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अजा-जजा में से होगा उपाध्यक्ष, मंत्रिमंडल में चार चेहरों के लिए कई दावेदार

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भोपाल। मप्र विधानसभा के कल से शुरू हो रहे बजट सत्र के पहले दिन सदन को नया अध्यक्ष मिल जाएगा। इसके साथ ही यह भी तय हो चुका है कि इस बार भी पूर्व की तरह परंपरा के अनुसार अध्यक्ष का निर्वाचन निर्विरोध होगा जबकि उपाध्यक्ष का पद सत्तारुढ़ दल के किसी अजा-जजा सदस्य के खाते में जाएगा।  भाजपा विधायक दल की ओर से अब तक उपाध्यक्ष पद के लिए अभी किसी भी नाम को तय नहीं किया गया है।  इस पद के लिए संगठन और सत्ता के बीच अभी मंथन का दौर जारी है।

 माना जा रहा है कि यह पद किसी अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति को दिया जाएगा। इसमें भी यह पद किसी महिला सदस्य को दिया जा सकता है। माना जा रहा है कि विंध्य के खाते में अध्यक्ष पद जाने के बाद उपाध्यक्ष का पद मालवा अंचल के खाते में जा सकता है। इसकी वजह है सत्ता में जातीय संतुलन बिठाना।  इसके साथ ही यह भी तय है कि यह दोनों पद नाथ सरकार के समय की ही तरह सत्तापक्ष के पास रहना भी तय हो चुके हैं। यह बात अलग है कि सरकार बदलने के बाद सिर्फ चेहरे बदलेंगे, लेकिन परिस्थितियां पूर्व की ही तरह रहेंगी। इसकी वजह है कांग्रेस की तरह अब भाजपा भी यह दोनों पद अपने पास रखने की तैयारी कर चुकी है। इसकी वजह से पहले माना जा रहा था कि कांग्रेस इन दोनों पदों के निर्वाचन के समय चुनौती देने के लिए मैदान में नहीं उतरेगी, हालांकि अध्यक्ष पद का अब निविरोध निर्वाचन होना तय हो चुका है। इसकी वजह है कांग्रेस की ओर से प्रदेशाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ द्वारा कहा गया है कि हमारा शुरू से ही संसदीय परंपराओं पर विश्वास रहा है। हम अपने इसी संकल्प के अनुरूप विस अध्यक्ष के निर्वाचन में कांग्रेस की ओर से पूर्ण सहयोग करते हुए निर्विरोध ढंग से विस अध्यक्ष पद का निर्वाचन करवाने में पूरा सहयोग करेंगे। इस पर कांग्रेस की ओर से औपचारिक रूप से आज शाम होने वाली विधायक दल की बैठक में मुहर लगा दी जाएगी। उधर भाजपा की ओर से आज गिरीश गौतम द्वारा नामांकन दाखिल किया जा चुका है।
अब उनका निर्विरोध निर्वाचन होना तय हो गया है। उधर सदन की कार्रवाई के लिए समय का स्वरूप तय करने के लिए आज  सर्वदलीय बैठक भी हुई। प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा द्वारा बुलाई गई बैठक में सदन के नेता मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, नेता प्रतिपक्ष कमल नाथ सहित सत्ता पक्ष और प्रतिपक्ष के वरिष्ठ विधायक मौजूद रहे।  दरअसल सर्वसम्मति से अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के निर्वाचन के लिए कांग्रेस उपाध्यक्ष का पद चाहती है , जबकि भाजपा इसके लिए तैयार नहीं है।
यह बात अलग है कि अपनी सरकार से इतर इस बार कांग्रेस अध्यक्ष के निर्विरोध निर्वाचन के पक्ष में है , इसकी वजह है उसका परंपराओं का पालन करना। गौरतलब है कि पूर्व की नाथ सरकार के समय अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव कराना पड़ा था, जब दलीय आधार पर दोनों पद कांग्रेस के खाते में गए थे। उस समय सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच संख्याबल में अंतर बहुत कम था, लेकिन इस बार इस मामले में परिस्थिति बहुत अलग है। सदन में फिलहाल भाजपा सदस्यों की संख्या 126 है तो कांग्रेस सदस्यों की संख्या 96 हैं। इसके साथ ही दो बसपा, एक सपा और चार निर्दलीय विधायक हैं, यह भी सरकार के पक्ष में हैं।  फिलहाल दमोह की एक सीट खाली है। यही वजह है कि चुनाव होने पर भी यह दोनों पद भाजपा के पक्ष में रहना तय हैं , इसकी वजह से कांग्रेस ने परंपरा की दुहाई देकर चुनौती देने से कदम पीछे खींच लिए  हैं।
शर्मा के नाम हो चुका है नया रिकार्ड
भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा के नाम एक नया रिकार्ड बन गया है। यह रिकार्ड है सर्वाधिक समय तक प्रोक्टेम स्पीकर रहने का। सामन्यतौर पर प्रोक्टेम स्पीकर  विधानसभा गठन के समय नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाने के साथ अध्यक्ष का चुनाव कराते हैं। कोरोना संक्रमण्ध की वजह से सत्ता बदलने के बाद अध्यक्ष का निर्वाचन कराने की स्थिति ही नहीं बन सकी। यही वजह है कि विधानसभा में नियमित अध्यक्ष का निर्वाचन ही नहीं हो सका।

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