बिहार में सहरसा जिले के बनगांव में 200 साल पुरानी घमौर होली की परंपरा है. जहां IAS-IPS अधिकारी भी आम लोगों संग कंधों पर चढ़कर होली खेलते हैं. भगवती स्थान पर भाईचारा और एकता का संदेश मिलता है. बता दें कि यहां की होली पूरे देश में मशहूर है.राधा कृष्ण की लीलाओं के लिए मशहूर बरसाना की होली अगर कभी देखी होगी तो बिहार के सहरसा जिले का IAS-IPS गांव के नाम से मशहूर बनगांव आपको इस रंग में रंगा हुआ महसूस होगा. यहां फर्क बस इतना है कि यहां लठ नहीं, कंधों पर चढ़कर होली खेली जाती है. जो सिर्फ आपसी भाईचारा नहीं, बल्कि एक अलग प्रेम देखने को मिलता है. इस गांव से न जाने कितने IAS-IPS सहित कई बड़े अधिकारी निकले हैं. खास तौर पर होली का पर्व कोई इस गांव का मिस नहीं करना चाहता है. वे खास इस पर्व के लिए छुट्टी लेकर अपने गांव आते हैं और अपनों के साथ होली खेलते हैं. यहां हर एक गली मोहल्ले में होली की धूम मची रहती है, गाने बजते हैं, होली में झूमते हुए लोग नजर आते हैं. यह दृश्य देखने के बाद हर किसी का मन खुश हो जाता है. बनगांव की घू होली कोई नई परंपरा नहीं है. मगर इसकी जड़ें 1810 ईस्वी की गहराई से जुड़ी हुई है.बिहार में सहरसा जिले के बनगांव में 200 साल पुरानी घमौर होली की परंपरा है. जहां IAS-IPS अधिकारी भी आम लोगों संग कंधों पर चढ़कर होली खेलते हैं. भगवती स्थान पर भाईचारा और एकता का संदेश मिलता है. बता दें कि यहां की होली पूरे देश में मशहूर है.

200 साल से अधिक पुरानी है यहां की परंपरा
बनगांव की घमौर होली का इतिहास 200 साल पुराना है. संत लक्ष्मीनाथ गोसाई ने 1810 में शुरू की इस होली की यह परंपरा आज भी कायम है. सालों के बाद भी आज भी यहां एकता का प्रतीक देखने को मिलता है. यहां हर समाज के लोग एकत्र होते हैं और एक साथ इस पर्व को मानते हैं. सभी जाति धर्म के लोग शामिल होकर आपसी भाईचारा का संदेश देने का काम करते हैं. यही कारण है कि बनगांव की होली की चर्चा देश और विदेशों में होती है
होली पर झूमते नजर आते हैं ग्रामीण
यहां लोग सभी जाति धर्म का भेदभाव भूलकर होली के दिन गांव के अलग-अलग हिस्सों से अलग-अलग टोली बनाकर भगवती स्थान पहुंचते हैं. जहां छत पर पानी का फवारा और अबीर फेंकी जाती है. इसके बाद लोग झूमते हुए नजर आते हैं. यहां महिलाएं छत पर बैठकर नजारा देखती हैं. सुबह से ही लोग यहां पर एकत्र होना शुरू हो जाते हैं. लोग एक दूसरे के कंधों पर चढ़ते हैं और इस पर्व का आनंद लेते हैं. बूढ़े हों या बच्चे हों या जवान. यहां सभी लोग झूमते हुए नजर आते हैं. यहां का दृश्य देखने के बाद मानो ऐसा लगता है कि यहां के जैसा मंजर तो शायद कहीं नहीं देखा है. अगर आप बनगांव का होली नहीं देखे हैं तो आपने क्या देखा. यहां गांव में प्रवेश करते ही होली जैसा दिखने लगता है.
बड़े-बड़े अधिकारी भी यहां खेलते हैं होली
बनगांव की रहने वाली श्वेता कुमारी बताती हैं कि वे कहीं भी रहें, लेकिन होली पर्व के दिन अपने गांव चली आती हैं. वह यहां की होली को बिल्कुल मिस नहीं करना चाहती हैं. इस होली में आपसी भाईचारा का संदेश देखने को मिलता है. सभी समाज, सभी जाति के लोग भगवती स्थान पर एकत्र होते हैं. ऐसे में यहां का माहौल खुशनुमा बन जाता है. वैसे तो यह इलाका IAS-IPS के नाम से जाना जाता है. यहां से न जाने कितने लोग बड़े-बड़े पद पर काम कर रहे हैं. यहां गांव के भगवती स्थान में होली के दिन बड़े से बड़े अधिकारी भी एक सामान्य व्यक्ति जैसा आपको दिखाई देंगे. यहां की परंपरा अद्भुत और देखने लायक होती है. यहां की होली पर सभी को सम्मान दिया जाता है.