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रैगांव में BSP नहीं होने से 31 साल बाद कांग्रेस का कब्जा, पृथ्वीपुर में BJP सपा का वोट शिफ्ट होने से जीती

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चुनावों में विकास, स्थानीय मुद्दों व राजनीतिक विचारधारा से ऊपर जातियों ने जगह ले ली है। उपचुनाव में दो सीटों पृथ्वीपुर और रैगांव पर बड़ा उलट फेल हुआ। रैगांव सीट 31 साल बाद बीजेपी ने कांग्रेस से छीनी। वहीं, पृथ्वीपुर बीजेपी ने कांग्रेस से वापस ले ली। वजह- दोनों ही पार्टियों ने अपने बूते ये सीट नहीं जीती है। रैगांव कांग्रेस को इसलिए मिल गई, क्योंकि यहां बहुजन समाज पार्टी मैदान में नहीं थी। उसका वोटर कांग्रेस में शिफ्ट हुआ, जबकि पृथ्वीपुर में शिशुपाल सिंह यादव की जीत में सपा का वोट बैंक अहम माना जा रहा है। जो यादव के साथ बीजेपी की तरफ झुक गया। खंडवा लोकसभा और जोबट विधानसभा क्षेत्र में बीएसपी और सपा का जनाधार नहीं है।

रैगांव में ऊषा चौधरी ने कांग्रेस का किया था समर्थन
रैगांव सीट पर बीएसपी के मैदान में नहीं होने का फायदा कांग्रेस को हुआ। बीएसपी नेता व पूर्व विधायक ऊषा चौधरी का कांग्रेस को समर्थन रहा। 2018 के चुनाव में बीएसपी से चुनाव मैदान में रहीं ऊषा चौधरी को 11% वोट मिले थे। उप चुनाव में कांग्रेस की कल्पना वर्मा सबसे अधिक 51% वोट लेकर जीती है।

वोटर संख्या के हिसाब से देखें तो कल्पना 12, 290 वोट ज्यादा लेकर विधायक बन गईं, जबकि पिछले चुनाव में उनके खाते में 33% वोट आए थे। इससे स्पष्ट है कि इस चुनाव में बीएसपी का वोटर कांग्रेस की तरफ शिफ्ट हुआ। बीजेपी की प्रतिमा बागरी को 42% वोट मिले, जबकि बीजेपी के जुगल किशोर बागरी 45% वोटर लेकर जीते थे।

इसलिए कांग्रेस के गढ़ में बीजेपी ने लगा ली सेंध
पृथ्वीपुर विधानसभा का पृथ्वीपुर नगर हमेशा कांग्रेस का गढ़ रहा है, लेकिन इस बार यहां बीजेपी ने सेंध लगा ली है। इसमें भले ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की लगातार 8 सभाएं व 50 से अधिक नुक्कड़ सभाओं को अहमियत दी जा रही है। यहां बीजेपी उम्मीदवार शिशुपाल सिंह यादव का प्रभाव भी है। यही वजह है कि शिशुपाल 2018 का चुनाव समाजवादी पार्टी से लड़े थे, तब उन्हें 32% वोट मिले थे। वे दूसरे नंबर पर थे, जबकि बीजेपी को मात्र 7% वोट लेकर चौथे नंबर पर चली गई थी। सपा का असर इस सीट पर इसलिए भी रहा, क्योंकि यह इलाका यूपी से सटा हुआ है।

यही वजह है कि बीजेपी पहले शिशुपाल को बीजेपी में लेकर आई और फिर टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा। माना जा रहा है कि बीजेपी की यह रणनीति काम आई, वरना नितेंद्र सिंह राठौर को हरा कर इस सीट पर कब्जा करना आसान नहीं था। बीजेपी ने यह सीट 15,687 के बड़े अंतर से जीत ली है।

दोनों सीटों पर बीजेपी-कांग्रेस ने झोंकी थी ताकत
रैगांव और पृथ्वीपुर सीट पर बीजेपी और कांग्रेस ने ताकत झोंकी थी। रैगांव में विंध्य के बड़े कांग्रेसी नेता अजय सिंह ने मोर्चा संभाला था। कमलनाथ ने भी यहां बड़ी सभा की थी। बीजेपी ने यहां इमोशनल कार्ड तक खेला था। हालांकि बागरी परिवार से किसी को टिकट नहीं दिए जाने का नुकसान भी बीजेपी को उठाना पड़ा।

इसी तरह, पृथ्वीपुर में जातियों का समीकरण बैठाने के लिए बीजेपी ने मंत्रियों की बड़ी फौज भी उतारी थी, लेकिन कांग्रेस का दमोह मॉडल इसके आगे फेल हो गया। बीजेपी ने यहां चुनाव प्रचार के दौरान गुंडागर्दी को मुद्दा भी बनाया था।

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