वैश्विक स्तर पर तनाव और डॉलर पर निर्भरता कम करने के देशों के प्रयासों से सोना लगातार नौवें सप्ताह तेजी के साथ बंद हुआ है। खास बात है कि सोने की कीमतें इस साल 35 से अधिक बार रिकॉर्ड ऊंचाई को छू चुकी हैं।मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज का अनुमान है कि केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, देशों के बीच तनाव और मजबूत एशियाई मांग से विदेशी बाजारों में सोना जल्द 4,500 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है। शुक्रवार को सोना 4,340 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। यह तेज साप्ताहिक बढ़त की ओर अग्रसर है, जो मौजूदा नौ सप्ताह की तेजी में सबसे मजबूत है। दिल्ली बाजार में 1.30 लाख रुपये प्रति दस ग्राम के पार है।
विश्लेषकों के मुताबिक, निवेशकों ने बढ़ती आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित संपत्तियों में निवेश को तवज्जो दी है। इस हफ्ते सोने की कीमतों ने बार-बार नई ऊंचाइयों को छुआ। इसकी वजह अमेरिका-चीन के बीच नए व्यापारिक तनाव व अमेरिकी सरकार के मौजूदा बंद को लेकर चिंताएं थीं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक के चेयरमैन पॉवेल की टिप्पणियों में श्रम बाजार के कमजोर होने के संकेतों की ओर इशारा करने के बाद अमेरिकी व्याज दरों में कटौती की उम्मीदों से सोने को और तेजी मिली। दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने इस साल के पहले नौ महीनों में 600 टन सोना खरीदा है। ईटीएफ में निवेश व सुरक्षित संपत्तियों की मजबूत मांग के चलते इस साल सोने की कीमतों में 65 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।
चांदी : 75 डॉलर तक जाने की उम्मीद
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक केंद्रीय बैंकों की निरंतर खरीदारी, देशों के बीच तनाव और मजबूत एशियाई मांग के कारण विदेशी बाजारों में चांदी के भाव 75 डॉलर प्रति औंस तक जा सकते हैं। घरेलू बाजार में यह 1.84 लाख रुपये किलो है। रिटर्न के मामले में सोने से बेहतर प्रदर्शन करने वाली चांदी के मजबूत औद्योगिक खपत और बढ़ते आपूर्ति घाटे के कारण मांग बढ़ी है। पीली धातु की तेजी वैश्विक अनिश्चितता, इस साल के अंत में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों से है। लंबी अवधि में अगर डॉलर के मुकाबले रुपया 89 तक जाता है तो फिर सोना 1.35 लाख के पार हो सकता है।

