उज्जैन के लोटी स्कूल परिसर में स्थित 45 साल पुरानी लगभग 36 फीट चौड़ी और 150 फीट ऊंची फ्लोर मिल की चिमनी को 22 किलो बारूद लगाकर गिरा दिया गया. इस काम के लिए जाने-माने विस्फोटक विशेषज्ञ शरद सरवटे को बुलाया गया था. उज्जैन के लोटी स्कूल परिसर में स्थित 45 साल पुरानी लगभग 36 फीट चौड़ी और 150 फीट ऊंची फ्लोर मिल की चिमनी को 22 किलो बारूद लगाकर गिरा दिया गया. इस काम के लिए जाने-माने विस्फोटक विशेषज्ञ शरद सरवटे को बुलाया गया था.
उज्जैन में स्थित एक विशाल और जर्जर औद्योगिक चिमनी अब ध्वस्त हो चुकी है. उज्जैन नगर निगम ने इस चिमनी को गिरा दिया. बता दें कि लगभग 45 साल पुरानी और 150 फीट ऊंची इस चिमनी की हालत जर्जर हो चुकी थी. आसपास के इलाकों में हादसे की आशंका बनी हुई थी. इसी को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने विशेषज्ञों की मदद से इसे नियंत्रित विस्फोट के जरिए गिरा दिया. यह औद्योगिक चिमनी शहर के लोकमान्य तिलक विद्यालय के समीप स्थित एक खाली भूखंड पर थी. नगर निगम अब शहर में मौजूद उन सभी पुराने और जर्जर भवनों को भी चिन्हित कर रहा है, जो भविष्य में हादसे का कारण बन सकते हैं.
पूरा इलाका खाली कराया गया
नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने बताया कि चिमनी की संरचना पूरी तरह कमजोर हो चुकी थी. सुरक्षा को देखते हुए विस्फोट विशेषज्ञों की अनुभवी टीम को मौके पर बुलाया गया. विशेषज्ञों ने चिमनी के आसपास काम शुरू किया. अंत में ब्लास्ट की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया. ब्लास्ट के दौरान आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता सबसे पहले की गई. इसके लिए पुलिस प्रशासन की मदद से क्षेत्र को खाली कराया गया और पूरे इलाके को सील कर दिया गया. जैसे ही लोगों को धमाके की आवाज सुनाई दी, इससे पहले वह कुछ समझ पाते कि एक धूल का बड़ा गुबार उठा.
150 फीट ऊंची चिमनी, तीन चरणों में विस्फोट
विस्फोट विशेषज्ञ शरद सरवटे ने बताया कि यह चिमनी करीब 45 साल पुरानी है. इसकी ऊंचाई 150 फीट है. इसका घेरा लगभग 16 मीटर का है. चिमनी को गिराने से पहले इसके निचले हिस्से और आसपास के क्षेत्र को सावधानीपूर्वक कमजोर किया गया, ताकि ब्लास्ट के समय चिमनी तय दिशा में ही गिरे.
22 किलो बारूद से चिमनी ध्वस्त
शरद सरवटे ने बताया, अगर पूरी प्रक्रिया की बात करें तो इसमें 22 किलो बारूद का इस्तेमाल किया गया. साथ ही 150 से अधिक होल बनाए गए थे. चिमनी को इस तरह से ब्लास्ट किया गया कि उसका मलबा केवल मैदान में ही गिरे. सुबह करीब 8 बजे चिमनी गिराने की प्रक्रिया शुरू की गई. 8 लोगों की टीम द्वारा ड्रिलिंग का काम किया गया. जेसीबी मशीन की सहायता से चिमनी के निचले हिस्से का एक बड़ा हिस्सा खाली किया गया, ताकि विस्फोट के दौरान संतुलन पूरी तरह नियंत्रित रहे.
शरद सरवटे के नाम दर्ज रिकॉर्ड
विस्फोट विशेषज्ञ शरद सरवटे ने बताया, उनकी टीम वर्ष 1996 से इस तरह के नियंत्रित विस्फोटों का कार्य कर रही है. अब तक देश के अलग-अलग राज्यों में 300 से अधिक बिल्डिंग, चिमनियां और अन्य बड़ी संरचनाएं सुरक्षित तरीके से ध्वस्त की जा चुकी हैं. इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए उनकी टीम का नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है. आज की कार्रवाई में ब्लास्टिंग एक्सपर्ट शरद सरवटे, नगर निगम अधीक्षण यंत्री संतोष गुप्ता, कार्यपालन यंत्री लक्ष्मण प्रसाद साहू, उपयंत्री मुकुल मेश्राम और पुलिस प्रशासन मौजूद रहा…

