परतापुर। 8 फरवरी। बी.एस.सी. का अध्ययन छोड़कर टीकमगढ़ के अभिनंदन जैन 14 फरवरी को राजस्थान के परतापुर में पांच मुनिसंघों के लगभग 55 पिच्छीधारी साधुओं के बीच श्रमणाचार्य विभवसागर मुनिमहाराज से दिगम्बर मुनि दीक्षा लेंगे। यह अनूठा अवसर होगा जब पांच संघ- आचार्य चन्द्रसागरजी, आचार्य चन्द्रप्रभसागरजी, आचार्य अनुभवसागरजी, आचार्य सुन्दरसागरजी एवं आचार्य विभवसागरजी अपने अपने संघ के लगभग 55 पिच्छीधारी साधुओं के साथ परतापुर पधार कर नवदीक्षित को अनुमोदना व आशीर्वाद देंगे। इस दीक्षाविधि के त्रिदिवसीय कार्यक्रम आयोजित किये गये हैं। 12 फरवरी को घटयात्रा, यागमण्डल विधान, 13 फरवरी को गणधरवलय विधान, गोद भराई, दीक्षार्थी की बिनौली और 14 को दीक्षा संस्कार विधि होगी।
दीक्षार्थी के बड़े भाई राहुल जैन टीकमगढ़ ने विद्वत्परिषद् के महामंत्री डाॅ. महेन्द्रकुमार जैन ‘मनुज’ को बताया कि 26 फरवरी 1998 को टीकमगढ में श्री उत्तमचंद्र-श्रीमती गुलाब देवी के यहां जन्में अभिनंदन जैन की प्रारंभिक शिक्षा जन्म-नगर में हुई, माध्यमिक शिक्षा वर्णी गुरुकुल पिसनहारी की मढ़िया जबलपुर में और उच्च शिक्षा बी.एस.सी. ज्ञानसार छात्रावास मथुरा में रहकर प्राप्त कर रहे थे। आपने 13 वर्ष की आयु सन् 2010 में ही आचार्य विभवसागर जी से आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत ले लिये थे, सन् 2016़ में त्याग मार्ग अंगीकार करके अध्ययन छोड़कर इन्ही आचार्य के संघ में हो लिए थे। अब ब्र. अभिनंदन जैन की मुनि दीक्षा हो रही है। दीक्षा से पूर्व दीक्षार्थी के माता पिता से भी अनुमति ली जाती है। इसके लिए आपके माता-पिता, राहुल एवं पं. रोहित शास्त्री दोनों बड़े भाई, एक मात्र बहिन समस्त परिवार व परिजन टीकमगढ़, व बड़ामलहरा से कई प्राइवेट बसें लेकर दीक्षा की अनुमोदना हेतु परतापुर पहुंच रहे हैं।
डाॅ. महेन्द्रकुमार जैन ‘मनुज’
अभिनंदन जैन 14 फरवरी को 55 साधुओं के बीच लेंगे जैनेश्वरी मुनि दीक्षा

