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केंद्र सरकार पर निशाना:पूर्व केंद्रीय मंत्री असलम शेरखान ने कहा- इमरजेंसी की तरफ जा रही यह सरकार

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इंदौर

अपनी बयानबाजी को लेकर हमेशा चर्चा में रहने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री असलम शेरखान बुधवार को इंदौर पहुंचे। इस दौरान शेरखान ने किसान आंदोलन पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार जो किसानों के साथ व्यवहार किया जा रहा है, इससे शर्मनाक व्यवहार नहीं हो सकता। किसानों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए दीवार खड़ी कर रहे हैं। सड़कें खोद रहे हैं। यह सरकार इमरजेंसी की तरफ जा रही है।

शेरखान ने आगे कहा कि यह सरकार भी इंदिरा गांधी सरकार के नक्शे कदम पर आगे बढ़ रही है। 1977 में इंदिरा सरकार भारी बहुत से आई थी, लेकिन उन्होंने जो इमरजेंसी लगाई, सख्ती की, लोगों को गिरफ्तार किया, लाठियां बरसाईं, नसबंदी करवाई। इस अत्याचार का जवाब देने के लिए लोगों ने चुनाव आने का इंतजार किया। मोदी सरकार का हश्र भी बिल्कुल 1977 जैसा ही होने वाला है।

गलत तरीके से राम के नाम पर चंदा नहीं होना चाहिए
शेरखान ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए हो रहे चंदे पर कांतिलाल भूरिया के बयान की निंदा की। उन्होंने कहा कि यदि विधायक ने ऐसा कहा तो यह गलत बात है। राम पर लोगों की आस्था है और यदि वे चंदा दे रहे हैं तो इस पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। चंदा उगाही को लेकर कहा कि राम के नाम का मिस यूज नहीं होना चाहिए। राम के नाम पर चंदा का धंधा नहीं बनना चाहिए। क्योंकि, लोग राम के नाम पर तो पैसे दे देंगे, लेकिन वह गलत लोगों के जेब में चला जाएगा। इसलिए गलत तरीके से राम के नाम पर चंदा नहीं होना चाहिए। कांतिलाल भूरिया ने कहा कि राम मंदिर के चंदे के नाम शराब पी जा रही है।

2023 के चुनाव में मुस्लिम किसी पार्टी के वोट बैंक नहीं होंगे
शेरखान ने कहा कि राम मंदिर के नाम पर कमलनाथ के जो बयान आए, कि राम मंदिर बनाने में हमारा भी योगदान है, क्योंकि बाबरी मस्जिद का ताला हमने ही खुलवाया था। रास्ता हमने ही दिया, इसलिए भाजपा अकेले इसका श्रेय नहीं ले सकती। मेरा यही कहना है कि कांग्रेस अब सही दिशा की ओर बढ़ गई है। वह अब हिंदू मिज्योरिटी प्लेइंग पर अब खेलने जा रही है। यानी सेक्युलरिज्म का जो इंदिरा गांधी वाला दौर था, या जो नेहरू जी, सरदार पटेल वाला दौर था। 1980 के पहले की राजनीति और 80 के बाद का भारत, यह दोनों अलग-अलग हैं। हालांकि, मुस्लिम वोटर अब आइसोलेशन में चला गया है। उसका अब रोल खत्म हो गया है। ऐसे में 2023 के चुनाव में मुस्लिम किसी पार्टी के वोट बैंक नहीं होंगे।

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