अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के परमाणु और मिसाइल प्रोग्राम को रोकने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं. जिनेवा में परमाणु वार्ता के दूसरे दौर में जब कोई हल नहीं निकला तो ट्रंप ने 72 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया है यानी ईरान या तो शर्तें मानें या फिर तबाही के लिए तैयार रहे, क्योंकि कभी भी ऑपरेशन 72 शुरू हो सकता है.
ऐसे में ईरान पर 72 घंटे भारी है, क्योंकि अमेरिका अगले 72 घंटे में तबाही मचा सकता है. जिनेवा में हुआ परमाणु वार्ता का दूसरा दौर भी बेनतीजा निकला. ऐसे में अमेरिका बातचीत को आगे नहीं बढाने का संकेत दे चुका है.
जानें अमेरिकी हमले के क्या हैं संकेत
डिएगो गार्सिया पर बॉम्बर्स की एयररिफ्यूलिंग एक्सरसाइज.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के एकदम पास USS लिंकन की तैनाती.
जॉर्डन बेस पर फाइटर जेट वॉर रेडी किए गए.
पिछले 48 घंटे में अमेरिका ने तेजी से बढ़ाई सैन्य तैनाती.
115 फाइटर जेट और 40 रिफ्यूलिंग विमानों की तैनाती.
सर्वेलेंस ड्रोन से ईरान की लगातार निगरानी
इसके अलावा इजराइल और अमेरिका ने सर्वेलेंस ड्रोन लगातार ईरान की निगरानी कर रहे हैं. इजराइल ने अपने सैन्य ठिकानों पर डिफेंस सिस्टम लगा दिए हैं. तीन लेयर सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं, क्योंकि हमला होने की सूरत में ईरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों के अलावा इजराइल पर सबसे ज्यादा तबाही मचा सकता है, इसलिए इजराइल को लेकर अमेरिका सतर्क नजर आ रहा है.
इस बीच, इजराइली खुफिया एजेंसी के पूर्व प्रमुख आमोस याडलिन ने कहा है कि वो इस हफ्ते हवाई यात्रा करने से पहले दो बार सोचेंगे. साथ ही व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने कहा है कि समझदारी इसी में है कि ईरान जिद छोड़कर ट्रंप के साथ डील कर ले.
ईरान को 72 घंटे का अल्टीमेटम
इजराइल और अमेरिका से मिले इन दो संकेतों से साफ है कि अमेरिका इरादा कर चुका है. अगर ईरान ने अगले 72 घंटों में परमाणु करार की सारी शर्तों को मानने की हामी भरी तो ठीक, नहीं तो ऑपरेशन 72 शुरू हो जाएगा, जिसके जरिए अमेरिका, ईरान को कब्रिस्तान में बदल सकता है.
इजराइल की सुरक्षा के लिए USS जेराल्ड 2 दिन पहले स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर से निकल चुका है. उससे आगे अल्जीरिया और मोरक्को के पास पश्चिमी भूमध्य सागर तक पहुंचेगा.
आगे का रूट ट्यूनीशिया के पास से होते हुए मध्य भूमध्य सागर तक है, जबकि आखिर में साइप्रस के पास पूर्वी भूमध्य सागर तक पहुंचेगा, जिसके बाद लेबनान के पास तैनाती की जाएगी. अगले 4 से 6 दिन 3800-4000 किमी. की दूरी तय करेगा.
अमेरिका ले सकता है बड़ा फैसला
USS जेराल्ड की पहली लेयर में 5 डिस्ट्रॉयर तैनात किए हैं. साथ ही MQ-25 ड्रोन ब्रिगेड भी तैनात है, लेयर 2 में फाइटर जेट स्क्वॉड्रन तैनात है. जेराल्ड फोर्ड पर 90 फाइटर जेट तैनात होते हैं.
तीसरी लेयर में डिफेंस सिस्टम लगाए गए हैं. Mk 15 Phalanx मिसाइल डिफेंस सिस्टम औ Mk 29 Sparrow मिसाइल लॉन्चर्स भी हैं. चौथी लेयर के डिफेंस में Hawkeye अर्ली वॉर्निंग सिस्टम है.. और Seahawk एंटी सबमरीन हेलिकॉप्टर स्पेशल ऑपरेशन के लिए मौजूद रहते हैं.
ऐसी कई रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें कई डिफेंस एक्सपर्ट दावा कर रहे हैं कि अमेरिका अगले 72 घंटे में कोई बड़ा एक्शन ले सकता है.
इतने ही वक्त में USS जेराल्ड फोर्ड भी पूर्वी भूमध्य सागर में पहुंच सकता है, जबकि USS अब्राहम लिंकन पहले से ही ओमान की खाड़ी में मौजूद है यानी एक तरफ इजराइल का सुरक्षा कवच मजबूत किया जा रहा है.
क्या पूरे मध्य-पूर्व में फैल जाएगा युद्ध?
दूसरी तरफ ईरान पर आक्रमण की तैयारी की जा रही है. यानी अमेरिका तब तक हमला नहीं करेगा. जब तक इजराइल की सुरक्षा सुनिश्चित ना करे, क्योंकि पिछले साल ईरान ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस के जरिए इजराइल को बड़ा नुकसान पहुंचाया था, लेकिन इस बार पहले से बड़ी तैयारी है. युद्ध भी लंबा खिंच सकता है.
कई डिप्लोमेट्स दावा कर रहे हैं. शनिवार या रविवार तक ईरान पर हमले हो सकते हैं. पश्चिमी मीडिया की कई रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका ईरान पर हमले के लिए तैयार है. हमले की संभावना 90 फीसदी है, जबकि शांति वार्ता के तीसरे दौर की संभावना सिर्फ 10 फीसदी है.
खास बात ये कि इस बार हमला इतना बड़ा होगा, जिससे पूरे मध्य-पूर्व में युद्ध का विस्तार हो सकता है. युद्ध एक दो दिन का नहीं, बल्कि महीनों चल सकता है. बस अमेरिका के ट्रिगर दबाने की देरी है

