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एमवायएच परिसर से नेता और पुलिसकर्मी तक की चलती हैं एम्बुलेंस!

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इंदौर, । एमवायएच परिसर से अवैध रूप से एम्बुलेंस का संचालन कई वर्षों से हो रहा है। कई बार अस्पताल प्रबंधन ने अवैध एम्बुलेंस के अड्डे को एमवायएच परिसर से हटाने की कोशिशें भी की, लेकिन हर बार नाकामी मिली है।

एमवायएच प्रदेश का एक ऐसा अस्पताल हैं, जहां पूरे देश के लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। नेशनल हाइवे, बिजनेस हब और मेडिकल हब होने के कारण दुर्घटना, इलाज के दौरान मौतें होती हैं और पोस्टमार्टम एमवायएच में होता है। परिजन एम्बुलेंस में शवों को ले जाते हैं, जिसके लिए उन्हें एम्बुलेंस संचालकों को मनमाने दाम चुकाना पड़ते हैं, इस पर किसी का भी नियंत्रण नहीं है। यही कारण है कि यहां से मोटी कमाई होती है और इसी को लेकर यहां आए दिन विवाद होते हैं।

कोरोना काल से हुई अंधाधुंध कमाई :

एमवायएच परिसर से जो एम्बुलेंस चलती हैं, सूत्रों का कहना है कि इनके सरपरस्तों में शहर के नेता, पुलिसकर्मी , एमवायएच के कर्मचारी भी शामिल हैं। कोरना काल मे शहर में हजारों मौतें हुई हैं और इन्हें शमशान, कब्रिस्तान के साथ ही अन्य शहरों में छोडऩे का काम इन्हीं एम्बुलेंस संचालकों ने किया है। इस दौरान इन्होंने अंधाधुंध कमाई की है और जो शुल्क मांगते थे, वो लोगों को देना पड़ते थे। सूत्रों का कहना है कि कोरनो काल के दौरान से ही विवाद चले आ रहे हैं। जो विशेष समुदाय के ड्राइवर एम्बुलेंस चलाते हैं, उनमें तो कई आपस में रिश्तेदार ही हैं। लाशों को ले जाने को लेकर ही आए दिन यहां विवाद की स्थिति बनती है। पूर्व में कई इन ड्राइवर में मारपीट हो चुकी है, लेकिन स्थानीय पुलिस चौकी पर तैनात कुछ कर्मचारियों द्वारा मामले को वहीं दबा दिया जाता था, क्योंकि सूत्रों का कहना है कि इन्हीं में से एक पुलिसकर्मी की एम्बुलेंस भी चलती थी।

यातायात डीएसपी पहुंचे, प्रबंधन से चर्चा की :

शुक्रवार रात को हुए गोलीकांड के बाद शनिवार को पुलिस ने जहां छानबीन की, वहीं यातायात डीएसपी भी एमवायएच पहुंचे और एमवायएच अधीक्षक डॉ. पीएस ठाकुर से चर्चा की। साथ ही इस मामले को आगे किस तरह से हैंडल करना है, इसको लेकर भी चर्चा की गई। डॉ. ठाकुर ने बताया कि हमने एक पत्र टीआई, थाना संगोगितागंज को लिखा है, जिसमें अस्पताल परिसर में संचालित अवैध एम्बुलेंस को हटाने और इनके ड्राइवर, वाहन के कागजात का वैरिफिकेशन के लिए निवेदन किया है। पूर्व में भी हम पत्र लिख चुके हैं। अब मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द ही इसका उचित समाधान निकाला जाएगा।

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