उनके समकक्ष कीर स्टारमर की मौजूदगी में इस समझौते पर हस्ताक्षर हुए। करीब तीन साल से इस समझौते पर बातचीत चल रही थी। इस डील से दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 34 अरब डॉलर सालाना बढ़ने की उम्मीद है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और उनके ब्रिटिश समकक्ष जोनाथन रेनॉल्ड ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते से भारत को ब्रिटेन से आयात होने वाले कई उत्पादों पर टैरिफ में कटौती देखने को मिलेगी। साथ ही, भारत में निर्यात करने वाले व्यवसायों को भी बहुत फायदा होगा। भारत और ब्रिटेन के बीच हुए इस मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से भारत में कई ब्रिटिश उत्पाद सस्ते हो जाएंगे। इससे भारतीय उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा। द्विपक्षीय व्यापार को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। आइए, यहां जानते हैं कि डील के बाद भारत में क्या-क्या सस्ता हो जाएगा।
भारत में क्या-क्या हो जाएगा सस्ता?
इस डील से भारत में कई ब्रिटिश उत्पादों के टैरिफ में भारी कमी आएगी। यहां उन प्रमुख चीजों की लिस्ट दी गई है जो भारत में सस्ते हो सकते हैं:
च व्हिस्की और जिन: इन पर लगने वाला टैरिफ यानी आयात शुल्क तुरंत 150% से घटकर 75% हो जाएगा। अगले 10 सालों में इसे 40% तक कम कर दिया जाएगा। इससे स्कॉच व्हिस्की और जिन भारत में काफी किफायती हो जाएंगे।
लग्जरी कारें: ब्रिटेन में बनीं लक्जरी कारों पर आयात शुल्क 100% से ज्यादा घटकर कोटा मैकेनिज्म के तहत 10% तक आ जाएगा। इससे रोल्स-रॉयस, जगुआर, लैंड रोवर जैसी कारें सस्ती हो जाएंगी।
सॉफ्ट ड्रिंक्स और कॉस्मेटिक्स: ब्रिटेन से आयातित सॉफ्ट ड्रिंक्स और सौंदर्य प्रसाधन (कॉस्मेटिक्स) जैसे उत्पादों पर औसत टैरिफ 15% से घटकर 3% हो जाएगा। इससे ये भारतीय उपभोक्ताओं के लिए अधिक सुलभ हो जाएंगे।
मेडिकल डिवाइसेस और एयरोस्पेस पार्ट्स: भारत में मेडिकल डिवाइस और एयरोस्पेस पार्ट्स जैसे कई उत्पादों को ब्रिटेन से किफायती दामों पर आयात किया जा सकेगा, जो भारतीय उद्योगों और लोगों के लिए लाभदायक होगा।
इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद: ब्रिटेन से आने वाले मोबाइल, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स पर भी टैक्स कम होने की संभावना है। इससे वे सस्ते हो सकते हैं।
जूते, कपड़े और फैशन उत्पाद: ब्रिटेन से आयात होने वाले जूते, कपड़े, फैशन से जुड़े सामान और चमड़े के उत्पादों पर भी शुल्क कम होगा। इससे इनकी कीमतें घटेंगी।
आभूषण और रत्न: यूके से आने वाले आभूषणों और रत्नों पर भी कस्टम ड्यूटी घटने से उनकी कीमतों में कमी आ सकती है।
कुछ खाद्य उत्पाद: चॉकलेट और बिस्कुट जैसे ब्रिटिश फूड प्रोडक्ट पर भी टैरिफ कम होगा। इससे वे सस्ते हो जाएंगे। डेयरी उत्पादों जैसे संवेदनशील कृषि उत्पादों को टैरिफ छूट से बाहर रखा गया है।
भारत को मिलने वाले अन्य बड़े फायदे
भारतीय निर्यातकों को बढ़ावा: इस समझौते से लगभग 99% भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। इससे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए लगभग 23 अरब डॉलर के अवसर खुलेंगे। इससे कपड़ा, रत्न और आभूषण, ऑटो कंपोनेंट्स, जूते और मशीनरी जैसे क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिलेगा।
सर्विस सेक्टर को बढ़ावा: भारतीय फर्मों और फ्रीलांसरों को ब्रिटेन के 36 सेवा क्षेत्रों में बिना ‘इकोनॉमिक नीड्स टेस्ट’ के पहुंच मिलेगी। भारतीय पेशेवर 35 ब्रिटिश क्षेत्रों में 24 महीने तक काम कर सकेंगे, भले ही उनका देश में कोई कार्यालय न हो।
सामाजिक सुरक्षा भुगतान में छूट: भारतीय पेशेवरों को इस डील के तहत तीन साल के लिए ब्रिटेन के सामाजिक सुरक्षा भुगतान से छूट मिलेगी। इससे उन्हें सालाना हजारों पाउंड की बचत होगी।
यह समझौता भारत-ब्रिटेन के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और रोजगार सृजन के नए रास्ते खोलेगा।
एयर इंडिया ने फिर तोड़े नियम, DGCA ने थमाए 4 नोटिस
डीजीसीए ने एयर इंडिया को पायलटों को 4 कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं, खासकर लंबी उड़ानों में नियमों के उल्लंघन पर ये नोटिस जारी किए गए हैं। एयर इंडिया का कहना है कि ये नोटिस स्वैच्छिक खुलासों से संबंधित हैं और वे जवाब देंगे।
एविएशन रेगुलेटर डीजीसीए ने एयर इंडिया को विभिन्न नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में चार कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। इनमें एयर इंडिया के पायलटों के आराम करने, डयूटी स्टैंडर्ड, ट्रेनिंग और ऑपरेशन प्रक्रियाओं से संबंधित हैं। इसमें भी संयुक्त रूप से 16 घंटे से अधिक टाइम वाली अल्ट्रा लांग फ्लाइटों के दौरान नियम अधिक तोड़े जाना बताया गया है। इससे पहले भी नियम तोड़ने पर डीजीसीए एयर इंडिया को नोटिस थमाने समेत पेनल्टी लगा चुका है।
मामले में एयर इंडिया का कहना है कि डीजीसीए से मिले ये नोटिस पिछले एक साल में एयर इंडिया द्वारा किए गए कुछ स्वैच्छिक खुलासों से संबंधित हैं। हम निर्धारित अवधि के भीतर इन नोटिस का जवाब देंगे। सूत्रों का कहना है कि इन नोटिसों में इस साल 22 अप्रैल को एक फ्लाइट, 27 अप्रैल को दो फ्लाइट, एक फ्लाइट 28 अप्रैल को और दो मई को आपरेट की गई एक उड़ान में नियमों के उल्लंघन करने का आरोप है।
पिछले साल 26 जुलाई और नौ अक्टूबर की फ्लाइटों में नियम तोड़े गए। एयर इंडिया द्वारा डीजीसीए को इन उल्लंघनों के बारे में 20 और 21 जून को जानकारी दी गई थी। इसके एक महीने बाद अब जाकर डीजीसीए ने 23 जुलाई को एयर इंडिया को चार कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
इससे पहले पिछले महीने 12 जून को अहमदाबाद से लंदन के गैटविक जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-171 अहमदाबाद में क्रैश हो गई थी। हादसे में प्लेन में सवार 242 में से 241 और 29 बाहरी लोगों की मौत हो गई थी। इसकी जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) द्वारा की जा रही है।
इस साल एयर इंडिया के हवाई जहाजों में हो रही सबसे अधिक तकनीकी खामियां
देश की तमाम एयरलाइंस में से सबसे अधिक एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के हवाईजहाजों में सबसे अधिक तकनीकी खामियों के मामले सामने आए हैं। लोकसभा में गुरुवार को नागर विमानन मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी में बताया गया कि 2022 से 21 जुलाई 2025 तक एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, इंडिगो, स्पाइसजेट और अन्य एयरलाइंस की 1580 फ्लाइटों में तकनीकी गड़बड़ी सामने आई। इस साल 21 जुलाई तक 183 विमानों में तकनीकी खामियां सामने आई।
इनमें 85 खामियां एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइटों की थी। इंडिगो और आकाशा एयर के विमानों में क्रमशः 62 और 28 तकनीकी खामियों की सूचना डीजीसीए को दी गई। स्पाइसजेट ने 8 खामियों की सूचना दी। जबकि साल 2024 में 421, 2023 में 448 और 2022 में 528 विमानों में तकनीकी खामियां सामने आई थी। सरकार ने यह भी बताया कि निर्देश का पालन नहीं करने पर एयर इंडिया एक्सप्रेस के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई।
अहमदाबाद प्लेन क्रैश के बाद कई पायलट मेडिकल लीव पर चले गए थे
डीजीसीए ने एयर बस ए-320 विमानों में लगे इंजनों के संबंध में निर्देश का पालन न करने पर एयर इंडिया एक्सप्रेस के जिम्मेदार कर्मियों पर यह एक्शन लिया। जिसमें 1.5 लाख रुपये के आर्थिक दंड के साथ वॉर्निंग लेटर जारी किया गया। लोकसभा में यह भी बताया गया कि अहमदाबाद में 12 जून को हुए प्लेन क्रैश के बाद एयर इंडिया के कितने ही पायलट अचानक मेडिकल लीव पर गए थे। इसमें अकेले 16 जून को ही 112 पायलटों ने छुट्टी ली थी। नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि इनमें 51 कमांडर (पी1) और 61 ‘फर्स्ट ऑफिसर’ (पी2) शामिल थे।
दो आशियान देशों के बीच छिड़ी जंग, 11 की मौत
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद बढ़ गया है। दोनों देशों के सैनिकों के बीच गुरुवार को सीमा पर काफी तनातनी देखने को मिली। दोनों ने एक-दूसरे पर गोलीबारी की, जिसमें कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में ज्यादातर आम नागरिक हैं। दोनों पक्षों ने छोटे हथियारों से गोलीबारी की और तोप से गोले दागे और रॉकेट से हमले किए। थाईलैंड ने भी हवाई हमले किए। थाईलैंड-कंबोडिया का यह विवाद भारत के लिए एक चेतावनी की तरह है।

दो एशियाई देशों थाईलैंड और कंबोडिया ने दुनियाभर का ध्यान खींचा है। इसकी वजह दोनों की सेनाओं में गुरुवार सुबह शुरू हुई लड़ाई है। दोनों देशों ने विवादित सीमा क्षेत्र में एक-दूसरे पर गोलीबारी की। इसके बाद तनाव बढ़ा और थाईलैंड की एयरफोर्स ने कंबोडिया में बमबारी कर दी। इससे दोनों देश जंग के मुहाने पर आ गए हैं। अब है कि ये लड़ाई क्या रुख ले सकती है। खासतौर से दोनों देशों की सरकारों की ओर से संघर्ष को बढ़ाने का डर है।
थाईलैंड ने अब तक 12 लोगों की मौत की पुष्टि की है। संघर्ष के चलते सैकड़ों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है। बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कंबोडिया और थाईलैंड के बीच भीषण गोलीबारी हुई है। हालांकि ये जल्दी ही रुक गई लेकिन खतरा टला नहीं है। इसकी एक बड़ी वजह दोनों देशों का नेतृत्व है। फिलहाल ऐसा नहीं लगता कि यह संघर्ष पूर्ण युद्ध में बदलेगा लेकिन दोनों देशों के नेतृत्व में टकराव टालने और मुश्किल हालात से पार पाने की क्षमता का अभाव दिखता है।
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद बढ़ गया है। दोनों देशों के सैनिकों के बीच गुरुवार को सीमा पर काफी तनातनी देखने को मिली। दोनों ने एक-दूसरे पर गोलीबारी की, जिसमें कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में ज्यादातर आम नागरिक हैं। दोनों पक्षों ने छोटे हथियारों से गोलीबारी की और तोप से गोले दागे और रॉकेट से हमले किए। थाईलैंड ने भी हवाई हमले किए। थाईलैंड-कंबोडिया का यह विवाद भारत के लिए एक चेतावनी की तरह है।
दरअसल भारत के आसियान देशों के साथ गहरे व्यापारिक संबंध हैं। यह संकट आसियान की एकता को खतरे में डाल सकता है, यह विवाद शरणार्थियों के पलायन का जोखिम भी बढ़ाता है। यूएनएचसीआर के अनुसार, 2011 में 10,000 कंबोडियाई लोग विस्थापित हुए थे, जिससे भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। बता दें कि आसियान दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन है, जिसमें 10 देश शामिल हैं जो व्यापार, सुरक्षा, शिक्षा में सहयोग को बढ़ावा देता है।
यह विवाद आसियान की एकता को खतरे में डाल सकता है। भारत का इस क्षेत्र के साथ 130 अरब डॉलर का व्यापार है। भारत का चीन के साथ सीमा विवाद भी है। इस विवाद में भारत हर साल 10 अरब डॉलर खर्च करता है। नीति आयोग की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, ‘यह विवाद आर्थिक रूप से नुकसानदायक है।’ UNHCR के अनुसार, 2011 में 10,000 कंबोडियाई लोग विस्थापित हुए थे। इस विवाद से भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए, बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से इस समस्या का समाधान करना जरूरी है। नहीं तो, यह पूरे क्षेत्र के लिए खतरा बन सकता है।
क्रिकेटर यश दयाल पर दूसरी बार रेप का आरोप
आईपीएल सीजन 18 की चैंपियन टीम रॉयल चैलेंजर बेंगलुरु के तेज गेंदबाज यश दयाल के खिलाफ रेप का एक और केस दर्ज हुआ है। पिछले दिनों यूपी के गाजियाबाद में केस दर्ज हुआ था और अब जयपुर के सांगानेर सदर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। जयपुर के कालवाड़ निवासी एक लड़की ने यश दयाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए दुष्कर्म का केस दर्ज कराया है।
आईपीएल सीजन 18 की चैंपियन टीम रॉयल चैलेंजर बेंगलुरु के तेज गेंदबाज यश दयाल के खिलाफ रेप का एक और केस दर्ज हुआ है। पिछले दिनों यूपी के गाजियाबाद में केस दर्ज हुआ था और अब जयपुर के सांगानेर सदर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। जयपुर के कालवाड़ निवासी एक लड़की ने यश दयाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए दुष्कर्म का केस दर्ज कराया है। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया है। यानी कि पीड़ित लड़की नाबालिग है। उसकी उम्र 18 वर्ष से कम है। इस केस में क्रिकेटर यश दयाल की मुश्किलें बढ़ना तय है।
नाबालिग ने लगाए ये गंभीर आरोप
बुधवार 23 जुलाई की शाम को जयपुर शहर के कालवाड़ रोड क्षेत्र में रहने वाली एक लड़की ने सांगानेर सदर थाने में केस दर्ज कराया है। लड़की का आरोप है कि क्रिकेटर यश दयाल ने उसे कई तरह के प्रलोभन देकर नजदीकियां बढाई। क्रिकेट में केरियर बनाने और उसके तमाम ख्वाब पूरे करने का दावा करते हुए दुष्कर्म किया। पीड़ित लड़की का कहना है यश दयाल ने उसकी भावनात्मक और पारिवारिक कमजोरी का फायदा उठाते हुए देहशोषण किया। उसने 11 और 12 अप्रैल 2025 की रात को सीतापुरा स्थित होटल इंटर कॉन्टीनेंटल में बुलाकर दुष्कर्म किया। मामले की जांच इंस्पेक्टर अनिल जैमन कर रहे हैं।
आरसीबी के इस धांसू गेंदबाज के खिलाफ इसी महीने 6 जुलाई को यूपी के गाजियाबाद में भी एक लड़की ने दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। लड़की का आरोप था कि क्रिकेटर यश दयाल ने शादी का झांसा देकर उसे लीव इन रिलेशनशिप के रूप में साथ रखा। करीब पांच साल तक उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और अब शादी से इनकार कर दिया। क्रिकेटर यश दयाल से युवती का संपर्क सोशल मीडिया के जरिए हुआ था। पिछले पांच साल से सोशल मीडिया के अलग अलग प्लेटफार्म पर चेटिंग और कॉलिंग भी होती रही लेकिन अब यश दयाल ने उसे ब्लॉक कर दिया। पीड़ित युवती ने ट्वीट के जरिए सीएम योगी आदित्यनाथ से भी शिकायत की थी। बाद में पुलिस थाने पहुंच कर एफआईआर दर्ज कराई।
यश दयाल की गिरफ्तारी पर लगी रोक
गाजियाबाद में दर्ज हुए केस के खिलाफ क्रिकेटर यश दयाल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। यश दयाल की दलील सुनकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्रिकेटर यश दयाल की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। यश ने अपनी दलील में कहा कि रेप केस दर्ज कराने वाली युवती कभी इलाज, कभी शॉपिंग और कभी अन्य बहानों से रुपए लेती रही। करीब 8 लाख रुपए उसे दिए जा चुके। रुपए वापस मांगने पर उसने रेप केस में फंसाने की धमकी दे दी। कोर्ट ने भी तमाम दलीलें सुनने के बाद कहा कि पांच साल तक साथ रहने के दौरान दुष्कर्म का आरोप नहीं लगाया और अब अचानक केस दर्ज कराने के पीछे कोई और उद्देश्य तो नहीं। अगली सुनवाई तक कोर्ट ने यश दयाल की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।
भारत की जिस दिन डील, उसी दिन PAK का ‘प्रमोशन’
पाकिस्तान के लिए अच्छी खबर है। S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने पाकिस्तान की क्रेडिट रेटिंग बढ़ाकर ‘B-‘ कर दी है, जो पहले ‘CCC+’ थी। यह सुधार IMF से मिले आर्थिक पैकेज के बाद हुआ है। इससे पाकिस्तान की वित्तीय स्थिति सुधरी है। हालांकि, भारत के साथ सीमा पर तनाव को लेकर एजेंसी ने चेतावनी भी दी है।
पाकिस्तान को क्रेडिट रेटिंग एजेंसी S&P ग्लोबल रेटिंग्स से बड़ी ‘खुशखबरी’ मिली है। जिस दिन भारत ने ब्रिटेन के साथ एक ऐतिहासिक व्यापार समझौता किया है, उसी दिन पाकिस्तान के मुंह में लड्डू गिरा है। S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने गुरुवार को पाकिस्तान की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को ‘CCC+’ से बढ़ाकर ‘B-‘ कर दिया। पाकिस्तान का आउटलुक ‘स्थिर’ रखा गया है। यह ‘प्रमोशन’ मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) से मिले बेलआउट पैकेज के बाद पाकिस्तान की वित्तीय स्थिति और विदेशी मुद्रा भंडार में सुधार के कारण हुआ है।
S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने पाकिस्तान की क्रेडिट रेटिंग ‘CCC+’ से बढ़ाकर ‘B-‘ कर दी है। यह बेहतरी आईएमएफ से मिले बेलआउट पैकेज के बाद हुई है। इससे पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और विदेशी मुद्रा भंडार में सुधार आया है। हालांकि, रेटिंग एजेंसी ने भारत के साथ बढ़ते सीमा विवाद को लेकर चेतावनी भी दी है। उसका कहना है कि इससे पाकिस्तान की क्रेडिट रेटिंग पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि पाकिस्तान को मिली आर्थिक मदद और भुगतान संतुलन में सुधार से विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा है। इससे बाहरी दबाव कम हुआ है। हालांकि, कर्ज चुकाने की लागत अभी भी बहुत ज्यादा है। लेकिन, सरकार के राजस्व बढ़ाने और महंगाई कम करने के प्रयासों से आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।
एजेंसी के अनुसार, अगले 12 महीनों में पाकिस्तान को अपने कर्ज चुकाने के लिए बाहरी मदद मिलती रहेगी। साथ ही, उसकी वित्तीय स्थिति भी मजबूत होगी। अगर पाकिस्तान की बाहरी या वित्तीय स्थिति बिगड़ती है तो रेटिंग घटाई जा सकती है। इसके उलट अगर राजनीतिक और संस्थागत माहौल सुधरता है, जिससे आर्थिक सुधारों को बढ़ावा मिले, विकास हो और वित्तीय स्थिति मजबूत हो तो रेटिंग का बढ़ना भी मुमकिन है।
S&P के मुताबिक, पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता बनी रहेगी। पाकिस्तान की रेटिंग घरेलू और बाहरी सुरक्षा जोखिमों से प्रभावित है। वैसे तो 2010 की शुरुआत से देश की सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है। लेकिन, इसमें गिरावट की आशंका बनी हुई है।
भारत के साथ सीमा पर तनाव को लेकर चेतावनी
एजेंसी ने भारत के साथ सीमा पर तनाव को लेकर चेतावनी दी है। मई 2025 में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था। S&P ने कहा कि इससे गलत अनुमान और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ सकती है। इससे स्थिति और बिगड़ने के आसार हैं। ऐसा होने पर पाकिस्तान की क्रेडिट प्रोफाइल पर बुरा असर पड़ेगा।
आईएमएफ ने पाकिस्तान को 8.4 अरब डॉलर का पैकेज दिया है। यह पैकेज एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (ईएफएफ) और रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी के तहत दिया गया है। यह 37 महीनों तक चलेगा।
S&P ग्लोबल ने मई में ही चेतावनी दी थी कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने से दोनों देशों की क्रेडिट रेटिंग पर असर पड़ सकता है। पहलगाम हमले में 26 नागरिकों की मौत के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था।
भारत-ब्रिटेन के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता
पाकिस्तान की बिगड़ी अर्थव्यवस्था के लिए कुछ राहत मिलने की खबर ऐसे दिन आई जब भारत ने ब्रिटेन के साथ ऐतिहासिक समझौता किया है। गुरुवार को भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) नाम के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुए। यह डील भारतीय कृषि, समुद्री उत्पाद, वस्त्र, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और कई अन्य प्रमुख सेक्टरों के लिए ब्रिटेन के बाजारों तक टैरिफ-फ्री पहुंच प्रदान करेगा। इससे भारतीय निर्यात में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है। इतना ही नहीं, कई उत्पाद भारत में सस्ते भी हो जाएंगे। यह समझौता भारत के लिए आर्थिक विकास और वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति मजबूत करने का बड़ा अवसर है।
टेक्सास में भीषण गर्मी में टेंट में रहेंगे प्रवासी कैदी,
अमेरिका सरकार एल पासो के फोर्ट ब्लिस में देश का सबसे बड़ा प्रवासी निरोध केंद्र (Immigration detention center) बनाने जा रहा है। इसके लिए रक्षा विभाग ने एक कंपनी को ठेका दिया है। सरकार इस केंद्र पर 1.26 अरब डॉलर खर्च करेगी। इस केंद्र में 5,000 लोगों को रखने की व्यवस्था होगी। इसे सितंबर 2027 तक खोलने की योजना है। वर्जीनिया की कंपनी एक्विजिशन लॉजिस्टिक्स LLC को यह ठेका मिला है। कंपनी को शुरुआत में लगभग 232 मिलियन डॉलर दिए गए हैं। हालांकि ऐसा लगता है कि कंपनी को पहले डिटेंशन सेंटर चलाने का अनुभव नहीं है।
टेक्सास ट्रिब्यून के अनुसार,अधिकारियों का कहना है कि इस केंद्र से देश की सुरक्षा मजबूत होगी। साथ ही यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि प्रवासियों को मानवीय तरीके से रखा जाए। लेकिन कुछ लोगों को इस योजना पर चिंता है। उनका कहना है कि टेंट में लोगों को रखना खतरनाक हो सकता है, खासकर टेक्सास की गर्मी में। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को चिंता है कि तपती गर्मी में टेंट में प्रवासियों को रखना ठीक नहीं है। पहले भी ऐसे केंद्रों में खराब स्थितियों की शिकायतें आई हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हर साल 10 लाख से ज्यादा प्रवासियों को गिरफ्तार करने का वादा किया था। उन्होंने हर दिन 3,000 लोगों को गिरफ्तार करने का लक्ष्य रखा था। अब, सरकार के सामने इन लोगों को रखने के लिए जगह बनाने की चुनौती है। इस कोशिश में पहले भी कई बार असुरक्षा की स्थितियों के आरोप लगे हैं।
ह्यूमन राइट्स वॉच नाम की एक संस्था ने इस साल एक रिपोर्ट जारी की थी। इसमें उन्होंने फ्लोरिडा के तीन निरोध केंद्रों में “दुरुपयोग” होने की बात कही थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि कुछ लोगों को “बिना खाना, पानी या टॉयलेट के बसों में लंबे समय तक हथकड़ी लगाकर रखा गया।” इसके अलावा, बंदियों को “ठंडी कंक्रीट के फर्श पर लगातार ट्यूबलाइट की रोशनी में सोने के लिए मजबूर किया गया।” इस गर्मी में सरकार ने फ्लोरिडा के एक दलदल में एक टेंट सुविधा खोली, जिसे “एलीगेटर अल्काट्राज” कहा गया। इस पर भी बंदियों के स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठाए गए थे।
ट्रम्प के पहले कार्यकाल में, टेक्सास में सरकार ने टोरनिलो में एक बड़ा टेंट शहर बनाया था। यह एल पासो का एक सीमावर्ती शहर है, जो फोर्ट ब्लिस से 40 मील दक्षिण-पूर्व में है। 2018 में खुलने के बाद इसकी आलोचना हुई थी। इसमें लगभग 2,500 लोगों को रखने की क्षमता थी, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।
एक्विजिशन लॉजिस्टिक्स कंपनी के लिए यह ठेका बहुत बड़ा है। ब्लूमबर्ग ने सबसे पहले इस बारे में खबर दी थी। ऐसा लगता है कि कंपनी को निरोध केंद्र चलाने का कोई अनुभव नहीं है। सरकार का कहना है कि वह प्रवासियों के साथ मानवीय व्यवहार करेगी। लेकिन, आलोचकों को डर है कि इन केंद्रों में लोगों को अच्छी तरह से नहीं रखा जाएगा। उनका कहना है कि सरकार को प्रवासियों के लिए बेहतर विकल्प तलाशने चाहिए।
एपस्टीन की फाइलों में डोनाल्ड ट्रंप के नाम का बार-बार जिक्र! यौन अपराधी के मामले में एक और खुलासा
अमेरिकी अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को मई में बताया था कि जेफरी एपस्टीन मामले से जुड़े न्याय विभाग के दस्तावेजों में उनका नाम कई बार आया है। इसके तुरंत बाद एपस्टीन केस को दबा दिया गया।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी ने बताया था कि कुख्यात सेक्स ट्रैफिकर जेफरी एपस्टीन की जांच से जुड़े दस्तावेजों में उनका नाम कई बार आया है। यह जानकारी कई रिपोर्ट्स में सामने आई है। बॉन्डी ने ट्रम्प को मई में बताया था कि एपस्टीन मामले से संबंधित जस्टिस डिपार्टमेंट के दस्तावेजों में कई अन्य प्रमुख लोगों के साथ उनका नाम भी है। बॉन्डी ने ट्रम्प को यह जानकारी उस विवादास्पद ज्ञापन को जारी करने से ठीक पहले दी थी, जिसमें ट्रम्प प्रशासन ने इस मामले में आगे कोई जानकारी जारी नहीं करने की बात कही थी। ट्रम्प कभी एपस्टीन के करीबी दोस्त थे। उन्होंने इन खबरों के बाद मामले को शांत करने की कोशिश की और इसे अपने राजनीतिक विरोधियों द्वारा रची गई एक अफवाह तक बता दिया।
वॉल स्ट्रीट जर्नल और न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी ने राष्ट्रपति ट्रम्प को मई में बताया था कि जेफरी एपस्टीन मामले से जुड़े न्याय विभाग के दस्तावेजों में उनका नाम कई बार आया है। बॉन्डी ने ट्रम्प को यह जानकारी उस विवादास्पद ज्ञापन को जारी करने से ठीक पहले दी थी, जिसमें ट्रम्प प्रशासन ने इस मामले में आगे कोई जानकारी जारी नहीं करने की बात कही थी। यह जानकारी कई अधिकारियों के हवाले से दी गई।
बॉन्डी ने मई में हुई मीटिंग के बारे में पूछे जाने पर एक बयान में पुष्टि की कि राष्ट्रपति को “निष्कर्षों के बारे में जानकारी दी गई थी।” लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि “फाइलों में ऐसा कुछ भी नहीं था जिससे आगे जांच या मुकदमा चलाने की आवश्यकता हो।”
‘डेमोक्रेट्स और उदारवादी मीडिया द्वारा गढ़ी गईं झूठी खबरें’
व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर स्टीवन चेउंग ने ब्रीफिंग के बारे में सवालों का जवाब नहीं दिया, लेकिन बुधवार को कहा कि एपस्टीन से संबंधित किसी भी अवैध गतिविधि में ट्रम्प के शामिल होने की बात “डेमोक्रेट्स और उदारवादी मीडिया द्वारा गढ़ी गई झूठी खबरों की निरंतरता मात्र है।” चेउंग का कहना है कि ये सब विपक्षी पार्टियां ट्रम्प को बदनाम करने के लिए कर रही हैं।
डोनाल्ड ट्रम्प ने 15 जुलाई को व्हाइट हाउस के बाहर इस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया कि क्या बॉन्डी ने उन्हें बताया था कि उनका नाम एपस्टीन फाइलों में शामिल है। एक रिपोर्टर ने ट्रम्प से पूछा, “विशेष रूप से, क्या उन्होंने आपको बताया कि आपका नाम फाइलों में आया है?” ट्रम्प ने जवाब दिया, “नहीं, नहीं। उन्होंने उन अलग-अलग चीजों की विश्वसनीयता के बारे में जो उन्होंने देखी हैं, हमें बहुत जल्दी जानकारी दी है।” ट्रम्प ने सवाल को टाल दिया और कहा कि उन्हें इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।
एपस्टीन मामले को लेकर ट्रंप से उनके समर्थक भी नाराज
जनवरी में अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से पहले, ट्रम्प और उनके मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (MAGA) के सहयोगियों ने एपस्टीन मामले के बारे में और अधिक जानकारी जारी करने की मांग की थी। MAGA ट्रम्प के समर्थकों का एक समूह है।
हाल के हफ्तों में एपस्टीन फाइलों को लेकर जनता का गुस्सा फूट पड़ा है, जिसके बाद ट्रम्प ने आलोचना से बचने की कोशिश की है। उन्होंने बॉन्डी को मामले में ग्रैंड जूरी की गवाही जारी करने के लिए कहा, जिसके बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि जस्टिस डिपार्टमेंट की फाइलों की तुलना में यह बहुत कम महत्वपूर्ण होगी।
‘अमेरिका मेक ग्रेट अगेन’ अभियान से बाहर किए गए ट्रंप
बुधवार को एक जज ने फ्लोरिडा में वर्षों पहले एपस्टीन के खिलाफ ग्रैंड जूरी जांच से ट्रांसक्रिप्ट को सील करने के ट्रम्प प्रशासन के अनुरोध को खारिज कर दिया। इसका मतलब है कि उन ट्रांसक्रिप्ट को अभी सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। इसी तरह का एक रिकॉर्ड अनुरोध मैनहट्टन के एक फेडरल जज के सामने लंबित है, जिन्होंने एपस्टीन की सहयोगी गिसलीन मैक्सवेल के मुकदमे की अध्यक्षता की थी। मैक्सवेल को 20 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। वह इस अनुरोध का विरोध कर रही हैं। मैक्सवेल नहीं चाहती कि ये रिकॉर्ड सार्वजनिक हो।
एक कांग्रेस कमेटी ने मैक्सवेल को एक बयान के लिए सम्मन जारी किया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वह पेश होने के लिए सहमत होंगी या नहीं। एपस्टीन मामले में तेजी से हो रहे घटनाक्रमों के बीच ये खबरें आई हैं, कि ट्रम्प को उनके दक्षिणपंथी मेक अमेरिका ग्रेट अगेन बेस से अलग कर दिया गया है। इस मामले ने ट्रम्प के अपने समर्थकों के बीच भी मतभेद पैदा कर दिए हैं।