उद्योगपति गौतम अडानी संबंधित लेख, यूट्यूब वीडियो और इंस्टाग्राम पोस्ट हटाने के केंद्र सरकार के फरमान के खिलाफ वामपंथी पार्टियों और सामाजिक संगठनों ने मंगलवार (23 सितंबर) को मुंबई के दादर रेल्वे स्टेशन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।विभिन्न वक्ताओं ने कहा कि “गोदी मीडिया” पर पूर्ण नियंत्रण के बाद सरकार सोशल, डिजिटल मीडिया के पीछे पड़ी हुई है और स्वतंत्र पत्रकारिता का गला घोंटना चाहती है। वक्ताओं ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार तरह तरह से ऐसे पत्रकारों और स्वतंत्र मीडिया संस्थाओं को परेशान कर रही है जो आलोचनात्मक हैं।
प्रदर्शन के दौरान यूटूबर पत्रकारों से 138 यूट्यूब लिंक और 83 इंस्टाग्राम पोस्ट हटाने के केन्द्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय के आदेश को “अघोषित आपातकाल” करार देते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई।
विभिन्न वक्ताओं ने कहा कि “गोदी मीडिया” पर पूर्ण नियंत्रण के बाद सरकार सोशल, डिजिटल मीडिया के पीछे पड़ी हुई है और स्वतंत्र पत्रकारिता का गला घोंटना चाहती है। वक्ताओं ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार तरह तरह से ऐसे पत्रकारों और स्वतंत्र मीडिया संस्थाओं को परेशान कर रही है जो आलोचनात्मक हैं।
उल्लेखनीय है कि 16 सितंबर को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने रविश कुमार, परंजॉय गुहा ठाकुरता, अभिसार शर्मा, अजित अंजुम, ध्रुव राठी, न्यूजलॉन्ड्री और वायर आदि को नोटिस भेजकर अडानी इंटरप्राइजेस से संबंधित सामग्री हटाने का निर्देश दिया। केंद्र सरकार के इस फरमान को रविश कुमार, न्यूजलॉन्ड्री, परंजॉय आदि ने अदालत में चुनौती दी हुई है।
केंद्र सरकार का यह आदेश दिल्ली की रोहिणी कोर्ट के एक एकतरफा अंतरिम आदेश पर आया था, जिसमें उन लेखों, सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो से कथित मानहानि वाली सामग्री हटाने का निर्देश दिया गया था, जिन्हें अडानी समूह की प्रतिष्ठा हानिकारिक माना गया था।
अदालत का आदेश 6 सितंबर को आया था हालांकि चार पत्रकारों के उस आदेश के खिलाफ अपील पर अडानी के खिलाफ कुछ भी लिखने व दिखाने पर रोक रद्द कर दी। अदालत ने कहा कि सामग्री लंबे समय से पब्लिक डोमेन में थी तो लेख हटाने का निर्देश देने से पहले सिवल जज को पहले पत्रकारों का पक्ष सुनना चाहिए था।

