Site icon अग्नि आलोक

*74 साल पहले उड़ी थी देसी प्लेन की पहली फ्लाइट*

Share

13 अगस्त 1951 को बेंगलुरु से हिंदुस्तान ट्रेनर-2 ने उड़ान भरकर इतिहास रचा था. आजाद भारत में बना यह पहला विमान था, जिसने भारतीय तकनीक को दुनिया के सामने साबित किया था.

आज से 74 साल पहले, 13 अगस्त 1951 का दिन भारत के लिए बेहद ही खास था. बेंगलुरु में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के एयरपोर्ट पर लोगों की नजरें आसमान की ओर टिकी थीं. वहां खड़ा था एक चमकदार, छोटा लेकिन मजबूत विमान – हिंदुस्तान ट्रेनर-2 (HT-2). जैसे ही इंजन ने आवाज की और पहिए रनवे पर दौड़ने लगे, सबकी सांसें थम गईं. कुछ ही सेकंड में यह विमान हवा में था और आजाद भारत ने अपनी पहली खुद की बनाई उड़ान भर ली.

आजादी के बाद का सपना पूरा हुआ
तब देश को आजाद हुए सिर्फ चार साल हुए थे. आजादी के बाद भारत कई मुश्किलों से गुजर रहा था, जैसे बंटवारे का दर्द, आर्थिक तंगी और तकनीकी साधनों की कमी. लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद भारत ने दुनिया को दिखा दिया कि अगर हौसला हो, तो सपनों के पंख खुद बनाए जा सकते हैं. एचटी-2 का उड़ना इस बात का सबूत था कि भारत अब तकनीकी रूप से भी आगे बढ़ने के लिए तैयार है.

पहली बार HAL को मिला था मौका
दूसरे विश्व युद्ध के समय एचएएल का काम ज्यादातर दूसरे देशों के विमानों की मरम्मत और पार्ट्स जोड़ने का था. लेकिन आजादी के बाद ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स ने यह जिम्मेदारी भारत को सौंप दी. यानी, तब पहली बार भारतीय इंजीनियरों को मौका मिला कि वे अपना विमान डिजाइन और तैयार करें. इसी सपने को साकार करने का काम शुरू हुआ, जिसे “एचटी-2” नाम दिया गया.

किनके नेतृत्व में फाइनल हुई डिजाइन
इस ऐतिहासिक काम की कमान डॉ. वी.एम. घाटगे के हाथ में थी. उन्होंने जर्मनी में मशहूर वैज्ञानिक डॉ. लुडविग प्रांट्ल के अधीन एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में डॉक्टरेट की थी. 11 अक्टूबर 1948 को सरकार ने इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी. खास बात ये रही कि सिर्फ एक साल में विमान का मॉडल तैयार हो गया. 1950 की शुरुआत में ही इसका डिजाइन फाइनल कर दिया गया था.

पहली उड़ान की तैयारी
पहले प्रोटोटाइप में 145 हॉर्सपावर का गिप्सी मेजर इंजन और लकड़ी का प्रोपेलर (पंख) लगाया गया था. 27 जुलाई 1951 को इसका इंजन पहली बार चालू किया गया. फिर 5 अगस्त 1951 को एचएएल के चीफ टेस्ट पायलट कैप्टन जमशेद कैकोबाद मुंशी, जिन्हें सब जिमी मुंशी कहते थे, ने इसे पहली बार उड़ाया. करीब 40 मिनट आसमान में रहकर विमान ने साबित कर दिया कि यह पूरी तरह सफल है.

13 अगस्त को दुनिया ने देखा भारत का कमाल
आखिरकार 13 अगस्त, 1951 को बेंगलुरु में इसकी पहली औपचारिक उड़ान हुई. एयर वाइस मार्शल सुब्रोतो मुखर्जी और कई बड़े अधिकारी मौजूद थे. जैसे ही जिमी मुंशी ने विमान को आसमान में उड़ाया और हवाई करतब दिखाए, वहां मौजूद लोग हैरान रह गए. तालियों की गूंज और गर्व की भावना पूरे मैदान में फैल गई.

HT-2 की खासियत
हिंदुस्तान ट्रेनर-2 दो-सीट वाला ट्रेनर विमान था, यानी एक सीट पायलट के लिए और दूसरी ट्रेनी के लिए. इसकी लंबाई 7.53 मीटर और वजन करीब 1,016 किलो था. यह 210 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक उड़ सकता था. शुरू में इसमें 150 हॉर्सपावर का इंजन लगा था, जिसे बाद में और बेहतर बनाया गया.

विदेशों में होने लगा इस्तेमाल
1953 से इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू हो गया. भारतीय वायुसेना ने करीब 150 एचटी-2 विमान पायलट ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल किए. नौसेना और कई फ्लाइंग स्कूलों में भी यह फेमस रहा. 1958 में यह भारत का पहला विमान बना जिसे विदेश में बेचा गया. तब घाना ने 12 विमान खरीदे थे.

कब हुई आखिरी उड़ान?
करीब 34 साल तक आसमान में उड़ान भरने के बाद 1989 में इसे भारतीय वायुसेना से रिटायर कर दिया गया. इसकी जगह एचपीटी-32 ने ली, लेकिन एचटी-2 ने जो आत्मविश्वास और ‘हम भी कर सकते हैं’ का संदेश भारत को दिया, वह आज भी एचएएल और देश के विमानन इतिहास में जिंदा है

Exit mobile version