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*मध्य प्रदेश समाचार:मध्यप्रदेश में श्रेष्ठ कॉटन : मुख्यमंत्री मोहन यादव,उज्जैन के ‘राजा’ का राजसी ठाठ!,88 साल की प्रेमादेवी ने रचा इतिहास*

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IT विभाग का बड़ा खुलासा,देशभर में करीब 200 जगह ऐसी छापेमारी फेक टैक्स रिफंड केस में Indore का CA भी शामिल

देशभर में करीब 200 जगह ऐसी छापेमारी एक साथ होने की सूचना है। राजनीतिक पार्टियों के चंदे की रसीदें, मेडिकल के फर्जी बिल से लेकर ट्यूशन फीस और निवेश के फर्जी दस्तावेज-रसीदें बनाकर टैक्स चोरी के इस खेल को अंजाम दिया जा रहा है। नौकरीपेशा वेतन भोगियों को फर्जी रसीदों से आयकर बचाने और टैक्स का रिफंड दिलाने का संगठित खेल उजागर हुआ।

फर्जी रसीदों-दस्तावेजों से आयकर की चोरी कर टैक्स रिफंड दिलवाने वाले टैक्स पेशेवर आयकर के निशाने पर आ गए हैं। सोमवार को आयकर विभाग की इंवेस्टिगेशन विंग ने इंदौर में छापेमारी की। नवलखा के पुखराज कार्पोरेट टावर स्थित एस लड्डा एंड एसोसिएट्स जांच के दायरे में है। आयकर रिटर्न में फर्जी दान और खर्च की रसीदें लगाकर सरकार को टैक्स का चूना लगाने के आरोप है। इन रसीदों से आयकर का रिफंड भी हासिल किया गया। आयकर विभाग ने सीए शुभम लड्डा, निखिल मंत्री और सहयोगियों से पूछताछ की।

देशभर में करीब 200 जगह ऐसी छापेमारी

देशभर में करीब 200 जगह ऐसी छापेमारी एक साथ होने की सूचना है। राजनीतिक पार्टियों के चंदे की रसीदें, मेडिकल के फर्जी बिल से लेकर ट्यूशन फीस और निवेश के फर्जी दस्तावेज-रसीदें बनाकर टैक्स चोरी के इस खेल को अंजाम दिया जा रहा है। नौकरीपेशा वेतन भोगियों को फर्जी रसीदों से आयकर बचाने और टैक्स का रिफंड दिलाने का संगठित खेल करीब तीन वर्ष पूर्व कश्मीर में सबसे पहले उजागर हुआ था। वहां पुलिस वालों व कई शासकीय कर्मचारियों पर भी फर्जी दस्तावेजों से रिफंड लेने का खुलासा आयकर ने किया था। इसके बाद हैदराबाद और फिर देशभर में ऐसे मामले पकड़े गए थे।

CA और कर सलाहकार ही फर्जीवाड़े में शामिल

पता चला था कि टैक्स चोरी और उसका रिफंड दिलाने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट और कर सलाहकार ही फर्जीवाड़े में शामिल है। एक ही जगह से थोकबंद तरीके से ऐसे रिटर्न दाखिल हो रहे हैं। ताजा कार्रवाई में इंवेस्टिगेशन विंग कम्प्यूटर के आइपी एड्रेस के आधार पर इंदौरे के सीए के ठिकानों पर पहुंची। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ कि निजी कंपनियों में मोटा वेतन पाने वाले कर्मचारियों को टैक्स बचाने और रिफंड हासिल करने का लालच देकर उनका इनकम टैक्स दाखिल करने का काम लिया जाता। इस सबके लिए रिटर्न दाखिल करते हुए फर्जी रसीदों को लगाया जाता।

उज्जैन के ‘राजा’ का राजसी ठाठ! गार्ड आफ ऑनर के बीच निकली महाकाल की सवारी 

सावन महीने के पहले सोमवार को उज्जैन में बाबा महाकाल की सवारी निकाली गई। भगवान महाकाल राजसी ठाठ बाट के साथ नगर भ्रमण पर निकले। बाबा की एक झलक पाने के लिए लोगों का हुजूम सड़कों पर देखा गया।

महाकालेश्वर मंदिर से शाम 4 बजे शुरू हुई बाबा की सवारी नगर के प्रमुख रास्तों से होते हुए शिप्रा नदीं के घाट पर पहुंची। जहां रामघाट पर जल अभिषेक के बाद सवारी पुनः महाकाल मंदिर के लिए रवाना हुई। मान्यता है कि भगवान महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते हैं। वहीं अपने राजा की एक झलक पाने के लिए प्रजा भी घंटों तक सड़क के किनारे इंतजार करती है।

मंत्रियों ने भी टेका महाकाल के दर पर माथा

शाम को पूजन के बाद राजा महाकाल को चांदी की पालकी में बैठाकर मंदिर से बाहर लाया गया। मंदिर से निकलते ही पुलिस बैंड और जवानों ने सवारी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। सवारी के आगे घोड़ा, बैंड, पुलिस टुकड़ी और भजन मंडलियां चल रही थीं। गाजे बाजे के साथ निकली सवारी का सफर लगभग आठ किलोमीटर का था। बाबा महाकाल की सवारी में मुख्यमंत्री की इच्छा अनुसार आदिवासी कलाकारों द्वारा आकर्षक नृत्य प्रस्तुति दी गई। प्रदेश सरकार के मंत्री तुलसी सिलावट, प्रहलाद पटेल और गौतम टेटवाल भी सवारी के दौरान दिखाई दिए।

क्या होता है सवारी का रास्ता?

बता दें कि सवारी परंपरागत रास्ते से महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाडी से होते हुए रामघाट पहुंची। जहां मां क्षिप्रा नदी के जल से भगवान का अभिषेक और पूजा-अर्चना किया गया। इसके बाद सवारी रामानुज कोट, मोढ की धर्मशाला, कार्तिक चौक खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार से होते हुए पुन: श्री महाकालेश्वर मंदिर के लिए रवाना हुई। मंदिर के मुख्य द्वार से राजाधिराज महाकाल की पालकी नगर भ्रमण के लिए निकली तब केवल पारंपरिक 9 भजन मंडलियां व झांझ डमरू दल को सवारी में शामिल किया गया।

10 साल बाद चांदी की नई पालकी में निकली महाकाल की सवारी

उज्जैन में भगवान श्री महाकालेश्वर की सवारी निकल रही है। महाकाल अपने मनमहेश स्वरूप में हैं। चांदी की नई पालकी में बाबा की सवारी है। 10 साल बाद सवारी में नई पालकी को शामिल किया गया है।

बाबा महाकाल की सवारी के दौरान साधु संत भक्ति में नजर आए। इनके निराले अंदाज से लोगों को सिंहस्थ की याद ताजा हो गई।

भजन मंडलियां हुईं शामिल
बाबा महाकाल की सवारी के दौरान भजन मंडलिया भी शामिल हुईं। जिसमें कुछ लोग भजन कीर्तन करते नजर आए तो कुछ लोगों ने डमरू बजाकर, ढोलक बजाकर, झांझ बजाकर बाबा महाकाल की भक्ति की।

मंत्रियों ने किया पूजा अर्चन
बाबा महाकाल की सवारी महाकाल मंदिर से शुरू होकर विभिन्न मार्गों से होती हुई रामघाट पहुंची। यहां मंत्री तुलसी सिलावट, प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल द्वारा पालकी में सवार बाबा महाकाल के मनमहेश स्वरूप का पूजन अर्चन और आरती की गई।


भूत-प्रेत और देवताओं की टोली
बाबा महाकाल की सवारी में भूत-प्रेत और देवताओं की टोली भी नजर आई। बाबा महाकाल की सवारी में भक्त विभिन्न रूप में शामिल होते हैं। एक भक्त ने हनुमान जी का स्वरूप लिया तो किसी ने भूत प्रेत बनकर इस सवारी की शोभा बढ़ाई।


महाकाल को दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर
सभा मंडप में बाबा महाकाल का पूजन अर्चन मनमहेश स्वरूप में होने के बाद सवारी मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची। यहां पर पुलिस द्वारा श्री महाकाल को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

मध्यप्रदेश में श्रेष्ठ कॉटन है, दुबई के उद्योगपति मध्यप्रदेश आएं: मुख्यमंत्री मोहन यादव

दुबई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि दुबई में टेक्सटॉइल सिटी पहुंच कर प्रवासी भारतीयों के बिजनेस मॉडल का अवलोकन एक महत्वपूर्ण अनुभव रहा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टेक्सटाइल सिटी के प्रमुख व्यवसायियों से चर्चा भी की और उन्हें पीएम मित्र पार्क की जानकारी दी। उद्यमियों ने टेक्सटॉइल के क्षेत्र में मध्यप्रदेश से जुड़ने में रुचि भी जताई है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यहां एक बहुत अच्छा प्रयोग हुआ है। यहां के व्यापारियों ने दुबई सरकार से जमीन लेकर तथा समिति बनाकर अपना एक मार्केट बनाया है। इस मार्केट की विशेषता है कि यहां तीन फ्लोर तक कार्य किया जाता है। आगे शो रूम भी है। रिटेल शॉप के साथ पीछे गोडाउन है। यह बहुत आदर्श व्यवस्था है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा प्रयास है कि यहां के अधिकांश उद्यमी मध्यप्रदेश आएं। टेक्सटॉइल के क्षेत्र में मध्यप्रदेश बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। विश्व में सबसे शुद्ध कॉटन मध्यप्रदेश में मिलता है। हम टेक्सटाइल के क्षेत्र में निवेशकों को आमंत्रित करते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्यमियों से अपेक्षा की है कि आप भी यह संकल्प लें कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश आगे बढ़े और उनके साथ मध्यप्रदेश कदम से कदम मिलाकर चले और इसमें आपका पूरा सहयोग हो। दुबई के उद्यमियों को देश के सात राज्यों में पीएम मित्र पार्क (पीएम मेगा एकीकृत वस्त्र क्षेत्र) के विकास और मध्यप्रदेश में धार जिले में प्रारंभ प्रकल्प की जानकारी भी दी गई।

88 साल की प्रेमादेवी ने रचा इतिहास,पहली बार देहदान पर दिया गया गार्ड ऑफ ऑन

बड़वानी जिले में एक 88 साल की महिला ने इतिहास रच दिया है। मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव के आदेश के बाद प्रदेश में पहली बार देहदान पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया है।

मध्य प्रदेश के बड़वानी जिला मुख्यालय पर सोमवार को नेत्रदान और देहदान के मामले में जिले में पहली बार पुलिस ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। हाल ही में मुख्यमंत्री में देहदान करने वालों के शव को गार्ड आफ ऑनर देने के आदेश दिए थे।

बड़वानी में सोमवार को पहली बार नेत्रदान के साथ देहदान का अनूठा उदाहरण सामने आया। 88 वर्षीय प्रेमादेवी सिंघल का रविवार रात 8:40 बजे निधन हुआ। परिजनों ने पहले नेत्रदान कराया और फिर देह दान कर दिया। प्रेमादेवी पिछले पांच वर्षों से अपनी बेटी और दामाद जगदीश गुप्ता के साथ बड़वानी में रह रही थीं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 1 जुलाई से देहदान करने वालों को गार्ड ऑफ ऑनर देने की घोषणा की थी।

बड़वानी पुलिस को देहदान के तारत्म्य में गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने की जानकारी को लेकर असमंजस था। क्योंकि इसके पहले ऐसा नहीं किया गया था। समाजसेवियों ने सीएम के आदेश की जानकारी प्रदान की। इसके बाद 88 वर्षीय प्रेमादेवी की देह मेडिकल छात्रों के लिए दान दे दी गयी। उनकी देह को सुखसागर मेडिकल कॉलेज जबलपुर ले जाया जा रहा है। इसके लिए स्पेशल एंबुलेंस की व्यवस्था की गई।

आदेश की प्रति दिखाने के बाद जागा प्रशासन

मधुबन कॉलोनी स्थित उनके निवास पर पुलिस जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। लोकसभा सांसद गजेंद्र सिंह पटेल भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। हालांकि, पुलिस को इस आदेश की जानकारी नहीं थी। समाजसेवी अजीत जैन ने एसपी को मुख्यमंत्री के आदेश की प्रति दिखाने के बाद ही पुलिस जवान पहुंचे। कार्यक्रम में कुछ खामियां भी रहीं। इस दौरान कोई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद नहीं था। समाजसेवी अजीत जैन ने बताया कि देहदान प्रपत्र पर पति-पत्नी, माता-पिता, भाई-बहन या पुत्र-पुत्री के हस्ताक्षर होने पर ही स्वीकार किया जाता है।


मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की घोषणा पर मप्र शासन ने 1 जुलाई को आदेश निकाला था। इसके मुताबिक देहदान अथवा अंगदान( लिवर हृदय गुर्दे) के दान करने वालों के पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। साथ ही उनके परिजनों को 15 अगस्त और 26 जनवरी के जिला कार्यक्रमों में सम्मानित भी किया जाएगा।

विधायक मंजू दादू बनीं मसीहा! हादसे में घायलों को निजी वाहन से पहुंचाया अस्पताल

रहानपुर (राजबीर सिंह) : इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर असीरगढ़ के पास बड़ा सड़क हादसा हो गया। हादसे को लेकर मची चीख पुकार के बीच विधायक मंजू दादू ने इंसानियत की मिसाल पेश की। दरअसल, इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर ग्राम असीरगढ़ के समीप उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक तेज रफ्तार आयसर वाहन ने सामने से आ रही यात्री बस को टक्कर मार दी। यात्री बस खंडवा से बुरहानपुर की ओर जा रही थी। इसमें सवार 6 यात्री घायल हो गए।

इत्तफाक से उसी रास्ते से कार्यक्रम में जा रहीं नेपानगर विधायक मंजू दादू की नजर जैसे ही दुर्घटनाग्रस्त वाहन पर पड़ी, उन्होंने तुरंत काफिला रुकवाया और एक पल की भी देर किए बिना घायलों को अपने निजी वाहन से बुरहानपुर जिला अस्पताल भिजवाया। इतना ही नहीं, विधायक दादू ने अस्पताल प्रबंधन को फोन कर त्वरित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की अहमियत समझें नागरिक’, सुप्रीम कोर्ट की सलाह- खुद पर लगाएं नियंत्रण

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि नागरिकों को अपनी बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी की कीमत समझनी चाहिए और इसके साथ-साथ स्व-नियंत्रण और संयम का पालन करना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि सोशल मीडिया पर बढ़ती विभाजनकारी प्रवृत्तियों पर रोक लगाई जानी चाहिए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह सेंसरशिप की बात नहीं कर रहा है, बल्कि चाहता है कि लोग खुद से जिम्मेदारी निभाएं और अपनी बातों में संयम बरतें।

राज्य को बीच में लाने की जरूरत न पड़े- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘कोई भी नहीं चाहता कि राज्य (सरकार) इस तरह के मामलों में हस्तक्षेप करे। इसलिए जरूरी है कि लोग खुद जिम्मेदारी लें और सोशल मीडिया या अन्य मंचों पर ऐसा कुछ न कहें जो समाज में तनाव फैलाए।’

सुप्रीम कोर्ट ने भाईचारा और एकता पर दिया जोर
शीर्ष अदालत ने नागरिकों के बीच भाईचारे की भावना बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया और कहा कि आज के समय में जब अलगाववादी विचार तेजी से फैल रहे हैं, तो नागरिकों को सोच-समझकर बोलना चाहिए। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा, ‘हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इस पर संविधान में पहले से ही युक्तिपूर्ण सीमाएं हैं और लोगों को इन सीमाओं का पालन करना चाहिए।’

क्या है पूरा मामला?
सुप्रीम कोर्ट यह टिप्पणी ने एक ऐसे मामले की सुनवाई के दौरान दी, जिसमें सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और उकसाने वाली पोस्ट को लेकर चिंता जताई गई थी। अदालत इस बात पर विचार कर रही है कि क्या आचार संहिता बनाई जा सकती है जिससे ऑनलाइन अभिव्यक्ति की आजादी और समाज में सौहार्द के बीच संतुलन बना रहे।

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