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अफगानी औरतों के हौसले :तालिबान से टकराती रहीं, स्कूल से सेना तक मौजूदगी दर्ज कराई

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अफगानिस्तान में तालिबान की हुकूमत आने के बाद महिलाओं के हालात पर सबसे ज्यादा चिंता जताई जा रही है। हालांकि, यह कहा जा रहा है कि तालिबान ही नहीं, बल्कि बीते 21 साल के अमेरिकी सेना के राज में भी अफगानिस्तान की 87% महिलाएं किसी न किसी रूप में पुरुषों के शोषण की शिकार हुईं। इसके बावजूद अफगानी महिलाओं ने हिम्मत नहीं हारी।

यानी अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के राज में भी महिलाओं के लिए बेहतर हालात नहीं थे। इसके बावजूद उन्होंने बीते 21 साल में दिलेरी दिखाई। हम इन्हीं 21 सालों की 20 तस्वीरें लेकर आए हैं, लेकिन कहानी की शुरुआत हमने जानबूझकर 1960 के दशक की एक तस्वीर से किया है, ताकि ये अंदाजा लग जाए कि वो पहले कैसी जिंदगी जी रही थीं।

साल 1926 में अफगानी शासक अमीर अमानुल्लाह खान ने महिलाओं को अपनी मनचाही ड्रेस पहनने की आजादी दे दी थी। 1960 के दशक में अफगानिस्तान की सड़कों पर अक्सर महिलाएं स्कर्ट पहने नजर आने लगी थीं। ये साल 1965 की फोटो है। इन महिलाओं की आजादी 1996 से 2001 के बीच पूरी तरह से छीन ली गई। पांच साल बाद जब अमेरिकी सेना आई तो महिलाओं ने कैसे तालिबान के कानूनों को तोड़ा, उसकी 20 तस्वीरें नीचे हैं-

ग्लोबल राइट्स की रिपोर्ट कहती है कि अब भी 100 में से 87 अफगानी महिलाएं शारीरिक शोषण, नौकरियों में भेदभाव, मानसिक प्रताड़ना और सेक्स के लिए हिंसा बर्दाश्त कर रही हैं।

अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर 7 अक्टूबर 2001 को अफगानिस्तान में अपना मिलिट्री ऑपरेशन लॉन्च कर दिया था। ये तस्वीर उसके 27 दिन बाद यानी‌ 4 नवंबर 2001 की है। तब अफगानी महिलाएं घर से अकेले बाहर नहीं निकल सकती थीं। तालिबानी सड़क पर किसी महिला को देखते ही टैंक लेकर पहुंच जाते थे। हालांकि महिलाओं ने इस नियम को तोड़ दिया।(Pic Credit- REUTERS/Yannis Behrakis)

ये तस्वीर 14 नवंबर 2001 की है। पांच साल बाद अफगानी महिलाओं को अपने चेहरे से पर्दा हटाने का मौका मिला था। तब एक खाना बंटने वाली जगह पर फोटोग्राफर को देखकर इस महिला ने अपना बुर्का हटाया था। वो जताना चाहती थी कि वह तालिबान के नियमों को नहीं मानती। (Pic Credit- REUTERS/Yannis Behrakis)

ये तस्वीर 18 नवंबर 2001 की है। अभी तालिबान के खिलाफ अमेरिका ने जंग छेड़ी ही थी कि 16 साल की मरियम शकेबर टीवी चैनल में जाकर बैठ गईं। जो तालिबान किसी को घर से बाहर निकलने पर पर्दा डलवाता है, उसको मुंहतोड़ जवाब देते हुए मरियम सीधे टीवी चैनल में पहुंच गईं। (Pic Credit-REUTERS/Shamil Zhumatov)

ये तस्वीर 18 फरवरी 2003 की है, जब काबुल की सड़क पर दो महिलाएं बिना किसी मर्द के कार की डिग्गी में बैठकर निकलीं। तब काबुल ऐसा करने वाली महिलाओं को अपना दुश्मन मानता था। (Pic Credit- REUTERS/Stringer)

ये तस्वीर 23 अप्रैल 2008 की है। तजाकिस्तान के बॉर्डर से लगी जगह पर अफगानी लड़कियां इस्लामिक हाईस्कूल में पढ़ने के लिए पहुंचीं थीं। तालिबान इसे गुनाह मानता था, लेकिन लड़कियों ने काफी हिम्मत दिखाई। (Pic Credit- REUTERS/Ahmad Masood)

ये तस्वीर 5 अक्टूबर 2009 की है। तब एक अफगानी पिता अपनी बच्ची को लेकर अमेरिकी मरीन रेजिमेंट दिखाने पहुंचा था। जबकि तालिबान ने लड़कियों को ऐसे घुमाने पर पाबंदी लगा रखी थी। (Pic Credit- REUTERS/Stringer)

ये तस्वीर 30 जनवरी 2010 की है। तब काबुल के एक कब्रगाह में बुर्का पहने महिला पहुंच गई थीं। वो अपने करीबियों को श्रद्धांजलि देने गई थी। पहले ऐसा करना गुनाह माना जाता था। (Pic Credit- REUTERS/Stringer)

ये तस्वीर 14 सितंबर 2010 की है। तब कई महिलाएं खुद बाहर आई थीं और अपने बच्चे- बच्चियों को साथ लाई थीं। पहले महिलाएं अपनी बच्चियों को लेकर बाहर नहीं जा सकती थीं। (Pic Credit- REUTERS/Stringer)

ये तस्वीर 23 सितंबर 2020 की है। जब काबुल में अफगान नेशनल आर्मी में एक लड़की ने जॉइन किया, तब उसकी शानदार सेरेमनी की गई थी। उसने हिम्मत दिखाई कि वो इस तरह से जॉब में जरूर आएगी। उस वक्त तालिबान नौकरी करने वाली महिलाओं की पत्‍थर मार-मार कर हत्या कर देता था। (Pic Credit- REUTERS/Stringer)

तालिबान ने महिलाओं पर स्पोर्ट्स देखने और उनमें हिस्सा लेने पर भी रोक लगा रखी थी। इसके बावजूद काबुल में महिलाओं ने बॉक्स‌िंग क्लब जाना शुरू कर दिया था। ये तस्वीर 26 दिसंबर 2011 की है। (Pic Credit- REUTERS/Ahmad Masood)

ये तस्वीर 11 दिसंबर 2012 की है जब अफगान नेशनल पुलिस में शामिल हुईं महिलाओं ने ट्रेनिंग लेनी शुरू की। उस वक्त महिलाओं की ताकत दिखाने के लिए अफगानी मेयर भी पहुंची थीं। मेयर ने अपना हथियार उठाकर इस तरह से दिखाया जैसे वो तालिबान पर हमले के लिए तैयार हों। (Pic Credit- REUTERS/Fabrizio Bensch)

ये तस्वीर 15 मार्च 2012 की है जब काबुल में एक महिला कार ट्रेनर ने दूसरी महिलाओं को ड्राइविंग सिखानी शुरू की थी। (Pic Credit- REUTERS/Stringer)

ये 2013 के इंटरनेशनल वुमन डे की फोटो है, जब एक अफगानी महिला अपने क्षेत्र के हालात का जायजा लेने हेलिकॉप्टर से निकली। (Pic Credit- REUTERS/Stringer)

ये तस्वीर 8 मार्च 2014 की है। तब एक अफगानी महिला ने अपने हाथ पावर-लिफ्टिंग में आजमाए। पहले यहां की महिलाओं का खेल देखना भी गुनाह था। (Pic Credit- REUTERS/Stringer)

तस्वीर 7 मार्च 2014 की है। तालिबान जिन अफगानी महिलाओं को संगीत सुनने नहीं दे रहा था, वहां की महिलाएं म्यूजिक ट्रेनिंग लेने लगी थीं। (Pic Credit- REUTERS/Morteza Nikoubazl)

14 जून 2014 की तस्वीर, जब एक अफगानी महिला ने वोट डालने के बाद अपनी उंगली के निशान को दिखाकर यह जताया कि वो भी अपने मत का प्रयोग कर सकती है। (Pic Credit- REUTERS/Stringer)

16 सितंबर 2015। दबाव के बावजूद अफगानी लड़कियां शिक्षा का महत्व समझने लगी थीं। वे खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ने और एक-दूसरे को पढ़ाने लगी थीं। (Pic Credit- REUTERS/Stringer)

20 जून 2019 और वो दिन फिर से लौटने लगे। अफगानी महिलाओं को डर लगने लगा कि अब उनके अधिकार फिर से खतरे में हैं तो उन्होंने पड़ोसी देशों की ओर भागना शुरू कर दिया। ये तस्‍वीर एक शरणार्थी कैंप की है। (Pic Credit- REUTERS/Stringer)

23 जनवरी 2020 को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक मॉडल तैयार हुई कि वो मॉडलिंग करेगी। उसने किया भी। ये तालिबान के खिलाफ सबसे बड़ा कदम था। (Pic Credit- REUTERS/Stringer)

इन महिलाओं को क्या पता था कि 2021 के अगस्त में फिर वही तालिबान लौट आएगा। इस वक्त अफगान महिलाएं बड़ी मुश्किल में फंस चुकी हैं, लेकिन वो पहले से हिम्मत दिखाती रही हैं। इस बार एक महिला ने कहा कि उनके कारोबार को कोई रोकने आया तो वो कहेंगी कि ये तभी संभव है जब उन्हें जान से मार दिया जाए। काबुल में अभी 5 महिलाएं धरना दे रही हैं।

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