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राष्ट्रपति संवैधानिक सर्वोच्च सेनापति , तब सीडीएस पद एक म्यान में दो तलवार जैसी बात : अजय खरे

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रीवा । समाजवादी जन परिषद के नेता अजय खरे ने कहा है कि सीडीएस जनरल बिपिन रावत के दुखद निधन के बाद अभी तक पद का खाली रहना सरकार की गैर जिम्मेदारी को दर्शाता है या फिर  राष्ट्रपति के सर्वोच्च सेनापति होते हुए उस पद की कोई जरूरत नहीं है । उन्होंने कहा कि थल जल और वायु सेना के अलग-अलग प्रमुख होते हैं , वहीं भारत गणराज्य के राष्ट्रपति इन तीनों सेनाओं के सर्वोच्च सेनापति हैं । यह एक संवैधानिक मानद् पद है , सारे फैसले मुख्य रूप से उनके नाम से होते हैं पर सभी फैसले प्रधान मंत्री कैबिनेट और रक्षा मंत्रालय के सहयोग से लिए जाते हैं । राष्ट्रपति सर्वोच्च सेनापति हैं , इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 2019 को लाल किले के प्राचीर से अपने संबोधन में चीफ आफ डिफेंस स्टाफ के नए पद निर्मित करने का ऐलान किया गया था जिस पर 1 जनवरी 2020 को थल सेनाध्यक्ष विपिन रावत को नियुक्त किया गया । चीफ आफ डिफेंस स्टाफ का पद निर्मित किया जाना , अभी तक की मान्य परंपराओं को तोड़ना ही नहीं बल्कि भारतीय गणराज्य के राष्ट्रपति के सर्वोच्च सेनापति होने के संवैधानिक अधिकारों की अवहेलना और गरिमा का हनन भी है । प्रधानमंत्री मोदी का यह फैसला एक म्यान में दो तलवार रखने जैसी कहावत को प्रकट करता है । सत्ता में आसीन लोगों को इस बात का ध्यान रहना चाहिए कि भारत एक सैनिक राज्य नहीं , एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न , समाजवादी , पंथनिरपेक्ष , लोकतंत्रात्मक गणराज्य है । संवैधानिक रूप से भारत के सर्वोच्च सेनापति के रूप में राष्ट्रपति मौजूद हैं । ऐसी स्थिति में सीडीएस पद का कोई औचित्य नहीं है और अब उसे समाप्त कर दिया जाना बेहतर होगा।

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