अग्नि आलोक

*डॉ. अंबेडकर की जन्मभूमि पर हो रहे निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार,ऑस्ट्रेलियन मार्बल की जगह लोकल मार्बल, घोटाले के आरोप*

Share

इंदौर : महू में डॉ.अंबेडकर की जन्मभूमि पर अस्थि कलश रखने के लिए तैयार किए गए मोनूमेंट (आधारशिला) के निर्माण कार्य में घोटाले के आरोप हैं. आरोप है कि ऑस्ट्रेलियन मार्बल के स्थान पर दोयम दर्जे के मार्बल का इस्तेमाल किया गया है. इस मामले का एक ऑडियो वायरल होने के बाद डॉ.अंबेडकर के अनुयायियों ने जांच करने की मांग की है.

अंबेडकर की जन्मभूमि को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा

मामले के अनुसार महू स्थित अंबेडकर स्मारक पर 6 दिसंबर 2021 को महापरिनिर्वाण दिवस का आयोजन किया गया था. इस दौरान केंद्र सरकार ने अंबेडकर की जन्मभूमि को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने की घोषणा की थी. अंबेडकर स्मारक के परिसर में मौजूद एक कमरे में रखे बाबासाहब के अस्थि कलश को महू आने वाले अनुयायियों के दर्शनों के लिए मुख्य हाल में स्थापित किया जाने की प्लानिंग की गई. इसके लिए ऑस्ट्रेलियन मार्बल की शिला वाला मोनुमेंट तैयार होना था, जो 6 फीट ऊंचा बनना था. इसके चारों ओर 6 इंच के अशोक स्तंभ और बीच में अशोक चक्र बनाया जाना था.

ऑस्ट्रेलियन मार्बल से निर्माण का कोटेशन

इस कार्य के लिए डॉ.अंबेडकर मेमोरियल सोसायटी के तत्कालीन सचिव राजेश वानखेड़े ने इंदौर की वीणा स्टोन गैलरी नामक एजेंसी से ऑस्ट्रेलियन मार्बल से निर्माण का कोटेशन लिया, जो 16 लाख 51 हजार का था. बाद में इतनी ही राशि के बदले में ऑस्ट्रेलियन मार्बल के स्थान पर सामान्य संगमरमर लगाने पर ही सहमति दे दी गई. इस बारे में समिति के सचिव राजेश वानखेडे और पत्थर लगने वाले ठेकेदार महेंद्र मीणा के बीच फोन पर ऑस्ट्रेलियन मार्बल के स्थान पर लोकल मार्बल लगाने के लिए कथित रूप से डील हुई, उसका ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

ऑस्ट्रेलियन मार्बल की जगह लोकल मार्बल लगाने का आरोप

वायरल ऑडियो से खुली पोल

कथित वायरल ऑडियो में ऑस्ट्रेलियन मार्बल लगाने के स्थान पर डुप्लीकेट मार्बल लगाने पर बात हो रही है. इसके बाद अंबेडकर मेमोरियल सोसायटी ने वीणा स्टोन गैलरी को 16,51000 के हिसाब से आधी राशि के अग्रिम भुगतान के रूप में 80,21000 का का चेक भी जारी कर दिया. आरोप है कि इस एजेंसी ने जो मोनुमेंट तैयार किया, वह लोकल मार्बल का है. इसकी वास्तविक कीमत 12 लाख 50 हजार है. जो पत्थर लगने वाले महेंद्र मीणा ने समिति के सचिव को भुगतान के लिए भेजे अपने अंतिम बिल में दर्शायी है. हालांकि सार्वजनिक रूप से इस कार्य में समिति द्वारा 16 लाख 51000 ही दर्शाया गया.

लोकल मार्बल लगाने वाले का 4 लाख बकाया

इस मामले में जब ईटीवी भारत ने पड़ताल की तो पता चला कि जिस एजेंसी ने यह मोनुमेंट बनाया, उसे लोकल मार्बल की बकाया 4 लाख रुपए की राशि का भी भुगतान 2021 के बाद से अब तक नहीं हुआ है. इतना ही नहीं समिति के तत्कालीन सचिव राजेश वानखेड़े ने बाद में आंशिक भुगतान के रूप से यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया का 50 हजार का जो चेक संबंधित ठेकेदार को 26 दिसंबर 2022 को दिया था, वह भी 13 जनवरी 2023 को बाउंस हो गया. अब संबंधित ठेकेदार भी बीते 2 साल से अपने बकाया पेमेंट के लिए भटक रहा है.

काम भी अधूरा, कलेक्टर से जांच की मांग

जिस स्थान पर यह निर्माण होना था, वहां भी पूरा काम अधूरा है. इस बीच स्मारक समिति के सदस्यों के बीच वर्चस्व को लेकर विवाद के बाद यह कार्य भी अधर लटक गया. यहां निर्माण कार्य अधूरा है. फिनिशिंग अब तक नहीं हो पाई है. इस मामले में डॉ.अंबेडकर स्मारक समिति के तत्कालीन कोषाध्यक्ष सुनील खंडेराव का कहना है “मोनुमेंट को लेकर भुगतान की सारी प्रक्रिया सचिव राजेश वानखेडे द्वारा ही संपन्न की गई और कोषाध्यक्ष होने के बावजूद भी उन्हें इस जानकारी से अनभिज्ञ रखा गया.”

आस्ट्रेलियन मार्बल से निर्माण का जिक्र

इधर, राजेश वानखेड़े से इस मामले में लगातार चर्चा करने के प्रयास किए गए लेकिन उन्होंने अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया. वहीं, अंबेडकर मेमोरियल सोसायटी के सदस्य राजीव अंभोते ने इस मामले की जांच की मांग कलेक्टर से की है.

ठेकेदार बोला- लोकल संगमरमर लगाया है

इधर, इस मामले के उजागर होने के बाद पत्थर लगने वाले महेंद्र मीणा का कहना है “समिति के सचिव के साथ हुई चर्चा के बाद ही ऑस्ट्रेलियन मार्बल के स्थान पर लोकल संगमरमर लगाया है, जिसका अलग से 12 लाख 50000 का बिल दिया है. अभी इस बिल के हिसाब से भी पूरा भुगतान नहीं हुआ है. अभी करीब 4:30 लाख रुपए लेना है. हालांकि पहले उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई मार्बल के हिसाब से आधा बिल का पेमेंट पूर्व में दिए गए चेक से कर दिया था.”

Exit mobile version