अजित पवार का प्लेन क्रैश कैसे हुआ? तकनीकी खामी या खराब मौसम
पुणे: महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार की मौत की खबर ने सभी को चौंका दिया है। राजनीति के दिग्गज अजित पवार के असमय निधन से महाराष्ट्र शोक में डूब गया है। यह हादसा तब हुआ जब प्लेन बारामती में लैंड कर रहा था और दादा समेत पांच लोगों की मौत हो गई। अजित पवार के निधन से पवार परिवार को बड़ा झटका लगा है। जिस जगह हादसा हुआ, वहां रहने वाले कुछ लोगों ने यह हादसा अपनी आंखों से देखा। इस हादसे में दादा की पहचान कैसे हुई? वहां के चश्मदीदों ने इस बारे में डिटेल में बताया है।महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की एक विमान दुर्घटना में दुखद मृत्यु हो गई। यह घटना बारामती में हुई जब उनका विमान उतरने की कोशिश कर रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्होंने कैसे इस भयानक दुर्घटना को अपनी आंखों से देखा और अजित पवार को कैसे पहचाना।
चश्मदीद ने क्या बताया?
चश्मदीद के अनुसार, जिस समय यह हादसा हुआ, वे अपने घर के पीछे ही थे। उन्होंने पहले विमान को आते देखा, लेकिन जब वह वापस मुड़ा तो बहुत नीचे आ रहा था। विमान रनवे के किनारे जाकर क्रैश हो गया। विमान के कुछ हिस्से उनके घर के पीछे भी गिरे। उन्होंने तुरंत हवाई अड्डे पर लोगों को सूचित किया। एक बड़ा धमाका हुआ और कोई कुछ कर नहीं पा रहा था। धमाके के बाद वे डरकर दूसरी तरफ चले गए। पुलिस ने उन्हें बुलाया और पानी लाने को कहा। उन्होंने अपनी आंखों से लोगों के शवों को उड़कर गिरते देखा।
कैसे हुई अजित दादा की पहचान?
महिला चश्मदीद ने बताया कि एक शव ठीक से दिख नहीं रहा था और आधा शरीर फूला हुआ था। उन्होंने उसे कंबल में लपेटा। यह सब करीब 15-20 मिनट तक चला। शुरुआत में उन्हें पता नहीं था कि यह अजित पवार हैं। दो शव एक तरफ पड़े थे और बाकी तीन शव उनमें फंसे हुए थे। उन्होंने बताया कि अजित पवार के शव को उन्होंने उनके गॉगल और घड़ी से पहचाना। इसलिए उन्होंने सबसे पहले उनका शव निकाला। यह घटना सुबह करीब 8:45 बजे हुई थी।
धमाके के साथ हादसा
चश्मदीद ने बताया कि प्लेन काफी नीचे था। उसने लैंड करने की कोशिश की लेकिन वह ऊपर नहीं उठ सका। धमाका बहुत जोरदार था। दो लाशें आस-पास पड़ी थीं। एक तीसरे चश्मदीद ने कहा कि जब प्लेन हवा में था, तो उसमें खराबी जैसी अजीब आवाज आई। प्लेन ने दो चक्कर लगाए गए लेकिन प्लेन रनवे पर लैंड नहीं कर सका और कुछ देर बाद प्लेन पास में ही क्रैश हो गया।
प्लेन क्रैश में कुल पांच लोगों की मौत
प्लेन क्रैश में कुल पांच लोगों की मौत हो गई। हादसे में मरने वालों के नाम डिप्टी चीफ मिनिस्टर अजीत पवार, बॉडीगार्ड विदीप जाधव, कैप्टन शांभवी पाठक, पायलट कैप्टन सुमित कपूर और फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली हैं। शांभवी पाठक अजित पवार के प्लेन के पायलटों में से एक थीं। उन्होंने 2019 में कमर्शियल पायलट का लाइसेंस लिया था। वह अभी VSR कंपनी में पायलट के तौर पर काम कर रही थीं। जबकि 36 साल के विदीप जाधव मुंबई पुलिस फोर्स में 2009 बैच के कांस्टेबल थे। वह पिछले पांच साल से अजित पवार के प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर काम कर रहे थे।
अजित पवार का प्लेन क्रैश कैसे हुआ? तकनीकी खामी या खराब मौसम
विमानन महानिदेशालय DGCA ने भी विमान हादसे में अजित पवार समेत सभी लोगों की मौत की पुष्टि की है। हालांकि, अजित पवार के प्लेन क्रैश की असल वजह जांच के बाद ही सामने आ पाएगी। इसके लिए दिल्ली से AAIB की टीम जांच करने जा रही है। मगर, शुरुआती रिपोर्टों में तकनीकी खामी की बात सामने आई है।यह कहा जा रहा है कि पायलट ने संकरे रनवे पर उतरने के लिए इमरजेंसी लैंडिंग की इजाजत मांगी थी। मगर, विमान का नोज रनवे पर टकरा गया। यूरोपियन ट्रांसपोर्ट सेफ्टी काउंसिल की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूरी दुनिया में 90 प्रतिशत प्लेन क्रैश की बड़ी वजह टेक्निकल फाल्ट होते हैं। साथ ही खराब मौसम भी प्लेन क्रैश का जिम्मेदार हो सकता है।
सबसे ज्यादा प्लेन क्रैश लैंडिंग और टेकऑफ के दौरान
एविएशन सेफ्टी के अनुसार, सबसे ज्यादा विमान हादसे टेक ऑफ के दौरान और फिर लैंडिंग के दौरान होते हैं। 2023 में 109 ऐसी दुर्घटनाएं हुई थीं, जिनमें से 37 टेकऑफ और 30 लैंडिंग के दौरान हुई थीं। बीते साल एयर इंडिया विमान हादसा भी टेकऑफ के दौरान ही हुआ था। नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, बीते 7 साल में हर साल औसतन 200 विमान हादसे हुए हैं। दरअसल, टेकऑफ या लैंडिंग के दौरान ही अक्सर इंजन फेल हो जाते हैं। यह तकनीकी खामी के चलते होती है।
पायलट कई बार कर बैठते हैं बड़ी गलती
wkw.com पर छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ज्यादातर प्लेन हादसों में पायलट की गलती विमानन दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण है। विमान चलाने के लिए लंबी ट्रेनिंग, विमान के मैकेनिकल का ज्ञान और विमान को प्रभावी ढंग से और सुरक्षित रूप से चलाने के लिए हाथों-आंखों में बेहतर तालमेल की आवश्यकता होती है। पायलटों को आगे के बारे में भी सोचना पड़ता है। उड़ानों की योजना बनाना, मौसम की जांच करना और बदलावों का अनुमान लगाना, ये सभी सुरक्षित पायलट होने की कुंजी हैं।
6 साल में 813 प्लेन हो गए हादसों का शिकार
विमान हादसों पर नजर रखने वाली संस्था एविएशन सेफ्टी के आंकड़ों के अनुसार, 2017 से 2023 के बीच दुनियाभर में 813 प्लेन क्रैश हो चुके हैं। प्लेन क्रैश की 813 घटनाओं में 1,473 यात्रियों ने इन हादसों में जान गंवा दी थी। सबसे ज्यादा विमान हादसे लैंडिंग के दौरान होते हैं। इन सात साल में लैंडिंग के दौरान 261 हादसे हुए हैं। उसके बाद 212 हादसे उड़ान के दौरान ही हुए हैं। इसी दौरान भारत में 14 हादसे हुए हैं।
खराब मौसम भी प्लेन क्रैश के लिए अहम वजह
रिपोर्ट के अनुसार, पायलट कई बार खराब मौसम में फंस जाता है या सटीक अनुमान नहीं लगा पाता है तो प्लेन क्रैश हो सकता है। बादलों में प्लेन उड़ाते वक्त भी कभी-कभी पायलट भ्रमित हो जाते हैं। यदि पायलट अच्छे कॉकपिट संसाधन प्रबंधन कौशल का पालन नहीं करते हैं तो प्लेन क्रैश हो सकते हैं। मौसम की स्थिति के आधार पर, विमान विज़ुअल फ्लाइट रूल्स (VFR) या इंस्ट्रूमेंट फ्लाइट रूल्स (IFR) द्वारा संचालित होंगे। VFR उड़ाने वाले पायलट मुख्य रूप से विमान को सुरक्षित रूप से उड़ाने के लिए कॉकपिट के बाहर दृष्टि और दृश्य संकेतों का उपयोग करते हैं। इंस्ट्रूमेंट फ्लाइट रूल्स (IFR) के तहत विमान संचालन में विशेष ज्ञान और कौशल की जरूरत होती है।
ATC की लापरवाही भी बड़ी भूमिका निभा सकती है
नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (ATC) की प्लेन की लैंडिंग और टेकऑफ में बड़ी भूमिका होती है। ATC विमानों को एक दूसरे से अलग रखने और भीड़भाड़ वाले हवाई क्षेत्र में उड़ानों का मार्गदर्शन करने में मदद करते हैं। ATC पायलटों से संवाद करते हैं और उन्हें उड़ान की दिशा बताते हैं और विमान को जिस ऊंचाई पर उड़ना चाहिए, उसके बारे में बताते हैं। यदि ATC पायलट को गलत जानकारी देता है या उड़ानों को अलग-अलग बनाए रखने में विफल रहता है, तो टकराव हो सकता है।
पक्षियों के टकराने से भी होते हैं ऐसे बड़े हादसे
वेबसाइट Travel Radar के अनुसार, दुनियाभर में हर दिन बर्ड स्ट्राइक के औसतन 150 मामले सामने आते हैं। अकेले अमेरिका में ही हर साल 14 हजार बर्ड स्ट्राइक के मामले सामने आते हैं। 2016 से 2021 तक के पांच साल के आंकड़ों की बात करें तो 2,73,000 मामले सामने आ चुके हैं। यह भी कहा जाता है कि दुनिया में 80 फीसदी बर्ड स्ट्राइक तो रिपोर्ट ही नहीं हो पाती हैं।

