नई दिल्ली. जीएसटी परिषद ने बुधवार को 56वीं बैठक में खाने-पीने की चीजों से लेकर गाड़ी तक पर जीएसटी की दरें घटा दी हैं. उम्मीद लगाई जा रही है कि त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को इससे काफी राहत मिलेगी. लेकिन, जीएसटी परिषद ने एक ऐसे उत्पाद पर टैक्स की दर बढ़ा दी है, जो अन्य सभी चीजों पर घटाए गए जीएसटी के फायदे को खत्म कर सकता है. जीएसटी परिषद ने तेल एवं गैस की खोज और उत्पादन से जुड़े उपकरणों पर जीएसटी बढ़ा दिया है. इससे देश में तेल का उत्पादन महंगा हो जाएगा, जिसका असर तेल की खुदरा कीमतों पर भी दिखेगा.
जीएसटी परिषद ने तेल एवं गैस खोजने वाली सेवाओं पर टैक्स की दर 12 फीसदी से बढ़ाकर 18 फीसदी कर दिया है. पेट्रोलियम कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस की खोज, खनन अथवा ड्रिलिंग से संबंधित सेवाओं पर अब माल एवं सेवा कर (जीएसटी) 18 फीसदी की दर से लगेगा और इसके साथ इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) भी मिलेगा. यही व्यवस्था इस क्षेत्र की सहयोगी सेवाओं के लिए भी होगी.
जीएसटी बढ़ने से क्या असर पड़ेगा
रेटिंग एजेंसी इक्रा लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रशांत वशिष्ठ ने कहा कि कच्चे तेल एवं प्राकृतिक गैस के जीएसटी के दायरे से बाहर होने के कारण इनकी बिक्री पर टैक्स ऑफसेट उपलब्ध नहीं होगा. कंपनियां उत्पादन पर दिए गए अतिरिक्त जीएसटी को बिक्री के समय समायोजित नहीं कर पाएंगी जिससे उनके लिए फंसे हुए टैक्स की स्थिति पैदा होगी. इसका मतलब है कि कंपनियां इन पर आईटीसी का लाभ नहीं ले सकेंगी. जाहिर है कि वह अपनी बढ़ी हुई लागत उपभोक्ताओं से वसूलेगी और पेट्रोलियम उत्पाद महंगे हो जाएंगे.
आने वाली है दोहरी चुनौती
प्रशांत ने बताया कि अप्रैल, 2025 से वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और ओपेकप्लस द्वारा उत्पादन कटौती में ढील देने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल एवं गैस के दाम काफी घट गए हैं. ऐसे में उत्पादन लागत बढ़ने और दामों में कमी आने से पेट्रोलियम खोज एवं उत्पादन क्षेत्र के लिए दोहरी चुनौती पैदा होगी. चॉइस इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज के धवल पोपट ने कहा कि तेल और गैस की खोज, उत्पादन और पाइपलाइन सेवाओं पर जीएसटी दर 12 से बढ़ाकर 18 प्रतिशत करने से परिचालन लागत बढ़ेगी और पेट्रोलियम कंपनियों का मुनाफा घटेगा.

