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J&K में आर्टिकल 370 हटने के 4 साल पूरे:महबूबा बोलीं- मुझे नजरबंद किया

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श्रीनगर

जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने दावा ने शनिवार को बताया- पुलिस ने उन्हें हाउस अरेस्ट कर दिया है। यह कार्रवाई शुक्रवार की आधी के बाद की गई। पुलिस ने उनकी पार्टी (PDP) के कई नेताओं को भी अवैध रूप से हिरासत में लिया है।

नेताओं को भी गिरफ्तार किया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वे आर्टिकल 370 हटने के चार साल पूरे होने पर एक सेमिनार करना चाहती थीं। प्रशासन ने उन्हें इजाजत नहीं दी, बल्कि हाउस अरेस्ट कर दिया। उधर, केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में झूठे दावे कर रही है कि यहां सब नॉर्मल है।

महबूबा मुफ्ती ने शनिवार (5 अगस्त) सुबह ट्वीट किया। उनका आरोप है कि पुलिस ने उन्हें हॉउस अरेस्ट किया है।

ओवैसी बोले- जवान मर रहे, देश में हंगामा क्यों नहीं हो रहा
AIMIM चीफ ओवैसी असदउद्दीन ओवैसी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में जवान मर रहें है, देश में हंगामा क्यों नहीं हो रहा है? 4 अगस्त को आतंकियों से मुठभेड़ में हमारे तीन जवान शहीद हो गए, लेकिन सब चुप है क्योंकि वहां बीजेपी का शासन है।

साल 2021 से 2023 तक जम्मू-कश्मीर में 251 आतंकी घटनाएं हुई थी, जिसमें 100 घटनाएं अकेले घाटी में हुईं।

वहीं, जम्मू-कश्मीर के गवर्नर मनोज सिन्हा ने कहा कि अब यहां के लोग अपनी मर्जी से जी रहे हैं। आतंकी घटनाओं के चलते पहले यहां स्कूल, कॉलेज और बिजनेस साल में 150 दिन बंद रहते थे। अब सड़क पर हिंसा नहीं होती। डल झील के किनारे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में कार्यक्रम हो रहे हैं।

आर्टिकल 370 पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है
जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के फैसले को चुनौती देने वाली 23 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। 2 और 3 अगस्त को सुनवाई हुई थी। सुनवाई करने वाले पांच जजों में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एसके कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत शामिल हैं।

याचिकाकर्ताओं के वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि आर्टिकल 370 को छेड़ा नहीं जा सकता। इसके जवाब में जस्टिस खन्ना ने कहा कि इस आर्टिकल का सेक्शन (c) ऐसा नहीं कहता। इसके बाद सिब्बल ने कहा, ‘मैं आपको दिखा सकता हूं कि आर्टिकल 370 स्थायी है।’ मामले पर अब अगली सुनवाई 8 अगस्त को होगी।

आर्टिकल 370 पर सुप्रीम कोर्ट में 3 साल बाद सुनवाई हो रही है। इससे पहले 2020 में 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने इस मामले की सुनवाई की थी। तब अदालत ने कहा था कि ये मामला बड़ी संवैधानिक बेंच को ट्रांसफर कर रहे हैं।

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