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अमेरिका बमबारी में बिजी और चीन ने रच दिया भविष्य का चक्रव्यूह:शी जिनपिंग का 141 पन्नों का ‘वॉर प्लान’

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ईरान युद्ध के बीच दुनिया की नजरें बमबारी पर हैं, लेकिन असली खेल लंदन के इंश्योरेंस दफ्तरों में हो रहा है. 7 बड़े P&I क्लब्स ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में कवरेज खत्म कर दी है. इसके कारण बिना एक भी समुद्री सुरंग बिछाए दुनिया का सबसे अहम ट्रेड रूट बंद हो गया है. मार्केट इस संकट के खिंचने की अवधि को 300% कम आंक रहा है, जो ग्लोबल मंदी का संकेत है.

दुनिया इस समय ईरान पर गिरते अमेरिकी बमों और कच्चे तेल की कीमतों को देख रही है. इसी बीच चीन ने दशक का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक दस्तावेज पेश कर दिया है. 5 मार्च को नेशनल पीपुल्स कांग्रेस में सामने आया 15वां पंचवर्षीय प्लान महज एक इकोनॉमिक ड्राफ्ट नहीं है. यह उस युद्ध की तैयारी है जिसे अमेरिका अभी तक समझ ही नहीं पाया है. 141 पन्नों के इस प्लान में 50 से ज्यादा बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का जिक्र है. चीन 2030 तक अपनी अर्थव्यवस्था में 90% AI पैठ का लक्ष्य रख रहा है. यह प्लान सेमीकंडक्टर और रेयर अर्थ मेटल्स पर ‘असाधारण उपायों’ की बात करता है.

जबकि अमेरिका चिप्स एक्ट (CHIPS Act) के जरिए सिर्फ एक सेक्टर पर ध्यान दे रहा है. चीन का प्लान पूरी इकोनॉमी को युद्ध के स्तर पर तैयार करने जैसा है. अमेरिका, ईरान पर मिसाइलें दाग रहा है, लेकिन उन मिसाइलों को बनाने में लगने वाला रेयर अर्थ मेटल चीन कंट्रोल करता है. अप्रैल 2025 में चीन ने इन पर एक्सपोर्ट कंट्रोल लगा दिया था. अब अमेरिका के पास 10 से 15 साल का ऐसा ‘वल्नरेबिलिटी विंडो’ है जिसमें उसके पास न तो मिसाइलें होंगी और न ही उन्हें बनाने का सामान. ट्रंप ‘डेथ, फायर और फ्यूरी’ की बात कर रहे हैं और शी जिनपिंग शांति से उस सामान की सप्लाई रोक रहे हैं जिससे ये फायर पैदा होता है.

क्या है 7 इंश्योरेंस लेटर्स का रहस्य?

5 मार्च 2026 की आधी रात को 7 बड़े इंटरनेशनल इंश्योरेंस क्लब्स ने खाड़ी देशों में वॉर-रिस्क कवरेज रद्द कर दी. यह फैसला किसी सरकार के आदेश पर नहीं लिया गया. दरअसल, यूरोपीय यूनियन के ‘सॉल्वेंसी II’ नियमों के कारण री-इंश्योरेंस कंपनियों के लिए यह इलाका अन-इंश्योरेबल हो गया. जब जोखिम इतना बढ़ जाए कि उसे कैलकुलेट करना मुमकिन न हो, तो इंश्योरेंस मार्केट खुद को पीछे खींच लेता है. इसे ही ‘एक्टुअरियल वॉरफेयर’ कहा जाता है.

इन सात चिट्ठियों ने वो काम कर दिखाया जो ईरान की नेवी भी नहीं कर पाती. हॉर्मुज का रास्ता, जहां से रोजाना 2 करोड़ बैरल तेल निकलता है, पूरी तरह ठप हो गया. 7 मार्च तक वहां टैंकर ट्रैफिक जीरो हो गया. कच्चे तेल की कीमत $108 तक पहुंच गई. मार्केट को लगता है कि अमेरिकी सेना इस रास्ते को खोल देगी, लेकिन यह कोई मिलिट्री समस्या नहीं है. यह एक फाइनेंशियल समस्या है जिसे बमों से हल नहीं किया जा सकता.

मोज़ेक डॉक्ट्रिन और बातचीत का संकट?

मार्केट का मानना है कि नेवी की सुरक्षा में टैंकर दोबारा चलने लगेंगे. यह सोच पुरानी हो चुकी है क्योंकि समुद्री व्यापार नेवी के भरोसे नहीं, बल्कि प्राइवेट इंश्योरेंस के भरोसे चलता है. 28 फरवरी के हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत ने एक नया संकट पैदा कर दिया है. ईरान ने अपनी ‘मोज़ेक डिफेंस’ डॉक्ट्रिन एक्टिव कर दी है. इसके तहत पूरा देश 31 स्वायत्त कमांड्स में बंट गया है. अब अमेरिका या चीन को सुरक्षित रास्ते के लिए किसी एक सरकार से नहीं, बल्कि 31 अलग-अलग कमांडरों से बात करनी होगी. इंश्योरेंस कंपनियां ऐसे माहौल में रिस्क नहीं लेतीं जहां कोई एक जिम्मेदार पक्ष न हो.

इंटरसेप्टर का गणित और समय की कमी?

मार्केट को उम्मीद है कि 2 से 4 हफ्तों में सब ठीक हो जाएगा. लेकिन असलियत इसके उलट है. अमेरिका के पास THAAD और पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है. जून 2025 के 12 दिनों के युद्ध में अमेरिका ने अपने 30% स्टॉक का इस्तेमाल कर लिया था. अब हालात और भी खराब हैं. ईरान हर महीने 100 से ज्यादा मिसाइलें बना रहा है, जबकि अमेरिका महीने में सिर्फ 8 इंटरसेप्टर बना पाता है. यह ‘कॉस्ट एसिमेट्री’ अमेरिका को घुटनों पर ला सकती है.

निवेशकों के लिए क्या है सबक?

ग्लोबल मार्केट इस समय एक बड़े धोखे में जी रहा है. लोग इसे 1973 के तेल संकट जैसा मान रहे हैं, लेकिन यह उससे कहीं ज्यादा गहरा है. जो निवेशक हॉर्मुज के खुलने का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें समझना होगा कि इंश्योरेंस मार्केट को दोबारा सेटल होने में कम से कम 6 से 18 महीने लगेंगे. सबसे ज्यादा रिस्क उन सेक्टर्स में है जो तेल की सप्लाई पर निर्भर हैं, जैसे दक्षिण कोरिया का पेट्रोकेमिकल सेक्टर.

अगले कुछ दिनों में ‘मरीन ट्रैफिक’ के डेटा पर नजर रखें. अगर 30 से ज्यादा जहाज बिना इंश्योरेंस अपडेट के वहां से निकलते हैं, तभी मार्केट में सुधार की उम्मीद करें. वरना, सोना $6,000 की तरफ बढ़ सकता है क्योंकि जब सिस्टम के सारे वादे (इंश्योरेंस, डिप्लोमेसी और मिलिट्री) फेल होते हैं, तो निवेशक सिर्फ पीली धातु पर भरोसा करते हैं.

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