अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

भारत में आतंकवाद बनाम अमेरिका में आतंकवाद, इतना पक्षपातपूर्ण रवैया क्यों !

Share

न्यूयॉर्क में ट्विन टॉवर्स पर हुए आतंकवादी हमले की 20 वीं बरसी पर 

-निर्मल कुमार शर्मा,

‘वक्त कितना भी बीत जाए,हमले का दर्द नहीं भुलाया जाता ! ‘उक्त बेबस,लाचार,दीन-हीन और दर्द भरा बयान वर्तमान समय में सत्तासीन कथित महाबली माने जाने वाले देश अमेरिका के राष्ट्रपति के हैं ! यह बयान उन्होंने कथित अलकायदा के 19 आतंकवादियों द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका के ही चार घरेलू उड़ान पर जा रहे यात्री विमानों को अपहरण करके 11 सितंबर 2001को प्रातःकाल क्रमशः दो विमानों से प्रातःकाल 8.46 और 9.03 बजे वाशिंगटन स्थित न्यूयॉर्क के 110 मंजीले ट्विन टॉवरों और तीसरे विमान को प्रातःकाल 9.37 पर अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के कार्यालय विश्वप्रसिद्ध पेंटागन से टकराकर तथा चौथे विमान में यात्रियों और आतंकवादियों में भयंकर लड़ाई के चलते वह विमान प्रातः 10.03 पर पेंसिल्वेनिया के शैंक्सविले में एक खेत में टकराकर ध्वस्त हो गया ! इस दुःखद घटना में क्रमशः चारों विमानों में क्रूमेंबर्स सहित 246 लोग,दोनों टॉवरों में 2606 लोग और पेंटागन में 125 लोग मतलब कुल मिलाकर 2977 लोग मारे गये थे,जिसमें 90 देशों के नागरिक भी अपनी जान गँवा बैठे थे,उसी दुःस्वप्निल दुर्घटना की बीसवीं बरसी की पूर्वसंध्या पर एक विडिओ संबोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति शोक व्यक्त करते हुए उक्त उद्गार व्यक्त किए थे।
लेकिन कितने दुःख की बात है कि भारत लगभग कई दशकों से आतंकवाद से बुरी तरह त्रस्त है ! भारत सरकार के अधीन जम्मूकश्मीर विधानसभा द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत के इस पश्चिमोत्तर प्रांत में 2009 तक आतंकवादी घटनाओं में 47000,सैतालिस हजार लोग बेमौत मारे गये और 3400 ऐसे अभागे लोग भी थे, जिनका कुछ अता-पता नहीं चला ! मतलब इन आतंकी घटनाओं में वे सदा के लिए लापता हो गए या मर-खप गए ! अगर इन घटनाओं के साथ मुंबई बम ब्लास्ट,पूर्वोत्तर भारत,पंजाब के आतंकियों तथा बस्तर तथा छत्तीसगढ़ के दाँतेवाड़ा में नक्सलियों और अर्धसैनिक बलों की मुठभेड़ों में मारे गए निरपराध लोगों और अर्धसैनिक बलों तथा गोधराकांड, पुलवामा कांड आदि में मौत के घाट उतारे गए जवानों की संख्या को भी जोड़ लिया जाय,तो भारत में आतंकवादी घटनाओं में अब तक लाखों लोग अपने प्राणों से हाथ धो बैठे हैं !
आतंकवादी दुर्घटनाओं में मरनेवाले लोग चाहे वह दुनिया के किसी भी कोने में घटित हों यथा वह न्यूजीलैंड में हों,श्रीलंका में हों,रूस में हों,भारत में हों,अफगानिस्तान में हों,पाकिस्तान में हों या अमेरिका में हों सभी जगह मरनेवाले लोगों के प्रति एक समान सहानुभूति व सदाशयता तथा करूणा की मानवीय संवेदना आधारित व्यवहार होनी चाहिए और इन दुःखद घटनाओं को रोकने की ईमानदार कोशिश भी होनी चाहिए,लेकिन वास्तविकता इसके ठीक विपरीत है,उदाहरणार्थ भारत अपने चिर-परिचित व परंपरागत दुश्मन देश पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से पिछले कई दशकों से अपने बेकसूर नागरिकों व सेना के जवानों के रक्तरंजित खून की होली खेलने से बुरी तरह त्रस्त रहा है और सिसकता रहा है ! पिछले कई दशकों तक भारत अपनी इस अतिदुःखद आतंकवादी घाव के टीसते दर्द को अमेरिका सहित यूरोप के अन्य पश्चिमी देशों तक अपनी व्यथा सुनाता रहा है,लेकिन अत्यंत दुःख और खेद तथा अफ़सोस के साथ यह लिखना पड़ रहा है कि यही अमेरिका व उसके पिछलग्गू यूरोप के इंग्लैड जैसे देश भारत के इस भयावहतम् रिसते फोड़े के दर्द से बेपरवाह और एकदम उदासीन रूख अपनाए हुए थे ! मतलब इन तथाकथित अमेरिकी और यूरोपियन देशों के कथित उन्नतशील और सभ्य गोरों के मन में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों व उग्रवादियों के हाथों भारतीय आम जनता और हमारी सेना के जवानों के सिर काटकर पाकिस्तानी जमीन पर फुटबॉल खेलने जैसे पैशाचिक कुकृत्य करने तथा उनके शरीर के अंग-भंग करने,उनके अनवरत हो रहे नृशंस हत्या,उनके खून की होली खेलने पर भी कोई खास प्रतिक्रिया या समवेदना न होना एक अचंभित कर देने वाला व्यवहार था ! ये देश भारत के इतने दग्ध और कारूणिक स्थिति में रहने के बावजूद आतंकवाद को प्रश्रय और परिपोषित करनेवाले पाकिस्तान जैसे देश को लगातार अरबों डॉलर की मदद दिए जा रहे थे ! यह असंवेदनशीलता की इंतिहा वाली स्थिति है !
परन्तु इन देशों की भारत के प्रति इस दुःस्वप्निल असंवेदनशीलता की स्थिति में तब परिवर्तन आना शुरू हुआ जब यूरोप और अमेरिकी सरजमीं पर भी आतंकवादियों के संगठन अपनी आतंकवादी कुकृत्यों को अंजाम देने लगे और हमले करने लगे मसलन फ्रांस, नार्वे,इंग्लैंड और कथित महाबली तथा अतिसुरक्षित अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के अभेद्य कहे जाने वाले ट्विन टॉवरों तक पर धड़ाधड़ हमले करने लगे ! जब यूरोपियन और अमेरिकी देशों पर आतंकवाद का कहर बरपने लगा,वहाँ के निरपराध लोगों से भी आतंवादियों द्वारा भारत के लोगों जैसे रक्त की होली खेली जाने लगी,तब जाकर यूरोपियन और अमेरिकी देशों के कर्णधारों और वहाँ के समाज को यह अनुभव हुआ कि आतंकवाद का जहरीला और विषाक्त दंश झेलना कितना कष्टकारी व पीड़ादायक होता है ! इस दुनिया में जब तक कोई भी आतंकवाद रहेगा,तब तक इस दुनिया में शांति और अमनचैन की उम्मीद करना ही बेमानी है !इसलिए अमेरिका व यूरोपियन देशों को भी अब यह बात खूब ठीक से समझ लेनी चाहिए कि बगैर किसी भेदभाव के आतंकवाद की समाप्ति के लिए दुनिया के सभी देश चाहे वे अमीर हों,गरीब हों,गोरे हों,काले हों,सभी संगठित होकर सशक्त,गंभीर व ईमानदारी के साथ आतंकवाद का मुकाबला करें और उसे नेस्तनाबूद करने में अपना सबसे श्रेष्ठतम् प्रयास करें,आतंकवाद चाहे तालिबानी हो, आईएसआईएस हो,ईसाइयों के उग्रवादी गुट हों,सिक्खों के उग्रवादी हों,असम के हों,नागालैंड के हों,मिजोरम के हों,साप्रदायिक हिंदुओं के संगठित गुँडे हों सभी मानवीयता और इंसानियत के एक समान ही घातक दुश्मन हैं। इसलिए इस दुनिया से हर तरह के आतंकवाद व गुँडागर्दी समाप्त होनी ही चाहिए ।

-निर्मल कुमार शर्मा, ‘गौरैया एवम पर्यावरण संरक्षण ‘,प्रताप विहार,गाजियाबाद,

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें