अग्नि आलोक

*इजरायल और हमास के युद्धविराम के बाद घर लौटने लगे गाज़ावासी, लेकिन उनके सामने चुनौतियों का पहाड़*

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इजरायल और हमास के बीच शुक्रवार दोपहर से गाज़ा में युद्धविराम (सीजफायर) लागू हो गया. जिसके परिणामस्वरूप हजारों फ़िलिस्तीनियों ने अपने घरों की ओर लौटना शुरू कर दिया है. शनिवार (11 अक्टूबर) को हजारों लोग पैदल ही गाज़ा शहर की ओर बढ़े. लोग उत्तर की ओर गाज़ा शहर की ओर जा रहे हैं और वहां पहुंचकर उन खंडहरों को देख रहे हैं जहां उनके घर हुआ करते थे.

गाज़ा एक गहरे मानवीय संकट से गुज़र रहा है, जहां व्यापक भुखमरी, संपत्ति का भारी विनाश और दो साल के युद्ध में इसके लगभग 20 लाख लोग बार-बार विस्थापित हुए हैं. युद्ध से पहले यह क्षेत्र गरीबी से ग्रस्त था. संघर्ष शुरू होने के बाद से खाद्य आपूर्ति और अन्य सहायता में भारी कटौती की गई है जिससे हालात और भी बदतर हो गए हैं. इजरायल और हमास के बीच समझौते में इस क्षेत्र में सहायता बढ़ाने की शर्तें शामिल हैं. न्यूयार्क टाइम्स के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर योजनाओं के बारे में बताया कि इजरायल रविवार से संयुक्त राष्ट्र को गाजा में अधिक मात्रा में मानवीय सहायता पहुंचाने की अनुमति देगा.

घर लौटते गाजावासियों का हुजूम. जहां तक नजर जाती है लोग ही लोग नजर आते हैं.

बड़े पैमाने पर तबाही
गाज़ा पट्टी में लड़ाई रुकने की खुशी, उत्तर की ओर लौटने पर कई लोगों को झेलनी पड़ रही तबाही के पैमाने से फीकी पड़ गई है. पिछले महीने इजरायल द्वारा गाज़ा शहर पर जमीनी हमला शुरू करने के बाद लाखों लोग वहां से भाग गए थे. एक रिपोर्ट के मुताबि 33 वर्षीय मनाल मुफ्ता ने कहा, “हम अपने शहर में वापस आ गए हैं, लेकिन ऐसा महसूस नहीं हो रहा है. हमने सब कुछ खो दिया है.” मनाल मुफ्ता ने कहा, “युद्ध से पहले वह बेकरी का काम करती थीं और अगर युद्धविराम स्थायी शांति में बदल गया तो उन्हें उम्मीद है कि वह अपना बिजनेस फिर से शुरू कर पाएंगी. लेकिन वह दिन जब हालात संघर्ष से पहले जैसे हो जाएंगे अभी भी दूर लगता है. शायद हमारे नाती-पोते गाज़ा का पुनर्निर्माण देखेंगे. जो भी लंबे समय तक जीवित रहेगा, वह इसे देखेगा – वह गाज़ा जिसे हम याद करते हैं.”

कुछ हफ़्तों में बदल गया सब कुछ
कई लोगों के लिए लड़ाई में आयी इस रुकावट ने घर लौटने और वहां जीवन के बचे हुए पहलुओं को समझने का मौका दिया. कुछ लोगों के लिए यह गंभीर अनुभव था.  सड़क किनारे थैलों, घरेलू सामान और तिरपाल के टुकड़े के बीच बैठी हुई 36 वर्षीय मैसून वादी ने कहा, “आज मुझे कुछ भी महसूस नहीं हो रहा है. न उदासी, न खुशी – बस खालीपन.” वह यह देखकर हैरान रह गई कि उसके और उसके परिवार के कुछ हफ़्ते पहले शहर से भागने के बाद से शहर कितना बदल गया है. उसने कहा, “यह पहले से ही तबाह था, लेकिन अब जो मैं देख रही हूं वह और भी बुरा है. हमारे पास कोई घर नहीं है. मैं किसी भी खड़ी दीवार पर यह तिरपाल बांध दूंगी और छत के लिए एक कंबल टांग दूंगी.” उसके लिए सबसे बड़ा सवाल यही था कि कैसे गुजारा किया जाए. मैसून वादी ने कहा, “मुझे इसकी परवाह नहीं कि मिस्र में क्या सहमति बनती है. मुझे एक तंबू की, पीने के पानी की जरूरत है.”

गाजा में ये नजारा अब आम है, लोग अपने घरों के लिए लौट रहे हैं, जिनके केवल निशान बचे हैं.

लड़ना होगा एक और युद्ध
पिछले हफ़्ते शहर का दौरा करने वाली संयुक्त राष्ट्र के मानवीय कार्यालय की प्रवक्ता ओल्गा चेरेवको ने कहा, “विनाश का पैमाना वाकई चौंका देने वाला है.” संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि लगभग 170,000 मीट्रिक टन खाद्यान्न, दवाइयां और अन्य सामग्री परिवहन के लिए तैयार है. गाज़ा शहर के शिफा अस्पताल के निदेशक डॉ. मोहम्मद अबू सलमिया ने कहा कि जैसे-जैसे लोग शहर लौटेंगे, स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को ‘गंभीर कमी’ और ‘विशाल’ चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा उन्होंने कहा, “हम एक युद्ध समाप्त कर चुके हैं और दूसरे में प्रवेश कर चुके हैं.” गाज़ा की नागरिक सुरक्षा आपातकालीन बचाव सेवा के प्रवक्ता महमूद बस्सल ने बताया कि युद्धविराम शुरू होने के बाद से गाजा शहर की सड़कों पर 63 शव बरामद किए गए हैं. उन्होंने कहा कि उनका मानना ​​है कि मलबे के नीचे दर्जनों और शव हो सकते हैं. गाज़ा को फिलहाल अपने बूते खड़े होने के लिए लंबा समय लगेगा.

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