नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के नौगाम के एक पुलिस स्टेशन परिसर में एक बड़ा धमाका हुआ है। देर रात हुए इस ब्लास्ट में अब तक नौ लोगों के मारे गए हैं। वहीं, करीब 30 लोग घायल हैं। इसी थाने में दिल्ली ब्लास्ट से जुड़े संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। यह विस्फोट थाने में रखे अमोनियम नाइट्रेट के नमूने जुटाते वक्त हुआ। जम्मू-कश्मीर के DGP नलिन प्रभात ने बताया कि नौगाम में हुआ धमाका कोई साजिश नहीं थी, ये एक हादसा है। अब समझते हैं कि किन हालातों में अमोनियम नाइट्रेट चलता-फिरता टाइम बम बन जाता है

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जम्मू-कश्मीर के डीजीपी ने क्या बताया
जम्मू-कश्मीर के DGP नलिन प्रभात ने नौगाम पुलिस स्टेशन धमाके के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा-9 और 10 नवंबर को फरीदाबाद से बरामद भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री, केमिकल और अभिकर्मकों को जम्मू-कश्मीर लाकर नौगाम पुलिस स्टेशन के खुले क्षेत्र में सुरक्षित रूप से रखा गया था। इन सामग्रियों के नमूने फॉरेंसिक और रासायनिक विश्लेषण के लिए भेजे गए थे, लेकिन सामग्री की मात्रा अधिक होने के कारण विस्तृत निरीक्षण आवश्यक था।
अमोनियम नाइट्रेट से हुआ लालकिला धमाका!
सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल मामले में ज़ब्त किए गए विस्फोटकों के एक बड़े जखीरे से नमूने निकाल रही थी। अधिकारियों ने बताया कि यह सामग्री हरियाणा के फरीदाबाद से लाई गई थी और गिरफ़्तार डॉक्टर मुज़म्मिल गनई के किराए के घर से बरामद 360 किलोग्राम विस्फोटक रसायनों का हिस्सा थी। मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि यही अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल दिल्ली लालकिला ब्लास्ट मामले में हुआ था।
आखिर ऐसी क्या चीज है अमोनियम नाइट्रेट
अमोनियम नाइट्रेट एक ऐसा केमिकल है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर खाद बनाने और खनन में विस्फोटक के रूप में किया जाता है। इसे बेहद सुरक्षित तरीके से रखा जाना चाहिए। यह एक ऑक्सीडाइजिंग केमिकल है, जो आसानी से आग पकड़ सकता है।
ऐसी हालत में अमोनियम नाइट्रेट बनता है टाइम बम
अमोनियम नाइट्रेट अगर लीक हो जाए या किसी ईंधन के साथ मिल जाए या असुरक्षित तरीके से रखा जाए तो यह बेहद खतरनाक हो सकता है। रायटर्स की खबर के अनुसार, अमोनियम नाइट्रेट की बड़ी मात्रा अगर ज्यादा तापमान के संपर्क में आए तो जबरदस्त विस्फोट हो सकता है। इस केमिकल को बड़े ईंधन टैंकों के पास, भारी मात्रा में और कम हवादार जगह पर रखने से भीषण विस्फोट हो सकता है। मात्रा जितनी ज्यादा होगी, विस्फोट होने का खतरा उतना ही ज्यादा होगा।
बेरूत में भी इसी लापरवाही ने ले ली थी 100 की जान
नवभारत टाइम्स की एक स्टोरी के अनुसार, 2020 में बेरूत में एक भीषण बम विस्फोट हुआ था, जिसमें कम से कम 100 लोग मारे गए थे। विस्फोटक आयुधों के निपटान में विशेषज्ञता रखने वाली ब्रिटिश कंपनी अल्फोर्ड टेक्नोलॉजीज के प्रबंध निदेशक रोलांड अल्फोर्ड के अनुसार, बेरूत में बड़े पैमाने पर यह विस्फोट पारंपरिक बम के मुकाबले से काफी ज्यादा है। उन्होंने आगे कहा-यह शायद अब तक के सबसे बड़े गैर-परमाणु विस्फोटों में से एक है।
अमोनियम नाइट्रेट से बन सकता है खतरनाक बम
अमोनियम नाइट्रेट को बम बनाने के लिए अन्य पदार्थों के साथ मिलाया जा सकता है। इसका इस्तेमाल 1990 के दशक में लंदन में आयरिश रिपब्लिकन आर्मी (IRA) द्वारा किए गए बम विस्फोटों, 1995 में ओक्लाहोमा सिटी में एक संघीय इमारत को उड़ाने वाले विस्फोट, जिसमें 168 लोग मारे गए थे,और 2002 में बाली के नाइटक्लबों में हुए विस्फोटों में किया गया था, जिसमें 200 से ज्यादा लोग मारे गए थे। अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल किए गए कई घरेलू बमों में अमोनियम नाइट्रेट था।
अमोनियम नाइट्रेट के ब्लास्ट से कब-कब दहली दुनिया?
लाल किले के पास जिस कार में सोमवार शाम को विस्फोट हुआ, उसके चालक का कथित तौर पर फरीदाबाद आतंकवादी मॉड्यूल से संबंध था. दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. PTI की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली पुलिस ने बताया कि इस विस्फोट में 12 लोगों की मौत हो गई है. सूत्रों के अनुसार पुलवामा का निवासी और पेशे से चिकित्सक उमर मोहम्मद कथित तौर पर वह हुंदै i20 कार चला रहा था, जो लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास पार्किंग क्षेत्र में हुए विस्फोट में इस्तेमाल हुई थी.
पुलिस सूत्रों ने बताया कि प्रारंभिक पुलिस जांच के अनुसार विस्फोट में अमोनियम नाइट्रेट, ईंधन तेल और डिटोनेटर का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. अभी भी इसकी आधिकारिक पुष्टि होनी बाकि है. ऐसे में सवाल एक यह भी उठता है कि आखिर अमोनियम नाइट्रेट किस तरह का विस्फोटक है, इस विस्फोटक का इस्तेमाल दुनिया में कब कब बड़े पैमाने की तबाही के लिए हुआ है. चलिए हम आपको यहां बताते हैं.
अमोनियम नाइट्रेट- जिंदगी भी देता है और मौत भी
अमोनियम नाइट्रेट एक क्रिस्टल जैसा सफेद ठोस पदार्थ है जिसे बड़े पैमाने पर इंडस्ट्री में बनाया जाता है. वैसे तो इसका सबसे बड़ा उपयोग फर्टिलाइजर (उर्वरक) बनाने के लिए नाइट्रोजन के स्रोत के रूप में किया जाता है. लेकिन साथ ही इसका उपयोग खनन क्षेत्र में विस्फोट करने के लिए विस्फोटक बनाने के लिए भी किया जाता है.
सरल शब्दों में यह एक नमक है जिसमें अमोनियम और नाइट्रेट के एक-एक आयन होते हैं जो अमोनिया (NH3) और नाइट्रिक एसिड (HNO3) के रिएक्शन से बनता है, जो इसे NH4NO3 का फॉर्मूला देता है.
यह एक ऑक्सीडाइजर भी है, जिसका अर्थ है कि यह दहन (कमबशन) के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति करता है. अमोनियम नाइट्रेट में दो तरीकों से विस्फोट हो सकता है. पहला है जब यह आग के संपर्क में आता है या आग लगने के दौरान किसी ज्वलनशील पदार्थ के साथ मिल जाता है. इसका विस्फोट होने का दूसरा तरीका यह है कि यह किसी विस्फोटक पदार्थ के साथ मिल जाता है. फिर यह सस्ते में बनाया गया बम बन जाता है जो काफी नुकसान पहुंचा सकता है. इस संस्करण को ANFO, या अमोनियम नाइट्रेट फ्यूल ऑयल कहा जाता है, और इसका उपयोग निर्माण और खनन जैसे विभिन्न उद्योगों में कंट्रोल्ड ब्लास्ट में किया जाता है.
अमोनियम नाइट्रेट के विस्फोट से कब-कब गई जान?
- अमोनियम नाइट्रेट का उपयोग आतंकवादी हमलों को अंजाम देने में भी किया गया है. साल 1995 में अमेरिका के ओक्लाहोमा सिटी में बमबारी में इसका इस्तेमाल हुआ था. यहां टिमोथी मैकविघ ने एक बम बनाने के लिए दो टन अमोनियम नाइट्रेट का उपयोग किया था और उसकी मदद से फेडरल गवर्नमेंट की एक इमारत को नष्ट कर दिया और 168 लोगों की मौत हो गई.
- 1921 में, लगभग 4,500 टन अमोनियम नाइट्रेट के कारण जर्मनी के ओप्पाउ में एक प्लांट में विस्फोट हुआ था, जिसमें 500 से अधिक लोग मारे गये.
- अमेरिकी की सबसे घातक औद्योगिक दुर्घटना में से एक 1947 में हुई. दुर्घटना टेक्सास के गैलवेस्टन बे में हुई थी. यहां बंदरगाह पर खड़े एक जहाज पर 2,000 टन से अधिक अमोनियम नाइट्रेट के विस्फोट से कम से कम 581 लोग मारे गए.
- 2015 में उत्तरी चीन के तियानजिन बंदरगाह में अमोनियम नाइट्रेट और अन्य रसायनों से जुड़े विस्फोट में 173 लोग मारे गए.
- 4 अगस्त 2020 को लेबनान के बेरूत में 2,750 टन अमोनियम नाइट्रेट में आग लगने से एक बड़ा विस्फोट हुआ. एक मालवाहक जहाज से 2014 में जब्त किया गया यह केमिकल 6 सालों तक बिना सुरक्षा उपायों के बिना बेरूत के बंदरगाह पर रखा गया था. लेकिन 2020 में जब पास के एक गोदाम में आग लगी तो इसमें विस्फोट हो गया. विस्फोट के कारण कम से कम 218 मौतें हुईं, 7,000 घायल हुए.