इंदौर
इंदौर में दो बुजुर्गों की मौत के बाद भी परिजन ने मौत के बाद उनकी देह दान की है। इसके साथ ही दोनों की आंखें व स्किन भी दान की गई है। एक मामले में तो रिटायर्ड IAS अधिकारी ने खुद के अस्पताल होने के दौरान पत्नी की मौत के बाद संकल्प पूरा कराया, जबकि दूसरे मामले में ट्रांसपोर्टर की देह, आंखें और त्वचा दान की गई है। अब दोनों की बॉडी पर मेडिकल स्टूडेंट्स रिसर्च करेंगे।
पहला मामला तिरुपति कॉलोनी निवासी रिटायर्ड IAS वीएन दीक्षित (75) का है। दीक्षित 13 साल CBI में रहने के बाद रिटायर्ड हुए थे। वर्तमान में वे रॉर्बट नर्सिंग होम के ट्रस्टी हैं। हार्ट की बीमारी के चलते वे इसी अस्पताल में एडिमट हैं। शनिवार रात उनकी पत्नी आशा दीक्षित (70) घर पर हार्ट अटैक से निधन हो गया। इसकी सूचना सुबह पति को अस्पताल में दी गई। उन्होंने पत्नी द्वारा मरने के बाद देह दान का संकल्प पूरा कराने के लिए डॉक्टरों से बात की। इसके बाद मुस्कान ग्रुप के सेवादार राजेंद्र मार्को, जीतू बागानी, गोपाल सिरोके, जयववंत निकम व अशोक राठौर आदि ने कॉन्टैक्ट किया गया। देह दान के साथ आंखें और त्वचा दान कराने की प्रक्रिया शुरू की।
इस बीच, रतलाम कोठी निवासी ट्रांसपोर्टर संपतलाल खजांची (70) की भी शनिवार रात हार्ट अटैक से मौत हो गई। मामले में उनके परिवार के मनोज, सुुनील व राजेश खजांची, रिश्तेदार प्रीतेश जैन ने भी उनके संकल्प अनुसार देह दान के लिए मुस्कान ग्रुप से संपर्क किया। इस पर दोपहर को दोनों का संकल्प पूरा कराते हुए एमजीएम मेडिकल कॉलेज में उनकी देह दान की गई। इस दौरान दीक्षित परिवार के अनिल दीक्षित, कुट्टी मेनन, हेमंत शर्मा, दीपक अग्रवाल, सीमा जसवानी व खंजाची परिवार की आंखें नम हो गई।
खास बात यह कि खजांची परिवार की बहू शिरोमणि खजांची के कुछ समय पहले ब्रेन डेड हो गई थी। तब भी परिवार ने उनके अंगदान कराए थे। इसके लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था। दोनों की आंखें एमके इंटरनेशनल आई बैंक और त्वचा चोइथराम अस्पताल को दान की गई है।

