गोल्ड लोन लेकर समय पर न चुकाना करीब एक लाख परिवारों को भारी पड़ेगा। दरअसल, बुधवार को गोल्ड लोन देने वाले एनबीएफसी और बैंक सोना नीलाम करने जा रहे हैं। संगठित गोल्ड लोन बाजार में आधे से अधिक हिस्सा गोल्ड लोन एनबीएफसी मुथूट फाइनेंस और मणप्पुरम फाइनेंस का है। ये ऐसे परिवार हैं, जिन्होंने सोना गिरवी रखकर कर्ज लिया, लेकिन समय पर चुका नहीं पाए।
गोल्ड लोन सोने के गहनों के बदले दिया जाता है। गहने की कीमत का करीब 70 फीसदी तक लोन मिलता है। इस मामले में कर्जधारक के लिए लोन मिलना जितना आसान है, उतना ही आसान कर्ज देने वाले के लिए इसकी वसूली है। डिफॉल्ट करने पर वह सोना बेचकर कर्ज वसूल लेते हैं। एनबीएफसी और बैंक हर महीने सोने की नीलामी करते हैं। इस महीने के लिए अब तक डेढ़ दर्जन शहरों में नीलामी के 59 नोटिस जारी हुए हैं।
गोल्ड लोन एक तरह का सिक्योर्ड लोन होता है। इसमें आपका सिबिल स्कोर मायने नहीं रखता। ये लोन पर्सनल लोन की तुलना में आसानी से और कम ब्याज पर मिल जाता है।
इसमें एक लाख से अधिक डिफॉल्टरों के सोने की नीलामी 16 फरवरी को होगी। निवेशक जागरूकता पर काम करने वाली संस्था मनीलाइफ फाउंडेशन की संस्थापक सुचेता दलाल कहती हैं, कोरोना काल में लाखों लोगों का रोजगार चला गया या उनका कारोबार चौपट हो गया। ऐसे लोगों ने सोना गिरवी रखकर लोन लिया, लेकिन चुका नहीं पा रहे हैं। यह यह ऐसी आर्थिक तंगी है जो दिखती नहीं है।
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़े बताते हैं कि कोरोनाकाल में देश में गोल्ड लोन का चलन तेजी से बढ़ा। जनवरी 2020 यानी कोविड से ठीक पहले देश के वाणिज्यिक बैंकों के कुल गोल्ड लोन का आकार 29,355 करोड़ रुपए था। यह दो साल में ढाई गुना होकर 70,871 करोड़ के पार हो गया, जो देश में बंटे कुल एजुकेशन लोन से अधिक है।
समय से कर्ज न चुकाने पर लोन देने वाली कंपनी को आपके सोने को बेचने का अधिकार होता है।
देश की सबसे बड़ी गोल्ड लोन कंपनी मुथूट फाइनेंस का कुल लोन पोर्टफोलियो इस दौरान 39,096 करोड़ से बढ़कर 61,696 करोड़ हो गया है। सुचेता दलाल कहती हैं, गोल्ड कंपनियां लोगों के इमोशन से खेलती हैं। मुसीबत में सोना गिरवी रखकर ब्याज चुकाने से बेहतर है कि सोना बेच दें और जब स्थिति ठीक हो जाए, तब सोना खरीद लिया जाए। जिनका सोना नीलाम होता है, उनके हाथ से सोने जैसी एसेट औने-पौने दाम पर निकल जाती है।
देश में गोल्ड लोन का औसत आकार 70 हजार रुपए का और औसत अवधि मात्र 4 महीने होती है। दैनिक भास्कर ने मुथूट फाइनेंस से इतने बड़े पैमाने पर हो रहे ऑक्शन को लेकर बात करने की कोशिश की, लेकिन कंपनी के प्रवक्ता ने यह कह कर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि हम ऑक्शन पर बात नहीं करते। हालांकि, एनबीएफसी के वरिष्ठ अधिकारी ने माना कि कुछ महीनों से ऑक्शन कई गुना बढ़ा है। इसके चलते, कुछ शहरों में खरीदार ढूंढना मुश्किल हो रहा है।
2 साल में ढाई गुना बढ़ा गोल्ड लोन, एजुकेशन लोन से ज्यादा
- कोल्लम, नई दिल्ली, भोपाल, पटना, जम्मू, भुवनेश्वर, गोवा, मैसुरु, मदुरै, लखनऊ, तिरुनवेली, मंगलौर और मुंबई में 1-1 जगह तथा 5 अन्य शहरों में नीलामी की जाएगी।
मजबूरी में बेचते हैं सोना
अर्थशास्त्री प्रो. अरुण कुमार कहते हैं, लोग लोन तभी लेते हैं जब उन्हें वित्तीय आवश्यकता होती है। कोरोना की दूसरी लहर में कई लोगों की नौकरी और रोजगार छिन गए। बीमारी में भी काफी पैसा खर्च हुआ। प्राइस का सर्वे बताता है कि 2016 के मुकाबले देश के 60 फीसदी निचले तबके की आय गिरी है। यही तबका सबसे अधिक गोल्ड लोन लेता है। अब आमदनी न होने से कर्ज चुका नहीं पा रहे हैं। यह माइक्रो लेवल पर आर्थिक तंगी को दर्शाता है।

