इंदौर के रानीपुरा इलाके में झंडाचौक पर एक पांच मंजिला इमारत गिर गई है। आशंका है कि मलबे में कई लोग दबे हुए हैं। स्थानीय लोग बचाव कार्य में जुटे हैं। प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंच गए हैं और दबे हुए लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं। घायलों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।
इंदौर में सोमवार रात एक दर्दनाक हादसा हुआ जिसने पूरे शहर को हिला दिया. जवाहर मार्ग के रानीपुरा इलाके में स्थित एक पुरानी तीन मंजिला बिल्डिंग अचानक भरभरा कर ढह गई. रात करीब 9 बजे जोरदार धमाके के साथ इमारत जमींदोज हो गई. हादसे के वक्त घर के अंदर 14 लोग मौजूद थे, जिनमें से 12 लोग घायल हो गए और 2 लोगों की जान चली गई.
कुल मिलाकर इस घर में 22 लोग रहते थे. लेकिन हादसे की रात किस्मत से 8 लोग खजराना अपने रिश्तेदार के यहां गए हुए थे. वरना इस हादसे में नुकसान और भी बड़ा हो सकता था.
बचाव अभियान तुरंत शुरू हुआ और करीब पांच घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला. मलबे में फंसे लोगों को बड़ी मुश्किल से निकाला गया. घायलों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां एक की हालत गंभीर बताई जा रही है.

इंदौर: रानीपुरा इलाके में एक बड़ा हादसा हो गया। झंडाचौक पर स्थित एक पांच मंजिला इमारत अचानक गिर गई। आशंका है कि कई लोग मलबे में दबे हैं। स्थानीय लोग बचाव कार्य में जुट गए हैं। इमारत गिरने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल है।
स्थानीय प्रशासन मौके पर
स्थानीय प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंच चुके हैं। वे दबे हुए लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं। घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। पुलिस और प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में रखने की कोशिश कर रहे हैं। घटना के कारणों की जांच की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इमारत कैसे गिरी। इमारत के निर्माण में कोई लापरवाही हुई थी या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी।
दबे हुए लोगों को निकालना प्राथमिकता
प्रशासन की ओर से हर संभव मदद पहुंचाई जा रही है। सरकार की ओर से मुआवजे का ऐलान भी किया जा सकता है। फिलहाल, प्राथमिकता दबे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने की है। इसके बाद घटना के कारणों की जांच की जाएगी। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मकान में तलघर (बेसमेंट) भी बना हुआ था. उस तलघर में अक्सर पानी भरा रहता था, जिसकी वजह से बिल्डिंग की नींव काफी कमजोर हो गई थी. लगातार बारिश ने हालत और बिगाड़ दी और आखिरकार सोमवार रात मकान धराशायी हो गया. पड़ोसियों का कहना है कि बिल्डिंग काफी समय से जर्जर हालत में थी और इसकी शिकायतें भी कई बार हुई थीं.
हादसे की खबर मिलते ही प्रशासन और रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुंचीं. इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने खुद हालात का जायजा लिया और कहा कि घटना की जांच हर एंगल से की जा रही है. उनका कहना है कि फिलहाल फोकस घायलों के इलाज और प्रभावित परिवारों को मदद पहुंचाने पर है.
इस हादसे ने एक बार फिर शहर में जर्जर और पुरानी इमारतों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. बारिश के मौसम में कई मकान कमजोर हो जाते हैं, लेकिन समय रहते कार्रवाई न होने पर लोगों की जान पर बन आती है.